मिसाल न्यूज़
रायपुर। विधानसभा में आज महिला, बाल विकास तथा समाज कल्याण मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े ने खुले मन से स्वीकारते हुए कहा कि दिव्यांग महाविद्यालयों के रिक्त पद इतने समय तक नहीं भरे जाने की मुझे तकलीफ है। इसे मैं अपना दुर्भाग्य समझती हूं। प्रश्नकाल में श्रीमती राजवाड़े, भाजपा विधायक अजय चंद्राकर के सवालों का जवाब दे रही थीं।
भाजपा विधायक अजय चंद्राकर का सवाल था कि क्या शासकीय दिव्यांग महाविद्यालय रायपुर अंतर्गत सेटअप स्वीकृत है? यदि हां तो सेटअप अनुसार कितने पद भरे गए व कितने रिक्त हैं? कौन-कौन से विषयों में अध्यापन कराया जा रहा है और कितने दिव्यांग छात्र अध्ययनरत हैं? उक्त महाविद्यालय अंतर्गत अध्ययनरत छात्रों को अन्य क्या-क्या सुविधाएं दी जा रही हैं? महाविद्यालय के संचालन हेतु राज्य सरकार व्दारा वित्तीय वर्ष 2022-23 से 2025-26 तक कितनी-कितनी राशि का बजट प्रावधान किया गया था तथा राशि किन-किन कार्यों में व्यय की गई? महिला, बाल विकास मंत्री एवं समाज कल्याण मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े की ओर से जवाब आया कि शासकीय दिव्यांग महाविद्यालय में दो विषय (1) बी.पी.ए. (बैचलर ऑफ परफार्मिंग आर्ट) मुख्य विषय हिन्दुस्तानी गायन एवं तबला तथा (2) बी.एफ.ए. (बैचलर ऑफ फाईन आर्ट्स) चित्रकला विषय में कक्षाएं संचालित हैं। वर्तमान में 130 छात्र-छात्राएं अध्यनरत हैं।
अजय चंद्राकर ने विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह एवं पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल दोनों का ध्यान आकृष्ट करते हुए कहा कि जब आप दोनों मुख्यमंत्री थे समाज कल्याण विभाग के संचालनालय के माध्यम से दिव्यांगों के ये शिक्षण संस्थान खुल चुके थे। 1 पद को छोड़ दें तो सभी दिव्यांग शिक्षण संस्थानों में प्लेसमेंट के माध्यम से पद भरे गए। यह भी ध्यान देने योग्य बात है कि इन शिक्षण संस्थानों के लिए मिलने वाला अनुदान लगातार कम हो रहा है। अनुदान की राशि फर्नीचर खरीदी व भोजन व्यवस्था तक ही सीमित होकर रह गई है। यदि इन शिक्षण संस्थानों को नहीं चला पा रहे हैं तो एनजीओ को दे दें। ऐसी कौन सी प्लेसमेंट सर्विस है जो तबला वादक या फाइन आर्ट विशेषज्ञ की सप्लाई करती है। मंत्री श्रीमती राजवाड़े ने कहा कि इतने समय तक पद नहीं भरे जाने की तकलीफ मुझे भी है। कहीं न कहीं हम भावनाओं को नहीं समझ पा रहे हैं। 2017 से पद स्वीकृत हैं। सवाल है कि 2018 में जो सरकार आई वह इस काम को क्यों नहीं कर पाई। दिव्यांग शिक्षण संस्थानों की जो स्थिति है उसे मैं अपना दुर्भाग्य समझती हूं। विभागीय अधिकारियों से मुझे वस्तुस्थिति का पता चला। इससे पहले गहराई तक नहीं जा पाई थी। दिव्यांग शिक्षण संस्थानों से संबंधित 112 पद जो स्वीकृत हैं उन्हें भरने के लिए जल्द फाइल आगे बढ़े यह मेरी प्राथमिकता होगी। चंद्राकर ने पूछा कि दिव्यांग शिक्षण संस्थानों के लिए पहले अनुदान राशि 97 लाख थी, जो घटकर 57 लाख हो गई, इसके पीछे क्या कारण है? व्यवस्था को कब तक ठीक करेंगे अवधि बताएं? या फिर प्राइवेट को दे दें। दिव्यांगों के साथ मजाक न हो। मंत्री ने कहा कि विषय गंभीर है। जल्द इस ओर कार्यवाही होगी।

