कारवां (28 सितंबर 2025) ● पहले भी रायपुर में पकड़े गए थे नक्सली… ● नक्सलवादः अब होगी बड़ी लड़ाई… ● विकास की नई राह विकासशील के सामने… ● ओलम्पिक हो या ऑस्कर पाना आपके हाथ में है… ● नया रायपुर ट्रेन दौड़ रही, सड़क पर भी तो गाड़ी दौड़ाइये… ● निगम मंडल की दूसरी सूची दिवाली से पहले या राज्योत्सव के बाद… ● आरडीए उपाध्यक्ष के लिए चले 2 नाम…

■ अनिरुद्ध दुबे

राजधानी रायपुर के व्यस्ततम क्षेत्र चंगोराभाठा में एक छोटे से मकान में पिछले क़रीब 3 महीने रह रहे नक्सली पति-पत्नी पकड़े गए। पति जग्गू कुरसम व पत्नी कमला कुरसम एक ठेकेदार के अंडर में भवन निर्माण का काम करते थे। पास पड़ोस में किसी से मेल-मिलाप नहीं रखने वाले ये नक्सली दंपत्ति हिन्दी व बस्तर की क्षेत्रीय भाषा के अलावा अंग्रेज़ी भी बोल लेते हैं। पुलिस के बताए अनुसार इनके पास से 12 लाख रुपये मिले जो नक्सली संगठन के विस्तार के लिए थे। पहले तो केवल नक्सलवाद शब्द प्रचलन में था, अब रुलर नक्सलवाद व अरबन नक्सलवाद दो श्रेणियों में बंट गया है। रायपुर में पूर्व में बड़े नक्सली लीडर पकड़े जा चुके हैं। दंतेवाड़ा जेल ब्रेक का मास्टर माइंड माना जाने वाला नक्सली लीडर नारायण सान्याल कभी डंगनिया इलाके से पकड़ा गया था। उसी डंगनिया इलाके से कभी महिला नक्सली लीडर के.एस. शांतिप्रिया गिरफ़्तार हुई थी। दिलचस्प संयोग है कि चंगोराभाठा व डंगनिया दोनों ही क्षेत्र आसपास हैं। जहां तक बड़े नक्सली लीडर नारायण सान्याल की बात है वह लंबे समय तक रायपुर सेंट्रल जेल में बंद रहा था। बाद में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद उसकी रिहाई हुई थी। रिहाई के कुछ साल बाद उसकी पश्चिम बंगाल में मौत हो गई। अरबन नक्सलवाद की जड़ों पर जाकर हमला करने वाले एक सीनियर आईपीएस अफ़सर ने कभी इस क़लमकार को बताया था कि तत्कालीन मनमोहन सिंह की केन्द्र सरकार के समय में केन्द्रीय गृह मंत्री पी.चिदम्बरम ने नक्सली नेताओं से बातचीत का रास्ता ढूंढने की कोशिश की थी, ताकि बरसों से कई राज्यों में जड़ें फैलाए इस हिंसात्मक समस्या का कोई समाधान निकल सके। इस काम के लिए चिदंबरम ने स्वामी अग्निवेश को आगे किया था। स्वामी अग्निवेश ने रायपुर सेंट्रल जेल में नारायण सान्याल से बातचीत की थी। वह बातचीत बेनतीजा रही। नारायण सान्याल व स्वामी अग्निवेश दोनों अब इस संसार में नहीं हैं।

नक्सलवादः अब

होगी बड़ी लड़ाई

पूर्व केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 31 मार्च 2026 तक छत्तीसगढ़ से नक्सलवाद की समाप्ति का लक्ष्य तय कर रखा है। केन्द्रीय गृह मंत्री नक्सलवाद के मुद्दे पर समय-समय पर छत्तीसगढ़ बैठकें लेने आते रहे हैं। पिछले छह महीनों में सूरक्षा बलों ने जहां कई बड़े हार्डकोर नक्सली नेताओं को मुठभेड़ में मार गिराया, वहीं कितने ही बड़े ईनामी नक्सलियों के आत्मसमर्पण का सिलसिला जारी है। नक्सलवाद का सामना करने बरसात का समय सबसे ज़्यादा मुश्किलों भरा होता है। फिर इस साल तो बस्तर का बड़ा हिस्सा बाढ़ प्रभावित रहा। ख़बर यही है कि बारिश के यह सितंबर महीने के गुज़रते ही बस्तर के दुर्गम इलाकों में नक्सलियों के खिलाफ़ सीधी लड़ाई लड़ने रणनीति तैयार हो चुकी है। यानी अक्टूबर 2025 से मार्च 2026 तक का महीना नक्सलवाद के खिलाफ़ निर्णायक होगा।

