बस्तर संभाग के हजारों किसानों का धान नहीं खरीदने का आरोप… विपक्ष का वाक आउट…

मिसाल न्यूज़

रायपुर। विधानसभा में आज बस्तर संभाग के हज़ारों किसानों के धान की खरीदी नहीं होने का आरोप लगाते हुए विपक्षी कांग्रेस विधायकों ने सरकार को घेरा। विपक्ष ने मांग की कि किसानों ने कर्ज लेकर धान लगाया। सरकार या तो इनका धान खरीद ले या फिर कर्ज पटा दे।  मंत्री का इस पर कोई ठोंस जवाब सामने नहीं आने पर विपक्ष सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए सदन से वाक आउट कर गया।

प्रश्नकाल में कांग्रेस विधायक लखेश्वर बघेल का सवाल था कि 2025-26 में धान खरीदी के लिए बस्तर संभाग के जिलों में पंजीकृत किसानों की संख्या, धान की खरीदी हेतु निर्धारित लक्ष्य एवं उपलब्धि सहित कितने किसानों ने प्रथम किस्त में व कितने किसानों ने दूसरे किस्त में धान जमा किए तथा कितने किसान धान जमा ही नहीं कर पाए?

वहीं दूसरे कांग्रेस विधायक कवासी लखमा का सवाल था कि जिला दंतेवाड़ा, नारायणपुर बस्तर, कोंडागांव तथा सुकमा में खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 में पंजीकृत किसानों की अपेक्षा धान का विक्रय करने वाले किसानों की संख्या कम होने के पीछे क्या कारण हैं? उपरोक्त जिलों में टोकन के लिए कितने-कितने किसानों ने आवेदन किया था तथा कितने कितने किसानों को टोकन जारी किया गया?

खाद्य मंत्री दयालदास बघेल की ओर से जवाब आया कि किसानों व्दारा धान विक्रय हेतु टोकन अनुसार उपार्जन केन्द्र में लाये गये समस्त मानक धान की खरीदी की गई है।

लखेश्वर बघेल ने पूछा 44 हजार से अधिक किसानों का धान नहीं खरीदा गया, इसके पीछे क्या वजह है? मंत्री दयालदास बघेल ने कहा कि जो आंकड़ा आप बता रहे हैं वह किसान धान खरीदी केन्द्र में धान लाए ही नहीं थे। लखेश्वर बघेल ने कहा कि आप कह रहे धान बेचने नहीं आए। कितने किसानों को वनाधिकार का पट्टा दिया गया? कितने किसान ऋणी हैं और कितने अऋणी हैं? मंत्री ने कहा कि जो भी किसान पंजीयन कराते हैं उनका शत प्रतिशत धान नहीं बिकता। ऐसा तब भी होता था जब आपकी सरकार थी। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि इस सवाल का जवाब नहीं आया कि कितने किसान ऋणी हैं, कितने अऋणी और कितनों को वन अधिकार का पट्टा दिया गया। मंत्री ने कहा कि यहां जो सवाल लगा है उसमें ऋणी व अऋणी के बारे में पूछा ही नही गया है। भूपेश बघेल ने पूछा कि कितने किसान धान जमा किए, कितने नहीं किए और कितने किसानों का समर्पण कराया गया? मंत्री ने कहा कि यहां पर समर्पण को लेकर भी सवाल नहीं लगा है।

कवासी लखमा ने कहा कि पूर्व में जो प्रश्न हुए वही प्रश्न मेरे हैं। बस्तर के जिले, आदिवासी जिले हैं। मुख्यमंत्री आदिवासी हैं। फिर भी आदिवासी किसानों से धान खरीदी में सरकार पीछे क्यों? पंजीयन होने के बाद भी नहीं खरीदा गया। ऐसे किसानों की संख्या 5 जिलों में 32 हजार से अधिक है। मंत्री ने कहा कि जो किसान अपना धान खरीदी केन्द्र में लेकर आए उनसे खरीदा गया। नहीं खरीदा गया ऐसा कहा जाना अनुचित है। लखमा ने कहा कि नहीं खरीदे इसीलिए चक्काजाम हुआ। आंध्रप्रदेश, ओड़िशा के लोग यहां लाकर धान बेचे हैं। 32 हजार से अधिक किसान धान बेचने से रह गए, जिन्हें 206 करोड़ का भुगतान होना था। ऋण लेकर जिन किसानों ने धान बोया था, जो कि नहीं बिका अब उनका कर्जा क्या सरकार पटाएगी? मंत्री ने कहा कि जब बेचने पहुंचे ही नहीं तो खरीदा कैसे जा सकता है। लखमा ने कहा कि किसानों पर कर्जा ही कर्जा है। शादी का कर्जा, घर बनाने का कर्जा फिर धान की फसल बोने पर लेबर का कर्जा। मंत्री ने कहा कि पिछली सरकार की तुलना में दो-तीन गुना ज्यादा धान खरीदी हुई है। लखमा ने कहा कि नक्सल प्रभावित क्षेत्रों के इन किसानों पर कर्ज का बोझ चढ़ गया है। या तो इनका नहीं बिका हुआ धान खरीद लें या कर्ज पटा दें। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने पूछा कि जो किसान धान बेचना चाहते हैं उसे खरीदेंगे क्या? इस पर मंत्री ने वही पुराना जवाब दोहराया। विरोध में कांग्रेस विधायकों ने नारेबाजी शुरु कर दी। भूपेश बघेल ने कहा कि यह किसानों के साथ धोखा है। मंत्री के उत्तर से हम संतुष्ट नहीं हैं। विरोध में वाक आउट करते हैं। इसके साथ ही सारे कांग्रेस विधायक नारेबाजी करते हुए सदन से बाहर चले गए।

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