कारवाँ (15 मार्च 2026) ● कुछ नक्सली अब भी जंगलों में, कहीं रुपये-सोने का मोह तो नहीं… ● ड्रग्स क्वीन व उज्बेकी सुंदरियां वापस चर्चा में… ● बेटे से ननकीराम की बढ़ी मुश्किलें… ● मुसवा से सरकार और दूसरे फाग से सरपंच निशाने पर… ● निगम कमिश्नर के खिलाफ़ मोर्चे का पुराना रहा इतिहास…

■ अनिरुद्ध दुबे

उप मुख्यमंत्री (गृह) विजय शर्मा ने मंगलवार को विधानसभा में बजट अनुदान मांगों पर चर्चा के दौरान विपक्ष के सवालों का जवाब देते हुए कहा कि “राज्य सरकार का लक्ष्य 31 मार्च 2026 तक सशस्त्र नक्सलवाद का ख़ात्मा करना है। इसके बाद 31 मार्च 2027 तक केंद्रीय सशस्त्र बलों की वापसी की प्रक्रिया भी पूरी कर ली जाएगी।“

नक्सल मुक्त छत्तीसगढ़ अभियान 2026 को सिर्फ़ सोलह दिन बचे हैं। नक्सल विरोधी आपरेशन को अंजाम दे रहे अफ़सरों व सूरक्षा बलों पर अब भी दबाव है कि सुकमा जिले में पापाराव व केसा का ग्रुप जो छिपते-छिपाते अभी भी सक्रिय है, उन्हें कैसे घेरे में लिया जाए। पिछले दिनों उल्लेखनीय ख़बर यह रही कि जगदलपुर में 3 करोड़ 29 लाख के 108 ईनामी नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया। समर्पण करते हुए इन नक्सलियों ने बड़ी संख्या में हथियार के साथ 3 करोड़ 61 लाख नगद एवं 1 करोड़ 64 लाख का किलो भर सोना भी सौंपा।

माना जाता है कि नवंबर 2016 में जब पूरे भारतवर्ष में नोट बंदी हुई थी वहीं से नक्सलवाद का आर्थिक ढांचा चरमराना शुरु हो गया था। बस्तर में रुपेश व गढ़चिरौली में सोनू जैसे बड़े नक्सली लीडरों ने जो समर्पण किया, उन्होंने खुद स्वीकार किया कि संगठन लगातार कमजोर पड़ते जा रहा था।  नोटबंदी के बाद नक्सलियों ने सोना इकट्ठा करना शुरु किया। माना जा रहा है कि बस्तर के जंगलों में कहीं-कहीं पर अब भी करोड़ों रुपये व करोड़ों का सोना डंप है। तो क्या ऐसे भी नक्सली हो सकते हैं जिन्हें रुपयों व सोने का मोह जंगलों में रोके रखा हो…

ड्रग्स क्वीन व उज्बेकी

सुंदरियां वापस चर्चा में

अपराध की दुनिया पर सरसरी तौर पर निगाहें दौड़ाएं तो ताजा घटनाक्रम यह कि नव्या मलिक एवं विधि अग्रवाल ड्रग्स रैकेट वाले मामले का ट्रायल शुरू हो गया है। वहीं ढाई महीने से भी ज़्यादा का समय गुज़र जाने के बाद अब कहीं जाकर उज्बेकिस्तान से संदिग्ध गतिविधियों अंजाम देने आईं दो युवतियों की गिरफ़्तारी शो की गई है। देखा जाए तो सुर्ख़ियों में इधर की दो हैं तो उधर की भी दो। दोनों ही मामलों में राजनीतिक व व्यावसायिक जगत के बड़े लोगों के जुड़े होने की ख़बरें दबी ज़ुबान से सुनने मिलती रही हैं। पहले नव्या मलिक व विधि अग्रवाल की बात हो जाए, जिनके अलावा सात और युवक आरोपी बनाए गए हैं। ड्रग्स रैकेट की मास्टर माइंड नव्या और विधि को बताया गया है। विशेष अदालत में इस मामले की सुनवाई हुई। पुलिस ने ड्रग्स, मोबाइल व अन्य सामान ज़ब्ती के समय के तीन गवाह भी पेश किए। गवाहों ने ड्रग्स व अन्य सामान की ज़ब्ती के संबंध में अपने बयान दर्ज कराए। इस ड्रग्स रैकेट में जिन नेताओं व क़ारोबारियों की संलग्नता उजागर नहीं हो पाई उस पर पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से लेकर विपक्ष के अन्य कई बड़े लोग सवाल उठा चुके हैं।

