■ अनिरुद्ध दुबे
इस कलमकार ने पिछले हफ़्ते ही अपने ‘कारवाँ’ कॉलम में संकेत दे दिए थे कि राज्यसभा सांसद चुनाव में छत्तीसगढ़ में प्रत्याशी चयन में आदिवासी व ओबीसी फैक्टर काम करेगा। वही हुआ। भाजपा ने राज्यसभा की उम्मीदवारी के लिए ओबासी वर्ग की ज़मीनी स्तर पर कर्म क्षेत्र में डटी रहने वाली नेत्री लक्ष्मी वर्मा का चयन किया, वहीं कांग्रेस ने जानी-मानी आदिवासी नेत्री फूलो देवी नेताम को अपना प्रत्याशी चुना। फूलो देवी नेताम पूर्व में विधायक तथा राज्यसभा सांसद दोनों रही थीं। झीरम घाटी में जो नक्सली हमला हुआ था कांग्रेस नेताओं के उस काफ़िले में फूलो देवी भी थीं। यही नहीं फूलो देवी प्रदेश महिला कांग्रेस की अध्यक्ष भी रह चुकी हैं। स्वाभाविक है बड़े पदों में सुशोभित होते रहने और बड़े राजनीतिक घटनाक्रमों की साक्षी रहने के कारण फूलो देवी की प्रदेश में अपनी अलग वृहद पहचान रही है, लेकिन लक्ष्मी वर्मा जिन्हें शिखर तक पहुंचने काफ़ी लंबा इंतज़ार करना पड़ा के बारे में यहां विस्तार से उल्लेख करना ज़रूरी मालूम पड़ता है। सन् 1994 में रायपुर शहर में खमतराई वार्ड हुआ करता था जो अब वीर शिवाजी वार्ड के नाम से जाना जाता है। 1994 का पार्षद चुनाव था। खमतराई वार्ड से भाजपा टिकट की दौड़ में दो नेत्रियां थीं- श्रीमती लक्ष्मी वर्मा व श्रीमती चन्नी वर्मा। उस दौर में पार्षद टिकट वितरण के समय में बृजमोहन अग्रवाल खेमा, रमेश बैस खेमा एवं संगठन खेमा अपने-अपने लोगों को टिकट दिलाने ताकत लगाए हुए थे। खमतराई प्रत्याशी चयन के समय में बैस खेमा चन्नी वर्मा को टिकट दिलवाने में क़ामयाब रहा था। निराश होकर लक्ष्मी वर्मा निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में उस पार्षद चुनाव में कूद पड़ीं। लक्ष्मी वर्मा न सिर्फ़ दमदारी से लड़ीं, बल्कि जीतीं भी। उस समय रायपुर महापौर कांग्रेस के बलबीर जुनेजा थे। वह महापौर-पार्षद कार्यकाल 1995 से 1999 के बीच का रहा। उस कार्यकाल में जब नगर निगम की सामान्य सभा हुआ करती तो सदन को हिलाकर रख देने वालों में विपक्षी भाजपा व सत्ता पक्ष कांग्रेस के बहुत से क़ाबिल नेता तो थे ही, साथ ही श्रीमती लक्ष्मी वर्मा समेत ज्ञानेश शर्मा व किशोर साहू जैसे 3 निर्दलीय पार्षद भी थे, जिनकी आवाज़ सदन में जमकर गूंजा करती थी। ज्ञानेश शर्मा पहले भाजपा, फिर कांग्रेस में गए और आज तक की स्थिति में कांग्रेस में हैं। किशोर साहू का असमय निधन हो गया। लक्ष्मी वर्मा को तब कांग्रेस ने अपनी ओर खींचने की काफ़ी कोशिशें की थी, लेकिन उन्हें अपना पुराना घर भाजपा ही भाया। भाजपा में लौटने के बाद से अब तक पार्टी के प्रति वफ़ादारी की उन्होंने कई मिसालें पेश की। यही कारण है कि पार्टी ने पुरस्कार स्वरुप सन् 2010 में उनको रायपुर जिला पंचायत अध्यक्ष बनवाया और अब वे ऐतिहासिक रूप से राज्यसभा सदस्य बनने जा रही हैं। जहां छत्तीसगढ़ से राज्यसभा के लिए सरोज पांडे से लेकर नारायण चंदेल, डॉ. कृष्णमूर्ति बांधी एवं गौरीशंकर अग्रवाल जैसे दिग्गज नेता दौड़ में माने जाते रहे हों वहां श्रीमती लक्ष्मी वर्मा का नाम उम्मीदवार के रूप में घोषित होना काफ़ी चौंका देने वाला राजनीतिक घटनाक्रम रहा। ये नये दौर की भाजपा है। 2023 के विधानसभा चुनाव के बाद से चाहे मुख्यमंत्री का पद हो या अन्य मंत्री पद, लोकसभा सांसद टिकट हो या फिर राज्यसभा सदस्य की उम्मीदवारी, दिल्ली से जिन नामों पर मुहर लगती आई है वह चौंका देने वाली ही तो रही है।
