कारवां (1 मार्च 2026) ● देवजी का समर्पण, सशस्त्र नक्सली आंदोलन ढलान पर… ● होलाष्टक में बजट… ● राज्यसभा- कांग्रेस से किसकी खुलेगी लॉटरी… ● नशे के क़ारोबार में युवतियों का इस्तेमाल… ● ‘मुर्दा शहर’ में विदेशी छात्र-छात्राओं का हंगामा…

■ अनिरुद्ध दुबे

केंद्र सरकार की ताजा समीक्षा के बाद यह निष्कर्ष निकलकर सामने आया है कि देश में नक्सलवाद से प्रभावित जिलों की संख्या आठ से घटकर सात रह गई है। यह समीक्षा वामपंथी उग्रवाद से निपटने के लिए राष्ट्रीय नीति और कार्य योजना के तहत की गई, जिसमें छत्तीसगढ़ समेत झारखंड, बिहार, आंध्रप्रदेश, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, ओडिशा, तेलंगाना और पश्चिम बंगाल के 38 जिलों का विश्लेषण किया गया। नक्सल प्रभावित में अब छत्तीसगढ़ के पांच जिले बीजापुर, नारायणपुर, सुकमा, कांकेर और दंतेवाड़ा, झारखंड का पश्चिम सिंहभूम और ओडिशा का कंधमाल शामिल हैं। इनमें भी तीन उप-श्रेणियां बनाई गई हैं। सबसे अधिक प्रभावित जिलों में बीजापुर, नारायणपुर और सुकमा शामिल हैं। जबकि चिंता वाले जिलों में कांकेर और पश्चिम सिंहभूम हैं। इस समीक्षा के सामने आने के बाद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने गुवाहाटी में 87 वें सीआरपीएफ दिवस पर परेड को संबोधित करते हुए दोहराया कि “31 मार्च 2026 की तय समय सीमा तक देश से नक्सलवाद पूरी तरह समाप्त जाएगा।“ शाह ने कहा कि “पिछले तीन वर्षों में माओवादियों की कमर टूट चुकी है और छत्तीसगढ़-तेलंगाना सीमा पर चलाए गए ‘ऑपरेशन ब्लैक फॉरेस्ट’ जैसे अभियानों ने नक्सलियों के गढ़ों को ध्वस्त कर दिया है।“ यह बड़ा संयोग रहा कि उधर गुवाहाटी में अमित शाह का अपने संकल्प को दोहराना और इधर कुख्यात नक्सली लीडर के रुप में पहचान रखने वाले देवजी का तेलंगाना में समर्पण।  पिछले साल मई में बसवाराजू के एनकाउंटर के बाद तिप्परी तिरुपति उर्फ देवजी को नक्सल संगठन का अगला महासचिव माना जा रहा था। नक्सलवाद पर पढ़ते-लिखते रहे कुछ लोगों का मानना है कि 60 वर्षीय देवजी के समर्पण के साथ ही सशस्त्र नक्सली आंदोलन ढलान पर आ चुका है। सुनने में यही आता रहा है कि 2025 के आख़री महीनों में देवजी व दूसरा कुख्य़ात नक्सली लीडर माड़वी हिड़मा कुछ समय के लिए साथ थे। उस समय तक की स्थिति में देवजी समर्पण के पक्ष में नहीं था। फिर आंध्रप्रदेश में सूरक्षा बलों के हाथों हिड़मा की चौंका देने वाली मौत हुई। बताते हैं देवजी की पोती इतलू सुमा टिपिरी ने एक वीडियो जारी कर अपने दादा से घर लौट आने की गुहार लगाई थी। पोती ने अपील करते हुए कहा था कि “ऑपरेशन कगार जारी है और कई जिंदगियां ले रहा है। वर्तमान परिस्थितियों में हम आपकी वापसी के लिए आंखों में आंसू लिए ईश्वर से प्रार्थना करते हैं। आपकी घर वापसी हमें बहुत खुशी देगी।“ माना जा रहा है कि पोती की इस मार्मिक अपील ने देवजी के मन पर गहरा असर छोड़ा। अब बस्तर के पूवर्ती गांव की तरफ चलें, वहां भी तो माड़वी हिड़मा की मां माड़वी पुंजी तथा बारसे देवा की मां बारसे सिंगे ने अपने-अपने बेटों से घर लौट आने की अपील की थी। हिड़मा आंध्रा में मारा गया। इसके कुछ दिनों बाद बारसे देवा ने तेलंगाना में समर्पण कर दिया। हिड़मा से जुड़ी तरह-तरह की कथा कहानियां बस्तर में सुनी सुनाई जा रही हैं। सवाल यह कि हिड़मा आख़िर कहां पर चूक गया…

