■ अनिरुद्ध दुबे
दिल्ली से लेकर बिहार व झारखंड तक जेन जी व जेन अल्फा का आंदोलन सुर्खियों में रहा है। भला छत्तीसगढ़ कहां पीछे रहने वाला। ‘कारवां’ कॉलम के पिछले एपिसोड में ज़िक्र हुआ था कि बीते दिनों दुर्ग जिले के पेंड्रावन स्थित स्वामी आत्मानंद अंग्रेज़ी माध्यम स्कूल के लगभग 400 छात्रों व्दारा शिक्षकों की कमी और बुनियादी सुविधाओं को लेकर क़रीब 12 घंटे तक सड़क पर प्रदर्शन किया गया। अब पिछले एक सप्ताह के भीतर की बात करें तो छत्तीसगढ़ में जेन अल्फा व जेन जी के 3 और आंदोलन सामने आ चुके हैं।
कथा 1- सरगुजा के बतौली स्थित शिवपुर एकलव्य आवासीय विद्यालय में बदहाल व्यवस्थाओं से तंग रहीं सौ से अधिक छात्राएं सुबह के समय कलेक्टर से मिलने पैदल ही अंबिकापुर निकल पड़ीं। स्कूल से कलेक्टोरेट की दूरी क़रीब 30 किलोमीटर है। छात्राएं पैदल आधी दूरी तय कर चुकी थीं, तभी बात कुछ अफ़सरों के कानों तक पहुंची। उन अफ़सरों के हाथ-पैर फूल गए। आनन-फानन में बस की व्यवस्था की गई। बड़ी मुश्किल से समझा-बूझाकर आंदोलनकारी छात्राओं को बस में बिठाया गया और कलेक्टोरेट ले जाया गया। कलेक्टोरेट पहुंचने के बाद छात्राएं अड़ी रहीं कि कलेक्टर अजीत वसंत छोड़ किसी से बात नहीं करेंगी। उसी बीच तनाव और थकान के कारण एक छात्रा बेहोश होकर गिर पड़ी, जिसे एंबुलेंस से मेडिकल कॉलेज अस्पताल भेजा गया। कलेक्टर को स्वयं होकर छात्राओं की बातें सुननी पड़ीं। कलेक्टर से शिकायत के दौरान आंदोलनकारी छात्राएं बोलती चली गईं कि हॉस्टल में पिछले 3 महीने से बिजली नहीं है। मेस में चारों तरफ गंदगी पसरी पड़ी है। फिजिक्स-केमिस्ट्री की नियमित रुप से कक्षाएं नहीं लग रहीं। अच्छा भोजन नहीं दिया जा रहा।
कथा 2- कोंडागांव जिले में मर्दापाल स्थित स्वामी आत्मानंद अंग्रेजी माध्यम स्कूल की बात करें। वहां कि छात्राएं करीब 30 किलोमीटर का सफर तय कर सीधे कलेक्टोरेट पहुंच गईं। वहां जिला स्तरीय अधिकारियों को छात्राओं ने बताया कि स्कूल के प्राचार्य रोज़ाना शराब के नशे में स्कूल आते हैं और कक्षाएं नहीं लेते। बीच में एक दिन स्कूल पहुंचकर उन्होंने केवल हाज़री लगाई और गायब हो गए। कुछ ऐसे विषय हैं जिनकी पढ़ाई ही नहीं हो रही। छात्राओं की शिकायत पर बड़े अफ़सरों के निर्देश के बाद जिला शिक्षा अधिकारी तुरंत छात्राओं के साथ मर्दापाल पहुंचे। कुछ देर में वहां पुलिस बल भी पहुंच गया जिससे काफ़ी देर तक हड़कंप मचे रहा। छात्राओं के हल्ला बोल के बाद अब कहीं जाकर जिला शिक्षा अधिकारी व्दारा शराब पीकर स्कूल आने वाले प्राचार्य को निलंबित करने और वहां के सभी शिक्षकों के वेतन रोकने का प्रस्ताव बनाकर भेजा गया है।
कथा 3- बिजली, पानी, सुरक्षा की कमी जैसे मुद्दों को लेकर डौंडीलोहारा के एकलव्य महाविद्यालय के आक्रोशित छात्रों ने हाल ही में जमकर प्रदर्शन किया। आंदोलनकारी छात्रों ने बंद पड़ी NSS (राष्ट्रीय सेवा योजना) को दोबारा शुरू करने की मांग भी की।
आदिवासी वोट बैंक को
साधने सुखदेव प्रभारी…
