■ अनिरुद्ध दुबे
जाने-माने फ़िल्म अभिनेता नाना पाटेकर का 8 अगस्त को गोवा में निधन हो गया। नाना का संसार अभिनय तक ही सीमित नहीं था, उनके व्यक्तित्व में कितने ही रंग समाए हुए थे। पेंटर के रुप में उन्होंने अपनी जीविका की शुरुआत की। ड्रामा आर्टिस्ट रहे। महान अदाकारा स्मिता पाटिल की प्रेरणा से फ़िल्मों में उनका सफ़र जो गति पकड़ा तो फिर आख़री सांस तक नहीं थमा। महाराष्ट्र के किसानों की उन्हें सदैव चिंता रही। वे किसानों पर संकट आने पर न सिर्फ़ उनकी आवाज़ बने, तन-मन-धन से मददगार भी रहे। गणेशोत्सव के समय में पूरी तरह भक्ति भाव में डूब जाते। राजनीति के क्षेत्र में विसंगतियां दिखाई देतीं तो उस पर भी खुल के बोलते। बहुत कम लोग इस बात से अवगत हैं कि अस्सी के दशक में नाना पाटेकर का रायपुर आगमन हुआ था और सदर बाज़ार स्थित मधुबन हॉटल में उन्होंने एक कार्यक्रम में शिरकत की थी। इस कदर मस्त मौला थे कि उस कार्यक्रम में संबोधन के दौरान उन्होंने जोर से सिटी भी बजा दी थी। कार्यक्रम में उपस्थित श्रोतागण उनके इस मज़ाकिया अंदाज़ को देख गदगद हो गए थे। नाना ऊपर से जितने मस्त मौला नज़र आते थे उतने ही भीतर से गंभीर थे। मई-जुलाई 1999 के बीच जब कारगिल युद्ध छिड़ा हुआ था, नाना भारतीय सैनिकों का हौसला बढ़ाने युद्ध स्थल पर जा पहुंचे थे। यही नहीं जिस दिशा से दुश्मन गोली बारी कर रहे थे उस तरफ निशाना साध नाना ने दो गोलियां चलाते हुए हमारे जवानों का मनोबल बढ़ाने का काम किया था।
रायपुर के गुढ़ियारी निवासी देवीदत्त तिवारी लंबे समय तक भारतीय सेना में पदस्थ रहे। कारगिल युद्ध को उन्होंने काफ़ी नज़दीक से देखा। कारगिल युद्ध की समाप्ति के बाद जब उनका रायपुर आगमन हुआ था, मैंने उनसे विस्तार से बातचीत की थी, जिसका प्रकाशन 11 अगस्त 1999 को सांध्य दैनिक ‘हाईवे चैनल’ में हुआ था। तिवारी जी ने उस बातचीत में बड़े ही आदर भाव के साथ नाना पाटेकर की गौरव गाथा का भी वर्णण किया था। उन्होंने कारगिल युद्ध के दौरान सेना के अफ़सरों व जवानों के साथ नाना पाटेकर की खिंची गई तस्वीर भी उपलब्ध कराई थी। तिवारी जी से हुई वह बातचीत नाना पाटेकर जी को श्रद्धांजलि देने के साथ एक बार फिर आप सब के समक्ष यहां शब्दशः प्रस्तुत है-
● अपने ही लोगों की गद्दारी के कारण घुसपैठियों का मनोबल बढ़ता है
● कारगिल से लौटे फौजी देवीदत्त तिवारी ने कहा- नाना ने भी चलाई थीं दो गोलियां
■ अनिरुद्ध दुबे/हाईवे चैनल
रायपुर, ११ अगस्त। “कारगिल युद्ध तो खत्म हो गया लेकिन कश्मीर में इस समय पाकिस्तानी घुसपैठियों ने आतंक मचा रखा है। यह हमारा दुर्भाग्य ही है कि इन घुसपैठियों को मदद करने वाले कोई और नहीं बल्कि कश्मीर के सीमावर्ती गाँवों में रहने वाले कुछ लोग हैं। भारतीय सेना से मुफ्त में राशन बिजली और दवा लेने के बाद घुसपैठियों की मदद देना यह गद्दारी नहीं तो और क्या है?” ये बातें कारगिल में युद्ध के दौरान एक महीने से भी ज्यादा समय तक रहे जवान देवीदत्त तिवारी ने आज यहाँ ‘हाईवे चैनल’ से चर्चा के दौरान कही। श्री तिवारी ने कहा कि युद्ध के दौरान फिल्म अभिनेता नाना पाटेकर ने कश्मीर जाकर न सिर्फ हमारे जवानों का मनोबल बढ़ाया बल्कि दुश्मनों को निशाना बनाते हुए बन्दूक से दो फायर भी किए।
