■ अनिरुद्ध दुबे
पिछले माह 26 अप्रैल को प्रकाशित ‘कारवां’ कॉलम में आपको सत्तर व अस्सी के दशक के राजधानी रायपुर के सद्दानी चौक के दो बड़े सट्टा किंग सदननाथ एवं रोमप्रकाश (परिवर्तित नाम) की कहानी विस्तार से बताई गई थी। संयोग देखिए ‘धुरंधर पार्ट- 2’ की तरह ‘सट्टा किंग पार्ट 2’ की कहानी सामने आने में देर नहीं लगी, जिसकी इन दिनों जुआरियों-सटोरियों के बीच काफ़ी चर्चा है। 26 अप्रैल के ‘कारवां’ कॉलम में सदननाथ के एक ख़ूबसूरत बेटे का भी ज़िक्र आया था, जिसे अपने पिता की तरह तेज-तर्रार बताया गया था। अब ये कहानी बेटे से ही आगे बढ़ती है। पुलिस सूत्रों के हवाले से सदननाथ के बेटे गन्नू (परिवर्तित नाम) से जुड़ा किस्सा हाल ही में सामने आया है। पुलिस सूत्र बताते हैं- आईपीएल क्रिकेट सट्टेबाजी में गन्नू की संलग्नता रही। गोवा में संचालित ‘भजनंदन सट्टेबाजी एप’ (परिवर्तित नाम) का प्रमोटर गन्नू ही है। पर्दे के पीछे एप गन्नू ने तैयार कराया था। सामने होकर उसका संचालन गन्नू का रिश्तेदार कर रहा था। रायगढ़ पुलिस ने हाल ही में गोवा और महाराष्ट्र में छापेमारी कर रायपुर के छह लड़कों को गिरफ़्तार किया है। उनमें से दो गन्नू के अति क़रीबी बताए जा रहे हैं। सट्टेबाजी के मामले में राजधानी रायपुर की पंडरी थाना पुलिस गन्नू को पूर्व में गिरफ़्तार कर जेल भेज चुकी है।
चलिए एक और फ्लैशबैक में चलें। सदननाथ के 3 बेटे हैं। अपने जीवनकाल में सदननाथ काफ़ी क्रेज़ी रहे। उन्होंने तीनों बेटों का लालन पालन उसी तरह किया, जैसा कि खानदानी रईस किया करते हैं। थे तो बच्चे, लेकिन कपड़े बड़े डिफ्रेंट टाइप के पहने नज़र आया करते। सदननाथ जब मोटर सायकल में बिठाकर गन्नू को कहीं घूमाने निकलते उस बच्चे पर लोगों की नज़र ठहर जाया करती। सदननाथ को गन्नू से इतना ज़्यादा प्यार था कि सदर बाज़ार के किसी तंग रास्ते में जब उन्होंने जूस की दुकान खोली उसका नाम ‘भजनंदन जूस बार’ (परिवर्तित नाम) रख दिया। सदर बाज़ार में किसी समय में एक काफ़ी फ़ेमस करैक्टर हुआ करते थे नागा महाराज, जिनकी कचौड़ी की दुकान थी। जिस पाटे पर नागा महाराज की दुकान लगती उसके सामने शाम को कचौड़ी के कद्रदानों की लाइन लग जाती। सदननाथ ने अपनी वाकपटूता का जादू चलाते हुए नागा महाराज को गेयर में ले लिया और अपने ही ‘भजनंदन जूस बार’ के एक हिस्से में नागा महाराज की कचौड़ी दुकान खुलवा दी थी। नागा महाराज की गैर मौजूदगी में सदननाथ अपने दोस्तों के सामने मज़ाकिया लहज़े में कहा भी करता था कि “कमाएगा नागा खाएगा सदन।“ ज़्यादा समय नहीं लगा नागा महाराज ने अपना सारा सामान सदन की दुकान से हटा लिया और पुराने वाले पाटे में जाकर फिर से अपनी दुकान जमा ली। इसके कुछ महीने बाद ‘भजनंदन जूस बार’ पर भी ताला लटक गया।
‘भजनंदन जूस बार’ से आपको कुछ याद आया कि नहीं… अरे वही ‘भजनंदन सट्टेबाजी एप’ जिसे पर्दे के पीछे से गन्नू चलाते रहा है। चलते-चलते बता दें गन्नू का दूसरा नाम ‘अभिनंदन’ है…
तीनों सर्वश्रेष्ठ आईएएस
अफ़सरों का फिलहाल
रायपुर से नाता…
