■ अनिरुद्ध दुबे
नवम्बर-दिसम्बर 2025 में ‘बॉलीवुड ठिकाना’ यू ट्यूब चैनल पर जाने-माने फ़िल्म प्रोड्यूसर व डायरेक्टर सुनील दर्शन का 5 एपिसोड में इंटरव्यू प्रसारित हुआ। इंटरव्यू लेने वाली खुशबू हजारे ने सुनील दर्शन से कई दिलचस्प सवाल किए। फ़िल्म अभिनेता अक्षय कुमार के फ़िल्मी करियर से जुड़ी कुछ गंभीर बातों पर से सुनील दर्शन ने पर्दा उठाया। उन्होंने बताया कि “90 के दशक में किस तरह एक के बाद एक अक्षय कुमार की 13 फ़िल्में पिटी थीं। लगातार असफ़लता के कारण अक्षय कुमार को लेकर बन रही ‘धड़कन’ एवं ‘हेराफेरी’ जैसी फ़िल्मों का निर्माण बीच में ही रोक दिया गया था। तब मैंने कितने ही लोगों के सूझावों को किनारे लगाते हुए अक्षय को लेकर ‘जानवर’ बनाने के दांव खेला। ‘जानवर’ की मेकिंग पूरी होने के बाद भी अक्षय का आत्मविश्वास भीतर तक हिला हुआ था। वह अपने किसी मित्र के साथ कनाडा में बिजनेस शुरु करने की तैयारी में थे। यहां तक कि ‘जानवर’ के गीतों का ऑडियो लॉच हुआ उस समारोह तक में अक्षय मौजूद नहीं थे। ऑडियो रिलीज़ के समय में मालूम हुआ कि वह कनाडा में हैं। तब आमिर ख़ान से हमने अनुरोध किया कि ‘जानवर’ का ऑडियो आपके हाथों लॉच हो। आमिर से हमारे काफ़ी क़रीबी संबंध रहे हैं और वह इसके लिए तैयार भी हो गए। उस ऑडियो लॉचिंग कार्यक्रम की आमिर और करिश्मा कपूर ने शोभा बढ़ाई थी। अक्षय कुमार, करिश्मा कपूर एवं शिल्पा शेट्टी जैसे कलाकारों से सजी फ़िल्म ‘जानवर’ न सिर्फ़ सुपरहिट रही, अक्षय की रुकी फ़िल्म ‘धड़कन’ व ‘हेराफेरी’ का निर्माण फिर शुरु हो गया।“

‘जानवर’ 24 दिसम्बर को 1999 को रिलीज़ हुई थी। 27 दिसम्बर 1999 को सांध्य दैनिक ‘हाईवे चैनल’ में मेरे व्दारा लिखी ‘जानवर’ की समीक्षा का प्रकाशन हुआ था। बरसों बाद एक बार फिर वह समीक्षा आप सबके सामने प्रस्तुत है-

● ‘जानवर’
अक्षय कुमार ने अपनी फ़िल्मों के लगातार असफल होने के कारण निराशा का लम्बा दौर देखा है। हो सकता है उन्हें ‘जानवर’ से थोड़ी राहत मिल जाए। यूं तो अक्षय की पहचान फाइटर हीरो के रूप में होती रही है, लेकिन ‘जानवर’ में उन्होंने अपनी अभिनय प्रतिभा दिखाने काफ़ी जोर लगाया है। अपना गैटअप भी बदला है। ‘जानवर’ बनाने वाले शख़्स का नाम है सुनील दर्शन। सुनील ने इस फ़िल्म को बनाने में लम्बा समय लिया। अधिकांश फ़िल्में जिनके निर्माण में लम्बा वक़्त लगा उनका बुरा अंजाम सामने आने के कई उदाहरण देखने मिलते रहे हैं, लेकिन यह सुनील दर्शन का कमाल है कि ‘जानवर’ में कहीं बासीपन दिखाई नहीं देता। ‘जानवर’ ऐसी फार्मूला फिल्म है जिसमें जिसको जो चाहिए उसे वह मिल जाएगा (सेक्स को छोड़कर)। क्या करिश्मा की ख़ूबसूरती, क्या शिल्पा शेट्टी का ममतामयी माँ वाला कैरेक्टर, क्या अक्षय की जानवर से इंसान बनने वाली अदा, क्या जॉनी लीवर की कॉमेडी, क्या बच्चे की मासूमियत और क्या आशीष विद्यार्थी का वजनदार अभिनय…! इतना सब होने के बाद भी लगता है कि सुनील दर्शन चाहते तो इस फ़िल्म को और बेहतर रंग दे सकते थे। बस कहीं-कहीं पर गले से नीचे नहीं उतरने वाले जो दृश्य हैं उन्हीं को लेकर दिक्कत होती है। ‘जानवर’ के लिए समीर के लिखे गीतों को संगीत से सजाया है आनंद मिलिंद ने। आनंद मिलिंद का संगीत क्या है? नई बोतल में पुरानी शराब है। लेकिन यह भी सच है कि पुरानी शराब अपना असर दिखाती है। करिश्मा पर – फ़िल्माया गया “अंगूरी-अंगूरी…” गाना तो धूम मचा देगा।
