0 सलवा जुडूम के कारण दूसरे राज्यों में गए लोगों का नाम भी मतदाता सूची से उड़ा
मिसाल न्यूज़
रायपुर। विधानसभा में आज एसआईआर अंतर्गत छत्तीसगढ़ के 19 लाख से अधिक मतदाताओं का नाम मतदाता सूची से कट जाने का आरोप लगाते हुए विपक्ष ने इस पर स्थगन लाया। विपक्ष का आरोप रहा कि सलवा जुडूम के कारण जो लोग छत्तीसगढ़ से बाहर जाकर आंध्रप्रदेश और तेलंगाना में रहने लगे उनका भी नाम मतदाता सूची से उड़ गया। सभापति ने विषय भारत निर्वाचन आयोग से संबद्ध होने का हवाला देते हुए स्थगन पर चर्चा की अनुमति देने से इंकार कर दिया। विरोध में सारे कांग्रेस विधायक नारेबाजी करते हुए सदन से वाक आउट कर गए।
शून्यकाल के दौरान नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने कहा कि मतदाता सूचियों का विशेष गहन पुनरीक्षण-2026 (एस.आई.आर.) का कार्यक्रम पूर्ण हो जाने पर अर्हता तिथि के अनुसार वोटर लिस्ट का अंतिम प्रकाशन 21 फरवरी 2026 को हुआ। अंतिम प्रकाशन के अनुसार जीवित मतदाताओं के कुल 19 लाख 13 हजार 450 नाम काट दिये गए। इससे राज्य के मतदाताओं की संख्या 2 करोड़ 12 लाख 30 हजार 737 से घटकर 1 करोड़ 87 लाख 30 हजार 914 रह गई है। इसमें 2 लाख 34 हजार 994 नये मतदाता भी शामिल हैं। मतदाताओं की संख्या में कमी होने का प्रमुख कारण उनका अन्यत्र चले जाना अथवा अनुपस्थित होना बताया जा रहा है। यह कारण कतई विश्वसनीय नहीं है। जानबूझकर कतिपय वर्ग विशेष के मतदाताओं के नाम बड़ी संख्या में फार्म नं. 7 भरकर हटवाए या कटवाए गए हैं। बस्तर क्षेत्र मे 2005 में नक्सलवाद के खिलाफ शुरू हुए सलवा जुडूम के कारण 1 लाख से अधिक व्यक्ति राज्य के बाहर जाकर आंध्रप्रदेश और तेलंगाना के तीन सौ गांवों में रहने लगे थे। इनका भी नाम मतदाता सूची में शामिल नहीं हो सका। राज्य शासन अपने राज्य के मतदाताओं के संवैधानिक अधिकारों की संरक्षा करने के अपने कानूनी दायित्वों का पालन करने में पूरी तरह से विफल रही है। इस संबंध में विपक्ष की ओर से स्थगन प्रस्ताव दिया गया है, जिसे स्वीकार कर चर्चा कराएं।
भाजपा विधाय़क अजय चंद्राकर ने कहा कि एसआईआर में छत्तीसगढ़ सरकार की सीधे तौर पर कोई भूमिका नहीं थी। यह भारत निर्वाचन आयोग व्दारा संचालित है। किसी भी वैधानिक संस्था पर चर्चा की अनुमति इस सदन में नहीं दी जा सकती। कांग्रेस वो पार्टी है जो लोकसभा अध्यक्ष एवं मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ भी अविश्वास प्रस्ताव ले आती है। एसआईआर राज्य का विषय ही नहीं है इसलिए उस पर चर्चा करना निर्रथक है। एसआईआर जनहित का विषय नहीं है और इस पर कोई बात रिकॉर्ड में नहीं आनी चाहिए।
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि मैं लापता लोगों की बात कर रहा। अजय चंद्राकर के यह कहे जाने पर कि लापता हो या कोई भी हो, विपक्षी विधायकों ने शोर मचाना शुरु कर दिया। कांग्रेस विधायक श्रीमती संगीता सिन्हा ने कहा कि क्या लापता हुए लोगों के प्रति राज्य शासन का कोई दायित्व नहीं बनता। भाजपा विधायक धर्मजीत सिंह ने कहा कि विपक्ष के पास मुद्दा नहीं है।
कांग्रेस विधायक उमेश पटेल ने अजय चंद्राकर की बातों पर प्रश्न खड़ा करते हुए भारतीय जनता पार्टी का उल्लेख कर दिया। इस पर भाजपा विधायक सुशांत शुक्ला ने आपत्ति करते हुए कहा कि इसमें भारतीय जनता पार्टी कहां से आ गई। भाजपा विधायक किरण देव ने भी उमेश पटेल की बात पर आपत्ति की। मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि भाजपा कार्यकर्ताओं से उमेश जी डर रहे हैं।
सभापति धरमलाल कौशिक ने कहा कि विपक्ष ने जिस विषय पर स्थगन दिया है वह भारत निर्वाचन आयोग से संबद्ध है। इसे प्रस्तुत करने की अनुमति नहीं देता। चर्चा की अनुमति नहीं मिलने पर सारे कांग्रेस विधायक नारेबाजी करते हुए सदन से वाक आउट कर गए।

