मिसाल न्यूज़
रायपुर। अंततः साल भर के लंबे इंतजार के बाद विष्णु देव साय सरकार के मंत्री मंडल विस्तार की तारीख आ ही गई। 20 अगस्त को सुबह 10.30 बजे राज भवन में नये मंत्रियों की शपथ होने की अधिकृत सूचना आज दोपहर जारी हो गई। मंत्री पद की शपथ के लिए अब तक वही संभावित 3 गजेन्द्र यादव, गुरु खुशवंत साहेब एवं राजेश अग्रवाल के नाम सामने हैं।
भारतीय जनता पार्टी छत्तीसगढ़ में इस समय दो स्ट्रेटजी पर काम करती नज़र आ रही है, जातिगत समीकरण व नई लीडरशिप। गजेन्द्र यादव, गुरु खुशवंत साहेब व राजेश अग्रवाल ये तीनों ही नाम दोनों पैमाने पर खरे उतरते नज़र आ रहे हैं। 2003 से लेकर अब तक का इतिहास उठाकर देख लें तो सरकार भाजपा की रही हो या कांग्रेस की, अनुसूचित जाति वर्ग से 2 मंत्री रहते आए हैं। वर्तमान में विष्णु देव साय सरकार में अनुसूचित जाति वर्ग से दयालदास बघेल एक ही मंत्री हैं, इसलिए दूसरे के रूप में युवा नेता गुरु खुशंवत साहेब का रास्ता खुला है। आदिवासी समुदाय से मुख्यमंत्री विष्णु देव साय समेत रामविचार नेताम एवं केदार कश्यप इस तरह 3 नेता मंत्री पद पर हैं। बात ओबीसी यानी पिछड़ा वर्ग की करें तो उप मुख्यमंत्री अरुण साव समेत ओ.पी. चौधरी, लखनलाल देवांगन, टंकराम वर्मा, श्याम बिहारी जायसवाल एवं श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े मंत्री मंडल में हैं और यह आंकड़ा 6 का है। छत्तीसगढ़ में साहू समाज एवं कुर्मी समाज के बाद देखा जाए तो यादव समाज की बहुतायत है। गजेन्द्र यादव का नाम यादव समाज वाले समीकरण की पूर्ति तो करता ही है, बताया जाता है कि संघ परिवार की तरफ से भी इन्हीं का नाम आगे बढ़ा था। पूर्व में 3 बार डॉ. रमन सिंह की सरकार रही थी और तीनों ही बार बृजमोहन अग्रवाल एवं अमर अग्रवाल मंत्री रहे थे। इस तरह पूर्व में वैश्य समाज को जो मंत्री मंडल में प्रतिनिधित्व मिलते रहा था वह अभी तक की स्थिति में नई सरकार में नहीं है। यही कारण है कि अम्बिकापुर विधायक राजेश अग्रवाल का नाम कुछ सोच समझकर ही आगे बढ़ाया गया। फिर अम्बिकापुर क्षेत्र जिसे कांग्रेस का गढ़ माना जाता रहा था वहां से टी.एस. सिंहदेव जैसे स्थापित नेता को हराकर राजेश अग्रवाल की जीत के बाद भाजपा वहां अपनी जमीन और मजबूत करना चाह रही है। भाजपा संगठन राजेश अग्रवाल को मंत्री बनाकर सिंहदेव राज परिवार के सामने एक नई चुनौती खड़ी करने का बड़ा कॉर्ड खेलने जा रहा है।