होलाष्टक में बजट

होलाष्टक 24 फरवरी को लगा जो 3 मार्च को होलिका दहन के साथ समाप्त होगा। कितने ही लोग होलाष्टक वाले समय में शुभ कार्य नहीं करते। कर्म योगियों का क्या, उनके लिए हर समय शुभ होता है। तभी तो छत्तीसगढ़ सरकार के वित्त मंत्री ने शुभ-अशुभ की परवाह नहीं करते हुए होलाष्टक लगने वाले दिन नया रायपुर की नई विधानसभा में पहला बजट पेश किया। इस बार के बजट की थीम ‘संकल्प’ रही। इससे पहले बजट की थीम ‘गति’, उससे और पहले ‘ज्ञान’ रही थी। ‘संकल्प’ के बजट में ‘मिशन 2047’ है। इससे पता चलता है चौधरी बहुत दूर की सोच रखते हैं। विधानसभा में बजट पर सामान्य चर्चा के दौरान वरिष्ठ विधायक अमर अग्रवाल ने इस संकल्प बजट की भूरि-भूरि प्रशंसा की। कभी वह भी दौर था जब खुद अमर अग्रवाल वित्त मंत्री के रूप में विधानसभा में बजट पेश किए थे। वित्त विभाग ऐसा है जो आसानी से हर किसी के हिस्से में नहीं आता। 2018 में जब कांग्रेस की सरकार बनी बतौर मंत्री टी.एस. सिंहदेव वित्त ही चाह रहे थे, लेकिन यह विभाग तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेश बघेल अपने पास रखे रहे थे।

राज्यसभा- कांग्रेस से

किसकी खुलेगी लॉटरी

बालोद में एक कार्यक्रम में शिरकत करने पहुंचे पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने साफ शब्दों में कहा कि “राज्यसभा की दौड़ में मैं दूर-दूर तक नहीं हूं।“ उन्होंने कहा कि “मैं ऑलरेडी विधायक हूं। महामंत्री भी हूं। फिर भला राज्यसभा जाने की बात कहां से आ गई।“

हुआ यूं कि पिछले दिनों भूपेश बघेल एवं उनके पुत्र चैतन्य बघेल की दिल्ली में कांग्रेस राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे व सांसद प्रियंका गांधी से मुलाक़ात हुई। उसके बाद से अटकलें लगनी शुरु हो गईं कि चैतन्य सक्रिय राजनीति का हिस्सा बनने जा रहे हैं और भूपेश को राज्यसभा भेजा जा सकता है। बालोद में जिस ओज वाणी के साथ भूपेश बघेल ने कहा कि राज्यसभा नहीं जा रहा, उससे यह साफ हो गया कि वह राज्यसभा की दौड़ में नहीं हैं। अब जिन नामों की अटकलें लगाई जा रहीं उनमें बचते हैं टी.एस. सिंहदेव व दीपक बैज। सिंहदेव व बैज को क़रीब से देखने समझने वालों का तो यही कहना है कि दोनों नेताओं का अब तक तो राज्यसभा को लेकर कोई विशेष उत्साह झलकते नज़र नहीं आया है। जब भूपेश, बाबा व बैज तीनों नहीं तो फिर छत्तीसगढ़ से कांग्रेस की तरफ से राज्यसभा जाएगा कौन… कांग्रेस में बरसों समय गुजार चुके एक नेता का कहना है राजीव शुक्ला, के.टी.एस. तुलसी तथा रंजीत रंजन जैसे दूसरे राज्यों के नेताओं को छत्तीसगढ़ के कोटे से राज्यसभा भेजा गया था। यह बिलकुल नहीं मान लेना चाहिए कि वह परंपरा ख़त्म हो गई। दिल्ली में बैठे दिग्गजों को भूले भटके छत्तीसगढ़ पर रहम आ भी गया तो यहां से राज्यसभा पहुंचाने में पहले किसी आदिवासी नेता के नाम पर विचार होगा। वैसे आदिवासी नेता में मोहन मरकाम के नाम की चर्चा है। दूसरे विकल्प पर विचार करने की नौबत आई तो वह ओबीसी वर्ग से होगा।