नितिन नवीन के भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद छत्तीसगढ़ भाजपा प्रदेश प्रभारी पद पर अब तक किसी को बिठाया नहीं जा सका है, लेकिन कांग्रेस ने नये समीरण के तहत सचिन पायलट की जगह पर झारखंड से सांसद सुखदेव भगत को ज़रूर नया प्रभारी बना दिया है। सुखदेव भगत आदिवासी समुदाय से हैं। पहली बार ऐसा हुआ है कि किसी राष्ट्रीय स्तर की बड़ी पार्टी ने छत्तीसगढ़ में किसी आदिवासी नेता को प्रभारी बनाया है। बस्तर व सरगुजा आदिवासी बहुल क्षेत्र हैं और यहां कि आरक्षित सीटें किसी भी पार्टी की सरकार बनने में अहम् भूमिका अदा करती हैं। इस बात को भाजपा-कांग्रेस दोनों ही पार्टियां भली-भांति समझती रही हैं। विष्णु देव साय के मुख्यमंत्री बनने का एकमात्र बड़ा कारण उनका आदिवासी समुदाय से होना ही रहा है। 2023 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने जिस तरह बस्तर व सरगुजा के आदिवासी वोट बैंक को खोया उसे वापस जुटाने की मशक्कत शुरु हो गई है। सुखदेव भगत को प्रभारी बनाया जाना उसी दिशा में बड़ा कदम है। सुखदेव भगत की छवि सरल सहज नेता की है और छत्तीसगढ़ में इस समय कांग्रेस के भीतर जो अंदरुनी खींचतान मची हुई है, संतुलन साधने की बड़ी ज़िम्मेदारी इन नये प्रभारी के कंधों पर है। सुखदेव भगत 2019 में कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हुए थे और भाजपा की टिकट पर लोहरदगा विधानसभा क्षेत्र से चुनाव भी लड़े थे, जिसमें उन्हें हार मिली थी। बाद में जनवरी 2022 में भगत कांग्रेस में वापस आ गए।
अठावले छत्तीसगढ़ में
चाहते तो हैं बड़ा पर
आख़िर में होता है क्या
केन्द्रीय मंत्री व रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (आरपीआई) के प्रमुख रामदास अठावले ने अपने छत्तीसगढ़ प्रवास के दौरान कहा कि “छत्तीसगढ़ में सभी समाजों को साथ लेकर हम अपने संगठन को मजबूत करेंगे। यदि पार्टी प्रदेश में मजबूत होगी तो विधानसभा चुनाव में भाजपा के साथ 4 से 5 सीटों पर गठबंधन को लेकर विचार किया जा सकता है।“ अठावले ने यह भी कहा कि “पिछले विधानसभा चुनाव में मैं भाजपा के पक्ष में छत्तीसगढ़ आया था।“
रामदास अठावले की छवि लालू प्रसाद यादव की तरह हास्य की फुलझड़ियां छोड़ने वाले नेता की रही है। 2018 के विधानसभा चुनाव से पहले जब वे दीपावली त्यौहार के समय में रायपुर दौरे पर आए थे तब भी कहे थे कि “उनकी पार्टी भाजपा से दो-तीन सीटें अपने लिए मांग सकती है।“ यह अलग बात है कि भाजपा ने उस चुनाव में सभी 90 सीटों पर अपने प्रत्याशी खड़े किए थे।
बैठक के बहाने पार्षदों के
मन की ‘बात’ या ‘थाह’
रायपुर महापौर श्रीमती मीनल चौबे ने निगम मुख्यालय में रायपुर की चारों विधानसभाओं के भाजपा पार्षदों की विधानसभावार अलग-अलग बैठकें लीं। बैठक का कोई भी अंश मीडिया में नहीं आया। बताते हैं मुख्यमंत्री विष्णु देव साय तथा उप मुख्यमंत्री (नगरीय प्रशासन) अरुण साव से मुलाक़ात करने पर क्या ‘हासिल’ हुआ, इस बात का ज़िक्र बैठक में हुआ। मंत्रियों से मुलाक़ात हो जाने के बाद अगला कदम किस ‘दिशा’ में बढ़ाना है पर बातचीत हुई। बैठक के बहाने महापौर ने सहयोगी पार्षदों का मन टटोला। कुछ का कहना रहा- सभी विधानसभा क्षेत्रों के पार्षदों की बैठक एक साथ भी तो हो सकती थी, वहीं कुछ का मानना रहा- भीड़ में मन की थाह ले पाना मुश्किल काम होता है। हवा का रुख़ टूकड़े-टूकड़े में बात करने से मालूम होता है। निगम के गलियारे में चर्चा तो यही है कि महापौर इस समय ‘वेट एंड सी’ वाली मुद्रा में हैं…
