कारवां (28 दिसम्बर 2025) ● धीरेन्द्र शास्त्री से पहले भी एयरपोर्ट पर बनती रही हैं कहानियां… ● प्रवक्ता पर से प्रतिबंध क्या हटा भिड़े दो नेता… ● बेटे को प्रवक्ता बनवाने का सपना… ● बस्तर का ये कैसा दोहन… ● आम आदमी की चहलकदमी ही आबाद कर सकती है ‘मुर्दा शहर’ को…● नशाखोरी और ‘31’ का क्रेज़… ● धमतरी में भी फैला सूखा नशा…

■ अनिरुद्ध दुबे

पिछले दिनों रायपुर के माना एयरपोर्ट पर सरकारी विमान से जैसे ही जाने-माने कथावाचक पंडित धीरेन्द्र शास्त्री उतरे एक दिलचस्प वाकया हुआ। माना थाने के थानेदार ने जूते उतारे, फिर टोपी उतारी और बागेश्वरधाम पंडित धीरेन्द्र शास्त्री के चरण छुए। किसी ने इसका वीडियो बना लिया और सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया। बस फिर क्या था, थानेदार के ऐसा करने पर सवालों की झड़ी लग गई। पं. धीरेन्द्र शास्त्री ठहरे कथावाचक। थानेदार के मन में श्रद्धा भाव जाग गया होगा। बहस का मुद्दा तो तब भी बना था जब अमित कटारिया बस्तर कलेक्टर थे। एक बार प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के बस्तर आगमन पर जगदलपुर एयरपोर्ट पर उनकी अगवानी करने अमित कटारिया जब पहुंचे उनकी आंखों पर धूप का चमचमाता चश्मा चढ़ा हुआ था। बताने वालों ने उस धूप के चश्मे को प्रोटोकाल के विपरीत बताते हुए मामले को तूल दे दिया। टीवी चैनलों पर इस पर लंबी बहस चली। अख़बारों में भी इस लगातार दो-तीन दिन अलग-अलग एंगल से ख़बरें लगती रहीं। इससे और काफ़ी पहले की तरफ चलें। वह विद्याचरण शुक्ल जैसे कद्दावर नेता का ज़माना था। एक बार विद्याचरण शुक्ल का दिल्ली से रायपुर आगमन हुआ। शुक्ल जैसे ही विमान से उतरे उस समय के पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय के कुलपति ने आगे बढ़कर उनके चरण छू लिए। कुलपति व्दारा नेता के पैर पड़ने वाली तस्वीर किसी अख़बार में प्रकाशित हो गई। बस फिर क्या था, उस तस्वीर पर सवाल तो उठना ही था कि कुलपति जैसे गरिमामयी पद पर आसीन व्यक्ति कैसे किसी राजनेता का इस तरह सार्वजनिक जगह पर पैर पड़ सकता है।

प्रवक्ता पर से प्रतिबंध

क्या हटा भिड़े दो नेता

कोई भी राजनीतिक पार्टी हो वहां के मीडिया विभाग से जुड़े लोगों को विभिन्न टीवी चैनलों व्दारा डिबेट पर आमंत्रित करने की परंपरा है। राजनीतिक पार्टियों के मीडिया विभाग में हर मूड के लोग पाए जाते हैं। कोई झील की तरह शांत होता है, तो कोई बहती हुई नदी की तरह कभी आक्रामक तो कभी शांत। वहीं कोई समुद्री लहरों की तरह तूफानी होता है। टीवी डिबेट में मर्यादा लांघने वालों के सामने बॉयकाट की तलवार लटकी रहती है। चैनल वाले किसी का बॉयकाट करें या न करें मौका पड़ने पर एक राजनीतिक पार्टी दूसरी राजनीतिक पार्टी के प्रवक्ता का बॉयकाट कर देती है। कभी बॉयकाट वालों पर से प्रतिबंध हट भी जाता है। एक प्रतिबंधित नेता के नाम को हाल ही में बहाल किया गया। उसकी बहाली को लेकर दो बड़े नेता पार्टी कार्यालय के भीतर आपस में भिड़ गए। एक का कहना था “मीडिया विभाग से मेरा गहरा वास्ता है। ठीक है संगठन के बड़े पद पर रहते हुए आपने किसी पर से प्रतिबंध हटा लिया। प्रतिबंध हटाने से पहले एक बार मुझसे राय मशविरा तो करना चाहिए था।“

बेटे को प्रवक्ता

बनवाने का सपना

किसी पार्टी में प्रवक्ता बनना बड़े ही सौभाग्य की बात मानी जाती है। आए दिन टीवी पर चेहरा जो दिखते रहता है। इस बहाने बड़े नेताओं की निगाहों में चढ़ने का अवसर मिल जाता है और ब्यूरोक्रेट्स व आम लोग भी जानने-पहचानने लग जाते हैं। टीवी की महत्ता को रायपुर के एक मुंहफट नेता जी बख़ूबी समझते हैं। यही कारण है कि वे अपने होनहार पुत्र को अपनी पार्टी का प्रवक्ता बनवाने की कोशिश में जुटे हुए हैं।

