कारवां (25 जनवरी 2026) ● बैज व डॉ. महंत के कहने का अंदाज़ अलग, भाव एक… ● भाजपा में भी जय वीरू की जोड़ी… ● फ़िल्म सिटी का भूमि पूजन और छॉलीवुड ही ग़ायब… ● चंद्राकर के साथ फोटो खिंचवाकर धन्य हुए साहित्यकार… ● स्वतंत्र जल बोर्ड की ज़रूरत… ● नगर निगम के म्युनिसिपल बॉन्ड पर ‘कुबेर’ की कृपा दृष्टि… ● नंदे भैया की फोटो गोल…

■ अनिरुद्ध दुबे

कभी-कभी ऐसा देखने में आता है कि प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज व विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत किसी जगह पर अलग-अलग अंदाज़ में नीचे क्रम के नेताओं व कार्यकर्ताओं को चेताते नज़र आते हैं, लेकिन दोनों के कहने का भाव एक सा लगता है। पिछले दिनों बिलासपुर में शहर एवं ग्रामीण अध्यक्षों के शपथ ग्रहण समारोह में प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज ने अपने संबोधन में सीधे-सपाट शब्दों में कहा कि “किसी नेता के सामने जी हुज़ूरी करने की ज़रूरत नहीं। 2028 के विधानसभा चुनाव में जीत हासिल करना एकमात्र लक्ष्य रहे।“ वहीं नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने कहा कि “गुटबाजी छोड़कर पार्टी हित में काम करें और मिशन 2028 के लिए अभी से जुट जाएं।“ बैज ने ‘जी हुज़ूरी’ छोड़ने कहा हो या डॉ. महंत ने ‘गुटबाजी’ छोड़ने, दोनों का भाव तो एक ही था। समझने वाली बात यह कि दोनों का इशारा किस तरफ था!

भाजपा में भी जय

वीरू की जोड़ी…

कांग्रेस के पास कभी भूपेश बघेल व टी.एस. सिंहदेव के नाम की जय-वीरू की जोड़ी हुआ करती थी, अब भाजपा को भी नये जय-वीरू मिल गए हैं। बलौदाबाजार में नगर पालिका व्दारा निर्मित चौपाटी का लोकार्पण कार्यक्रम था। कार्यक्रम स्थल के गेट पर लगा एक विशाल फ्लैक्स बरबस वहां पर पहुंचे लोगों का ध्यान खींच रहा था जिस पर लिखा था “जय-वीरू की जोड़ी।“ इस कैप्शन के ऊपर मंत्री व्दय टंकराम वर्मा व गुरु खुशवंत साहेब की फोटो लगी हुई थी। जय यानी टंकराम वर्मा और वीरू यानी गुरु खुशवंत साहेब। चौपाटी लोकार्पण कार्यक्रम में अतिथि के रूप में पहुंचे इन दोनों ही मंत्रियों के चेहरे पर उस फ्लैक्स को देखने के बाद गहरी मुस्कान तैर रही थी।

फ़िल्म सिटी का भूमि पूजन

और छॉलीवुड ही ग़ायब

नवा रायपुर से लगे माना-तूता में शनिवार को मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने चित्रोत्पला फ़िल्म सिटी का भूमि पूजन किया। 150 करोड़ रुपये की लागत से लगभग 100 एकड़ में फ़िल्म सिटी का निर्माण होना है। पद्मश्री अनुज शर्मा फ़िल्म अभिनेता एवं लोक कलाकार होने के साथ विधायक हैं तथा सुश्री मोना सेन लोक कलाकार एवं फ़िल्म अभिनेत्री होने के साथ छत्तीसगढ़ी फ़िल्म विकास निगम की अध्यक्ष हैं, अतः इन दोनों की मंच पर तो उपस्थिति होनी ही थी लेकिन कार्यक्रम स्थल पर दर्शक दीर्घा में छत्तीसगढ़ी सिनेमा जगत से जुड़े चार-पांच लोग ही देखने को मिले। छत्तीसगढ़ी सिनेमा जगत से जुड़े कितने ही लोगों में निराशा का भाव है कि उन्हें फ़िल्म सिटी के भूमि पूजन में बुलाया नहीं गया। छत्तीसगढ़ी फ़िल्मों के जाने-माने निर्माता रॉकी दासवानी व अभिनेता पुष्पेंद्र सिंह ने तो अपनी भावनाओं को फ़ेस बुक के माध्यम से खुलकर सामने रख भी दिया है।

चंद्राकर के साथ फोटो

खिंचवाकर धन्य

हुए साहित्यकार

नवा रायपुर के पुरखौती मुक्तांगन में 3 दिवसीय रायपुर साहित्य महोत्सव संपन्न होने की ओर है। साहित्य महोत्सव विविधताओं को समेटे हुए है। शहर की आपाधापी से दूर खुले स्थान पर इस तरह के बड़े आयोजन का अपना एक अलग ही आनंद है। महोत्सव के दूसरे दिन शनिवार को पूर्व मंत्री एवं वरिष्ठ भाजपा विधायक अजय चंद्राकर आकर्षण का केन्द्र रहे। आयोजन स्थल पर पहुंचने के बाद चंद्राकर की सबसे ज़्यादा रुचि बुक स्टालों पर नज़र आई। उन्होंने कुछ किताबें ख़रीदी। यह बात बहुतेरे लोगों को मालूम है कि चंद्राकर का संसदीय ज्ञान (विधानसभा) काफ़ी तगड़ा है। यह ज्ञान ख़ूब पढ़ने के बाद ही आया है। यह बात कम लोगों को मालूम है कि चंद्राकर अन्य विषयों से जुड़ी किताबें भी पढ़ते हैं और उनके निवास में किताबों का भंडार है। चंद्राकर जब साहित्य महोत्सव के बुक स्टालों का विचरण कर रहे थे, इस सेलिब्रिटी नेता के आकर्षण से प्रदेश के कुछ मूर्धन्य साहित्यकार बच नहीं पाए। चंद्राकर के बाजू खड़े होते हुए उन साहित्यकारों ने अलग-अलग एंगल से फोटो खिंचवाई। जो भी साहित्यकार चंद्राकर के साथ फोटो खिंचवाने के लिए आकर मिले उनसे उन्होंने (चंद्राकर) नपे-तुले शब्दों में ही बातचीत की। किताबों के गहरे अनुभवों से गुज़र चुके लोगों को परिस्थितिनुसार नपे-तुले शब्दों में बात करने की आदत हो जाती है। विनोद कुमार शुक्ल भी तो नपे-तुले शब्दों में ही बातें किया करते थे।

