गोठानों की व्यवस्था केवल कागजों में नहीं, जमीन पर दिखे… नगर निगम का काम शासन से राशि भर ले लेना नहीं- महापौर

मिसाल न्यूज़

रायपुर। गौवंश एवं गोठानों की व्यवस्थाओं को लेकर नगर निगम मुख्यालय में आयोजित समीक्षा बैठक में महापौर श्रीमती मीनल चौबे ने अफसरों की सुस्त कार्यप्रणाली पर गहन नाराजगी जताते हुए दो टूक शब्दों में कहा कि गोठानों की व्यवस्था केवल कागजों में नहीं, जमीन पर दिखाई देनी चाहिए। उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट चेतावनी दी कि गौवंश की सुरक्षा और देखभाल में किसी भी प्रकार की लापरवाही या अनियमितता सामने आने पर जिम्मेदारी तय कर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। महापौर ने अधिकारियों को स्पष्ट शब्दों में कहा कि नगर निगम का काम केवल शासन से प्राप्त राशि को खर्च करना नहीं है। शहर की वास्तविक जरूरतों को समझकर स्थायी और उपयोगी योजनाएं तैयार करना भी योजना विभाग के अधिकारियों की जिम्मेदारी है।

महापौर ने अधिकारियों से कहा कि बारिश के मौसम में हर 15 दिन में सभी गोठानों का अनिवार्य भौतिक निरीक्षण किया जाए। अधिकारी स्वयं मौके पर जाएं, गोठानों की वास्तविक स्थिति देखें और वहां मौजूद गौवंश की संख्या, क्षमता, पानी, चारा, शेड, स्वास्थ्य एवं अन्य व्यवस्थाओं की जांच कर फोटो एवं विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करें। उन्होंने स्पष्ट कहा कि केवल कागजों पर रिपोर्ट बनाकर जिम्मेदारी पूरी करने की प्रवृत्ति अब स्वीकार नहीं की जाएगी।

महापौर ने अधिकारियों से कहा कि गोठानों में निर्धारित क्षमता से अधिक गौवंश रखने की स्थिति नहीं बननी चाहिए। प्रत्येक गोठान की स्वीकृत क्षमता और मौके पर मौजूद गौवंश की वास्तविक संख्या का मिलान किया जाए। गौवंश को गोठान में लाने अथवा रखने से संबंधित रजिस्टर, प्राप्ति रसीद, बिल एवं अन्य दस्तावेजों का सत्यापन अनिवार्य रूप से किया जाए। उन्होंने कहा कि यदि अनुबंध की शर्तों का उल्लंघन हुआ है अथवा क्षमता से अधिक गौवंश रखकर भुगतान लेने जैसी स्थिति सामने आती है तो संबंधित की जवाबदेही तय कर कड़ी कार्रवाई की जाए। उन्होंने कहा कि किसी भी संस्था द्वारा दिए गए पत्र को केवल फाइल में रखकर मामला समाप्त नहीं किया जाएगा। पत्र में बताई गई स्थिति सही है या नहीं, इसकी जिम्मेदारी अधिकारियों की है और अधिकारी मौके पर जाकर इसकी पुष्टि करें।

महापौर ने शहर में खुले में घूमने वाले गौवंश को लेकर भी अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि खुले में पाए जाने वाले गौवंश के मालिकों की पहचान के लिए प्रभावी व्यवस्था बनाई जाए। जिस पशु के मालिक की पहचान हो जाए, उसके विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाए, ताकि सड़क पर घूमते पशुओं के कारण दुर्घटनाएं न हों और नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।महापौर ने कहा कि यदि पशु किसी पशुपालक का है तो उसकी पहचान और रिकॉर्ड की व्यवस्था होनी चाहिए। पशु को सड़क पर छोड़ देना किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने गोठानों में शेड, पानी, चारा और पशु उपचार जैसी मूलभूत सुविधाओं को मजबूत करने के लिए पशु विभाग से समन्वय कर ठोस प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि बार-बार अस्थायी समाधान और भुगतान की व्यवस्था करने के बजाय स्थायी अधोसंरचना विकसित करने की दिशा में काम किया जाए।

महापौर ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि वे अपने-अपने क्षेत्र में नियमित रूप से भ्रमण करें और केवल कार्यालय में बैठकर रिपोर्टों के आधार पर निर्णय न लें। उन्होंने कहा कि “मैदानी निरीक्षण के बिना कोई भी व्यवस्था पूरी नहीं मानी जाएगी। महापौर ने अधिकारियों को सख्त चेतावनी देते हुए कहा कि गौवंश की सुरक्षा, गोठानों की व्यवस्था और जनता के धन के उपयोग में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। अधिकारी अपनी जिम्मेदारी समझें, मौके पर जाएं और परिणाम दिखाई दें—अब केवल कागजी कार्रवाई से काम नहीं चलेगा। उन्होंने कहा कि बारिश के मौसम में गोठानों की स्थिति की विशेष निगरानी की जाए और हर 15 दिन में निरीक्षण कर फोटो एवं रिपोर्ट के साथ वास्तविक स्थिति सामने लाई जाए। यदि निरीक्षण में क्षमता से अधिक गौवंश, खुले में पशु, पानी-चारे की कमी, शेड की समस्या या अन्य अव्यवस्था सामने आती है तो उसका तत्काल निराकरण सुनिश्चित किया जाए।

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