तो क्या अब ‘अर्बन
नक्सलवाद’
पर होगी चोट…
केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह 31 मार्च तक देश को सशस्त्र नक्सलवाद से मुक्त कर देने वाली बात आज तारीख़ तक दोहरा रहे हैं। नक्सली घटनाओं पर पैनी नज़र रखते रहे कुछ लोग बताते हैं कि केन्द्र सरकार का अगला लक्ष्य अप्रैल महीने से ‘अर्बन नक्सलवाद’ पर चोट करना होगा। अर्बन नक्सल के इको सिस्टम पर चोट पहुंचाने दिल्ली में ब्लू प्रिंट तैयार करने की ख़बर है। दिल्ली में बैठे लोगों का मानना है कि अर्बन नक्सलियों का जाल दिल्ली से लेकर आंध्रप्रदेश, तेलंगाना व छत्तीसगढ़ में फैला हुआ है। छत्तीसगढ़ में तो अर्बन नक्सलावद पर चोट करने की कोशिशें उस समय पहली बार हुई थी जब विश्वरंजन यहां के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) थे। तब रायपुर शहर में कुछ गिफ्तारियां हुई थीं। गिरफ़्तार हुए लोगों में एक डॉक्टर व एक पत्रकार भी थे। नक्सलवाद विषय का गहरा अध्ययन करते रहे किसी शख़्स का मानना था कि महासमुन्द जिले के किसी कस्बानुमा गांव में स्थित कोई फार्म हाउस में समय-समय पर नक्सल विचारधारा से जुड़े लोगों को आश्रय मिलते रहता था। उस फार्म हाउस के मालिक व रायपुर में गिरफ़्तार हुए डॉक्टर के बीच काफ़ी निकटता रही थी। यह भी बताते चलें राजधानी रायपुर के रिंग रोड पर स्थित साउथ इंडियन खाद्य पदार्थ वाला एक रेस्टारेंट उस डॉक्टर की पहली पसंद था।
भूपेश व मोतीलाल के
सवालों से मची हड़कंप
इस समय छत्तीसगढ़ विधानसभा का बजट सत्र चल रहा है। बजट सत्र में दो ऐसे मुद्दे उठे जिन्हें लेकर न सिर्फ़ सदन बल्कि सड़क पर भी ज़बरदस्त हलचल पैदा हुई। संयोग से दोनों मुद्दे राजधानी रायपुर से जुड़े रहे हैं। पहला मुद्दा ड्रग्स के क़ारोबार में लिप्त रहीं नव्या मलिक और विधि अग्रवाल का रहा, जिसे पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने उठाया। दूसरा गंभीर प्रश्न रायपुर ग्रामीण भाजपा विधायक मोतीलाल साहू की तरफ से उठा, जिसमें कोटवारी ज़मीन पर अवैध रुप से तनी बिल्डिंग का कोई हर माह लाखों रुपये वसूल रहा था।
बताते हैं जिस रैकेट के साथ नव्या मलिक व विधि अग्रवाल जुड़ी थीं उसमें 500 से अधिक ऐसे ग्राहक थे जो इनसे सूखा नशा खरीदते थे। यह सूखा नशा हर माह दूसरे राज्यों से आता था। सूखे नशे के आदान-प्रदान का बड़ा केन्द्र राजधानी रायपुर का एक्सप्रेस वे हुआ करता था।
विधायक मोतीलाल साहू ने जब लालपुर के क़रीब 20 हजार वर्ग फीट कोटवारी जमीन पर बनी अवैध दुकानों और कमरों का मामला उठाया तो जिला, पुलिस एवं नगर निगम प्रशासन तीनों हरक़त में आए। प्रशासन ने पाया कि 8 दुकानें एवं 70 से अधिक कमरे अवैध रूप से निर्मित हुए हैं। इन कमरों में ज़्यादातर अस्पताल के कर्मचारी तथा बाहर से पढ़ाई करने आये छात्रों का ग्रुप रहता था। उस अवैध बिल्डिंग के पास दो बड़े अस्पताल हैं। इसलिए कभी-कभी मरीजों के परिजनों को भी उस अवैध बिल्डिंग में किराये पर रहने जगह दे दी जाती थी। बताते हैं अवैध निर्माणकर्ता के पास हर महीने 5 लाख रुपये के आसपास पहुंचता था। फिर बिल्डिंग भी इतनी बड़ी और इतनी मज़बूत की उसे तोड़ गिराने में पूरे 3 दिन लग गए। पहले तो प्रशासन को यह साबित करने में ही काफ़ी पसीना बहाना पड़ गया कि जगह सरकारी है। प्रश्न यह कि इस अवैध निर्माण को पूरा होने में साल भर का समय तो लग ही गया होगा। निर्माण जब हो रहा था क्या नगर निगम प्रशासन सो रहा था…
