‘रेडी टू ईट’ नोएडा की कंपनी को, विपक्ष का जमकर हंगामा…… गर्भ गृह में जा घुसे सारे भाजपा विधायक स्वमेव निलंबित

मिसाल न्यूज़

रायपुर। विधानसभा में आज रेडी टू ईट का ठेका महिला स्व सहायता समूह से लेकर नोएडा की एक प्राइवेट कंपनी को दिए जाने के विरोध में विपक्षी भाजपा विधायकों ने जमकर हंगामा मचाया। विपक्ष ने इस पर लेनदेन का आरोप लगाया। इस पर विपक्ष एवं सत्ता पक्ष के बीच चली बहस ऐसे मोड़ पर आ गई कि भाजपा विधायक नारेबाजी करते हुए गर्भ गृह में आ गए और सदन की कार्यवाही से स्वमेव निलंबित हो गए।

प्रश्नकाल में आज रेडी टू ईट पर भाजपा विधायक व्दय शिवरतन शर्मा एवं रजनीश कुमार सिंह दोनों का सवाल लगा था। रजनीश कुमार सिंह ने कहा कि प्रदेश में जब डॉ. रमन सिंह की सरकार थी रेडी टू ईट वितरण व्यवस्था के तहत 20 हजार महिला स्व सहायता समूह को रोजगार मिला हुआ था। महिला स्व सहायता समूह की उपेक्षा कर इसे बीज निगम एवं एक उद्योगपति को सौंपने के पीछे आखिर क्या कारण हो सकते हैं? 1 अप्रैल से ये दोनों मिलकर काम शुरु भी कर देंगे। क्या छत्तीसगढ़ सरकार के मुख्य सचिव व्दारा इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट के समक्ष हलफनामा दिया गया था? महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती अनिला भेंडिया ने कहा कि नई व्यवस्था के तहत रेडी टू ईट के काम में बीज निगम की 26 प्रतिशत एवं कंपनी एग्रो फूड कार्पोरेशन लिमिटेड की 74 प्रतिशत की भागेदारी है। यह सही है कि रेडी टू ईट में मशीन का इस्तेमाल होगा और इससे बच्चों को हाइजिनिक खाना मिल सकेगा। भाजपा विधायक सौरभ सिंह ने कहा कि यह प्रदेश को बेचने का काम किया जा रहा है। जिस कंपनी की बात हो रही है वह नोएडा की है। नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक ने कहा कि ऐसा लगता है इसमें बड़ा लेन-देन हुआ है। भाजपा विधायक अजय चंद्राकर ने कहा कि 74 प्रतिशत की हिस्सेदारी में यह काम हो रहा है। बच्चों को कुपोषित करने का यह षड़यंत्र है। सुप्रीम कोर्ट का आदेश महिलाओं के पक्ष में है, किसी व्यक्ति विशेष को लाभ पहुंचाने का नहीं। शिवरतन शर्मा ने कहा कि रेडी टू ईट के तहत स्व सहायता समूह के माध्यम 16 हजार 655 लोग काम कर रहे थे। कितने ही लोग ऐसे हैं जिन्होंने बैंक से कर्ज लेकर बच्चों के लिए भोजन तैयार करने मशीन लगवा रखी थी। अब इन्हें हटाकर बाहर के लोगों को उपकृत किया जा रहा  है। नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक ने कहा कि 2019 में रेडी टू ईट पर मुम्बई हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट ने एबॉलिश किया था। कोर्ट का फैसला महिलाओं के पक्ष में रहा, अतः इनसे रोजगार न छिना जाए। वन मंत्री मोहम्मद अकबर ने कहा कि आप एबॉलिश शब्द का इस्तेमाल कर रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट के फैसले में इस का कहीं कोई उल्लेख नहीं है। इसके बाद सभी भाजपा विधायक यह कहते हुए शोर मचाने लगे कि यह महिलाओं के भविष्य का सवाल है इसकी जांच होनी चाहिए। महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती अनिला भेंडिया ने कहा कि हम सुप्रीम कोर्ट के दिशा निर्देश पर चल रहे हैं। आप लोगों के कह देने से कोई जांच नहीं होगी।

भाजपा विधायक बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि बच्चों को हाइजिनिक फूड उपलब्ध कराया जाना चाहिए। मध्यप्रदेश में 3 दिन पहले महिला दिवस पर निर्णय हुआ कि रेडी टू ईट महिलाओं के माध्यम से ही संचालित होगा, फिर इसे यहां अपनाने में क्या दिक्कत है। ग्रामीण क्षेत्र की अर्थव्यवस्था इसी से चलती थी। मध्यप्रदेश की तरह यहां की सरकार को भी यू टर्न लेना चाहिए। मंत्री अनिला भेंडिया का इस पर हर बार एक ही तरह का जवाब आया। भाजपा विधायकगण इससे संतुष्ट नहीं हुए तथा नारेबाजी करते हुए गर्भ गृह में जा घुसे और स्वमेव निलंबित हो गए। विधानसभा अध्यक्ष डॉ. चरणदास महंत ने निलंबित विधायकों को सदन से बाहर जाने के लिए कहा और सदन की कार्यवाही 5 मिनट के लिए स्थगित कर दी।

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