पुलिस सूत्र बताते हैं कि ड्रग्स क्वीन नव्या पिछले चार वर्षों में लगातार विदेश यात्राएं करती रही थी। तुर्किए, थाईलैंड से लेकर चाइना तक की दौड़ लगा आई। उसके साथ नेताओं के कुछ बेहद क़रीबी और धनपतियों ने यात्रा का आनंद लिया। पुलिस सूत्र बताते हैं नव्या के एक मोबाइल में कई रसूख़दारों के नंबर थे। पुलिस की एक टीम वह मोबाइल मुंबई से लेकर आई। मोबाइल में कई गहरे राज़ छिपे हो सकते हैं।

अब उज्बेकिस्तान की दो विदेशी युवतियों पर आएं, जिनके खिलाफ़ ढाई माह बाद अब कहीं जाकर केस दर्ज हुआ है। दोनों राजधानी रायपुर के तेलीबांधा के एक होटल में ठहरी हुई थीं। जिन लोगों ने दोनों को बुलवाया और होटल में कमरा बुक करवाया, वह बचे हुए हैं। स्पष्ट है कि इन दोनों युवतियों को समाज सेवा के लिए तो बुलाया नहीं गया था। इनसे अलग ही तरह की सेवाएं लेने की तैयारी थी। बताते हैं इनके पासपोर्ट व वीजा तक वैध नहीं पाए गए। दोनों कई हफ्ते डिटेंशन सेंटर में रहीं। युवतियों के मोबाइल फोन भी बरामद किए गए हैं। मोबाइल फोन की तकनीकी जांच में जो भी पता चला उसका ख़ुलासा नहीं हुआ है। इससे समझ लें कि कितने मज़बूत लोगों का इन दोनों युवतियों को हवाई मार्ग से रायपुर लाने में रोल रहा होगा! इससे पहले पिछले साल वीआईपी रोड पर एक अन्य उज्बेकी युवती ने नशे की हालत में कार को एक बाइक पर ले जा ठोका था, जिससे एक युवक की जान चली गई। उस घटना में उज्बेकी युवती के साथ ईडी से जुड़ा एक वकील भी गिरफ़्तार हुआ था। उधर नया रायपुर में नाइजीरिया से पढ़ने आए कई लड़के-लड़कियां आए दिन आतंक मचाते रहते हैं। राजधानी रायपुर में जितने भी हाईप्रोफाइल ड्रग्स एवं सेक्स रैकेट चल रहे हैं उनके तार कहीं न कहीं वीआईपी रोड व पुरानी विधानसभा रोड से जाकर जुड़े हैं।

बेटे से ननकीराम

की बढ़ी मुश्किलें

वरिष्ठ आदिवासी नेता व पूर्व गृह मंत्री ननकीराम कंवर के पुत्र व पूर्व जिला पंचायत सदस्य संदीप कंवर की दबंगई की चर्चा राजनीतिक क्षितिज में जोरों पर है। आरोप है कि संदीप ने नशे की हालत में लापरवाहीपूर्वक अपनी कार को सेवई बेचने वाले की दुकान में घुसा दिया। जब दुकानदार ने आपत्ति जताई तो सहानुभूति जताने व नुकसान की भरपाई करने के बजाय संदीप ने गालीगलौज करते हुए उसे पीट दिया। घटना कोरबा की है। घटना का और उसके बाद थाना परिसर में हुए हंगामे का कुछ लोगों ने वीडियो बना लिया जो जमकर वायरल हुआ है। पिता की तरह संदीप कंवर उर्फ बल्ला भी राजनीति में हैं। वह जिला पंचायत सदस्य रह चुके हैं। बताया तो यह भी जा रहा है कि जिस कार को संदीप ने सेवई दुकान में ले जा घुसाया उसमें पूर्व विधायक रामपुर का बोर्ड लगा हुआ था।

देखा जाए तो डॉ. रमन सिंह सरकार के दूसरे कार्यकाल में गृह मंत्री रह चुके ननकीराम कंवर का अभी का राजनीतिक दौर काफ़ी कठिनाइयों के बीच गुज़र रहा है। ऊपर से बेटे ने एक और बड़ी मुश्किल खड़ी कर दी। ननकीराम कंवर को अपने राजनीतिक अस्तित्व को बचाए रखने किस कदर संघर्ष करना पड़ रहा है इसे जानने के लिए थोड़ा पीछे जाते हुए याद करिये अक्टूबर 2025 का वह समय जब केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह छत्तीसगढ़ के बस्तर दौरे पर आए हुए थे। उस दौरान ननकीराम कंवर ने अपनी ही सरकार पर गंभीर आरोप लगाया था। कंवर कोरबा जिले के कलेक्टर को हटाए जाने की मांग को लेकर मुख्यमंत्री निवास के सामने धरना देने जा रहे थे तब पुलिस ने उन्हें रोककर राजधानी रायपुर के टाटीबंद क्षेत्र में स्थित एक सामाजिक भवन में नज़रबंद कर दिया था।