विकास की नई राह

विकासशील के सामने

आख़िर छत्तीसगढ़ के मुख्य सचिव के लिए विकासशील का नाम फाइनल हुआ। वे अमिताभ जैन की जगह लेंगे। अब प्रदेश को विकास के रास्ते ले जाने की बड़ी ज़िम्मेदारी 1994 बैच के आईएएस अधिकारी विकासशील के कंधों पर है। छत्तीसगढ़ के इतिहास में अमिताभ जैन ऐसे मुख्य सचिव रहे जिन्हें रिटायरमेंट के बाद 3 महीने का एक्सटेंशन मिला। यूं तो जैन की जगह लेने को लेकर 3-4 नाम चल रहे थे लेकिन फ़ैसला आश्चर्यजनक रूप से विकासशील के नाम पर हुआ। 5 वरिष्ठ आईएएस अफ़सरों को सुपरसीड कर मुख्य सचिव पद तक पहुंचना कोई छोटा-मोटा सरकारी घटनाक्रम नहीं। यूं तो विकासशील ने अपने प्रशासनिक जीवन में एक के बाद एक विभिन्न विभागों का दायित्व सम्हालते हुए लंबी पारी खेली है, लेकिन अमिताभ जैन की तरह वे भी पूर्व में रायपुर कलेक्टर रह चुके हैं। विकासशील की छवि काफ़ी मेहनती होने के साथ सादगी वाली भी रही है।

ख़ास बात यह कि डॉ. रमन सिंह सरकार के समय में 112 एम्बुलेंस सेवा के लॉच होने की पहली जानकारी तब के स्वास्थ्य कल्याण विभाग के अतिरिक्त सचिव विकासशील ने न्यू सर्किट हाउस में पत्रकारों को दी थी। तब विकासशील ने घटना स्थल पर 112 के पहुंचने का जो टाइम बताया था उस पर लोगों ने आश्चर्य जताया था कि शहरी क्षेत्र में कॉल करते ही 10 मिनट के भीतर भला एम्बुलेंस कैसे घटना स्थल पर पहुंच सकती है, लेकिन ऐसा हुआ। मीडिया के इस सवाल पर कि “क्या 112 पर फेक कॉल नहीं आएंगे”, विकासशील ने तब ज़वाब में कहा था कि “हो सकता है मज़ा लेने या फिर परखने लोग इस तरह का भी कार्य करें, लेकिन चिकित्सा जगत में यह सुविधा मील का पत्थर साबित होगी।“ और वैसा ही हुआ।

ओलम्पिक हो या ऑस्कर

पाना आपके हाथ में है…

कौन कहता है सरकारें उदार नहीं होतीं। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने छत्तीसगढ़ ओलम्पिक एसोसियेशन की वार्षिक आमसभा में शामिल होते हुए बड़ी घोषणा की कि छत्तीसगढ़ से ओलम्पिक में भाग लेने वाले प्रतिभागियों को 21 लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि दी जाएगी। मालूम हो कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय छत्तीसगढ़ ओलम्पिक एसोसियेशन के अध्यक्ष भी हैं। इससे पहले प्रदेश में जब कांग्रेस की सरकार थी, तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने घोषणा की थी कि छत्तीसगढ़ से जो कोई छत्तीसगढ़ी फ़िल्म ऑस्कर में जाएगी उसे 5 करोड़ की पुरस्कार राशि दी जाएगी। ख़ेल हो या सिनेमा बेहतरीन दिन का इंतज़ार रहेगा…

