■ अनिरुद्ध दुबे
पूरे आसार हैं कि दिसंबर के दूसरे या तीसरे हफ्ते में नगरीय निकाय चुनाव की तारीख़ की घोषणा हो ही जाएगी। छत्तीसगढ़ में कुल 189 नगरीय निकाय हैं, जिनमें 14 नगर निगम, 52 नगर पालिका एवं 123 नगर पंचायत हैं। विष्णु देव साय सरकार की कोशिश यही है कि सभी निकाय चुनाव एक साथ हों। पूर्व में नगर पंचायत चुनाव अलग से हुआ करते थे। सबसे ज़्यादा चर्चा महापौर चुनाव को लेकर है जो एक बार फिर प्रत्यक्ष यानी जनता के वोट से होने जा रहे हैं। भाजपा हो या कांग्रेस, महापौर टिकट की दौड़ में शामिल नेताओं ने भीतर ही भीतर प्रयास तेज कर दिए हैं। भीतर ही भीतर इसलिए कि महापौर को लेकर लॉटरी होना बाकी है। लॉटरी का बेसब्री से इंतज़ार है। लॉटरी के बाद ही पता चलेगा कि कहां का महापौर पद सामान्य रहेगा, ओबीसी रहेगा, महिला सामान्य रहेगा या महिला ओबीसी रहेगा। लॉटरी होते ही कितने ही टिकट के दावेदार खुलकर मैदान में कूद पड़ेंगे। चूंकि महापौर चुनाव प्रत्यक्ष प्रणाली से होना है, अतः विधायक की तरह महापौर टिकट के लिए भी भारी माथापच्ची होना तय है।
एक अनार सौ बीमार
रायपुर के राजधानी होने के कारण यहां की महापौर सीट हाई प्रोफाइल मानी जाती है। भाजपा में महापौर टिकट को लेकर एक अनार सौ बीमार वाला आलम है। कांग्रेस में शायद ज़्यादा माथापच्ची वाली नौबत न रहे। माना जा रहा है कि भाजपा में महापौर टिकट के लिए जो नाम हवा में तैर रहे हैं, उनमें भाजपा प्रदेश महामंत्री संजय श्रीवास्तव समेत प्रफुल्ल विश्वकर्मा, सुभाष तिवारी, सूर्यकांत राठौर, केदार गुप्ता, मनोज वर्मा, श्रीमती मीनल चौबे, मृत्युंजय दुबे, रमेश ठाकुर, प्रमोद साहू, ओंकार बैस, श्रीमता लक्ष्मी वर्मा एवं सीमा साहू हैं। वहीं कांग्रेस की बात करें तो पूर्व विधायक कुलदीप जुनेजा समेत पूर्व महापौर व्दय प्रमोद दुबे एवं श्रीमती किरणमयी नायक, ज्ञानेश शर्मा, श्री कुमार मेनन एवं नागभूषण राव के नाम प्रमुखता से सामने आ रहे हैं। रायपुर महापौर महिला आरक्षित हुआ तो भाजपा से मीनल चौबे, सीमा साहू एवं श्रीमती लक्ष्मी वर्मा की प्रबल दावेदारी सामने आ सकती है, वहीं कांग्रेस से श्रीमती किरणमयी नायक का नाम जमकर चल सकता है।
राजेश मूणत व मिसेज़
प्रमोद दुबे के भी
नाम चर्चा में
रायपुर महापौर टिकट को लेकर दबे स्वर में दो और नामों की चर्चा है, पूर्व मंत्री एवं वरिष्ठ विधायक राजेश मूणत तथा पूर्व महापौर व वर्तमान नगर निगम सभापति प्रमोद दुबे की पत्नी श्रीमती दीप्ति दुबे। उल्लेखनीय है कि राजेश मूणत के नाम की हवा तो 2014 के महापौर चुनाव के समय में भी बही थी। तब तो वे मंत्री भी थे। वैसे भी कोई मंत्री या विधायक रहते हुए महापौर पद का निर्वहन कर सकता है। यहां एक व्यक्ति एक पद जैसा बंधन नहीं है। बात करें प्रमोद दुबे की। हाल ही में रायपुर दक्षिण में हुए उप चुनाव में वे कांग्रेस टिकट के प्रबल दावेदार थे। यह अलग बात है कि टिकट पा गए प्रदेश युवक कांग्रेस अध्यक्ष आकाश शर्मा। प्रत्यक्ष प्रणाली से महापौर चुनाव होने की तस्वीर साफ होते ही बताते हैं प्रमोद दुबे ने एक बार फिर कमर कस ली है। नगर निगम की राजनीति से गहराई से जुड़े लोगों का कहना है कि प्रमोद ने दो विकल्प तैयार कर रखे हैं। यदि महापौर पद सामान्य रहा तो टिकट के लिए दावा ठोंकने उनकी तरफ से कोई देर नहीं होगी। वहीं महापौर यदि महिला सामान्य हुआ तो प्रमोद अपनी धर्मपत्नी श्रीमती दीप्ति दुबे का नाम सामने ला सकते हैं। श्रीमती दुबे सन् 2020 से सामाजिक क्षेत्र में खुद को सक्रिय रखी हुई हैं। बीच में सोशल मीडिया में भी उनके मोटिवेट करने वाले वीडियो सामने आते रहे थे। कहा यही जाता रहा है कि लंबे समय तक घरेलू महिला के रूप में पहचानी जाती रहीं श्रीमती दुबे की जिस तरह सामाजिक क्षेत्र एवं सोशल मीडिया में अचानक सक्रियता बढ़ी वह उनकी कहीं न कहीं आगे की तैयारी रही है।
दिल की बात लब
पे आ ही गई
बरसों पहले एक फ़िल्म आई थी ‘तेरी कसम’ जिसका एक दर्द भरा गीत काफ़ी पॉपुलर हुआ था- “दिल की बात कहीं लब पे न आ जाए… हॅंसते हॅंसते ऑख कहीं न भर आये…” पिछले दिनों राजधानी रायपुर के एकात्म परिसर में भाजपा जिलाध्यक्ष चयन को लेकर बुलाई गई बैठक में जो कुछ घटा वह गाने के इस बोल की याद दिला गया। खुलकर कोई बात तो सामने नहीं आई लेकिन अंदर की ख़बर रखने वालों ने बताया कि उस बैठक में भाजपा नेत्री नंदिनी साहू का दर्द छलक पड़ा। नंदिनी साहू बैठक में बोल पड़ीं कि “बरसों से पार्टी में रहते हुए हमारे जैसे न जाने कितने ही लोग योगदान देते रहे हैं और यहां कांग्रेस से आए लोगों को सिर आंखों में बिठाने में कोई कमी नहीं की जा रही है। और तो और उन्हें टिकट देकर विधायक तक बना दिया गया। हमारे हिस्से में अब कांग्रेस से आए उन लोगों को माला पहनाने का काम रह गया है।“ बताते हैं कि इस बैठक में पर्यवेक्षक बनकर आए वरिष्ठ नेता नारायण चंदेल समेत विधायक मोतीलाल साहू पूर्व विधायक संजय ढीढी मौजूद थे।
धान खरीदी को गरमाए
रखे हैं दीपक बैज
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज धान खरीदी को लेकर राजनीतिक माहौल गरमाए रखे हैं। धान खरीदी में तथाकथित अव्यवस्था को लेकर उन्होंने दस दिनों के भीतर दो प्रेस कांफ्रेंस ले ली। दूसरी वाली प्रेस कांफ्रेंस में तो उनके साथ दो पूर्व मंत्री एवं कृषि विशेषज्ञ धनेन्द्र साहू व रविन्द्र चौबे तथा लंबा राजनीतिक सफर तय कर चुके वरिष्ठ नेता सत्यनारायण शर्मा भी मौजूद थे। पिछले दिनों चौंकाने वाली यह बात सामने आई कि पड़ोसी राज्य मध्यप्रदेश से 2 हजार बोरी धान अवैध रूप से भरतपुर ब्लॉक के ग्राम कसौड़ा में लाया गया था, जिसे जब्त कर लिया गया। वैसे पड़ोसी राज्यों का धान छत्तीसगढ़ में लाकर खपाया जाना कोई नई बात नहीं रही है। 16 दिसंबर से छत्तीसगढ़ विधानसभा का मानसून सत्र शुरु होने जा रहा है। स्वाभाविक है कि विपक्षी कांग्रेस विधायक दल धान खरीदी में अव्यवस्था को उठाने में कोई कसर बाकी नहीं रखेगा।
सेक्स रैकेट कांड
कोई रहम नहीं
कुछ महीनों पहले बलौदाबाजार में सेक्स रैकेट कांड का जो भंडाफोड़ हुआ था उसकी चर्चा अभी थमी नहीं है। सेक्स रैकेट कांड के दो मुख्य आरोपियों की जमानत याचिका कोर्ट ने फिर रद्द कर दी। चौंकाने वाली बात तो यह रही थी कि इस खेल में एक थानेदार भी अहम् रोल निभा रहा था। यह भी चर्चा है कि इस सेक्स रैकेट कांड में बड़े-बड़े लोगों को लपेटे में लेने का काम एक युवती करती रही थी। उसकी मनमोहक अदाओं में न जाने कितने ही लोग बह गए तथा मन और धन दोनों खो बैठे। क्षेत्र के मंत्री जी ने वरिष्ठ पुलिस अफ़सरों से कह रखा है कि इस कांड के किसी भी दोषी व्यक्ति पर रहम नहीं खाना है। आख़िर बलौदाबाजार की इज़्ज़त का जो सवाल है।

