मिसाल न्यूज़
200 से अधिक छत्तीसगढ़ी फ़िल्मों में काम कर चुके अभिनेता प्रदीप शर्मा ‘तोर मयारू मोर मयारू’ में एकदम डिफ्रेंट किरदार में नज़र आएंगे। ‘तोर मयारू मोर मयारू’ 4 सितम्बर को सिंगल स्क्रीन व मल्टीप्लेक्स में रिलीज़ होने जा रही है। प्रदीप शर्मा बताते हैं- ‘तोर मयारू मोर मयारू’ में मेरा किरदार ब्रह्मानंद (सतीश जैन) के दोस्त विजय का है। ब्रह्मानंद अपने आश्रम और बेटी के देखभाल की जिम्मेदारी विजय को सौंप जाते हैं। कुछ लोग आश्रम को हथियाने के फेर में रहते हैं।

‘मिसाल न्यूज़’ से बातचीत करते हुए प्रदीप शर्मा कहते हैं- “जैसा कि दर्शक मुझे हास्य अभिनेता के किरदार में पसंद करते रहे हैं तो एक हास्य कलाकार होने के नाते गारंटी के साथ कह सकता हूं कि ‘तोर मयारू मोर मयारू’ में शुरुआत से अंत तक भरपूर कॉमेडी है। हास्य की चाशनी होने के बाद भी ‘तोर मयारू मोर मयारू’ का सब्जेक्ट गंभीरता खोते नहीं दिखेगा। किसी कॉमेडी सब्जेक्ट में कोई राइटर और डायरेक्टर गहरी बात कह जाए वह उसकी ख़ूबी होती है। राइटर व डायरेक्टर राहुल प्रताप सिंह ने यह काम बख़ूबी किया है। फिर इस फ़िल्म से मनीष मानिकपुरी प्रस्तुतकर्ता के रुप में जुड़े हुए हैं। जिस प्रोजेक्ट से मनीष जुड़ जाएं वह अपने आप बड़ा हो जाता है। किसी एक दो का नाम लूं तो नाइंसाफ़ी होगी, इस फ़िल्म में सभी कलाकारों ने बेहतरीन परफार्मेंस दिया है। दर्शक ख़ुद मुझे एक नये किरदार में देखेंगे।“
आपकी अभिनय यात्रा कहां से शुरु हुई, पूछने पर प्रदीप शर्मा बताते हैं- “1978 में नाटकों से। बॉलीवुड के जाने-माने डायरेक्टर अनुराग बसु के पिता सुब्रत बोस जी मुझे नाटकों की दुनिया में लेकर आए थे। बोस दादा के निर्देशन में मैंने ‘शताब्दी बिम्ब’, ‘पोस्टर’, ‘अग्नि बरखा’, ‘ठाकुर का कुंआ’ जैसे नाटक किए। 150 से अधिक नाटकों में मुख्य भूमिकाएं निभा चुका हूं। 2002 में सतीश जैन जी की फ़िल्म ‘झन भूलव मां बाप ला’ से मेरा फ़िल्मी करियर शुरु हुआ। सतीश जी के निर्देशन में लगातार छत्तीसगढ़ी व भोजपुरी फ़िल्में करता रहा हूं। मनोज वर्मा जी जैसे फ़ेमस डायरेक्टर के निर्देशन में ‘दू लफाड़ू’ व ‘महूं कुंवारा तहूं कुंवारी’ फ़िल्में की। पिछले 39 वर्ष से दशहरा पर्व पर होते आ रही ‘राम लीला’ में मैं रावण का पात्र निभाते आ रहा हूं।

