मिसाल न्यूज़
छत्तीसगढ़ी सिनेमा के सीनियर प्रोड्यूसर अलक राय की छत्तीसगढ़ी फ़िल्म ‘आटा चक्की’ 13 फरवरी को पूरे छत्तीसगढ़ में प्रदर्शित होने जा रही है। अलक राय कहते हैं- “आटा चक्की नाम लीक से हटकर ज़रूर है, लेकिन ये है उम्दा प्रेम कहानी। ऐसी प्रेम कहानी जो अब तक देखने में नहीं आई है।“
अलक राय ने किसी समय में ‘मया दे दे मयारू’, ‘बैरी के मया’ एवं ‘रघुबीर’ जैसी छत्तीसगढ़ी फ़िल्में प्रोड्यूस की थी। वे छत्तीसगढ़ी फ़िल्मों के जाने-माने डिस्ट्रीब्यूटर भी हैं। यह पूछने पर कि फ़िल्म डिस्ट्रीब्यूशन में तो आप लगातार सक्रिय रहे, फ़िल्म बनाने में इतना लंबा गेप क्यों आया, अलक राय कहते हैं- “हर चीज का समय होता है। बीच में एक ऐसा दौर आया था जब छत्तीसगढ़ी सिनेमा में अच्छे कंटेंट नहीं आ रहे थे और छत्तीसगढ़ीभाषी दर्शक बॉलीवुड और साउथ की फ़िल्में ख़ूब देख रहे थे। अब हिन्दी फ़िल्में मेट्रो कल्चर को ध्यान में रखते हुए ज़्यादा बन रही हैं, जिनमें छोटे शहर, कस्बे व गांव ग़ायब हैं। ग्रामीण और कस्बाई दर्शकों को जिस कुछ अलग की तलाश रहती आई है छत्तीसगढ़ी सिनेमा में वह दौर अब आ चुका है। नई-नई चीजें हो रही हैं। मुझे लगा कि फ़िल्म निर्माण की दिशा में वापस लौटने का उपयुक्त समय आ चुका। और अपने तरह की अलग हटकर फ़िल्म ‘आटा चक्की’ ज़ल्द आपके सामने होगी। फ़िल्म की कहानी पर से परतें हटाना अभी ठीक नहीं होगा। यू ट्यूब पर फ़िल्म के जो गाने आए हैं, सराहे जा रहे हैं। यही कहूंगा कि ‘आटा चक्की’ का कंटेंट ज़बरदस्त है और म्यूज़िक भी। आज की तारीख़ में युवा दर्शक सिल्वर स्क्रीन पर जो देखना चाहता है वह सब ‘आटा चक्की’ में है। फ़िल्म के गीत-संगीत पर प्रेम चंद्राकर जी का बेहतरीन काम देखने मिलेगा। प्रेम जी ने भूपेन्द्र साहू जी के साथ मेरी एक और फ़िल्म ‘मया दे दे मयारू- 2’ डायरेक्ट की है, जिसके पोस्ट प्रोडक्शन का काम चल रहा है।

प्रेम जी के अलावा ‘आटा चक्की’ के डायरेक्टर मंजूल ठाकुर की भी गिनती तो आपके पसंदीदा लोगों में होती है, यह ज़िक्र करने पर अलक राय कहते हैं- “इसमें कोई शक नहीं। मंजूल छत्तीसगढ़ की माटी में पले-बढ़े हैं और यहां के कल्चर की गहरी समझ रखते हैं। उसे साथ मैं एक और छत्तीसगढ़ी फ़िल्म ‘मोर मया ल तैं नई जानय’ कर रहा हूं।“