बस्तर का ये

कैसा दोहन…

दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी कहलाने वाली एक स्टील कंपनी आंध्रपदेश के अनकापल्ली में 1.4 लाख करोड़ का स्टील प्लांट लगाने जा रही है। बताया यही जा रहा है कि यह देश का सबसे बड़ा स्टील प्लांट होगा। आंध्रप्रदेश में लगने जा रहे इस प्लांट के पीछे बस्तर को बदहाल करने की कहानी अलग सामने आ रही है। बस्तर के नदी नालों के पानी के सहारे अब तक करोड़ों टन लौह अयस्क आंध्रा ले जाया जा चुका है।

आम आदमी की चहलकदमी

ही आबाद कर

सकती है ‘मुर्दा शहर’ को

अब तो विधानसभा भी नया रायपुर शिफ्ट हो गई। 2026 के आख़री तक राज भवन के भी नया रायपुर शिफ्ट हो जाने की संभावना है। यानी वह समय दूर नहीं जब न सिर्फ़ सरकार के बल्कि संवैधानिक स्तर पर भी सारे बड़े फ़ैसले नया रायपुर से होंगे। नया रायपुर में हज़ार एकड़ से ऊपर की ज़मीन 82 सरकारी व निजी संस्थाओं को आबंटित होने की बात सुनने मिलती रहती है। बिल्डर व कार्पोरेट सेक्टर को भी काफ़ी ज़मीन दी गई है। वर्तमान में तो यही धारणा है कि नया रायपुर महंगी खादी पहनने वाले नेताओं व सूट-बूट टाई वाले आला अफ़सरों का शहर बनकर रह गया है। नया रायपुर में आम आदमी के लिए मानो कोई स्थान ही नहीं है। नया रायपुर में आम लोगों की बसाहट तो दूर पुराने रायपुर से वहां तक पहुंचने के लिए परिवहन व्यवस्था दुरुस्त करने पर कहीं कोई किसी बड़े स्तर पर शायद ही विचार होते दिखा हो। जिस शहर में आम आदमी की चहलकदमी न हो वह ‘मुर्दा शहर’ ही तो कहलाएगा। आए दिन नया रायपुर को चमकाने से जुड़ी तरह-तरह की कथा-कहानियां सुनाई जाती रहती हैं। कैमरों के सामने आकर नया रायपुर को लेकर बड़े-बड़े दावे करने वाले लोग वहां किसी ऑटो या दुपहिया गाड़ी में सवार होकर सफ़र करके देखें, मालूम हो जाएगा कि सपने और दावे दोनों कितने खोखले हैं।

नशाखोरी और

‘31’ का क्रेज़

नव वर्ष की पूर्व संध्या यानी ‘31’ को सिर्फ़ 3 दिन बचे हैं। न्यू ईयर पार्टी को लेकर बेहद एक्साइटेड रहने वाले कुछ लोगों से यह बात सुनने मिली है कि राजधानी रायपुर में 31 का क्रेज़ इस बार कुछ ज़्यादा ही नज़र आ रहा है। जगह-जगह फार्म हाउस बुक हो रहे हैं। होटल व रेस्टॉरेंट में एक दिन की शराब बिक्री के लिए लाइसेंस के लिए कितने ही लोग क़तार में हैं। पुलिस प्रशासन के लिए सबसे बड़ी सरदर्दी इस समय सूखा नशा बनी हुई है। ‘ऑपरेशन निश्चय’ के तहत रायपुर शहर में महीने भर में 90 से अधिक लोगों की गिरफ़्तारी हो चुकी है लेकिन शहर में नशे का जाल इस क़दर फैल चुका है कि हर तरफ लगातार नज़र रख पाना आसान नहीं। नशे के क़ारोबार में लिप्त लोग जान रहे हैं कि लोकल लड़के पुलिस की निगाहों में आसानी से आ सकते हैं, इसलिए आसपास के कस्बों व गांवों में रहने वालों को इस ख़तरनाक ख़ेल से जोड़ने नया दांव चला हुआ है। हाल ही में रायपुर के नरैया तालाब के पास एमडी ड्रग्स के साथ जो युवक पकड़ा गया वह पाटन का रहने वाला है। पूछताछ में पता चला कि न्यू ईयर पार्टी के लिए वह माल (ड्रग्स) की सप्लाई करने यहां आया हुआ था।

धमतरी में भी

फैला सूखा नशा

ड्रग्स का अवैध क़ारोबार रायपुर व भिलाई जैसे बड़े शहरों में फैले रहने की ख़बरें तो सामने आती रहती हैं, लेकिन सूखे नशे की गंध धमतरी जैसे शहर में फैलने लगे तो उसे क्या कहेंगे! हाल ही में धमतरी में इंडोर स्टेडियम के पास हेरोइन रखा युवक पुलिस की गिरफ़्त में आया। वह हेरोइन कुछ लोगों तक पहुंचाने की तैयारी में था। पुलिस से जुड़े सूत्रों का मानना है कि धमतरी शहर के कुछ रईसजादों को सूखे नशे की आदत पड़ चुकी है। यही कारण है कि नशे के क़ारोबारी अब धमतरी में अपनी ज़मीन तैयार करने में लगे हुए हैं।

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