इधर सीएम ने ‘शतक’
को किया टैक्स फ्री
उधर ‘मल्टी’ से उतर गई
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के 100 वर्षों के इतिहास पर आधारित फिल्म ‘शतक’ को न सिर्फ़ राजधानी रायपुर के जोरा मॉल में जाकर देखा, बल्कि इसे पूरे छत्तीसगढ़ राज्य में टैक्स-फ्री भी घोषित किया। मंत्रीगण विजय शर्मा, रामविचार नेताम व केदार कश्यप के साथ फिल्म देखने के बाद मुख्यमंत्री ने इसे राष्ट्र प्रेम और सेवा का सजीव चित्रण बताया। वीर कपूर व्दारा निर्मित तथा आशीष मल्ल व्दारा निर्देशित ‘शतक’ 20 फरवरी को रिलीज़ हुई थी। इस फ़िल्म में 1925 से 2025 तक की राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की 100 वर्षों की यात्रा, त्याग और राष्ट्र सेवा की गाथा दर्शाई गई है। दिलचस्प बात यह कि इधर मुख्यमंत्री ने ‘शतक’ को पूरे छत्तीसगढ़ में टैक्स फ्री करने की घोषणा की उधर पूरे प्रदेश के मल्टीप्लेक्सों से इस फ़िल्म को उतारने में देर नहीं लगाई गई। मुख्यमंत्री ने 27 को टैक्स फ्री करने की घोषणा की, फरवरी का महीना 28 का था और 3 मार्च को जब लोगों ने बुक माई शो रायपुर खोला तो पाया कि ‘शतक’ गायब है। ‘शतक’ ने अपने टैक्स फ्री होने के बाद के 3 दिन भी शायद ही मल्टीप्लैक्स में पूरे किए हों। पहले तो छत्तीसगढ़ी फ़िल्मों की मल्टीप्लेक्स वाले कहीं गिनती ही नहीं करते थे। या तो छत्तीसगढ़ी फ़िल्में लगाते नहीं थे, यदि लगा भी देते तो शो का उलजुलूल टाइम देते या फिर एक-दो दिन में ही फ़िल्म को हटा देते थे। आक्रोशित होकर सन् 2019 में छत्तीसगढ़ी सिनेमा से जुड़े लोगों ने राजधानी रायपुर में बड़ा आंदोलन किया था और गिरफ़्तारी दी थी। तब छत्तीसगढ़ सरकार के तत्कालीन संस्कृति मंत्री ताम्रध्वज साहू ने आंदोलनकारियों को अपने बंगले में बुलाकर उनसे चर्चा की थी। ताम्रध्वज साहू के निर्देश पर रायपुर के आबकारी भवन में बड़े अफ़सरों की उपस्थिति में छत्तीसगढ़ी सिनेमा से जुड़े लोगों तथा मल्टीप्लेक्स वालों की बैठक हुई थी। तब कहीं जाकर मामला सूलझा था।
मीनल ने उपलब्धियां तो
नहीं गिनाईं पर बजट में
कर सकती हैं बड़े वादे
रायपुर नगर निगम में 1 साल का कार्यकाल पूरा होने पर महापौर व्दारा अपनी उपलब्धियों को मीडिया के सामने रखने की परंपरा रही थी। पूर्व के महापौर यही करते रहे थे। वर्तमान महापौर श्रीमती मीनल चौबे लगता है दो साल की उपलब्धियां एक साथ फरवरी 2027 में रखेंगी। वैसे इसी साल छत्तीसगढ़ की अधिकांश नगर निगमों के महापौर अपनी उपलब्धियों का ब्यौरा रखने मीडिया के सामने आए। धमतरी महापौर रामू रोहरा ने अपने एक साल के कार्यकाल की जो उपलब्धियां गिनाईं, कुछ अख़बारों ने उसे आधा-आधा पेज में प्रकाशित किया। ऐसा नहीं है कि रायपुर महापौर मीडिया