सुनील सोनी ने कहा- ‘छातिम’ सेहत के लिए बेहद खतरनाक, मप्र की तरह क्या रोकेंगे… डॉ. महंत, भूपेश व धर्मजीत ने भी विधानसभा में जताई चिंता…

मिसाल न्यूज़

रायपुर। विधानसभा में आज भाजपा विधायक सुनील सोनी ने  छातिम (सप्तपर्णी) वृक्ष को सेहत के लिए बेहद खतरनाक बताते हुए छत्तीसगढ़ में इस पर रोक लगाने के साथ जगह-जगह नीम व पीपल पेड़ लगाने की मांग उठाई। नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत, पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल एवं भाजपा विधायक धर्मजीत सिंह ने भी स्वास्थ्य के लिए घातक पेड़ों पर चिंता जताते हुए तत्काल कदम उठाने की जरूरत बताई।

प्रश्नकाल में सुनील सोनी का सवाल था कि क्या यह सत्य है कि देश के विभिन्न राज्यों में सप्तपर्णी (छातिम) वृक्ष के स्वास्थ्य संबंधी दुष्प्रभावों को देखते हुए इनके रोपण पर रोक लगाई गई है? क्या छत्तीसगढ़ में पर्यावरण विभाग सप्तपर्णी व्दारा स्वास्थ्य संबंधी दुष्प्रभावों को दृष्टिगत रखते हुए जनहित में इनके रोपण पर प्रतिबंध लगाने एवं पूर्व से रोपित किए गए सप्तपर्णी वृक्षों को हटाकर उन्हें अन्य स्थानीय वृक्षों से प्रतिस्थापित किया जाना प्रस्तावित है? पर्यावरण विभाग व्दारा सप्तपर्णी के दुष्प्रभावों से जनमानस को बचाने हेतु क्या कार्य योजना है?

पर्यावरण मंत्री ओ.पी. चौधरी की ओर से जवाब आया कि वन विभाग या पर्यावरण विभाग व्दारा सप्तपर्णी वृक्ष के रोपण पर रोक नहीं लगाई गई है। कार्यालय प्रधान मुख्य वन संरक्षक से प्राप्त जानकारी अनुसार वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग में वर्तमान में अभी कोई प्रस्ताव या कार्य योजना नहीं है। पर्यावरण विभाग द्वारा सप्तपर्णी वृक्षों को हटाकर उन्हें अन्य स्थानीय वृक्षों से प्रतिस्थापित किया जाना प्रस्तावित नहीं है।

सुनील सोनी ने कहा कि जगह-जगह बड़ी संख्या में छातिम के पेड़ लगे हुए हैं, जिससे लोगों को अस्थमा व सांस की अन्य बीमारियां हो रही हैं। वैज्ञानिक रिसर्च में सामने आ चुका है कि हातिम का पेड़ हानिकारक है। मध्यप्रदेश, केरल, तेलंगाना एवं आंध्रप्रदेश में तो छातिम पर रोक लगा दी गई है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के आह्वान पर एक पेड़ मां के नाम अभियान पूरे देश में चला। मध्यप्रदेश सरकार ने छातिम को हटाने 9 जनवरी 2026 को बकायदा आदेश जारी किया है। छत्तीसगढ़ में ऐसा ही कोई कदम उठाते हुए क्या छातिम के स्थान पर नीम व पीपल के पेड़ लगाए जाएंगे?

पर्यावरण मंत्री ने कहा कि कोनोकार्पस का विषय जरूर आया था। कोनोकार्पस पर रिसर्च प्रकाशित हुआ है। छातिम का विषय अभी आया है। भविष्य में छातिम पर प्रतिबंध लगवा ही देंगे। रायपुर में जब मैं प्रशासनिक क्षेत्र में काम कर रहा था तब खूब पीपल के पेड़ लगवाए थे। नया रायपुर में भी हमने पीपल फॉर फीपल अभियान चलाया था। सोनी ने कहा कि मध्यप्रदेश ने 9 जनवरी 2026 से स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाने वाले वृक्षों को हटवाना भी शुरु कर दिया है। रायपुर में भी बड़ी संख्या में छातिम के पेड़ लगे हुए हैं। इन्हें हटवाकर नीम व पीपल के पेड़ लगवा दीजिए।

पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि छातिम अस्थमा जैसी बीमारी लाता है। कोनोकार्पस भी खतरनाक है। ऐसे वृक्षों को हटवाएंगे क्या? पर्यावरण मंत्री ने कहा कोनोकार्पस को हटाने सकारात्मक कदम उठाएंगे।

सुनील सोनी ने कहा कि रायपुर में लगे छातिम के पेड़ों से बीमारियां फैल रही हैं। इनको काटने के लिए आवेदन लगे हुए हैं। नई कॉलोनियों के साथ पुराने स्थानों पर क्या ये कटवाए जाएंगे? पर्यावरण मंत्री ने कहा मैं सांइटिस्ट नहीं हूं। रिसर्च पेपर निकलवाकर समझने की कोशिश करता हूं। भूपेश बघेल ने कहा कि इस काम के लिए सुनील सोनी की अध्यक्षता में एक कमेटी बनवा लें। कमेटी में कुछ विधायक एवं कुछ अधिकारी शामिल कर लिए जाएं। अगले विधानसभा सत्र में उस कमेटी की रिपोर्ट प्रस्तुत हो जाए, फिर जो कदम उठाना है उठा लें। भाजपा विधायक धर्मजीत सिंह ने कहा कि ऐसे वृक्ष जो जिंदा इंसान को भी ठूंठ बना दें किस काम के। उन्हें कटवा देना बेहतर रहेगा। सुनील सोनी ने कहा कि इस तरह के हरे भरे वृक्ष गर्मी में पानी भी खूब काफी सोंखते हैं। पर्यावरण मंत्री ने कहा कि विषय बेहद गंभीर है। न मैं साइंटिस्ट हूं, न विधायक साइंटिस्ट हैं। एक टेक्नीकल टीम बनाएंगे व भविष्य में प्रतिबंध लगाएंगे।

नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने कहा कि बेशरम का पेड़ होता है, जिसकी लकड़ी गांव वाले खूब उपयोग करते हैं। इससे टीवी जैसी बीमारी फैलने का खतरा रहता है।

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