असामाजिक तत्व नगर निगम कर्मचारी बनकर तोड़वा रहे थे पंडरी की 3 दुकानें… नेता प्रतिपक्ष की चेतावनी- “दोषी लोगों पर कार्रवाई नहीं हुई तो घेराव”

मिसाल न्यूज़

रायपुर। कुछ असामाजिक तत्व नगर निगम कर्मचारी बनकर पंडरी जीवन बीमा मार्ग स्थित तीन पक्की दुकानों को तोड़वा रहे थे। तोड़फोड़ कर रहे लोगों को पकड़कर देवेन्द्र नगर थाना पुलिस के सुपुर्द किया गया। नगर निगम नेता प्रतिपक्ष आकाश तिवारी ने इस घटना को लेकर नगर निगम प्रशासन,  जिला प्रशासन एवं देवेंद्र नगर थाना पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं। तिवारी ने चेतावनी दी है कि यदि 24 घंटे के भीतर दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई नहीं हुई, तो व्यापारी संघ के साथ मिलकर नगर निगम मुख्यालय एवं थाने का घेराव किया जाएगा।

प्राप्त जानकारी के अनुसार पंडरी जीवन बीमा मार्ग स्थित तीन पक्की दुकानों पर 4 दिन पूर्व नगर निगम द्वारा जर्जर भवन का हवाला देते हुए नोटिस चिपकाया गया था। नियमानुसार नोटिस का जवाब देने के लिए 15 से 30 दिन का समय दिया जाता है। यहां मात्र 4 दिन के भीतर ही विगत रात लगभग 2:00 बजे नगर निगम के फर्जी कर्मचारी बनकर कुछ असामाजिक तत्वों ने मजदूरों को लगाकर दुकानों में सुनियोजित तरीके से तोड़फोड़ शुरू करवा दी। रात्रि में वहां से गुजर रहे राहगीरों ने जब दुकानों के शटर तोड़े जाते देखा, उन्होंने तत्काल दुकान मालिकों को सूचना दी। सूचना मिलते ही व्यापारी मौके पर पहुंचे तो देखा कि मजबूत पक्की बिल्डिंग को हथौड़े और सब्बलों से तोड़ा जा रहा है। व्यापारियों ने साहस दिखाते हुए तोड़फोड़ कर रहे युवकों को पकड़कर देवेंद्र नगर थाने में सुपुर्द किया। व्यापारियों का आरोप है कि थाना में शिकायत करने के बावजूद पुलिस ने किसी भी प्रकार की FIR दर्ज नहीं की है और न ही आरोपियों से पूछताछ है।

घटना की सूचना मिलते ही नेता प्रतिपक्ष आकाश तिवारी तत्काल मौके पर पहुंचे और वस्तुस्थिति का जायजा लिया। तिवारी ने कहा कि मैंने स्वयं मौके पर जाकर देखा है। ये बिल्डिंग कहीं से भी जर्जर नहीं है, बल्कि एक मजबूत RCC की पक्की दुकान है। आखिर ऐसी मजबूत बिल्डिंग को नगर निगम ने जर्जर कैसे घोषित कर दिया? क्या यह निगम के कुछ भ्रष्ट अधिकारियों द्वारा बिल्डर लॉबी को फायदा पहुंचाने के लिए शॉर्टकट में नोटिस जारी करने का खेल है?सबसे बड़ा सवाल यह है कि नगर निगम की कोई भी अधिकृत तोड़फोड़ की कार्रवाई दिन के उजाले में, पंचनामा बनाकर और पुलिस बल की मौजूदगी में होती है। रात के 2 बजे चोरों की तरह आकर तोड़फोड़ करना कौन से नियम में लिखा है? जो लोग अपने आप को नगर निगम का कर्मचारी बता रहे थे उनके पास कोई ID कार्ड तक नहीं था। यह सीधे तौर पर आपराधिक साजिश और लूटपाट का प्रयास है। व्यापारियों द्वारा आरोपियों को पकड़कर थाने में देने के बाद भी पुलिस द्वारा कार्रवाई न करना बेहद निंदनीय है। इससे देवेंद्र नगर पुलिस की भूमिका भी संदेह के घेरे में आती है।

आकाश तिवारी ने माांग की कि इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए कि 4 दिन में ही जर्जर का नोटिस देकर रात में तोड़फोड़ की अनुमति किस अधिकारी ने दी। रात में तोड़फोड़ करने वाले फर्जी कर्मचारियों और उनके पीछे के मास्टरमाइंड पर लूट, धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश की धारा में मामला दर्ज हो। जिम्मेदार पुलिस अधिकारी की भूमिका की भी जांच हो कि व्यापारियों की शिकायत पर कार्रवाई क्यों नहीं की गई।

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