फ़ेम इंडिया और एशिया पोस्ट व्दारा राष्ट्रीय स्तर पर किए गए मूल्यांकन में 10 प्रमुख मानकों के आधार पर देश भर के लगभग 800 जिलों के अधिकारियों का आकलन किया गया। इसमें से 100 सर्वश्रेष्ठ जिलाधिकारियों का चयन किया गया, जिनमें छत्तीसगढ़ से रायपुर कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह, बीजापुर कलेक्टर संजीत मिश्रा (अब रायपुर नगर निगम कमिश्नर) एवं बालोद कलेक्टर श्रीमती दिव्या मिश्रा का नाम शामिल है। इन्हें यह सम्मान उत्कृष्ट प्रशासन, नवाचार और प्रबंधन कौशल के लिए दिया गया है।
संयोग है कि इन तीनों ही आईएएस अफ़सरों का वर्तमान में राजधानी रायपुर से गहरा रिश्ता बना हुआ है। गौरव सिंह जहां रायपुर कलेक्टर के रूप में लंबी पारी को खेलते आ रहे हैं, वहीं संबित मिश्रा की क़ाबिलियत को देखते हुए उन्हें बीजापुर से रायपुर नगर निगम कमिश्नर बनाकर लाया गया। संबित मिश्रा को रायपुर आते ही कड़ी चुनौतियों से दो-चार होना पड़ा। रायपुर शहर इस समय भारी जल संकट से जो गुज़र रहा है। जल संकट ख़त्म होगा नहीं कि रायपुर के कई हिस्सों में बारिश के पानी से जलभराव होगा, वह एक अलग समस्या। बालोद कलेक्टर दिव्या मिश्रा की बात है तो उनका रायपुर से गहरा रिश्ता इसलिए कि वह यहीं कि स्थानीय निवासी बन चुकी हैं। उनकी पहचान एक मेहनतकश अधिकारी के रूप में है।
मप्र व छग दोनों की
प्राचीन प्रतिमाएं
विदेश से वापस आने को
मध्यप्रदेश एवं छत्तीसगढ़ दोनों ही राज्यों की अति प्राचीन प्रतिमा जो इस समय अलग अलग देशों में हैं उन्हें वापस लाए जाने के प्रयासों की चर्चा जोरों पर है। बात मध्यप्रदेश की करें। मध्यप्रदेश के धार में स्थित प्राचीन भोजशाला को लेकर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ने मध्यप्रदेश हाई कोर्ट के फैसले के बाद नया आदेश जारी किया है। इसमें भोजशाला को मां वाग्देवी (सरस्वती) का मंदिर और संस्कृत अध्ययन का प्राचीन केंद्र बताते हुए हिंदू समाज को पूजा-अर्चना और अध्ययन संबंधी गतिविधियों के लिए निर्बाध प्रवेश देने को कहा गया है। पूर्व में यहां हिंदू पक्ष को सिर्फ मंगलवार और बसंत पंचमी के दिन ही पूजा का अधिकार था। हर शुक्रवार को यहां नमाज़ अदा की जाती थी। बता दें कि वर्ष 1903 में लॉर्ड कर्जन इस प्रतिमा को अपने साथ इंग्लैंड ले गए थे। मध्यप्रदेश हाई कोर्ट ने 15 मई के अपने निर्णय में स्पष्ट किया कि लंदन स्थित ब्रिटिश संग्रहालय में संरक्षित मां वाग्देवी की मूल प्रतिमा को भारत लाने के प्रयास किए जाएं। इसके बाद मंदिर पक्ष ने प्रधानमंत्री कार्यालय को पत्र लिखकर प्रतिमा की वापसी की मांग उठाई है।
रायपुर शहर के महंत घासीदास स्मारक संग्रहालय से वर्षों पहले चोरी हुई दुर्लभ पद्मपाणि बोधिसत्व (अवलोकितेश्वर) कांस्य प्रतिमा अमरीका में मौजूद है। अमरीका भारत को करीब 1.4 करोड़ डॉलर मूल्य की 657 प्राचीन वस्तुएं जो लौटाने जा रहा है उनमें घासीदास संग्रहालय से चुराई गई यह कांस्य प्रतिमा भी शामिल है। यह प्रतिमा 8 वीं – 9 वीं सदी की मानी जाती है और सिरपुर क्षेत्र से प्राप्त हुई थी। इसकी ऊंचाई करीब 24.5 सेंटीमीटर है। प्रतिमा का कलात्मक स्वरूप देखते ही बनता है। रायपुर संग्रहालय की महत्वपूर्ण धरोहरों में यह शामिल रही थी। माना जाता है कि यह 1939 में सिरपुर के लक्ष्मण मंदिर के पास मिली थी। इसे रायपुर के महंत घासीदास स्मारक संग्रहालय में लाकर रखा गया। सन् 1982 के आसपास प्रतिमा चोरी हो गई। तस्करों ने चोरी की इस प्रतिमा को अमरीका तक पहुंचा दिया। छत्तीसगढ़ के संस्कृति एवं धार्मिक न्यास मंत्री राजेश अग्रवाल प्रयासरत हैं कि चोरी हुई इस प्रतिमा को वापस लाएं। अग्रवाल को इस प्रतिमा के दिल्ली स्थित संस्कृति मंत्रालय पहुंचने का इंतज़ार है। मंत्री अग्रवाल की तरफ से इस संबंध में केंद्रीय संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत को पत्र भी गया है। अभी तक की ख़बर तो यही है कि प्रतिमा अब तक भारत नहीं पहुंची है।
