रायपुर। अधिवक्ता एवं कांग्रेस नेता मनोज सिंह ठाकुर ने आरोप लगाया कि छत्तीसगढ़ में समग्र शिक्षा का 690 करोड़ से अधिक का बजट छत्तीसगढ़ सरकार खर्च नहीं कर पाई। छत्तीसगढ़ सरकार ने 2025-26 का उपयोगिता प्रमाण पत्र (UC) भी केंद्र सरकार को नहीं भेजा।
मनोज सिंह ठाकुर ने एक प्रेस नोट जारी कर कहा कि छत्तीसगढ़ में स्कूली शिक्षा के बुनियादी ढांचे और संसाधनों की बदहाली के बीच एक अत्यंत गंभीर प्रशासनिक व वित्तीय लापरवाही का मामला सामने आया है। भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय (स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग) से सूचना का अधिकार (RTI) के तहत खुलासा हुआ है कि समग्र शिक्षा योजना के तहत केंद्र सरकार से स्वीकृत करोड़ों की राशि राज्य में खर्च ही नहीं हो पा रही है। वित्तीय वर्ष 2023-24: केंद्र सरकार द्वारा 776.59 करोड़ जारी किए गए, जिसमें से 312.25 करोड़ का केंद्रीय हिस्सा बिना खर्च हुए (Unspent) पड़ा रहा। वित्तीय वर्ष 2024-25: केंद्र सरकार ने 830.65 करोड़ की राशि जारी की, जिसमें से भी 378.52 करोड़ की भारी राशि खर्च नहीं हो सकी और Unspent रही।वित्तीय वर्ष 2025-26 में गंभीर वित्तीय लापरवाही: केंद्र सरकार ने 993.40 करोड़ की बड़ी राशि जारी की, लेकिन छत्तीसगढ़ शासन के संबंधित विभाग ने केंद्र सरकार को इसका उपयोगिता प्रमाण पत्र (Utilization Certificate – UC) तक प्रस्तुत नहीं किया है।
ठाकुर ने कहा कि एक तरफ छत्तीसगढ़ के ग्रामीण और वनांचल क्षेत्रों में बच्चे जर्जर भवनों, शिक्षकों की कमी और बुनियादी सुविधाओं के अभाव में पढ़ने को मजबूर हैं, वहीं दूसरी तरफ केंद्र से स्वीकृत 690 करोड़ से अधिक की केंद्रीय राशि का खर्च न होना शिक्षा विभाग की घोर अकर्मण्यता और वित्तीय कुप्रबंधन को दर्शाता है। वर्ष 2025-26 के खर्च का उपयोगिता प्रमाण पत्र (UC) समय पर केंद्र को न भेजा जाना यह संदेह पैदा करता है कि या तो मैदानी स्तर पर काम अटका हुआ है या फिर वित्तीय नियमों की खुली अनदेखी की जा रही है। उपयोगिता प्रमाण पत्र न भेजे जाने की स्थिति में भविष्य में केंद्र से मिलने वाले शिक्षा अनुदान में कटौती का सीधा नुकसान छत्तीसगढ़ के लाखों स्कूली बच्चों को उठाना पड़ेगा। ठाकुर ने कहा कि इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।