मुसवा से सरकार और दूसरे

फाग से सरपंच निशाने पर

होली के समय साय सरकार को निशाने पर लेते हुए कांग्रेसियों ने मुसवा फाग वाला जो वीडियो जारी किया था वह चर्चा में बना ही हुआ था कि राजनीतिक हमले वाला एक और फाग गीत सुर्ख़ियों में आ गया। राजधानी रायपुर से थोड़ी दूर धरसींवा इलाके के ग्राम मोहदा में होली के दो दिन बाद उप सरपंच व्दारा अपने ब्यारे में होली मिलन समारोह रखा गया था। एक महिला सरपंच को टारगेट कर गाली-गलौज वाला एक फाग गीत तैयार किया गया और उसे गाते हुए वीडियो रिकॉर्ड कर वायरल कर दिया गया। शिकायत सिलयारी पुलिस चौकी तक पहुंची और एफआईआर भी दर्ज हुई। चौकी इंचार्ज इस मामले में उपसरपंच समेत उनके 4 अन्य साथियों का फ़रार होना बता रहे हैं। गांव वालों का कहना है कि दोनों पक्ष भाजपा से जुड़े हैं। उनके बीच आरोप-प्रत्यारोप पहले से चलते आ रहा है।

निगम कमिश्नर के

खिलाफ़ मोर्चे का

पुराना रहा इतिहास

भिलाई महापौर नीरज पाल ने अपने ही नगर निगम कमिश्नर के खिलाफ़ मोर्चा खोल दिया है। महापौर के नेतृत्व में कांग्रेसी पार्षदों ने नगर निगम कमिश्नर के खिलाफ़ कलेक्टर अभिजीत सिंह को मुख्य सचिव के नाम ज्ञापन सौंपा है। महापौर ने निगम कमिश्नर पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि “निगम में नियमों की अनदेखी कर निर्णय लिए जा रहे हैं। शासन स्तर पर कार्यवाही नहीं होने पर महापौर ने आंदोलन करने और कोर्ट जाने तक की चेतावनी दे दी है। भिलाई नगर निगम में महापौर एवं निगम कमिश्नर के बीच टकराव का पुराना इतिहास रहा है। भिलाई नगर निगम के पहले कार्यकाल में तत्कालीन महापौर नीता लोधी और निगम कमिश्नर निरंजन दास खुलकर एक दूसरे के आमने-सामने हो गए थे। बाद के कार्यकाल में तत्कालीन महापौर निर्मला यादव और निगम कमिश्नर अनिल टुटेजा के बीच जमकर विवाद देखने मिलते रहा था। महापौर की तरफ से लगातार आरोप लगते रहा था कि उनके प्रस्तावों और सुझावों को निगम कमिश्नर नज़रअंदाज़ करते चले जा रहे हैं।

अब राजधानी रायपुर के नगर निगम पर आएं। वर्तमान विधायक सुनील सोनी 2004 में रायपुर महापौर बने थे। अमित कटारिया रायपुर नगर निगम कमिश्नर बनकर आए। नेताजी सुभाष स्टेडियम में हुई मेयर इन कौंसिल की बैठक में सुनील सोनी ने अमित कटारिया को कुछ ऐसा कह दिया था कि वे और उनके अधिनस्थ अधिकारी बैठक छोड़कर बाहर निकल गये थे। इसके कुछ ही दिनों बाद कटारिया का तबादला हो गया। सोनी के बाद कांग्रेस की श्रीमती किरणमयी नायक महापौर बनीं और अभी के छत्तीसगढ़ सरकार के वित्त, आवास व पर्यावरण मंत्री ओ.पी. चौधरी उस समय रायपुर नगर निगम कमिश्नर थे। शुरुआती कुछ महीनों में श्रीमती नायक व चौधरी के बीच भी ज़बरदस्त टकराव रहा था।

अभी के महत्वपूर्ण घटनाक्रम पर थोड़ा गौर करें। किसी महापौर ने पिछले महीने मुख्यमंत्री के सामने गुहार लगाई थी कि “अधिकारी मेरी सुनते नहीं!“ वो महापौर कौन हैं, यह जानने के लिए पढ़ने वालों को थोड़ा मशक़्क़त करना पड़ सकता है…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *