स्वतंत्रता संग्राम सेनानी स्व.पं. रामभद्र दुबे की स्मृतियों का स्मरण

मिसाल न्यूज़

रायपुर। स्वतंत्रता संग्राम सेनानी उत्तराधिकारी संस्था द्वारा सेनानी परिवार महेश दुबे के निवास आम्रपाली में स्वतंत्रता संग्राम सेनानी स्व.पं. रामभद्र दुबे की स्मृतियों का स्मरण किया गयाl

सर्वप्रथम संस्था के अध्यक्ष मुरली मनोहर खंडेलवाल ने स्व. पं. रामभद्र दुबे के तस्वीर पर माल्यार्पण किया l इसके बाद संक्षिप्त परिचय देते हुए उन्होंने बताया कि स्वतंत्रता संग्राम सेनानी स्व. श्री रामभद्र दुबे ने मात्र 9 वर्ष की आयु में गांधी टोपी पहना प्रारंभ कर दिया था। इस कारण स्कूल के प्राचार्य द्वारा बेत से उनकी पिटाई की गई थी। सन् 1930 के महात्मा गांधीजी के नमक सत्याग्रह के आंदोलन में उन्होंने सक्रिय भाग लिया था। सन् 1931 के कराची के खुले अधिवेशन में उन्होंने भाग लिया था। जहां से अंग्रेज सरकार द्वारा प्रतिबंधित पुस्तकें व फोटो, अधिवेशन स्थल से गुप्त रूप से वे कटनी लाये थे। जिसे उन्होंने अपने साथियों को वितरित किया था। सन् 1933 में महात्मा गांधी के अछुतोद्धार कार्यक्रम में उन्हें कटनी तहसील के संचालक बनाया गया था, जिसके कारण स्थानीय ब्राम्हण समाज ने उनका समाज से निष्काषन किया था। सन् 1939 में कांग्रेस के त्रिपुरा अधिवेशन में उन्होंने कटनी क्षेत्र के प्रतिनिधि के रूप में भाग लिया था। इसी प्रकार सन् 1941 में आचार्य विनोभा भावे के नेतृत्व में सविनय अवज्ञा आंदोलन में उन्होंने भाग लिया था। सन् 1942 में महात्मा गांधी के अंग्रेजो भारत छोड़ों आंदोलन तथा देश की स्वतंत्रता के लिए करो या मरो आंदोलन में उन्होंने भाग लिया था। इस कारण अंग्रेज सरकार ने धारा 129 (1) बी 26 डी.आई.आर. के तहत 8 सितंबर 1942 को उन्हें गिरफ्तार किया था और 9 माह तक 3 जून 1943 तक उन्हें कारावास में रखा था। भारत को आजादी प्राप्त होने पर वे रायपुर जिले के ग्राम बागबाहरा में स्थायी रूप से बस गये थे, जहां वे सामाजिक कार्यों में संलग्न रहे थे। स्वतंत्रता के पश्चात् भारत सरकार द्वारा सन् 1972 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के कार्यकाल में उन्हें स्वतंत्रता संग्राम सेनानी के रूप में ताम्रपत्र देकर सम्मानित किया गया था।

राष्ट्रगान के बाद स्वल्पाहार हुआ l संस्था के अध्यक्ष मुरली मनोहर खंडेलवाल ने कार्यक्रम में आमंत्रित आम्रपाली अध्यक्ष आई एन सिंह को गांधी टोपी पहना कर उनका सम्मान किया l इस अवसर पर अपने विचार व्यक्त करते हुए सिंह ने कहा कि देश की आजादी के लिए वीर सपूतों ने अनेक कुर्बानियां दी हैं। तब जाकर हमें आजादी मिली है। उनके बलिदान को कभी भूलाया नहीं जा सकता l हमारी युवा पीढ़ी और आने वाली पीढ़ी को सदैव इस बात का स्मरण कराया जाना चाहिए l इस अवसर पर मैं उन वीर सपूतों को नमन करते हुए अपनी ओर से श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं l

कार्यक्रम में स्वतंत्रता संग्राम सेनानी उत्तराधिकारी संस्था के पदाधिकारी एवं सदस्य महेश दुबे के परिवारजन, एन के अग्निहोत्री, आम्रपाली संचालक और प्रधान संपादक डी.एस. मिश्रा उपस्थित थे l

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