पुरातत्व की 6 में से
5 पंजियों को
चाट गई दीमकें…
दुनिया भर में जब अंतरराष्ट्रीय संग्रहालय दिवस (इंटरनेशनल म्यूजियम डे) मनाया जा रहा था उस बीच राजधानी रायपुर स्थित क़रीब डेढ़ सौ साल पुराने महंत घासीदास स्मारक संग्रहालय से एक चौंका देने वाली ख़बर सामने आई! देश के टॉप 10 में शामिल घासीदास संग्रहालय में सुरक्षित पुरावशेषों की 6 पंजियों में से 5 को दीमकें चाट गईं। इन पंजियों में दुर्लभ धातु प्रतिमाओं, कलाकृतियों और पुरावशेषों के रिकॉर्ड दर्ज थे। इससे पता चलता है कि अख़बारों व चैनलों में कम सुर्खियों में रहने वाले इस विभाग का कामकाज कितनी ज़िम्मेदारी से होते रहा होगा। यह ख़ुलासा संग्रहालय के तत्कालीन प्रभारी और सहायक संचालक व्दारा संचालक पुरातत्व, अभिलेखागार एवं संग्रहालय को भेजे गए पत्र से हुआ। पत्र के मुताबिक डबल लॉक कमरे को खोला गया, जहां पुरावशेषों की पंजियां रखी हुई थीं। कमरे के खुलते ही पाया गया कि 6 पंजियों में से 5 दीमकों से ख़राब हो चुकी हैं। केवल एक ही पंजी सुरक्षित बची है।
कला वीथिका पर स्मार्ट
सिटी का पैसा पानी
की तरह बहा पर…
पुरातत्व विभाग की लचर सूरक्षा व्यवस्था के किस्से समय-समय पर सामने आते रहे हैं। इसके अलावा एक और वज़ह से इस पर उंगली उठती रही है कि राजधानी रायपुर की ख़ास पहचान रखने वाले नगर घड़ी चौक के पास स्थित महाकोशल कला वीथिका को पुरातत्व विभाग वापस क्यों नहीं ले सका! बताते हैं लोक निर्माण विभाग के रिकॉर्ड में महाकोशल कला वीथिका आज भी पुरातत्व विभाग का हिस्सा के रूप में दर्ज है। वीरान पड़ी रहने वाली कला वीथिका को ख़ूबसूरत बनाने स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट वालों ने पानी की तरह पैसा बहाया, पर उससे हासिल क्या हुआ…
नगर निगम वालों
पर ही कुत्ता हमला
हाल ही में सुप्रीम कोर्ट का फ़ैसला आया है कि रेबीज और गंभीर रूप से बीमार कुत्तों को मार दें। आवारा कुत्तों के रोकथाम की ज़िम्मेदारी नगर निगमों व पालिकाओं की होती हैं, क्या वे इसका निर्वहन सही तरीके से कर पा रही हैं यह सवाल जब तब उभरते रहता है। रायपुर नगर निगम में आवारा कुत्तों पर चिंतन मनन 2001 से होते आ रहा है, हो सकता है आगे भी होते रहे। वैसे तो नगर निगम ने आवारा कुत्तों के निदान के लिए डॉग शेल्टर होम भी बनवाया है, लेकिन कुत्तों की संख्या है कि कहीं से घटती नज़र नहीं आती। अब तो आलम यह है कि लोग नगर निगम वालों पर ही कुत्ते से हमला करवा दे रहे हैं। बिलासपुर में ऐसा ही कुछ हुआ। बिलासपुर जिले में शिवघाट बराज के दूसरे छोर पर स्थित कुदुदंड में अतिक्रमण हटाने पहुंची नगर निगम की टीम पर एक कब्जाधारी ने पालतू कुत्ता छोड़ दिया। कुत्ते के हमले में नगर निगम का एक कर्मचारी घायल हो गया। कुत्ता उसके हाथ पैर को काट खाया। तनावपूर्ण माहौल के बीच पुलिस ने मोर्चा संभाला तब कही जाकर नगर निगम बुलडोजर चलाकर अवैध निर्माणों को गिरा पाया।