छत्तीसगढ़ी अग्रवाल समाज
की बैठक में उठा
ये कैसा धुंआ…
राजधानी रायपुर में छत्तीसगढ़ी अग्रवाल समाज की जो केंद्रीय बैठक हुई, उसमें कई ऐसे गंभीर पहलुओं पर बातचीत हुई, जिन पर इसी तरह मंथन होता रहा तो आगे परिणाम हलचल मचा सकते हैं। इसमें दान संरक्षण समिति की रिपोर्ट पर चर्चा और मंथन किया गया। बैठक में दान संरक्षण समिति की रिपोर्ट का ब्यौरा देते हुए समाज के केंद्रीय अध्यक्ष दाऊ अनुराग अग्रवाल ने बताया कि एम्स की 65 एकड़ भूमि, नागरीदास मंदिर की संपत्ति तथा ठाकुर रामचंद्र स्वामी दूधाधारी मंदिर से जुड़े मसले कहीं न कहीं हमारे समाज से जुड़े हुए हैं।
नागरीदास मंदिर की मंदिर हसौद स्थित ज़मीन पर उत्खनन व धरसींवा स्थित करीब 12 एकड़ भूमि के उपयोग तो कुछ ऐसे मुद्दे हैं जो आगे सियासी भूचाल भी ला सकते हैं! ये ऐसे मसले हैं जिन पर कानूनी सलाह मशविरे का दौर जारी है। बैठक में यह बात भी जोरों से उठी कि यह छत्तीसगढ़ी अग्रवाल समाज के लोग ही रहे जिनकी ओर से रायपुर में डी.के. अस्पताल के निर्माण के लिए ज़मीन दान देने के अलावा एम्स के लिए 65 एकड़ ज़मीन, दूधाधारी मंदिर की व्यवस्था के लिए तेलीबांधा क्षेत्र तथा नागरीदास मंदिर की व्यवस्था के लिए धरसींवा में एकड़ों ज़मीन को आय का स्त्रोत बनाकर रखा गया। सवाल यह कि सत्ता के केन्द्र में बने रहने वालों ने दानवीर छत्तीसगढ़ी अग्रवाल समाज को कितनी गंभीरता से लिया!
कभी-कभार चौक चौराहों में इस बात पर भी बहस छिड़ जाती है कि राजधानी रायपुर के वीआईपी रोड पर बने भव्य राम मंदिर की ज़मीन किस परिवार की रही है।
गणेश जी का स्वरुप
बिगाड़ने से बाज नहीं
आते ये कलयुगी
कल गणेश चतुर्थी पर जगह-जगह गणेश जी विराजेंगे। इस बार भी राजधानी रायपुर में कहीं-कहीं पर गणेश प्रतिमाओं के स्वरूप को लेकर विवाद की स्थिति बनती नज़र आई। मोवा और अमलीडीह क्षेत्र में छह पैक्स जैसी तैयार हुईं प्रतिमाओं को लेकर बजरंग दल वालों ने जमकर आपत्ति जताई है। बजरंग दल का कहना था कि गणेश प्रतिमा तैयार करते समय धार्मिक मान्यताओं, परंपराओं और आस्था का ध्यान रखा जाना चाहिए। विरोध के बाद मूर्तिकारों को छह पैक्स वाली प्रतिमा को बेचने से पीछे हटना पड़ा।
ऐसा कुछ पहले भी होते रहा है। पिछले साल रायपुर के लाखेनगर में गणेश प्रतिमा के स्वरूप को लेकर विवाद हुआ था। उससे और बहुत पहले जब आमिर ख़ान स्टारर फ़िल्म ‘गजनी’ आई थी तो एक मूर्तिकार ने सिर पर लंबे चोट निशान वाली प्रतिमा बना दी थी। मामला पुलिस तक में गया था और उस प्रतिमा को बनाने वाले की गिरफ़्तारी हुई थी। उल्लेखनीय है कि ‘गजनी’ में आमिर खान ने जो करैक्टर किया था उसके सिर पर कम बाल होने के साथ चोट का लंबा निशान था।

