मिसाल न्यूज़
पिछले ढाई दशक से छत्तीसगढ़ी सिनेमा में अपने अभिनय की छाप छोड़ते आ रहे रजनीश झांझी की एक और बड़े कैनवाश वाली फ़िल्म ‘तोर मयारू मोर मयारू’ 4 सितम्बर को जन्माष्टमी के शुभ दिन पूरे छत्तीसगढ़ में रुपहले पर्दे पर पहुंच रही है। छॉलीवुड में रजनीश को सदाबहार अभिनेता माना जाता रहा है। आत्मविश्वास से भरे रजनीश कहते हैं- “तोर मयारू मोर मयारू की स्टार कास्ट धमाकेदार है। उम्मीद है फेस्टिवल का महीना कहलाने वाले सितंबर में यह फ़िल्म धूम मचाएगी।“
हाल ही में ‘मिसाल न्यूज़’ से बातचीत करते हुए रजनीश ने कहा- “तोर मयारू मोर मयारू मनीष मानिकपुरी जैसे फ़िल्मकार की प्रस्तुति है जो नीलजई फ़िल्म्स के बैनर तले बनी है। इसके निर्माता प्रणय गर्ग हैं और निर्देशक राहुल प्रताप सिंह। फ़िल्म की सबसे ख़ास बात यह है कि पूरी डायरेक्शन टीम एफ.टी.आई. पास आउट है और सिनेमा के जानकार लोगों व्दारा बनाई गई है। इसलिए फ़िल्म का निर्माण नेक्स्ट लेवल का है। दमदार स्क्रीन प्ले और कसे हुए निर्देशन ने जहां फ़िल्म को उच्च स्तर का बना दिया है, वहीं स्टार कास्ट भी धमाकेदार है। लंबे समय बाद इस फ़िल्म से अमलेश नागेश जैसे क्रेज़ी अभिनेता की वापसी हो रही है। वहीं मन कुरैशी , काजल सोनबेर , इशिका यादव, संजय महानंद, उपासना वैष्णव व उर्वशी साहू जैसे कलाकारों ने फ़िल्म में अपना जलवा बिखेरा है।

रजनीश बताते हैं- “इस फ़िल्म में मेरे काम को देखकर दर्शक सरप्राइज़ होंगे। मैंने जो रोल किया, वह किसी हीरो के लेवल से कम नहीं। मेरे करैक्टर में लुक ट्रांसफार्मेशन व विभिन्नता देखने को मिलेगी।“
रजनीश से उनकी फ़िल्म यात्रा के बारे में सवाल करने पर वह बताते हैं- “अभिनय मुझे विरासत में मिला। माँ श्रीमती संतोष झांझी वरिष्ठ साहित्यकार, ड्रामा आर्टिस्ट व लोक कला संस्था ‘चंदैनी गोंदा’ की प्रथम लोक गायिका रही हैं। बचपन से ही नाट्य विधा व साहित्य वाले माहौल में मेरी परवरिश हुई। काफ़ी कम उम्र में नाटकों में मेरा काम करना शुरू हो चुका था, जो स्कूल-कॉलेज़ से होकर और आगे बढ़ते चले गया। आकाशवाणी से भी जुड़ा रहा। 90 के दशक में जाने-माने फ़िल्म निर्देशक प्रेम चंद्राकर जी के निर्देशन में लोक कथा पर आधारित धारावाहिक ‘मयारुक चन्दा’ में लोरिक का पात्र अभिनीत किया। सात एपिसोड वाला यह धारावाहिक रायपुर दूरदर्शन से प्रसारित हुआ। यही वह धारावाहिक था जिससे पहली बार मेरा कैमरे का सामना हुआ। 2001 में रंगमंच व दूरदर्शन की दुनिया की बड़ी हस्ती संतोष जैन जी के निर्देशन में बनी फ़ीचर फ़िल्म ‘जय बमलेश्वरी मैया’ से बतौर हीरो सिनेमा में लॉच हुआ। ‘जय बमलेश्वरी मैया’ के बाद सतीश जैन जी जैसे मोस्ट सीनियर डायरेक्टर की फ़िल्म ‘झन भूलव मां बाप ला’ की। उसी दौर में रंग मंडल भारत भवन भोपाल में बतौर अभिनेता मेरा चयन हो गया। रंग मंडल से और प्रशिक्षित होकर लौटने के बाद यहां आकर अपनी संस्था ‘रंग दर्शनी’ की बुनियाद रखी। 45 से ज़्यादा नाटकों का निर्देशन कर चुका हूं। जिन नाटकों में अभिनय किया, काफ़ी लंबी लिस्ट है। देश भर में हमारे नाटकों के मंचन हुए। अभी के दौर की बात करुं तो मुझे सतीश जैन जी जैसे निर्देशक के साथ सबसे अधिक फ़िल्में करने का सौभाग्य प्राप्त हो चुका है। छत्तीसगढ़ी, भोजपुरी व हिन्दी मिलाकर अब तक 157 फ़िल्में कर चुका हूं। अब बहुप्रतीक्षित फ़िल्म ‘तोर मयारू मोर मयारू’ का बेसब्री से इंतज़ार है। हाल ही में स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर 15 अगस्त को मेरी भोजपुरी फ़िल्म ‘शहीद की वीरांगना’ रिलीज़ हुई है।

