■ अनिरुद्ध दुबे
यह कॉलम राइटर 2014 एवं 2019 दोनों लोकसभा चुनाव के समय में रिपोर्टिंग करने राजधानी रायपुर के अलग-अलग मतदान केन्द्रों पर पहुंचा था। मेरी जिज्ञासा उन युवाओं को लेकर रही थी जो पहली बार लोकसभा चुनाव में मतदान करने पहुंचे हुए थे। सभी युवाओं की मोदी को लेकर स्पष्ट राय थी। उन दोनों ही बार के चुनाव में राहुल के प्रति युवाओं में कोई ख़ास आकर्षण नहीं दिखा था। 2028 के छत्तीसगढ़ में होने वाले विधानसभा चुनाव व 2029 के देश भर में होने वाले लोकसभा चुनाव में भाजपा कहां पर खड़ी होगी इस बात का लगातार चिंतन ख़ुद संघ व भाजपा के लोग इस समय कर रहे होंगे। ‘नीट’ के पेपर लीक होने को लेकर दिल्ली के जंतर मंतर में हुए आंदोलन में जिस तरह युवाओं यानी जेन ज़ी का आक्रोश भड़क उठा उसने दिल्ली से लेकर नागपुर तक में बैठे लोगों को सोचने पर मजबूर कर दिया। शायद यही वज़ह रही कि स्वयं प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी आंदोलन के दौरान जेन ज़ी के नाम संदेश देते हुए सोशल मीडिया पर अपना वीडियो पोस्ट किए। फिर आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत जेन ज़ी से संवाद करते नज़र आए। ये तो रही दिल्ली की बात। छत्तीसगढ़ पर आएं। छत्तीसगढ़ में जेन ज़ी और जेन अल्फा की संख्या डेढ़ करोड़ के आसपास बताई जा रही है। यह भी ज़ाहिर हो चुका है कि जेन अल्फा भी अब “कौन नेता कैसा है” पर खुलकर प्रतिक्रिया देने लगे हैं। ज़रूरत पड़ने पर आंदोलन करने से भी पीछे नहीं हट रहे हैं। पिछले दिनों दुर्ग जिले के पेंड्रावन स्थित स्वामी आत्मानंद अंग्रेज़ी माध्यम स्कूल के लगभग 400 छात्रों व्दारा शिक्षकों की कमी और बुनियादी सुविधाओं को लेकर क़रीब 12 घंटे तक सड़क पर किया गया प्रदर्शन इसका बड़ा उदाहरण है। सरकार को समझ में आ गया कि केवल आला अफ़सरों को भेजने से काम नहीं चलेगा। स्वयं स्कूली शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव पेंड्रावन जाकर आंदोलनकारी छात्रों और उनके पालकों से मिले। शिक्षा मंत्री को आंदोलनकारी छात्रों को कुछ इस तरह समझाना पड़ा कि “आप सब की पीड़ा हमारी अपनी पीड़ा है।“
बात करें मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की तो उनकी ओर से लगातार जेन ज़ी व जेन अल्फा से किसी न किसी मंच पर सीधे संवाद होते दिख रहा है। जुलाई में राज्य स्तरीय शाला प्रवेशोत्सव के दौरान मुख्यमंत्री ने बच्चों से बातचीत करते हुए उन्हें विकसित छत्तीसगढ़ की नींव बताया था। वहीं अगस्त में मुख्यमंत्री अपने निवास में नीट-2026 में सफल रहे विद्यार्थियों से सीधे संवाद किए।
भाजपा संगठन की बात करें। पिछले दिनों छत्तीसगढ़ भाजपा संगठन की जो महत्वपूर्ण बैठक हुई थी, उसमें मंत्रियों के कामकाज के तरीकों पर चर्चा के साथ जेन ज़ी और जेन अल्फा वाला विषय भी आया था। उस बैठक के बाद हाल ही में संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री राजेश अग्रवाल ने लखनपुर स्थित निवास में विभिन्न विद्यालयों से आए छात्रों से संवाद किया था। उन्होंने जेन अल्फा से न सिर्फ़ उनकी पढ़ाई अपितु रुचियों और भविष्य की योजनाओं के बारे में भी पूछा।
जो हो, ज़ुबां पर नाम
तो रहता है टंकराम
राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा राजनीति के साथ दूसरी कलाओं में भी प्रवीण हैं। पिछले दिनों वे ठेठ किसान के भेष में खेत में रोपा लगाते व नांगर जोतते दिखे। इसके ठीक बाद उनका वीडियो अलबम सामने आया, जिसमें छत्तीसगढ़ी भाषा में गीत गाते हुए छत्तीसगढ़ की महिमा का बखान करते दिख रहे हैं। यह वीडियो छत्तीसगढ़ की हसीन वादियों में फ़िल्माया गया है। खेती-किसानी व विभिन्न कलाओं के प्रति समर्पित टंकराम जिन जिलों के प्रभारी मंत्री हैं वहां पार्टी के लोगों से उनका कितना तालमेल बैठ पा रहा है यह समझने की कोशिश पिछले दिनों संगठन के बड़े पदों पर बैठे लोगों ने की। हुआ यूं कि हाल ही में भाजपा की हुई दो दिनी बैठक में भाजपा क्षेत्रीय संगठन महामंत्री अजय जामवाल एवं प्रदेश संगठन महामंत्री पवन साय जिलाध्यक्षों, जिला प्रभारियों व संबंधित क्षेत्र के विधायकों का मन टटोल रहे थे। दोनों ने सारंगढ़ एवं बिलाईगढ़ जिले तरफ के लोगों से पूछा रहा होगा कि आप लोगों के क्षेत्र के प्रभारी मंत्री का क्या हाल है। एक-दो जागरुक नेताओं ने दिल का हाल कुछ इस तरह सुना दिया कि “हमारे प्रभारी मंत्री जी कभी-कभी आते हैं। आते हैं तो भाजपा कार्यालय उनका आगमन नहीं होता। लगता है मंत्री जी के पास काम का इतना ज़्यादा प्रेशर है कि उनके पास कार्यकर्ताओं से मिलने का भी समय नहीं रहता।“ ये दिल का हाल टंकराम जी के बारे में बयां किया गया था। उल्लेखनीय है कि टंकराम जी सारंगढ़ एवं बिलाईगढ़ जिले के प्रभारी मंत्री हैं।
यही रह गया था
बाक़ी, राखी में एक
ड्रिंक्स पर एक फ्री
राखी त्यौहार से ठीक पहले ब्रालेट ब्लाउज में रक्षाबंधन सेलिब्रेट करने वाला एड करना जानी मानी फ़िल्म एक्ट्रेस कृति सेनन को भारी पड़ गया। उस जूलरी ब्रांड के एड में कृति सेनन ब्रालेट पहनकर ऑन स्क्रीन भाई व अपने कुत्ते को राखी बांधती नज़र आईं थीं। उस एड के लिए सोशल मीडिया यूजर्स ने तो कृति सेनन को ट्रोल किया ही, कंगना रनौत से लेकर प्रियंका चोपड़ा की मां मधु चोपड़ा तक ने बेहद कड़े शब्दों का इस्तेमाल किया। दिग्गज कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने ज़रूर कृति सेनन का समर्थन करते हुए कहा कि “महिलाओं को उनकी आज़ादी का इस्तेमाल करने दें। इस तरह ट्रोल न करें।” विवाद बढ़ते देख ज़िम्मेदार कंपनी ने अपना यह विज्ञापन हटा लिया।
लगता है कि कृति सेनन के आधुनिक विचारों से प्रेरित होने वालों की रायपुर शहर में कमी नहीं। तभी तो किसी पैलेस की तरह नज़र आने वाले मॉल में चल रहे बीयर कैफे में राखी पर्व वाले दिन ‘सिब्लिंग्स कराओके नाइट’ जैसा आयोजन रख दिया गया। सोशल मीडिया पर पोस्ट डाला गया था, इस इवेन्ट में शाम 7 से 8 बजे के बीच पहुंचने वाली बहनों के लिए एक ड्रिंक्स पर एक फ्री का ऑफर रहेगा। यानी राखी पर भाई की तरफ़ से बहन को पेग का ख़ास तोहफ़ा! सोशल मीडिया पर यह एड ख़ूब दौड़ ही रहा था कि उसे देख बजरंग दल वालों के ख़ून ने उबाल मारा और हंगामा खड़ा हो गया। हंगामा मचते देख कैफे चलाने वाले को वह प्रोग्राम रद्द करना पड़ा।