एक बच्चा जिसकी माँ गरीबी के कारण मर गई। उस अनाथ बच्चे को आश्रय मिला भी तो सुल्तान (शक्ति कपूर) नाम के ऐसे आदमी का जो कि सारे गैर कानूनी काम करता है। सुल्तान की संगत में रहकर वह बच्चा अपराध की राह पर चल पड़ता है और बड़ा होकर बादशाह (अक्षय कुमार) के नाम से जाना जाने लगा है। बादशाह की पहचान सपना (करिश्मा कपूर) से होती है। सड़कों पर नाच गाकर पैसे कमाना सपना का काम है। इधर, इंस्पेक्टर अर्जुन प्रधान (आशीष विद्यार्थी) का एक ही प्रमुख लक्ष्य है बादशाह को गिरफ़्तार करना। एक दिन उत्तेजना में बादशाह धोखा देने वाले शेट्टी (रामी रेड्डी) की हत्या कर देता है। ख़ून से रंगे हाथों को लेकर भाग रहे ‘बादशाह’ को रास्ते में भटकता हुआ एक बच्चा मिलता है। इस बच्चे के मिलने के साथ ही बादशाह के जीवन की दिशा बदल जाती है। वह बादशाह से बाबू लोहार बन जाता है। वह खोया हुआ बच्चा कोई और नहीं आदित्य (मोहनीश बहल) एवं ममता (शिल्पा शेट्टी) का है। इधर, बादशाह का ख़ास दोस्त अब्दुल (आशुतोष राणा) अब उसका दुश्मन बन चुका है। सपना भी बादशाह यानी बाबू लोहार की जान लेना चाहती है, क्योंकि वह यह मानकर चल रही होती है कि बादशाह ने उसे धोखा दिया। एक दिन आदित्य व ममता जान जाते हैं कि बाबू लोहार के पास जो बच्चा है वह उनका है। अब फ़िल्म में आते हैं एक के बाद एक नाटकीय मोड़।
फ़िल्म का सबसे सशक्त दृश्य वह है जब आशीष विद्यार्थी, अक्षय कुमार के सामने भगवान बुद्ध का उदाहरण रखते हैं। कहीं-कहीं पर लगता है कि सुनील दर्शन की निर्देशन पर पकड़ ढीली हो गई। यह समीक्षक निर्देशक से 3 सवाल करना ज़रूर करना चाहेगा- 1. जब करिश्मा का मामा उसे एक गुंडे के हाथों बेच देता है और गुंडा उसकी इज्जत लूट रहा होता है तो अक्षय कुमार कैसे वहाँ अचानक प्रगट हो जाता है? जबकि अक्षय को यह मालूम भी नहीं होता कि मामा करिश्मा को लेकर कहां गया है। 2. बच्चे की ज़रूरत पूरी करने के लिए अक्षय कुमार एक फ़िल्म का खतरनाक दृश्य करना स्वीकार कर लेता है। इसी दौरान वह बच्चा उस स्थान पर पहुँच जाता है जहाँ शूटिंग चल रही होती है। बच्चे को कैसे मालूम पड़ा कि उसका बाबा खतरनाक सीन करने गया है? 3. इसी तरह फ़िल्म के क्लाइमेक्स में जब अक्षय कुमार और आशुतोष राणा के बीच लड़ाई चल रही होती है तो अक्षय कुमार का पालतु कुत्ता वहाँ आ टपकता है। कुत्ते को कैसे मालूम होता है कि उसका मालिक ख़तरनाक अड्डे में गया हुआ है?
कलाकार – अक्षय कुमार करिश्मा कपूर शिल्पा शेट्टी मोहनीश बहल आशुतोष राणा शक्ति कपूर आशीष विद्यार्थी जॉनी लीवर एवं कादर खान, गीत- समीर, संगीत- आनंद मिलिन्द, निर्माता एवं निर्देशक सुनील दर्शन।