नशे के क़ारोबार में

युवतियों का इस्तेमाल

विधानसभा में बजट सत्र के चौथे दिन प्रश्नकाल के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने पूछा कि “मेरे व्दारा राज्य में पिछले 12 महीनों में पुलिस व्दारा पकड़े गए अंतर्राज्यीय ड्रग तस्करों की सूची मांगी गई थी। जो सूची उपलब्ध कराई गई है उसमें रायपुर का बहुचर्चित नव्या मलिक प्रकरण शामिल है या नहीं? नव्या मलिक रायपुर में रेव पार्टी चलाती थी। आखिर ये नव्या मलिक कौन है? वह विदेश क्या करने गई और कितनी बार गई और विदेश किस-किस के साथ गई?” उप मुख्यमंत्री (गृह) विजय शर्मा ने कहा कि “आपने विशेष नाम लिया। जानकारी उपलब्ध करा दूंगा।“ भूपेश बघेल ने कहा “मैंने यूं ही नव्या मालिक का नाम नहीं लिया, बल्कि इलेक्ट्रानिक व प्रिंट मीडिया में उसका नाम उछला था। चूक कहां पर हुई, इस सब के लिए कौन जिम्मेदार है?”

ड्रग्स रैकेट में संलग्नता का आरोप सुनिश्चित करते हुए पुलिस ने नव्या मलिक एवं विधि अग्रवाल को राजधानी रायपुर में गिरफ़्तार किया था। बताया तो यही जाता है कि इस मामले में कुछ बड़े व्यापारियों व नेताओं के नाम सामने आते-आते रह गए। सदन में भूपेश बघेल ने कुछ सोचकर ही जोर देते हुए नव्या मलिक प्रकरण का ज़िक्र किया। राजधानी रायपुर में नशीले पदार्थों की तस्करी में अब युवतियों का इस्तेमाल ज़्यादा होने लगा है। इसलिए कि युवतियां एक ठिकाने से माल लेकर दूसरे ठिकाने तक पहुंचाएं तो निगाहों से बच निकलना थोड़ा आसान रहता है।

कुछ ही दिनों पहले की तो बात है, रायपुर में एसीसीयू क्राइम ब्रांच एवं पश्चिम जोन पुलिस ने ओडिशा से बस के जरिये 10 किलो गांजा लेकर पहुंची दो युवतियों को गिरफ़्तार किया। दोनों भाठागांव बस स्टैंड में पकड़ी गईं। युवतियों से पूछताछ हुई तो पता चला कि किसी व्यक्ति ने उन्हें ओडिशा से गांजा  रायपुर लाकर डिलीवरी देने पर 5-5 हजार देने की बात कही थी। हालांकि दोनों उस व्यक्ति का नाम और मोबाइल नंबर तक नहीं बता पाईं, क्योंकि वाट्सएप और इंस्टाग्राम के जरिये उनसे संपर्क किया गया था। बाद में ऑन लाइन निर्देश मिलते रहे। पकड़ी गई युवतियों में एक शहडोल मध्यप्रदेश (21 वर्ष) और दूसरी भनपुरी (18 वर्ष) रायपुर की है।

राजधानी रायपुर के एक्सप्रेस वे का तेलीबांधा से लेकर केन्द्री तक का जो हिस्सा है, वहां बीच में गाड़ी रोककर सामान लेने व देने वाले नज़ारे आम हैं। सामान लेने व देने वालों में युवतियां भी देखी जा सकती हैं।

‘मुर्दा शहर’ में विदेशी

छात्र-छात्राओं का हंगामा

मुर्दा शहर नया रायपुर में पिछले दिनों विदेशी मूल के कुछ छात्र-छात्राओं ने जो कथित आपत्तिजनक हरकतें की उससे वहां आसपास रहने वालों के मन में भारी गुस्सा है। मुर्दा शहर के सेक्टर 30 स्थित एक रिहायशी परिसर की पार्किंग में कुछ युवक-युवतियों व्दारा अश्लील गतिविधियां करने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। वीडियो में नज़र आने वाले छात्र-छात्राएं नाइजीरिया के बताए जा रहे हैं। ये नया रायपुर के शिक्षण संस्थाओं में पढ़ने आए हुए हैं। सुनने में तो यहां तक आया कि विदेशी छात्र-छात्राओं को ऐसी-वैसी हरकतों के लिए जब कुछ लोगों ने मना किया तो वे मारपीट करने पर उतारू हो गए। राखी थाने में इन विदेशी छात्र-छात्राओं की शिकायतें पहुंची हैं।

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