कारवां (18 जनवरी 2026) ● चूहों की ये हिम्मत, जो करोड़ों का धान चट कर गए… ● अश्लील डॉस व उज्बेकी युवतियों का सौंदर्य जाल… ● नक्सलवाद पर उल्टी गिनती शुरु, अब पापा राव टारेगट में… ● ‘चमत्कार’ और कांग्रेस… ● डॉग शेल्टर होम में कब पड़ेंगे कुत्तों के शुभ कदम…

■ अनिरुद्ध दुबे

छत्तीसगढ़ में हाथी व कुत्ते के बाद चूहे चिंता का कारण बन गए हैं। हाथियों व कुत्तों का आतंक तो ख़ुलेआम रहा है लेकिन चूहों का छिपा हुआ। हाथियों व कुत्तों की तरह चूहों ने इंसानों पर सीधे हमला तो नहीं बोला लेकिन पिछले कुछ दिनों से बातें धान को लेकर हो रही हैं, जिन्हें चट कर जाने का गंभीर आरोप इन मूसकों पर लगाया जा रहा है। पूर्व में कवर्धा जिले की तरफ़ से सुनने में आया था कि वहां धान संग्रहण केन्द्र में रखे 7 करोड़ के धान चूहे खा गए। उसके बाद महासमुन्द जिले के बागबाहरा से ख़बर आई कि वहां संग्रहण केन्द्र में 5 करोड़ से अधिक का धान चूहे चट कर गए। इस पर महासमुन्द कलेक्टर साहब का तो यही कहना रहा कि “इस बारे में मुझे कोई जानकारी नहीं। मार्कफेड के डीएमओ से जानकारी लेता हूं।“ हाथियों व कुत्तों का आतंक सामने नज़र आते रहा है, इसलिए वहां पर शक की कभी कोई गुंजाइश नहीं रही, लेकिन चूहे करोड़ों के धान की पेट पूजा कर जाएं इस पर भला कैसे कोई आसानी से यक़ीन कर पाए! छत्तीसगढ़ की राजनीति 2018 के समय से मानो किसान और धान पर केन्द्रित रही है। सरकार किसी भी पार्टी की रहे धान ख़रीदी को लेकर बड़े-बड़े दावे होते रहते हैं, सवाल यह कि छत्तीसगढ़ के सभी तरफ के अन्नदाता किसान क्या ख़ुशहाल हो पाए हैं, शायद नहीं। यदि धान ख़रीदी का सिस्टम शत-प्रतिशत खरा होता तो भला हाल ही में पहले सुमेर फिर बैसाखू जैसे किसानों के सामने ज़हर पीने की नौबत ही क्यों आती?

अश्लील डॉस व उज्बेकी

युवतियों का सौंदर्य जाल

राजनीतिक, मारधाड़ व प्रशासनिक ख़बरों से थोड़ा परे हटकर बात करें तो इस समय मनोरंजन की आड़ में गरियाबंद तथा सूरजपुर जिले में अश्लील डॉस का होना, वहीं दूसरी तरफ राजधानी रायपुर की एक बड़ी आलीशान हॉटल में उजबेकिस्तान की दो युवतियों का पकड़ा जाना जैसी ख़बरें सुर्खियों में हैं। फिर ये अश्लील डॉस किसी शहरी या कस्बाई क्षेत्र में नहीं बल्कि ग्रामीण इलाके में होते पाए गए। दोनों ही स्थानों पर हुए फूहड़ डॉस में कुछ सरकारी अधिकारी-कर्मचारी निलंबित हुए, तो कुछ की गिरफ़्तारियां हुईं। वो कहते हैं न कभी-कभी दोष निगाहों का होता है। हो सकता है हमारे प्रदेश के मंत्री रामविचार नेताम जी की निगाहें साफ़-सुथरी व सोच पॉजिटिव हो। तभी तो नेताम जी ने नृत्य कला के इस महान आयोजन पर कुछ इस तरह की प्रतिक्रिया दी कि “कला में सिर्फ़ राम नाम का जाप नहीं होता। कला तो कला है। कहीं भी जागृत हो सकती है। चाहे वह रेस्ट हाउस का बंद कमरा हो या कहीं और का खुला मंच।“

अर्ध नग्न मुद्रा वाले इन नाचों पर रिसर्च करके बैठे हुए कुछ लोग बताते हैं कि गरियाबंद जिले में जो कुछ हुआ वह कोई पहली बार नहीं। पहले भी होते रहा था। इस बार वीडियो वायरल हो गया तो तूफान खड़ा हो गया। ओड़िशा राज्य गरियाबंद जिले की सीमा से लगा हुआ है। उधर की नर्तकियां पहले भी यहां आकर धमाल मचाती रही हैं और अपने हुस्न की गाज गिराती रही हैं। फिर गरियाबंद पर ही क्यों उंगली उठाना, और तरफ भी पता करो, उत्तेजना पैदा करने वाले ऐसे स्टेज शो और भी जगह होने की जानकारी मिल जाएगी। बात केवल ओड़िशा की ही नहीं है, भोजपुरी गीतों पर ठुमके लगानी वाली नृत्यांगनाएं भी अवसर मिले तो छत्तीसगढ़ जैसे शांतिप्रिय व आनंद में डूबे रहने वाले राज्य का भ्रमण कर लेती हैं। कला-संस्कृति के मामले में छत्तीसगढ़ का झारखंड से भी गहरा संबंध है। उधर से इधर कौन आता है और अपने हुस्न की गाज गिराकर चला जाता है थोड़ा उस पर भी पता किया जा सकता है।

