मिसाल न्यूज़
रायपुर। कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि भारत स्काउट गाईड की बालोद में होने वाली जंबूरी भाजपा की गुटबाजी का अखाड़ा बन चुकी है। जंबूरी को लेकर शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव एवं सांसद बृजमोहन अग्रवाल का मतभेद खुलकर सामने आ चुका है। दोनों ही स्काउट गाइड अध्यक्ष होने का दावा कर रहे हैं। कांग्रेस ने जंबूरी नवा रायपुर से बदलकर बालोद में करने के पीछे वजह भारी भ्रष्टाचार बताते हुए इस आयोजन को रद्द करने की मांग की है। साथ ही शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव को भ्रष्टाचार के लिए जिम्मेदार ठहराते हुए उनसे इस्तीफे की मांग की है।
राजीव भवन में आज पत्रकार वार्ता में प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि जंबूरी के आयोजन का श्रेय लेने भाजपाई आपस में लड़ रहे है। जंबूरी पहले नवा रायपुर में होने वाली थी, लेकिन शिक्षा मंत्री इसे बालोद में रखवा लिया। बृजमोहन अग्रवाल स्वयं स्काउट गाइड अध्यक्ष होने का दावा कर रहे हैं। शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव खुद को अध्यक्ष बता रहे हैं। सरकार स्पष्ट करे कि स्काउट गाइड अध्यक्ष कौन है, बृजमोहन अग्रवाल या गजेन्द्र यादव। कल ही भारत स्काउट गाइड के प्रदेश अध्यक्ष बृजमोहन अग्रवाल ने जंबूरी को रद्द कर दिया। स्काउट गाइड के आयुक्त ने इस बात का खंडन किया की जंबूरी रद्द नहीं हुई है। रात में मुख्यमंत्री के एक्स पर पोस्ट हुआ कि 9 से 14 जनवरी तक होने वाली जंबूरी हमारे लिए गर्व का विषय है। देर रात मुख्यमंत्री का यह पोस्ट भी हटा लिया गया। यह घटनाक्रम बताता है कि भाजपा में कितनी गुटबाजी है। जंबूरी में पहले दिन में भ्रष्टाचार हो रहा है। बिना टेंडर के टेंट लगवाना और बिना पात्रता के शिक्षा मंत्री के द्वारा अध्यक्ष का पद हथियाना यह बताता है कि भाजपा की सरकार में कितना विरोधाभास है। कांग्रेस मांग करती है कि जंबूरी को रद्द किया जाए या फिर राज्यपाल स्वयं इसे अधिग्रहित करें और राज भवनकी देखरेख में यह आयोजन हो।
प्रदेश कांग्रेस महामंत्री सुबोध हरितवाल ने कहा कि जंबूरी 2026 में दो टेंडर हुए। 20 दिसंबर को रद्द हुए टेंडर और 03 जनवरी को खुलने वाले टेंडर में भारी असमानता है। नियमों में बदलाव किए गए ताकि अपनी चहेती फर्म को काम दिलाया जा सके और भ्रष्टाचार की अंजाम दिया जा सके। भाजपा सांसद और स्काउट एंड गाइड के अध्यक्ष बृजमोहन अग्रवाल का बयान ये साबित करता है कि मंत्री और उनके अधिकारी आर्थिक अनियमितता में शामिल हैं और भ्रष्टाचार को अंजाम दिया गया है। पुराने टेंडर के अनुसार 3 साल का एक्सपीरियंस की आवश्यकता थी परंतु नए टेंडर में सिर्फ 1 साल का अनुभव मांगा गया।
