छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत नियामक आयोग सलाहकार समिति की बैठक में महापौर ने उठाया सवाल- 300 करोड़ का बिजली बिल और उस पर 50 करोड़ का सरचार्ज… क्या जनता की जेब से वसूलें?

मिसाल न्यूज़

रायपुर। महापौर श्रीमती मीनल चौबे ने छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत नियामक आयोग सलाहकार समिति की बैठक में शामिल होकर नगर हित से जुड़े बहुत से सुझावों को सामने रखा। इस अवसर पर महापौर ने स्पष्ट कहा कि नगर निगम एक जनसेवी संस्था है, जिसका उद्देश्य मुनाफा कमाना नहीं है। विद्युत नियामक आयोग नगर निगम को ग्रास सब्सिडाइजेशन श्रेणी में ना रखे और व्यावसायिक दर श्रेणी से बाहर रखे। अधिक बिजली बिल के कारण आवश्यक सेवाएँ प्रभावित होंगी। महापौर ने सवाल उठाया कि 300 करोड़ का बिजली बिल और उस पर 50 करोड़ का सरचार्ज। क्या इसे यूजर चार्ज और सम्पति कर के रूप में ही जनता की जेब से वसूलें?

महापौर श्रीमती मीनल चौबे ने विद्युत विनामक आयोग सलाहकार समिति की बैठक में कहा कि निगम जनसेवा का कार्य करता है। स्ट्रीट लाईट, वाटर पम्प, सार्वजनिक शौचालय पर विद्युत पावर कम्पनी को कमर्शियल टेरिफ की दरें नहीं लगानी चाहिए।  इस हेतु विद्युत विभाग को पब्लिक यूटिलिटी स्लेब बनाना चाहिए, जो डोमेस्टिक दर के समान हो। महापौर ने कहा कि दरों को 7.35 रू प्रति यूनिट के स्थान पर 5.10 रू. प्रति यूनिट किया जाना चाहिए।
महापौर ने कहा कि नगर निगम को ग्रास सब्सिडाइजेशन श्रेणी में ना रखा जाये। बिजली बिल अधिक आने के कारण आवश्यक मूलभूत नागरिक सेवाओं सफाई, पानी आदि के बजट में कटौती करनी पड़ रही है। 300 करोड़ का बिजली बिल और उस पर 50 करोड़ का सरचार्ज नगर निगम को अंततः यूजर चार्ज और सम्पति कर के रूप में ही जनता की जेब से वसूलना होगा। अतः नगर निगम रायपुर को व्यवसायिक दर श्रेणी से बाहर रखें।

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