नया रायपुर ट्रेन दौड़

रही, सड़क पर

भी तो गाड़ी दौड़ाइये

छत्तीसगढ़ राजधानी क्षेत्र विकास प्राधिकरण अधिनियम 2025 को मंजूरी मिल गई है। राजपत्र में इसका प्रकाशन भी हो गया है। इसके अंतर्गत नया रायपुर-पुराना रायपुर-भिलाई-दुर्ग को मिलाकर स्टेट कैपिटल रीजन प्लान का रास्ता साफ हो गया है। बताते हैं इस प्लान ने मूर्त रूप लिया तो इन चारों शहरों से लगे क़रीब 500 गांवों को भी इसका प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष फ़ायदा मिलेगा। दूसरी ख़बर ये कि दिसंबर महीने तक पुराना रायपुर, नया रायपुर होते हुए धमतरी तक ट्रेन दौड़ाने का लक्ष्य रखा गया है। पुराना रायपुर-नया रायपुर-राजिम के बीच तो ट्रेन शुरु भी हो चुकी है। हर बार बात घूम-फिरकर वही नया रायपुर पर आ जाती है। मुर्दा शहर! नया रायपुर में मंत्रालय व संचालनालय तो पहले से हैं, अब वहां कुछ मंत्री तथा कई बड़े अफ़सर बस चुके हैं तथा अक्टूबर महीने में विधानसभा भवन का निर्माण कार्य पूर्ण होने के दावे हो रहे हैं। इस सब के बाद भी क्या नया रायपुर तक पुराने रायपुर या अन्य दूरस्थ क्षेत्रों से आने वाले आम आदमी की पहुंच आसान हो पाई है? इसका ज़वाब नहीं में है। पुराना रायपुर से नया रायपुर के बीच रेलगाड़ी दौड़ने पर कितनी भी पीठ थपथपा ली जाए लेकिन इन दोनों शहरों के बीच आम आदमी के लिए सरकारी सड़क परिवहन की जैसी सुविधा होनी चाहिए वह अब तक नहीं हो पाई है। पुराने रायपुर के अधिकांश सामान्य जन की यही राय है कि पुराने रायपुर से नया रायपुर जाने और वहां से लौटने, हर आधे घंटे के अंतराल में बस चलाए जाने की ज़रूरत है। चाहे यह सरकार के लिए साल-दो साल घाटे का सौदा ही क्यों न रहे। पुराने रायपुर से नया रायपुर की बीच सवारी ऑटो तो चलते नहीं, निजी तौर पर कोई ऑटो करके जाना भी चाहे तो ऑटो वाला 800 से हज़ार रुपये भाड़ा बताता है। ऐसे में फिर कहां हो पाया है नई राजधानी में समावेशी विकास…

निगम मंडल की दूसरी

सूची दिवाली से पहले

या राज्योत्सव के बाद

निगम-मंडल की पहली सूची में जिन थोड़ा वज़न रखने वाले  नेताओं का नाम नहीं आया अब उन्हें दूसरी सूची का बेसब्री से इंतज़ार है। माना जा रहा है निगम-मंडल की दूसरी सूची दीपावली से पहले आने की संभावना है। यदि दीप पर्व से  पहले नहीं आई तो मामला सीधे राज्योत्सव यानी नवंबर के पहले हफ़्ते तक के लिए टल सकता है। वैसे तो तक़रीबन सारे बड़े पदों पर पात्रता के हिसाब से बिठाया जा चुका है, लेकिन कुछ ऐसे चेहरे जिन्होंने पांच साल पार्टी के विपक्ष में रहते समय जी तोड़ मेहनत की थी उन्होंने उम्मीदें नहीं छोड़ी है। भाजपा मीडिया विभाग में रहे दो से तीन ऐसे जाने-पहचाने नाम हैं जिन्हें पद मिलने की संभावनाएं बरक़रार हैं।

आरडीए उपाध्यक्ष

के लिए चले 2 नाम

निगम मंडल की बात चल ही निकली है तो भला रायपुर विकास प्राधिकरण जैसी (आरडीए) संस्था को कैसे नज़रअंदाज़ किया जा सकता है। निगम मंडल की पहली सूची जब जारी हुई पूर्व विधायक नंद कुमार साहू उर्फ नंदे भैया ससम्मान आरडीए अध्यक्ष नियुक्त किए गए। आरडीए के दो उपाध्यक्ष एवं 5 संचालक मंडल सदस्य के पद ख़ाली हैं। संचालक मंडल सदस्य जैसे लॉलीपाप वाले पद को ख़ुद से होकर कोई नहीं पाना चाहता, लेकिन दो उपाध्यक्ष पद का अपना अलग वज़न तो है। आरडीए उपाध्यक्ष पद के लिए इस समय दो नामों की चर्चा है। पहला नाम पूर्व में कई बार सांसद व केन्द्र सरकार में मंत्री रहे वरिष्ठ नेता के रिश्तेदार का है, वहीं दूसरा नाम एक दिग्गज सांसद के क़रीबी का होना बताया जा रहा है। माना जा रहा है कि निगम-मंडल नियुक्ति की जो दूसरी सूची आएगी उसमें आरडीए के दो उपाध्यक्षों व 5 संचालक मंडल सदस्यों के पद भरे जाने की पूरी संभावना है।

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