पुराने टेंडर में 3 माह की बैंक गारंटी थी जिसे 1 माह कर दिया गया। पुराने टेंडर में टेक्नीकल बीड का क्वालिफिकेशन 90 अंक मांगा गया जिसे घटाकर नए टेंडर में सिर्फ 52 अंक कर दिया गया। पुराने टेंडर में 5 करोड़ का टर्न ओवर मांगा गया जिसे घटाकर 3 करोड़ कर दिया गया। हरितवाल ने कहा कि ये सारे मामले भ्रष्टाचार की ओर इशारा कर रहे हैं। नियम को शिथिल करते हुए नया टेंडर जारी किया गया ताकि किसी व्यक्ति विशेष को लाभ पहुंचाया जा सके।
प्रदेश कांग्रेस चिकित्सा प्रकोष्ठ के अध्यक्ष डॉ. राकेश गुप्ता ने कहा कि शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव स्वयंभू अध्यक्ष हैं। प्रदेश के शिक्षा मंत्री नियमतः प्रदेश स्काउट एंड गाइड के पदेन अध्यक्ष होते थे। 13 दिसंबर 2025 को राज भवन ने स्कूली शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव को भारत स्काउट एंड गाइड का पदेन अध्यक्ष मनोनीत किया। आरएसएस नेता बिसराराम यादव के पुत्र गजेंद्र यादव का अति आत्मविश्वास देखिए कि वे 9 दिसंबर 2025 को ही भारत स्काउट एंड गाइड के लेटर हेड पर अपने आपको अध्यक्ष घोषित करते हुए राज्य परिषद की बैठक आहूत करते हैं। माना कि राज्य के मुख्यमंत्री का अनुमोदन उनकी नियुक्ति के लिए था लेकिन यह तो नियमों का खुला उल्लंघन है कि राज्यपाल की ओर से नियुक्ति से पहले ही कोई स्वयं को अध्यक्ष घोषित कर दे। यह तो खुली अवमानना का मामला है।
डॉ. गुप्ता ने कहा कि भारत स्काउट एंड गाइड ने राज्य कार्यालय के लिए 22 एवं 24 जनवरी 2019 को जमीन खरीदने के लिए दो रजिस्ट्री करवाई थी। ये दोनों रजिस्ट्री भारत स्काउट एंड गाइड के नाम पर है। दस्तावेजों से स्पष्ट है कि यह सौदा रमन सिंह सरकार के दौरान वर्ष 2018 में तय हुआ था। ये दोनों ज़मीनें राजेश अग्रवाल पिता ओमप्रकाश अग्रवाल से खरीदी गई। घपला ये है कि राजेश अग्रवाल भारत स्काउट एंड गाइड के छत्तीसगढ़ के तत्कालीन कोषाध्यक्ष थे। ये ज़मीनें कुल 56 लाख 93 हजार एवं 13 लाख 7 हजार रुपयों में खरीदी गई, यानी कुल 70 लाख रुपयों में खरीदी गई। कोषाध्यक्ष भारत स्काउट एंड गाइड राजेश अग्रवाल ने अभनपुर स्थित ज़मीन के मालिक राजेश अग्रवाल को 70 लाख रुपयों का भुगतान किया। इस भुगतान के चेक पर राज्य के तत्कालीन अध्यक्ष गजेंद्र यादव ने भी दस्तखत किए। इस जमीन की वास्तविक कीमत क्या थी? हमारी जानकारी के अनुसार वास्तविक क़ीमत से बहुत अधिक कीमत पर जमीन ख़रीदी गई। इसी जमीन को खरीदने का फैसला क्यों किया गया? क्योंकि इससे भारत स्काउट एंड गाइड के कोषाध्यक्ष और अध्यक्ष (राज्य मुख्य आयुक्त) को फ़ायदा मिल रहा था। राज्य सरकार से इसके लिए नया रायपुर में ज़मीन क्यों नहीं मांगी गई जबकि शासकीय संस्थाओं को नया रायपुर में ज़मीन देने का प्रावधान है?
पत्रकार वार्ता में वरिष्ठ प्रवक्ता धनंजय सिंह ठाकुर, नितिन भंसाली एवंं सत्यप्रकाश सिंह उपस्थित थे।