श्री तिवारी आज ही समता एक्सप्रेस से रायपुर पहुँचे। श्री तिवारी इस समय श्रीनगर के आगे तनहार के पास स्थित नियारी में पदस्थ हैं। वह बताते हैं कि बचपन में जब गणतंत्र दिवस पर परेड करते हुए सैनिकों की तस्वीरें देखते थे तो उनका भी मन सैनिक बनने का करता था और सन् १९८५ में उनका यह सपना पूरा हुआ। सबसे पहली उनकी नियुक्ति देवांग में हुई। फिर इलाहबाद, गुवाहाटी एवं अम्बाला में काफी समय तक रहे। वर्तमान में नियारी में जहाँ वे पदस्थ हैं वह कुपवाड़ा सेक्टर में आता है। श्री तिवारी ने बताया कि दुश्मनों से लड़ रहे सैनिकों को दवाएं उपलब्ध कराने वह २८ मई को कारगिल गए और पूरे जून महीने वहाँ रहे। उस समय वहाँ बर्फ गिर रही थी। स्थितियाँ काफी कष्टप्रद होने के बावजूद हमारे जवानों का हौसला बरकरार था। हमारे सैनिक रात में चढ़ाई करते थे क्योंकि दुश्मन काफी ऊंचाई पर थे। रात का समय इस काम के लिए इसलिए उपयुक्त था, क्योंकि दिन भर ऊपर से भारी गोलीबारी होती थी। ठंड के मौसम में जब पूरा पहाड़ बर्फ से ढंका होता है तब फौजी कारगिल की सीमा से हट जाते थे। और ऐसे ही समय का दुश्मनों ने फायदा उठाया। मौसम खुलने के बाद जब हमारी वाहिनी के लोग गए तो दुश्मनों ने उन्हें मार डाला। जब दूसरा दस्ता वहाँ पहुँचा तो पता चला दुश्मनों ने हमारी जगह पर कब्जा कर लिया है। दुश्मन अपने बंकरों में साल भर का राशन रखकर बैठे थे। जबकि हमारे जवानों को रोजाना राशन साथ में लेकर उनसे लड़ने के लिए जाना होता था। वहाँ स्थिति यह थी कि कभी भी कुछ भी हो सकता था। मैं अपना ही एक अनुभव सुनाता हूँ- शाम के करीब ६ बजे का वक्त था। हम करीब २५ लोग सेना की एक गाड़ी में सवार होकर जा रहे थे। गुरेज के पास ही दुश्मनों ने हमारी गाड़ी को निशाना बनाकर तोप का एक गोला दाग दिया। वह गोला गाड़ी से कुछ ही दूरी पर गिरा और हम बाल-बाल बच गए। यदि गोला गाड़ी पर गिरता तो हम पचीसों वहीं पर मर चुके होते।
श्री तिवारी ने आगे बताया कि पाकिस्तान जो भारत में अशांति फैला रहा है उसके पीछे कौन-कौन सी वजह है उस पर सूक्ष्म दृष्टि दौड़ानी होगी। इससे ज्यादा अफसोसजनक बात क्या है कि सीमा पर बसे कश्मीर के कुछ गाँव में रहने वाले अपने ही लोग दुश्मनों को प्रश्रय देते हैं। दुश्मन सीमा लांघने के बाद इन्हीं के यहाँ खाते-पीते हैं। वक्त गुजारते हैं। और हमारी उदारता देखिए कि हमारी सेना इन गाँव वालों को अपना ही हिस्सा मानती है। इन्हें राशन पानी बिजली एवं दवा मुफ्त में उपलब्ध कराई जाती है। सीमा पार रहने वाले ये कुछ गाँव वाले मदद हमसे ले रहे हैं और प्रश्रय दुश्मनों को दे रहे हैं, यह गद्दारी नहीं तो और क्या है? दुश्मन भी इतने चालाक हैं कि वे बरसात के मौसम में नदी नालों से होते हुए भारत में घुसपैठ करते हैं। घुसपैठिये बर्फीले मौसम के आदी हो चुके हैं। यही कारण है कि वह कारगिल की चोटी पर डटे रहे और इधर हमारे सैनिकों को काफी संघर्ष करना पड़ा। कश्मीर के सीमा क्षेत्र में रहने वाले कुछ ग्रामीणों का प्रश्रय पाकर कश्मीर पहुँचे पाकिस्तानी घुसपैठिये ही कारगिल युद्ध समाप्त होने के बाद इस समय कश्मीर में आतंक फैला रहे हैं। न सिर्फ कश्मीर, इनका निशाना तो राजधानी दिल्ली भी रहा है। पकड़े गए एक पाकिस्तानी घुसपैठिये से जब कड़ी पूछताछ की गई तो उसने कुछ ऐसा ही बताया था।
श्री तिवारी ने बताया कि कारगिल युद्ध के दौरान फिल्म अभिनेता नाना पाटेकर का जवानों का हौसला बढ़ाने के लिए कश्मीर पहुँचना भी यादगार रहा। नाना पाटेकर हमारे ११६ रेजीमेन्ट बियारी में भी आए थे। वह सुबह ८ बजे से दोपहर २ बजे तक जवानों के बीच रहे। नाना के दिल में देशभक्ति की भावना किस कदर समाई है इस बात का पता इसी से चलता है कि किरण सेक्टर में उन्होने दुश्मनों की तरफ दो फायर भी किया। वाकई नाना किसी सैनिक से कम नहीं हैं। श्री तिवारी ने बताया कि हम इतने दिनों तक कारगिल में सैनिकों को दवाएं उपलब्ध कराते रहे यह सब कर्नल टी.सी.डे की प्रेरणा से ही सम्भव हो पाया।

