मिसाल न्यूज़
रायपुर। छत्तीसगढ़ मंत्री मंडल के विस्तार को लेकर जो उठापटक चल रही है उसमें अचानक रायपुर दक्षिण विधायक सुनील सोनी का भी नाम उभरा है। भाजपा के पुराने लोगों का एक तबका जिसकी दो संभावित नामों पर घोर असहमति है उसने कल अचानक सोनी का नाम दिल्ली की तरफ बढ़ाया है। वैसे तो मंत्री पद के लिए गजेन्द्र यादव, गुरु खुशवंत साहेब एवं राजेश अग्रवाल के नाम प्रमुखता से चल रहे हैं, लेकिन माना यही जा रहा है कि इन 3 में से दो नामों को लेकर पार्टी के पुराने लोगों के एक मजूबत तबके ने प्रदेश भाजपा संगठन के भीतर विभिन्न संभावित खतरों को सामने रखने के बाद दिल्ली तक अपनी असहमति दर्ज करा दी है। दिल्ली वालों व्दारा विकल्प के तौर पर कुछ और नाम पूछे जाने पर बिलासपुर विधायक अमर अग्रवाल तथा सुनील सोनी का नाम सामने रखा गया है। वैसे अमर अग्रवाल की मंत्री पद के लिए प्रबल दावेदारी पहले से ही रही है। वहीं रायपुर पश्चिम विधायक राजेश मूणत के नाम पर प्रदेश के एक कद्दावर नेता व्दारा लगातार दिल्ली बात किए जाने की भी खबर है।
उल्लेखनीय है कि 16 अगस्त को मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने राज भवन पहुंचकर राज्यपाल रमेन डेका से मुलाकात की उसके बाद यह चर्चा जोर पकड़ चुकी थी कि 18 अगस्त यानी सोमवार को 3 विधायक मंत्री पद की शपथ लेने जा रहे हैं। 16 एवं 17 अगस्त, ये दो दिन काफी कश्मकश वाले रहे। मंत्री पद के लिए चल रहे 3 नामों में से दो नाम को लेकर रायपुर एवं बिलासपुर संभाग के कुछ ऐसे पुराने नेता जो अपने समय में जलवा दिखा चुके हैं, धड़ाधड़ दिल्ली फोन खड़खड़ाते रहे। असंतोष जताने वाले इन नेताओं ने न सिर्फ अपने स्तर पर प्रदेश में पार्टी में जो कुछ चल रहा है उसकी समीक्षा की बल्कि मंत्री पद के लिए बड़े नामों की हो रही अनदेखी पर गहरी आपत्ति जताई। असंतोष के स्वर मोबाइल के माध्यम से प्रदेश भाजपा संगठन में बैठे कुछ बड़े लोगों के कानों तक भी लगातार पहुंच रहे हैं। माना जा रहा है कि जिस तरह से अंदर ही अंदर विरोध के स्वर जो उठ खड़े हुए हैं उससे सोमवार को नये मंत्रियों की शपथ होते-होते रह गई। भरोसमंद सूत्रों के मुताबिक असंतुष्ट नेतागण दिल्ली में अपनी बात रखते हुए यह कहने से नहीं चूके कि नई लीडरशीप तैयार करने, नये लोगों को मौका देना ठीक है। वर्तमान में पहली बार मंत्री बने दो से तीन लोगों का परफार्मेंस अच्छा भी है, लेकिन केवल नये समीकरणों का हवाला देते हुए पार्टी के पुराने काबिल लोगों की अनदेखी नहीं की जा सकती। दिल्ली की ओर से मांगे गए सूझाव पर पूर्व में मंत्री रह चुके बिलासपुर विधायक अमर अग्रवाल तथा रायपुर दक्षिण विधायक सुनील सोनी के नाम की पैरवी की गई है। सोनी के नाम का हवाला कुछ यूं देते हुए किया गया कि1980 में भाजपा के अस्तित्व में आने के समय से वे न सिर्फ पार्टी से जुड़े हुए हैं बल्कि रायपुर महापौर एवं रायपुर सांसद की बड़ी भूमिका निभा चुके हैं। ओबीसी वर्ग के नेता सोनी के नाम का यह कहते हुए भी हवाला दिया गया कि विधानसभा उप चुनाव में रायपुर दक्षिण जैसी प्रतिष्ठापूर्ण सीट से उन्होंने रिकॉर्ड मतों से जीत हासिल की। यह भी उल्लेखनीय है कि अगस्त महीने की 15 तारीख़ तक सोनी का नाम मंत्री पद की दौड़ में दूर-दूर तक नहीं था। पार्टी के एक मजूबत तबके ने जोर देते हुए दिल्ली में बैठे कुछ दिग्गजों के समक्ष अपनी बात रखते हुए यह भी कहा कि पूर्व में जब लगातार 3 बार भाजपा की सरकार रही थी, रायपुर शहर से ही लगातार 3 बार बृजमोहन अग्रवाल एवं राजेश मूणत मंत्री रहे थे। अभी की स्थिति में रायपुर शहर की बात तो दूर पूरे रायपुर जिले की बात कर लें, जिसमें सात विधानसभा सीटें आती हैं, एक भी विधायक नहीं है। हालांकि मंत्री पद की दौड़ में शामिल गुरु खुशवंत साहेब का आरंग विधानसभा क्षेत्र रायपुर जिले में ही आता है लेकिन मजबूत तबका जो पिछले दो-तीन दिनों से तेज लॉबिंग कर रहा है वह किसी मोस्ट सीनियर विधायक को मंत्री बनाने की वक़ालत कर रहा है। मोस्ट सीनियर में तो फिर दो ही नाम हैं राजेश मूणत एवं सुनील सोनी।
भाजपा के एक वरिष्ठ नेता ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि एक इस पहलू पर भी विचार हो रहा है कि विस्फोटक स्थिति को टालने के लिए केवल दुर्ग विधायक गजेन्द्र यादव को शपथ दिला दी जाए और दो मंत्री पद फिलहाल होल्ड पर रख दिया जाए। यह केवल विचाराधीन है, जो भी अंतिम निर्णय होना है वह आज या कल में होना है। वरिष्ठ नेता ने यह भी कहा कि दूसरी संभावना यह भी बनी हुई है कि किसी तरह का बड़ा नुकसान न हो, इसे देखते हुए मंत्री मंडल का विस्तार राज्योत्सव तक के लिए टाला जा सकता है।

