छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना दिवस पर 100 रुपए में फिजियोथेरेपी सुविधा… 1 से 30 नवंबर तक मरीजों की जांच और परामर्श रहेगा नि:शुल्क…

मिसाल न्यूज़

रायपुर। नियमित फिजियोथेरेपी की जरूरत वाले मरीजों को उपचार का खर्च कम करने में मदद के उद्देश्य से राजधानी के हकीमी फिजियोथेरेपी क्लीनिक में 1 से 30 नवंबर तक 100 रुपए में फिजियोथेरेपी सत्र उपलब्ध कराए जाएंगे। छत्तीसगढ़ स्थापना दिवस के अवसर पर की जा रही इस पहल के तहत मरीजों की जांच और परामर्श नि:शुल्क रहेगा। हकीमी फिजियोथेरेपी क्लीनिक का संचालन दाऊदी बोहरा चैरिटेबल ट्रस्ट अंजुमन-ए-सैफी व्दारा किया जा रहा है। क्लीनिक शर्मा रोड, बागड़ी नर्सिंग होम के पास, बोहरा मस्जिद सत्ती बाजार रायपुर में स्थित है।

क्लीनिक का उद्घाटन विगत 23 अप्रैल को सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने किया था। उद्घाटन के अवसर पर उन्होंने कहा था कि दाऊदी बोहरा समुदाय हमेशा से सेवा, सद्भाव और सामाजिक उत्थान के कार्यों के लिए प्रतिबद्ध रहा है। उन्होंने उम्मीद जताई थी कि यह फिजियोथेरेपी केंद्र जरूरतमंद लोगों को किफायती और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

क्लीनिक में उद्घाटन के बाद छह महीनों में 100 से अधिक मरीज फिजियोथेरेपी सेवाएं ले चुके हैं। केंद्र में चार फिजियोथेरेपिस्ट सेवाएं दे रहे हैं। यहां कमर और गर्दन के दर्द, खेल के दौरान लगी चोटों, जोड़ों और मांसपेशियों से जुड़ी समस्याओं तथा सर्जरी के बाद पुनर्वास के लिए उपचार उपलब्ध है। मरीजों को घर पर किए जाने वाले व्यायाम और उपचार के दौरान बरती जाने वाली सावधानियों की जानकारी भी दी जाती है।

क्लीनिक की डॉ. जुमाना हुसैन ने बताया कि फिजियोथेरेपी दर्द को नियंत्रित करने, मांसपेशियों की कार्यक्षमता सुधारने और शरीर की गतिशीलता बहाल करने में मदद करती है। उन्होंने कहा कि लगातार बने रहने वाले दर्द को नजरअंदाज करने के बजाय समय पर जांच कराना जरूरी है। नियमित उपचार के साथ फिजियोथेरेपिस्ट द्वारा बताए गए व्यायाम और सावधानियों का घर पर भी पालन करना चाहिए। इससे रिकवरी की प्रक्रिया बेहतर बनाने और समस्या दोबारा होने की आशंका कम करने में मदद मिलती है।

दाऊदी बोहरा चैरिटेबल ट्रस्ट, अंजुमन-ए-सैफी ट्रस्ट ने इस केंद्र की शुरुआत अपनी सामुदायिक सेवा गतिविधियों के तहत की है, ताकि लोगों को किफायती दरों पर फिजियोथेरेपी और पुनर्वास सेवाएं उपलब्ध हो सकें। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि आर्थिक कठिनाइयों के कारण किसी को जरूरी पुनर्वास उपचार से वंचित न रहना पड़े।

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