कांग्रेस के पास नहीं बचा एजेंडा, हार के डर से वोट चोरी के झूठे बहाने बना रही- संतोष पाण्डेय

मिसाल न्यूज़

रायपुर। भाजपा मुख्य प्रदेश प्रवक्ता एवं सांसद संतोष पाण्डेय ने आरोप लगाया कि कांग्रेस सहित अन्य विपक्षी दल निष्पक्ष चुनाव प्रक्रिया को नुकसान पहुँचाने और जनता को भ्रमित करने का निरन्तर प्रयास कर रहे हैं। 1952 में कांग्रेस का वोट शेयर 45% था, जो 2024 के लोकसभा चुनाव में गिरकर महज़ 21.4% रह गया है। जनता का समर्थन खो चुकी कांग्रेस के पास कोई ठोस एजेण्डा नहीं बचा है, इसलिए वह हार के डर से वोट चोरी और ईवीएम जैसे झूठे बहाने बना रही है। निर्वाचन आयोग लोकतंत्र की रीढ़ और जनादेश का रक्षक है।

कुशाभाऊ ठाकरे परिसर स्थित प्रदेश भाजपा प्रदेश कार्यालय में आज प्रेस वार्ता  में संतोष पाण्डेय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में हो रहे विकास कार्यों से ध्यान भटकाने के लिए विपक्ष अब निर्वाचन आयोग और चुनाव प्रणाली पर बेबुनियाद सवाल खड़े कर रहा है। श्री पाण्डेय शनिवार को यहाँ रहे थे। 1952 के चुनाव में कांग्रेस ने कम्युनिस्टों के साथ मिलकर बाबा साहेब डॉ. भीमराव अम्बेडकर को हराने की साजिश रची थी। 1957 में बिहार के बेगूसराय में देश के पहले बूथ पर कांग्रेस समर्थकों द्वारा कब्जा करने की घटना हुई थी। 1967 में जम्मू-कश्मीर में कांग्रेस ने प्रतिद्वंदियों को चुनाव से रोककर निर्विरोध 61 सीटें जीती थीं। पाण्डेय ने कहा कि सन् 1975 में इलाहाबाद हाईकोर्ट के तत्कालीन न्यायमूर्ति जगमोहनलाल सिन्हा ने तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को सरकारी मशीनरी के दुरुपयोग का दोषी पाते हुए 6 वर्षों के लिए किसी भी सार्वजनिक पद के अयोग्य घोषित कर दिया था। 1987 का कश्मीर चुनाव कांग्रेस और नेशनल कॉन्फ्रेंस ने बड़े पैमाने पर धांधली कर जीता था। इसके अलावा देश में कई चुनी हुई सरकारों को कांग्रेस ने अपने राजनीतिक स्वार्थ के लिए बर्खास्त किया।

पाण्डेय ने कहा कि  पिछले 70 वर्षों में चुनाव आयोग ने 400 से अधिक विधानसभा चुनाव और 20 आम चुनाव सफलतापूर्वक सम्पन्न कराए हैं। दुनिया की लगभग 1/6 आबादी के लिए चुनाव प्रबन्धन करने का अनुभव रखने वाला यह आयोग वैश्विक लोकतंत्र के सबसे मजबूत संरक्षकों में से एक है। मोदी सरकार ने चुनाव कानून संशोधन विधेयक (2021) लाकर चुनावी सुधारों और एसआईआर की निष्पक्ष प्रक्रिया को मजबूती दी है।

पाण्डेय ने केरल के कांग्रेस नेताओं के बयानों का हवाला देते हुए कहा कि केरल के पूर्व गृह मंत्री और कांग्रेस नेता रमेश चेन्निथला ने स्वयं स्वीकार किया था कि एसआईआर प्रक्रिया काफी उपयोगी रही है, क्योंकि इससे माकपा द्वारा डलवाए जाने वाले फर्जी वोटों पर रोक लगी। केरलम के ही कांग्रेस विधायक मैथ्यू कुझलनादन ने भी माना कि एसआईआर के जरिए वामपंथी दलों द्वारा जोड़े गए फर्जी मतदाताओं को हटाया गया, जिससे राज्य को लाभ हुआ। इसके अलावा कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने भी इस प्रक्रिया का समर्थन किया था। पाण्डेय ने कहा कि मतदाता सूची के शुद्धिकरण की प्रक्रिया कोई नई नहीं है। आजादी के बाद से अब तक यह 8 बार 1952-56, 1957, 1961, 1965-66, 1983-84, 1987-89, 1992-95 और 2002-2004 में यह प्रक्रिया हो चुकी है, जिनमें से अधिकांश समय केंद्र में कांग्रेस की ही सरकारें थीं।

पाण्डेय ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 324 और लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1950 की धारा 21 के तहत यह प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी है। इसके तहत बीएलओ घर-घर जाकर फॉर्म देते हैं। अनुपस्थित, स्थानांतरित, मृत और दोहरे मतदाताओं की पहचान कर नाम हटाए जाते हैं। प्रारूप मतदाता सूची प्रकाशित कर आम जनता से दावे एवं आपत्तियाँ आमंत्रित की जाती हैं और सुनवाई के बाद ही अंतिम सूची जारी होती है।

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