रायपुर में शरीफ़ तो बहुत बसते हैं लेकिन “शराफ़त छोड़ दी हमने” वाले अंदाज़ में उधम मचाने वालों की भी यहां कमी नहीं। तभी शादीशुदा लोगों के लिए किसी फार्म हाउस में एडल्ट पार्टी का आयोजन रख दिया जाता है। यह अलग बात है कि भारी विरोध के चलते उस आयोजन पर पानी फिर जाता है। प्रेम रस में डूबे रहने वाले यहां के कुछ लोगों ने तो सनी लियोनी के रायपुर आगमन की तारीख़ तय कर दी थी। जमकर विरोध हुआ तो सनी लियोनी का आना रद्द हो गया। एक और ‘स्ट्रेंजर मीटअप पार्टी’ का एड ख़ूब चर्चा में रहा था। बजरंगियों के विरोध के बाद वह आयोजन भी रद्द हो गया था।
निर्माण पूरा नहीं, पर
पूरे का भुगतान…
मुर्दा शहर नया रायपुर के सेक्टर-18 में निर्माणाधीन लोक भवन (राज भवन) एवं आला अफ़सरों के आवास निर्माण कार्य अपूर्ण होने के बाद भी ठेका कंपनी को संपूर्ण भुगतान कर दिए जाने का मामला सुर्ख़ियों में है। इस मामले की खोज़बीन करने वालों का दावा है कि संबंधित विभाग के सचिव को अंधेरे में रखते हुए अधूरे काम करने वाले को पूर्ण राशि का भुगतान करवा दिया गया। छत्तीसगढ़ भंडार क्रय नियम एवं लोक निर्माण विभाग अनुबंध की शर्तों की खुलकर अनदेखी की गई, जिसकी शिकायत ऊपर तक पहुंच चुकी है।
आरंग जैसी मांग
रायपुर में क्यों नहीं
14 सितम्बर को जगह-जगह सार्वजनिक स्थलों पर गणेश जी विराजेंगे। छत्तीसगढ़ के जिन शहरों, कस्बों व गांवों में गणेश चतुर्थी पर गणेश प्रतिमा स्थापना की परंपरा रही है वहां गणेशोत्सव की तैयारियां शुरु हो चुकी हैं। मिट्टी को प्रतिमा का स्वरुप देने वाले कलाकार युद्ध स्तर पर अपने काम में जुटे हुए हैं। आरंग में ऐसे न जाने कितने ही मूर्तिकार हैं जिनकी गणेश प्रतिमा बनाने की कला की सराहना दूर-दूर तक होती है। राजधानी रायपुर तक में आरंग से बड़ी संख्या में गणेश प्रतिमाएं आती हैं। उसी आरंग के कुम्हार समाज ने गणेश प्रतिमाओं की बिक्री के लिए उचित अस्थायी जगह उपलब्ध कराने की मांग आरंग नगर पालिका परिषद से की है। समाज के पदाधिकारियों का कहना है कि कुम्हार समाज के लोग वर्षों से परंपरा और पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए मिट्टी की गणेश प्रतिमाएं तैयार कर बेचते आ रहे हैं। पर्व नज़दीक होने के कारण मूर्तिकारों को प्रतिमाओं के सुरक्षित भंडारण और बिक्री के लिए उपयुक्त जगह की तत्काल आवश्यकता है। नगर पालिका क्षेत्र व्दारा व्यवस्थित अस्थायी दुकानें या स्थान आवंटित होने से प्रतिमाओं की बिक्री व्यवस्थित तरीके से हो सकेगी। इससे मुख्य मार्गों पर जाम की स्थिति नहीं बनेगी और आम लोगों व खरीददारों को आवागमन में परेशानी नहीं होगी।
रायपुर शहर का एक बड़ा वर्ग आरंग में उठी इस मांग की सराहना करते हुए कह रहा है कि ऐसी मांग रायपुर शहर में कभी क्यों नहीं उठी! उल्लेखनीय है कि रायपुर का व्यस्ततम क्षेत्र सत्ती बाज़ार साठ के दशक से गणेश प्रतिमाओं की बिक्री का केन्द्र रहा है। गणेश चतुर्थी तथा उससे एक दिन पहले सत्ती बाज़ार में सुबह से रात तक भारी ट्रैफिक जाम की स्थिति बनी रहती है। ऐसा बरसों से होते आ रहा है। जिला, पुलिस या नगर निगम प्रशासन आज तक इसका कोई ठोंस समाधान नहीं निकाल पाया। यही नहीं डीजे-बाजे के चक्कर में रायपुर शहर में चार से पांच दिनों तक प्रतिमाओं के विसर्जन का सिलसिला जारी रहता है। श्रीमती किरणमयी नायक जब महापौर थीं उन्होंने प्रतिमाओं के विसर्जन के लिए लाखे नगर से रायपुरा जाने वाले मार्ग पर विसर्जन कुंड बनवाया था, लेकिन वह प्रयास पूरी तरह सफल नहीं हो सका।