स्वतंत्र जल बोर्ड

की ज़रूरत…

रायपुर नगर निगम ने आम जनता को भीषण गर्मी में होने वाले पानी के संकट से छुटकारा दिलाने के लिए जल बोर्ड का गठन किया है। बोर्ड में 8 अनुभवी इंजीनियरों की टीम रखी गई है। बोर्ड का यह गठन प्रशासनिक महकमे से जुड़े न जाने कितने ही लोगों को चौंका गया। इसलिए कि ‘बोर्ड’ शब्द अपने आप में काफ़ी वज़न रखता है। ‘बोर्ड’ से किसी विशाल व्यवस्था की परिकल्पना होती है। नगर निगम के जल बोर्ड के गठन पर लंबी प्रशासनिक यात्रा से गुजर चुके एक बेहद ही अनुभवी अधिकारी की कुछ इस तरह प्रतिक्रिया सामने आई कि “रायपुर, बिरगांव और नया रायपुर को शामिल करके एक स्वतंत्र जल बोर्ड बनाए जाने की ज़रूरत है, जिसका पृथक से कानून हो। जो राजनीति से प्रभावित नहीं हो।“

नगर निगम के म्युनिसिपल

बॉन्ड पर ‘कुबेर’ की कृपा दृष्टि

इंदौर नगर निगम की तरह रायपुर नगर निगम की भी म्युनिसिपल बॉन्ड लाने की योजना है। रायपुर नगर निगम म्युनिसिपल बॉड को लेकर जो कॉमर्शियल कॉम्पलेक्स तानने वाला है उसके लिए जगह तय कर ली गई है। शंकर नगर की सीमा पर स्थित क्रिस्टल ऑर्केड के सामने कॉम्पलेक्स का निर्माण होना है। म्युनिसिपल बॉन्ड वाली यह योजना 100 करोड़ की है, जिसे कुछ ही दिनों पहले छत्तीसगढ़ शासन से हरी झंडी मिली है। वैसे तो म्युनिसिपल बॉन्ड अभी सिर्फ़ कागज़ों पर है लेकिन इस योजना के तहत जो कॉमर्शियल कॉम्पलेक्स खड़ा होना है नगर निगम के कर्ता-धर्ताओं ने उसका नाम भी सोच रखा है- ‘कुबेर भवन।‘ हालांकि नामकरण ‘कुबेर भवन’ ही होगा इस पर कोई अंतिम निर्णय नहीं हुआ है लेकिन बोल चाल में यह नाम निगम से जुड़े लोगों की ज़ुबान पर चढ़ चुका है। इस प्रस्तावित कॉमर्शियल कॉम्पलेक्स के लिए ‘कुबेर’ नाम जिसने भी चलाया, काफ़ी सोच समझकर चलाया होगा। उल्लेखनीय है कि ‘कुबेर’ को धन और खजाने का देवता माना जाता है। फिर रायपुर नगर निगम वर्तमान में जिस बदहाली के दौर से गुज़र रहा है वहां धन की बेहद ज़रूरत है। जानकार लोग बताते हैं कि म्युनिसिपल बॉन्ड वाला फंडा यदि सक्सेज हो गया तो केन्द्र सरकार से 13 करोड़ की प्रोत्साहन राशि मिलेगी। यदि 13 करोड़ मिले तो वह किसी छोटे खजाने पर हाथ लगने जैसा ही तो होगा ना।

नंदे भैया की

फोटो गोल

रायपुर विकास प्राधिकरण (आरडीए) अध्यक्ष नंद कुमार साहू सरल एवं सहज नेता माने जाते हैं। सहजता और सरलता के कारण व्यक्ति कहीं-कहीं पर उपेक्षा का शिकार भी हो जाता है। नंदे भैया के साथ कुछ ऐसी ही कहानी होती नज़र आ रही है। हो यह रहा है कि आरडीए के ज़मीन, मकान या दुकान के जो भी विज्ञापन जारी हो रहे हैं उनमें दो ही लोगों की फोटो नज़र आती है मुख्यमंत्री विष्णु देव साय एवं आवास एवं पर्यावरण मंत्री ओ.पी. चौधरी की। किसी ने यह कहते हुए नंदे भैया का स्वाभिमान जगाने की कोशिश की कि साय जी और ओपी भैया की फोटो लगना तो अपनी जगह बिलकुल सही है, लेकिन अध्यक्ष रहते हुए में आपकी फोटो नज़र नहीं आए यह भला कैसे हो सकता है! पता करवाइये, विज्ञापन जारी करने वाले लोग आपकी फोटो कैसे गोल कर दे रहे हैं!

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *