मिसाल न्यूज़
जानी मानी एक्ट्रेस, फ़ेमस डॉसर एवं एंकर अनुराधा दुबे की छत्तीसगढ़ी फ़िल्म ‘सुकवा’ 10 जनवरी को पूरे छत्तीसगढ़ में प्रदर्शित होने जा रही है। अनुराधा कहती हैं- “पूरी ‘सुकवा’ टीम को 10 तारीख़ का बेसब्री से इंतज़ार है। इस फ़िल्म से छत्तीसगढ़ी सिनेमा में कुछ नया अनोखा जो होने जा रहा है।“

‘मिसाल न्यूज़’ से बातचीत के दौरान अनुराधा दुबे बताती हैं- “22 वर्षों की अपनी फ़िल्म और रंगमंच की यात्रा में छत्तीसगढ़ी, भोजपुरी और हिंदी को मिलाकर 35 से 40 फ़िल्में कर चुकी हूं। क़रीब 10 शॉर्ट फिल्में की हैं। 10 नाटकों में भी काम किया है। मेरे भीतर जो उत्सुकता और उत्साह ‘सुकवा’ फ़िल्म की रिलीज़ को लेकर है वैसा शायद ही पहले कभी रहा हो। इसका एक बड़ा कारण फ़िल्म की स्टोरी है। कहानी, डायरेक्शन, गीत-संगीत एवं फ़िल्मांकन हर स्तर पर यह फ़िल्म खरी उतरती नज़र आएगी। इस फ़िल्म को बनाते समय डायरेक्टर मनोज वर्मा जी एक अलग तरह का नज़रिया लेकर आगे बढ़े। सामाजिक कुरीतियों व भूत-प्रेत जैसा सब्जेक्ट जो सामने था। मनोज वर्मा जी के डायरेक्शन में अब तक तीन फिल्में ‘महूं कुंवारा तहूं कुंवारी’, ‘भूलन द मेज़’ एवं ‘सुकवा’ कर चुकी हूं। तीनों फिल्मों में मेरा किरदार एकदम डिफरेंट रहा। एक कलाकार के लिए ये इससे अच्छा और क्या हो सकता है कि उसे अलग-अलग तरह के किरदार प्ले करने का अवसर मिले। ‘महूँ कुंवारा तहूं कुंवारी’ फिल्म में मनोज जी ने कॉमेडी कैरेक्टर के लिए मुझे चुना था। इसके पहले मैंने हमेशा गंभीर किरदार ही प्ले किए थे। ‘महूं कुंवारा तहूं कुंवारी’ के शूट के वक़्त मनोज जी ने जब मेरा पहला शॉट पुष्पेंद्र सिंह जी के साथ लिया, उन्होंने मेरे अभिनय और टाइमिंग की तारीफ़ की थी। उनके उत्साह बढ़ाने से मेरा आत्मविश्वास और बढ़ा। उसके बाद ‘भूलन द मेज़’ में सरपंच की पत्नी के रोल में उन्होंने मुझे कास्ट किया। यह किरदार ऐसी आदिवासी महिला का था जो दिल में हर किसी के लिए स्नेह रखती है और मददगार है। अब ‘सुकवा’ में हीरोइन की दादी के रोल में एक अलग तरह के किरदार में दर्शक मुझे देखेंगे। इस फ़िल्म से जुड़े कुछ अनुभव मुझे हमेशा याद रहेंगे। इस फ़िल्म में मेरे अधिकांश सीन देर शाम और रात को शूट हुए। एक या दो सीन ही बस दिन में फ़िल्माए गए। शाम को ऑफिस से निकलकर रायपुर से भानुप्रतापपुर मैं बाई रोड जाया करती थी और पूरी रात शूट में शामिल होकर अर्ली मॉर्निंग वहां से रायपुर पहुंचकर ऑफिस जाती थी। यह काफ़ी रोचक और प्रेरक अनुभव रहा। ‘सुकवा’ की शूटिंग का असर इस कदर मुझ पर हावी रहा कि जब मैं सतीश जैन जी की फ़िल्म ‘मोर छंइहा भुंइया- 3’ कर रही थी तो एक नाइट सीन के शूट के समय मुझे ‘सुकवा’ फिल्म के डायलॉग और दृश्य याद आ गए और मैं कुछ वैसा ही करने लगी। यह देख वहां मौजूद लोग हॅस पड़े। मैं भी अपनी हॅसी को रोक नहीं पाई। कभी आप करना कुछ चाहते हैं और हो कुछ जाता है।“
अनुराधा आगे कहती हैं- “किसी फ़िल्म में संगीत का अपना अलग आकर्षण होता है। ऐसा ही कुछ संगीत का जादू ‘सुकवा’ के गानों में देखने को मिल रहा है। रात में जब भी किसी पीपल या बड़ के पुराने घने पेड़ को देखती हूं तो मुझे ‘सुकवा’ फ़िल्म का अपना एक सीन याद हो उठता है और मैं हंसकर रह जाती हूं… क्योंकि डरना मना है…”
अनुराधा की आने वाली फिल्में
1* सुकवा (छत्तीसगढ़ी)
2* मोर छंइहा भुंईया- 3 (छत्तीसगढ़ी)
3* बारात (हिंदी)

