मिसाल न्यूज़
रायपुर। विधानसभा में आज स्कूलों के युक्तियुक्तरण के मुद्दे पर स्कूली शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव को उन्हीं की पार्टी के विधायकों ने घेरा। भाजपा विधायक व्दय सुनील सोनी एवं राजेश मूणत ने आरोप लगाया कि राजधानी रायपुर की सरकारी स्कूलों का हाल काफी बुरा है।
प्रश्नकाल में विधायक सुनील सोनी का सवाल था कि स्कूल शिक्षा विभाग व्दारा कितनी शालाओं का युक्तियुक्तकरण विगत वर्ष में किया गया? युक्तिकरण के पश्चात् उसकी आधारभूत संरचनाओं रिक्त भूमि, रिक्त भवन इत्यादि के विषय में सरकार व्दारा क्या निर्णय लिए गए? स्कूल शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव कि तरफ से जवाब आया कि स्कूल शिक्षा विभाग व्दारा विगत वर्ष पूरे प्रदेश में 10 हजार 538 शालाओं का युक्तियुक्तकरण किया गया है। युक्तियुक्तकरण के पश्चात शालाओं की आधारभूत संरचनाओं रिक्त भूमि, रिक्त भवन इत्यादि को शासकीय कार्यों में आवश्यकतानुसार उपयोग किया जाएगा।
सुनील सोनी ने कहा कि सरकारी स्कूलों में लैब, कम्यप्यूटर एवं लाइब्रेरी जैसी सुविधाओं के दावे होते रहे हैं। युक्तियुक्तकरण से क्या कुछ बेहतर हुआ? मंत्री ने कहा कि पूर्व में जो सुविधाएं जी जाती रही थीं उसके साथ-साथ अब ई क्लासेस की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। सुनील सोनी ने कहा कि राजधानी रायपुर में मठपुरैना स्कूल, गनपत स्कूल एवं आर.डी. तिवारी स्कूल की बिल्डिंगें जर्जर हो चुकी हैं। क्या नये निर्माण कार्य लिए राशि जारी करेंगे? मंत्री ने कहा कि जो मांगें आती हैं, प्राथमिकता के आधार पर राशि जारी करते हैं। सुनील सोनी ने कहा कि प्राइमरी व मिडिल स्कूलों में छात्रों की संख्याएं बढ़ी हैं, लेकिन स्कूलों को दी जाने वाली अनुदान राशि कम है। क्या अनुदान राशि बढ़ाएंगे? मंत्री ने कहा कि अनुदान राशि फिक्स है।
भाजपा विधायक अजय चंद्राकर ने कहा कि टीचरों के युक्तियुक्तकरण की बात तो समझ में आती थी, स्कूलों का भी युक्तियुक्तकरण कर दिया गया। जो स्कूल खाली हुए, वहां जो परिसम्पत्तियां थीं उनका क्या उपयोग होगा? मंत्री ने कहा कि एक परिसर में चार स्कूल तक चलते थे। परिसम्पत्तियां अनुपयोगी नहीं हो जाएंगी।
भाजपा विधायक राजेश मूणत ने कहा कि रायपुर में 167 स्कूलों का युक्तियुक्तकरण किया गया। युक्तियुक्तकरण से पहले क्या किसी तरह का सर्वे कराया गया था? रायपुर में 3 करोड़ की लागत से बनी एक ऐसी स्कूल भी है जहां बैठने के लिए दरी तक नहीं थी। स्कूलों में न फर्नीचर हैं न पर्याप्त संख्या में शिक्षक।

