मिसाल न्यूज़
रायपुर। विधानसभा में आज विपक्ष ने जम्बूरी आयोजन पर फिर से सवाल पर सवाल खड़े किए। कांग्रेस विधायक राघवेन्द्र सिंह ने जम्बूरी आयोजन में भ्रष्टाचार होने का आरोप लगाते हुए इसकी विधायक दल की समिति से जांच कराने की मांग की, जिस पर स्कूल शिक्षा मंत्री का जवाब आया कि इसकी कोई जरूरत नहीं है। मंत्री की ओर से संतोषजनक जवाब नहीं आने का आरोप लगाते हुए सारे कांग्रेस विधायकगण नारेबाजी करते हुए सदन से वॉक आउट कर गए।
प्रश्नकाल में राघवेन्द्र कुमार सिंह का सवाल था कि छत्तीसगढ़ राज्य स्काउट गाईड परिषद के अध्यक्ष कौन हैं? क्या राज्य के शिक्षा मंत्री को ही पदेन अध्यक्ष बनाए जाने संबंधित कोई स्थाई आदेश/निर्देश है? जम्बूरी आयोजन को बालोद में कराए जाने संबंधित निर्णय कब व किसके द्वारा लिया गया? क्या इस आयोजन को पूर्व में रायपुर में कराए जाने का निर्णय लिया गया था? यदि हां, तो स्थल परिवर्तन करने के पीछे का कारण क्या है? जम्बूरी आयोजन हेतु क्रियान्वयन एजेंसी किसे बनाया गया? आयोजन हेतु कितनी राशि आबंटित की गई? राशि व्यय करने के लिए कौन सी प्रक्रिया अपनाई गई? स्कूल शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव की ओर से जवाब आया कि छत्तीसगढ़ राज्य स्काउट गाईड परिषद के पदेन अध्यक्ष स्कूल शिक्षा मंत्री होते हैं। बालोद में राष्ट्रीय रोवर रेंजर जंबूरी आयोजन का निर्णय राष्ट्रीय मुख्यालय नई दिल्ली के व्दारा 14 नवम्बर 2025 को लिया गया। जम्बूरी आयोजन हेतु क्रियान्वयन एजेंसी जिला शिक्षा अधिकारी बालोद को बनाया गया। आयोजन हेतु 5 करोड़ आबंटित किए गए। आबंटित राशि का उपयोग एरीना निर्माण, शौचालय निर्माण, जल व्यवस्था, प्रकाश व्यवस्था, ध्वनि व्यवस्था, आवास हेतु टेंट, कार्यक्रम हेतु डोम, बेरिकेट, भोजनालय एवं प्रिंटिंग आदि कार्यों में किया गया है। राशि व्यय करने के लिए छत्तीसगढ़ भण्डार क्रय नियम में निहित प्रक्रिया अपनाई गई।
राघवेन्द्र सिंह ने कहा कि 13 दिसम्बर 2025 को जम्बूरी अध्यक्ष पद पर आपकी नियुक्ति हुई, जबकि आयोजन का टेंडर 10 दिसम्बर 2025 को हो गया, यह किस आधार पर हुआ? मंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ में जम्बूरी के आयोजन को लेकर भारत सरकार की चिट्ठी अप्रैल 2025 में जारी हुई थी, जिसके आधार पर टेंडर हुआ। आयोजन स्थल के चयन के लिए टीम दिल्ली से आई थी। टीम ने नया रायपुर व बालोद दोनों स्थानों को देखा। मेरे जम्बूरी अध्यक्ष बनने से पहले तय हो चुका था कि आयोजन बालोद में होगा। टेंडर प्रक्रिया मेरे कहने पर नहीं हुई। राज्य परिषद की बैठक 19 नवंबर 2025 को हुई थी, मेरे अध्यक्ष बनने से पहले। टेंडर के पीछे निर्णय परिषद का रहा।
राघवेन्द्र सिंह ने कहा कि 10 दिसम्बर वाला टेंडर निरस्त किया जाता है, फिर दोबारा टेंडर होता है, जो 4 दिसम्बर को ओपन होता है। 9 जनवरी को आयोजन स्थल पूरी तरह तैयार भी हो जाता है। यह सब कैसे हो गया? यह सवाल होते ही भाजपा विधायक सुशांत शुक्ला ने कटाक्ष करते हुए कहा कि वैसे ही हुआ जैसा पिछली सरकार में बोरे बासी का हुआ था। शुक्ला की इस टिप्पणी पर कांग्रेस विधायकों ने कड़ी आपत्ति की और शोर शराबा हुआ।
राघवेन्द्र सिंह ने कहा कि 10 तारीख को जो टेंडर जारी होता है उसमें 90 प्वाइंट होते हैं। उसे निरस्त कर 52 प्वाइंट पर लाया जाता है। टेंडर जारी होने से पहले जिस तरह काम शुरु हो गया, इसकी क्या विधायक दल की समिति से जांच कराएंगे? मंत्री गजेन्द्र यादव ने कहा कि विधायक दल की समिति आखिर किस बात की जांच करेगी। आयोजन में राष्ट्रीय स्तर का पार्ट अलग था और हमारा पार्ट अलग। हमारा पार्ट 10 दिसम्बर के बाद का था। राघवेन्द्र सिंह ने अपनी बात को दोहराते हुए कहा कि आखिर जांच से बच क्यों रहे हैं? टेंडर खुलने से पहले काम शुरु हो जाता है। इससे बड़ा भ्रष्टाचार क्या हो सकता है। मंत्री ने कहा कहा कि लखनऊ में भी जम्बूरी का आयोजन हुआ था। वहां का आयोजन संपन्न होते ही राष्ट्रीय इकाई ने सीधे वेंडर को तैयारी के लिए यहां भेजा।
नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने कहा कि पूर्व में भी इसी सदन में जम्बूरी को लेकर प्रश्न उठ चुका है। मंत्री की ओर से सही जवाब नहीं आ रहा है, इसलिए बहिर्गमन करते हैं। इसके साथ ही सारे कांग्रेस विधायक नारेबाजी करते हुए सदन से बाहर चले गए।

