मिसाल न्यूज़
रायपुर। विधानसभा में आज बालोद जिले में जनवरी माह में हुई जंबूरी का मामला गरमाया रहा। जंबूरी आयोजन के लिए एक टेंडर निरस्त करते हुए दूसरा टेंडर बुलाए जाने पर विपक्ष ने कई सवाल खड़े किए। यह भी सवाल खड़ा हुआ कि प्रदेश स्तरीय जंबूरी समिति का अध्यक्ष कौन पूर्व मंत्री जो कि वर्तमान में सांसद हैं वह, या फिर स्वयं स्कूली शिक्षा मंत्री? बहस के दौरान दो-तीन ऐसे भी मौके आए जब विपक्ष व सत्ता पक्ष के विधायक आपस में जमकर उलझे। स्कूली शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव के जवाबों से असंतुष्ट होकर सारे विपक्षी विधायक सदन से वाक आउट कर गए।
प्रश्नकाल में कांग्रेस विधायक उमेश पटेल का सवाल था कि बालोद में हुए स्काउट गाइड के रोवर रेंजर जंबूरी कार्यक्रम में किस-किस कार्य के लिए कितना-कितना खर्च किया गया? कौन सी फर्म को कितने का टेंडर दिया गया? क्या शर्त तय करने के लिए समिति बनी थी ? क्या चहेतों को लाभ दिलाने के लिए टेन्डर बदलने संबंधी शिकायतें प्राप्त हुई हैं?
स्कूली शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव की तरफ से जवाब आया कि बालोद जिले में हुए स्काउट गाइड के रोवर रेंजर जंबूरी कार्यक्रम में क्रीड़ांगन (एरीना निर्माण), शौचालय निर्माण, जल व्यवस्था, प्रकाश व्यवस्था, ध्वनि व्यवस्था, आवास टेंट, कार्यक्रम डोम, बेरिकेट, भोजनालय एवं प्रिंटिंग आदि कार्यों के लिये दो करोड़ खर्च किया गया। जंबूरी कार्य के लिए मेसर्स अमर भारत किराया भण्डार रायपुर को 5 करोड़ 18 लाख 88 हजार 860 रूपये का टेंडर दिया गया था। शर्त तय करने के लिए समिति का गठन किया गया था। इस कार्य हेतु किसी भी फर्म को लाभ दिलाने के लिए टेंडर बदलने संबंधी शिकायत प्राप्त नहीं हुई है।
जंबूरी पर सदन में जो लंबी बहस चली वह कुछ इस तरह रही…
उमेश पटेल- जंबूरी के लिए निविदा कितनी बार लगी? कब लगी? यदि उसे निरस्त किया गया तो उसके पीछे क्या कारण है?
गजेन्द्र यादव- जंबूरी राष्ट्रीय स्तर का कार्यक्रम था। पहला टेंजर रद्द हो गया था। पहली बार जब टेंडर जारी हुआ तो बहुत से लोगों ने शासन एवं प्रशासन से मांग थी कि इसमें जिस तरह की शर्तें हैं, लोकल लोग भाग नहीं ले पाएंगे। सरलीकृत किया जाए। इसके बाद दूसरा टेंडर किया गया।
उमेश पटेल- आप मान रहे हैं कि सरलीकृत करते हुए दूसरा टेंडर निकाला गया। ऐसे में डाउन ग्रेड का क्या क्राइटेरिया है? क्या डाउन ग्रेड का निर्णय स्काउट गाइड परिषद ने लिया था?
गजेन्द्र यादव- भारत स्काउट गाइड परिषद ने राज्य शासन को पत्र लिखकर कहा था कि टेंडर जेम पोर्टल की प्रक्रिया पर जाते हुए करें। राज्य शासन ने इस काम के लिए बालोद कलेक्टर को अधिकृत किया।
उमेश पटेल- राज्य स्काउड गाइड परिषद का अध्यक्ष कौन होता है?
गजेन्द्र यादव- स्कूल शिक्षा मंत्री।
उमेश पटेल- क्या परिषद को भंग करेंगे। सांसद बोलते हैं मैं परिषद का अध्यक्ष हूं। स्कूली शिक्षा मंत्री बोलते हैं मैं अध्यक्ष हूं। फिर पहला टेंडर निरस्त किसने किया?
गजेन्द्र यादव- जिले की निविदा समिति ने भंग किया।
उमेश पटेल- 23 दिसंबर 2025 को दूसरी बार टेंडर हुआ। टेंडर भरने की अंतिम तारीख 2 जनवरी थी। क्या निविदा पूर्ण होने से पहले ही काम शुरु हो गया था?
गजेन्द्र यादव- काम बंटे रहते हैं। बहुत सी चीजें जम्बूरी के नेशनल हेड क्वार्टर से तय होती हैं।
(टेंडर की प्रक्रिया पूर्ण होने से पहले काम शुरु हो गया था। उमेश पटेल के इस आरोप के बाद सत्ता पक्ष व विपक्ष दोनों तरफ से शोर शराबा होने लगा)
उमेश पटेल- इस पूरे प्रकरण की क्या विधायकों की समिति से जांच कराएंगे?
गजेन्द्र यादव- आप कह रहे हैं टेंडर में भ्रष्टाचार हुआ है। जेम पोर्टल में भ्रष्टाचार नहीं हो सकता। प्रोग्राम राष्ट्रीय स्तर का था। जल, प्रकाश, टेंड समेत जो अन्य बड़े काम हुए उसमें भारत सरकार की बड़ी भूमिका रही।
(इस बीच पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल बोलने के लिए खड़े हुए थे कि दोनों तरफ से फिर शोर शराबा होने लगा)
भूपेश बघेल- लड़ाई इस बात की थी कि राज्य स्काउड गाइड परिषद का अध्यक्ष, कौन पूर्व मंत्री जो वर्तमान में सांसद हैं वह या फिर स्कूली शिक्षा मंत्री। टेंडर की प्रक्रिया पूरी होने से पहले ही काम शुरु हो जाने की मानो परंपरा सी बन गई है। सुकमा में ऐसा हुआ, महिला बाल विकास विभाग में भी ऐसा हुआ। सारी प्रक्रिया में गड़बड़ी दिखाई दे रही है। बिना टेंडर की प्रक्रिया पूरी हुए मिलीभगत से काम शुरु हो गया। क्या सदन की समिति से इसकी जांच कराएंगे?
गजेन्द्र यादव- यहां से पहले लखनऊ में राष्ट्रीय जम्बूरी हुई थी। वहां का आयोजन पूरा होते ही जम्बूरी आयोजन टीम ने सीधे यहां आकर बहुत से काम किए। हमारा काम एरीना निर्माण, मुख्य मंच व डोम बनवाना तथा भोजन की व्यवस्था करना था, जो कि 9 जनवरी के बाद शुरु हुआ था।
चर्चा चल ही रही थी कि सभापति धरमलाल कौशिक ने अगला प्रश्न करने के लिए विधायक डोमनलाल कोर्सेवाड़ा का नाम पुकारा। इसके साथ ही विपक्ष की ओर से नारेबाजी शुरु हो गई। जवाब में सत्ता पक्ष की ओर से भी नारेबाजी होने लगी। कुछ देर बाद नारेबाजी कर रहे विपक्षी कांग्रेस विधायक सदन से वाक आउट कर गए।