के सामने नहीं आईं। आईं। छत्तीसगढ़ सरकार के 2026-27 के अनुमानित बजट में रायपुर नगर निगम के पक्ष में कौन सी बड़ी घोषणाएं हुईं, उनका श्रीमती चौबे ने मीडिया के सामने बखान किया। श्रीमती चौबे इसी मार्च महीने में रायपुर नगर निगम का 2026-27 का अनुमानित बजट पेश करने जा रही हैं। हो सकता है इस बार के बजट में महापौर कुछ चौंका देने वाले बड़े वादे लेकर सामने आएं। शायद उन्हें वर्तमान के बजाए भविष्य ज़्यादा सूंदर नज़र आ रहा हो।
होली मिलन के नाम
पर अमर्यादित आचरण
इस बार की होली में प्रदेश में कितने ही स्थानों पर मर्यादा लांघी गई। तखतपुर नगर पालिका के कुछ अफ़सरों और पार्षदों ने होली मिलन के बहाने जमकर दारू-मुर्गा पार्टी का आनंद लिया। पार्टी में जमकर गाना बज रहा था। इतने जोर से कि आसपास वालों का चैन छिना जा रहा था। कार्यक्रम स्थल के आसपास रहने वाले जब विरोध करने पहुंचे तो पार्टी करने वालों ने इन लोगों को दौड़ा-दौड़ा कर पीटा। पिटाई वाला वह वीडियो सोशल मीडिया में जमकर वायरल हुआ है। पार्टी करने वालों ने पालिका दफ़्तर के कैम्पस में लगे सीसीटीवी कैमरे को पहले ही बंद करा दिया था। सुनने में तो यह भी आया है कि मार खाने वालों में से एक बेचारा मजबूर होकर पुलिस या अन्य किसी जगह पर इसलिए शिकायत नहीं कर पाया कि उसकी पत्नी आंगनबाड़ी कार्यकर्ता है। पार्टी कर रहे पार्षदों में से एक ने उसे धमकाते हुए कहा था कि कहीं जाकर बोले तो समझ लेना तुम्हारी बीवी की नौकरी गई।
दूसरी घटना बिलासपुर की। गुरु घासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय परिसर में ‘रंग बरसे’ नाम से होली मिलन कार्यक्रम रखा गया था। ऑडिटोरियम के ठीक सामने तेज साउंड सिस्टम लगा हुआ था। डीजे की धुन पर जमकर नाच-गाना हो रहा था। बताया तो यह भी जाता है कि कुछ छात्र नशे में थे। जब रंग-गुलाल उड़ना शुरु हुआ कुछ लोग आपस में भिड़ गए। धक्का-मुक्की से बढ़ते-बढ़ते बात एक-दूसरे के कपड़े फाड़ने व गाली-गलौच तक पहुंच गई।
वीआईपी रोड पर
चाकूबाजी का दाग़
राजधानी रायपुर का वीआईपी रोड कुछ ऐसा है कि आए दिन उस पर कोई न कोई बदनामी का दाग़ लगते ही रहता है। बीते सप्ताह वीआईपी रोड पर ग्राम टेमरी स्थित नुक्कड़ कैफे व ब्लैक लीफ कैफे के पास खाली पड़े प्लॉट में एक छात्र पर अपराधिक किस्म के किसी युवक ने चाकू घोंप दिया। पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय इलाके में होली मिलन कार्यक्रम में हिस्सा लेने के बाद छात्र वीआईपी रोड घूमने पहुंचा था। जहां वह चाकूबाजी का शिकार हो गया। गैर पुलिस सूत्र बताते हैं यह घटना आपसी रंजिश का नतीजा है। पुलिस इस घटना को धक्का-मुक्की व जमकर हाथापाई बताती रही और चाकूबाजी का उल्लेख करने से बचती रही। वीआईपी रोड नाम जितना अच्छा है, उसकी शक्ल उतनी ही बुरी। तीन हिस्से में बंटी सड़क। उस पर भी बनावट ऐसी कि एक हिस्से में कुछ घट जाए तो दूसरी तरफ आने-जाने वाले को पता ही नहीं चल पाए। कुलदीप जुनेजा जब विधायक थे, विधानसभा में उन्होंने व्यंग्यात्मक लहज़े में कहा था कि रायपुर की वीआई पी रोड जैसी रोड पूरे विश्व में कहीं देखने को न मिले। अच्छा हो कि सरकार इस अजीबोगरीब सड़क को पर्यटन स्थल घोषित कर दे।