रही बात उजबेकिस्तान की तरफ की ख़ूबसूरत बालाओं के राजधानी रायपुर आने की, तो यह कोई नया घटनाक्रम नहीं। यह सही है कि वीआईपी रोड के पास स्थित एक हॉटल में उजबेकिस्तान की दो युवतियों ठहरी हुई थीं, लेकिन इन्हें यहां तक लाने वाला कौन था और कौन से महान उद्देश्य को लेकर वह यहां आई हुई थीं, काश इसकी भी गहराई से पड़ताल हो पाती! ये वही वीआईपी रोड है जहां पिछले साल नशे की हालत में कार चलाते हुए एक उज्बेकी युवती ने एक दोपहिया सवार को ठोंक दिया था, जिसकी मौत हो गई। यही नहीं एक्सीडेंट के बाद नशे में बेसुध उस उज्बेकी युवती ने जमकर खुली सड़क पर जमकर हंगामा मचाया था। उसका मित्र जो नशा पार्टी में लेकर गया था वह भी उसे सम्हाल नहीं पा रहा था। अब उस वीआईपी रोड से दो-ढाई किलोमीटर की दूरी पर स्थित मरीन ड्राइव (तेलीबांधा) की कुछ वर्षों पहले की घटना को याद कर लें। मरीन ड्राइव में नशे की हालत में बेसुध पड़ी उज्बेकी युवती पाई गई थी। मौज मस्ती के बाद उसका कोई दोस्त मरीन ड्राइव में ला पटका और फ़रार हो गया। पुलिस प्रशासन के लिए वह युवती बड़ी उलझन बन गई थी। उसे न हिन्दी आती थी, न इंग्लिश। उसे जो भाषा आती थी वह यहां के पुलिस वालों के लिए समझ पाना मुश्किल था। कुछ दिनों तक वह रायपुर जेल में रही और काफ़ी मशक़्क़त के बाद उसे उसके देश रवाना किया जा सका था।

नक्सलवाद पर उल्टी गिनती

शुरु, अब पापा राव टारेगट में

बस्तर से ख़बर यही आ रही है कि फरवरी व मार्च माह में फोर्स बचे-खुचे नक्सलियों के खिलाफ़ ताबड़तोड़ अभियान चलाएगी। वैसे भी 31 मार्च 2026 को समय बचा ही कितना है। केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह नक्सलवाद का ख़ात्मा करने यही डेट लाइन तय जो किए हुए हैं। खूंख़ार नक्सली लीडर माड़वी हिड़मा के आंध्रप्रदेश में तथाकथित मुठभेड़ में ढेर होने के बाद तेलंगाना में उसी के साथी नक्सली लीडर बारसे देवा का सूरक्षा बलों के हाथ लगना या फिर समर्पण होना, बस्तर के भी सूरक्षा के क्षेत्र में डटे अफ़सरों के लिए राहत वाली ख़बर रही। लेकिन बस्तर के बीजापुर एवं सुकमा जिले के घने जंगल अभी भी अमन चैन वाली स्थिति में नहीं हैं। माना जा रहा है कि बीजापुर जिले के घने जंगलों में 100 के आसपास हथियार लेकर चल रहे नक्सली अभी भी सक्रिय हैं। इनके बीच सबसे ख़तरनाक चेहरा पापा राव है। पापा राव कोई दो-चार साल नहीं, बीस साल से अधिक समय से बस्तर में सक्रिय रहा है। कई ख़तरनाक नक्सली हमलों का उसे मास्टर माइंड माना जाता रहा है, जिस पर 50 लाख का ईनाम है। इधर बस्तर में पापा राव तो उधर आंध्रप्रदेश व तेलंगाना में देवजी की सघन तलाश जारी है। देवजी की आंध्रा व तेलंगाना के साथ बस्तर में भी नक्सली लड़ाकों के बीच गहरी पैठ रही थी। नक्सल मामलों के जानकार मानते हैं कि देवजी व पापा राव के हाथ लगने के बाद ही दावा करना ठीक होगा कि बस्तर, तेलंगाना व आंध्रप्रदेश में नक्सलवाद समाप्त होने की ओर है।

‘चमत्कार’ और कांग्रेस

छत्तीसगढ़ में कांग्रेस के शहर एवं ग्रामीण अध्यक्षों के बाद ब्लॉक अध्यक्षों की भी घोषणा हो गई। कांग्रेस लोकतांत्रिक के साथ ‘चमत्कारिक’ पार्टी भी है। इसलिए कि छोटे से लेकर बड़े ‘चमत्कारी’ फ़ैसले समय-समय पर जो होते रहते हैं। छत्तीसगढ़ के बेचारे संघर्षशील नेता अपनी पारी का इंतज़ार करते रह जाते हैं और राजीव शुक्ला, के.टी.एस. तुलसी व रंजीत रंजन जैसे दूसरे प्रदेशों के नेता यहां से राज्यसभा सदस्य बन जाते हैं। कोई चमत्कारी तरीके से पहले मुख्य प्रवक्ता बनता है, फिर चौबीस घंटे नहीं बीते रहते वह ‘मुख्य’ से नीचे आकर ‘वरिष्ठ’ प्रवक्ता बनता है, बाद में वह ‘वरिष्ठ’ छह साल के लिए पार्टी से निष्कासित भी हो जाता है। कहते हैं न कभी कहीं पर निर्णय बड़ा होता है, तो कहीं पर समय बलवान होता है। राजधानी रायपुर की बात करें, यहां कांग्रेस का समय बलवान होता नज़र आ रहा है। श्री कुमार मेनन रायपुर शहर कांग्रेस अध्यक्ष बनने के बाद जहां पूरे समय शहर कांग्रेस संगठन को चार्ज करने में लगे हैं और आंदोलन पर आंदोलन कर रहे हैं, वहीं कुछ ही महीनों पहले रायपुर नगर निगम के नेता प्रतिपक्ष बने आकाश तिवारी न जाने कहां-कहां से मुद्दे खोज निकाल ला रहे हैं। फिर सुबोध हरितवाल जैसे युवा नेता भी हैं, जिन्होंने बालोद में भयंकर विवादों में घिरी रही स्काउट जंबूरी में एक के बाद एक भ्रष्टाचार की कहानी ढूंढ़ निकाली और अदालत तक भी चले गए। यानी श्री कुमार मेनन, सुबोध हरितवाल व आकाश तिवारी जैसे चेहरों को देखो तो लगता है, छोटी लीडरशिप अब बड़ी लीडरशिप में परिवर्तित होती जा रही है। फिर रायपुर नगर निगम के दो पूर्व महापौर रहे प्रमोद दुबे व एजाज़ ढेबर की भी राजनीतिक दूरदर्शिता कोई कम नहीं। इसीलिए प्रमोद दीप्ति भाभी तथा एजाज़ अर्जुमन भाभी को ससम्मान सक्रिय राजनीति में ले आए हैं। प्रमोद, दीप्ति भाभी को 2025 का महापौर चुनाव तथा एजाज़, अर्जुमन भाभी को पार्षद चुनाव लड़ा चुके हैं। दीप्ति भाभी की किस्मत अच्छी नहीं रही और उन्हें हार का सामना करना पड़ा। महापौर रहने के बाद भी एजाज़ ख़ुद पार्षद चुनाव लड़े और हारे, लेकिन अर्जुमन भाभी जीत गईं। यही नहीं अर्जुमन जी पार्षद रहने के साथ-साथ अब ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष भी बन गई हैं।

‘चमत्कार’ की बात ऊपर पहले ही की जा चुकी है। किसी नेता का कुशलता के साथ वाहन चलाने और बेहतरीन रील्स बनाने वाला कोई युवक यदि ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष बन जाए तो क्या यह किसी ‘चमत्कार’ से कम है!

डॉग शेल्टर होम में कब

पड़ेंगे कुत्तों के शुभ कदम

सुप्रीम कोर्ट व्दारा साफ़ शब्दों में कह दिया गया है कि “कुत्तों के काटने पर राज्य सरकार और स्थानीय निकायों को भारी जुर्माना चुकाना होगा। कुत्तों के काटने पर उन्हें खाना खिलाने वाले लोगों एवं संगठनों की भी ज़वाबदेही तय की जाएगी।“ रायपुर में आए दिन लावारिस या पालतू कुत्तों व्दारा राह चलते लोगों को काटने की घटनाएं होती रहती हैं। रायपुर नगर निगम पिछले क़रीब 24 वर्षों से कुत्तों के आतंक पर चिंता करते तो आ रहा है, लेकिन ठोंस समाधान नहीं निकाल पा रहा। राजधानी रायपुर के सीमावर्ती क्षेत्र सोनडोंगरी में नगर निगम ने क़रीब 2 करोड़ ख़र्च कर डॉग शेल्टर होम तो बना दिया, लेकिन लावारिस कुतों के अपने इस सराये में क़ब शुभ कदम पड़ेंगे तारीख़ तय नही हो पा रही है! पूर्व में डॉग शेल्टर होम के संचालन के लिए जो टेंडर किया गया था उसमें अनियमितताएं पाई गई थीं। नगर निगम को वह टेंडर निरस्त करना पड़ा। फिर यह सुनने में आया था कि ऑल एनिमल लव एंड केयर फाउंडेशन व्दारा इस शेल्टर होम का संचालन किया जाएगा, लेकिन उसका भी अता-पता नहीं। अब नई बात यह सुनने में आई है कि नगर निगम की 5 सदस्यीय टीम शेल्टर होम का संचालन करेगी।

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