‘तोर मयारू मोर मयारू’ से ‘7.1’ का पहला धमाका करने वाले नीरज वर्मा

● वो भी दिन आएगा जब यहां की कहानियां दूसरे उठाएंगे

मिसाल न्यूज़

छत्तीसगढ़ी सिनेमा के पोस्ट प्रोडक्शन की दुनिया में नीरज वर्मा बड़ा नाम हैं। अब तक फ़िल्मों में साउंड इफेक्ट के नाम पर 5.1 पर अपना हुनर दिखाते रहे नीरज ने फ़िल्म ‘तोर मयारू मोर मयारू’ के लिए पहली बार 7.1 पर काम किया है। इस तरह ‘तोर मयारू मोर मयारू’ 4 सितम्बर को पूरे छत्तीसगढ़ के सिंगल स्क्रीन व मल्टीप्लेक्स में रिलीज़ होने जा रही 7.1 वाली पहली फ़िल्म कहलाने जा रही है। पोस्ट प्रोडक्शन के अलावा डायरेक्शन व राइटिंग में भी हाथ आज़मा चुके नीरज वर्मा कहते हैं- “छत्तीसगढ़ी सिनेमा इस समय तरह-तरह के एक्सपेरिमेंट के दौर से गुज़र रहा है। नये-नये कंटेंट सामने आ रहे हैं। मुझे लगता है वह भी समय आएगा जब छत्तीसगढ़ी फ़िल्मों की कहानियां दूसरे लोग मांगेगे। जैसे साउथ की कहानियों की डिमांड दूसरी जगह होती हैं।“

‘मिसाल न्यूज़’ ने हाल ही में नीरज वर्मा से बातचीत की, जो शब्दशः यहां प्रस्तुत है-

0 ‘तोर मयारू मोर मयारू’ के 7.1 में जाने का माहौल कैसे बना…

00 हाल ही में मेरी लिखी फ़िल्म ‘मयारू भौजी- 2’ काफ़ी भीड़ खिंची। ‘मयारू भौजी- 2’ को लेकर पब्लिक का कैसा रिस्पांस है जानने मैं कितने ही मल्टीप्लेक्स गया। मल्टीप्लेक्स यानी साउंड का खेल। ऐसा नहीं कि टेक्नालॉजी के हिसाब से हमारा छत्तीसगढ़ी सिनेमा पीछे है। बस समय के साथ-साथ अपडेट होते रहने की ज़रूरत है। फ़िल्म मेकर मनीष मानिकपुरी व प्रोड्यूसर प्रणय गर्ग जब ‘तोर मयारू मोर मयारू’ के पोस्ट प्रोडक्शन का प्रपोज़ल लेकर मेरे पास आए तो मैंने उनसे कहा कि क्यों न हम कुछ कदम और आगे बढ़ें, इस फ़िल्म को 7.1 करके देखें। दोनों इसके लिए सहर्ष तैयार हो गए। मैंने 7.1 पर अपना 100% देने की कोशिश की है। कितना खरा उतर पाया यह दर्शक तय करेंगे।

0 कोई भी बड़ा नया काम करो तो रिज़ल्ट आने से पहले कुछ अलग तरह की लहरें मन में उठती हैं, सुकून पहुंचाने वाले हवा के झोंकों की आहट मिलती है…

00 हां यह सच है। सिंगल स्क्रीन व मल्टीप्लेक्स में ‘तोर मयारू मोर मयारू’ का ट्रेलर चल रहा है। लोगों के कॉल आ रहे हैं कि 7.1 का इफेक्ट ट्रेलर में महसूस हो रहा है।

0 7.1 से पहले आपने कितनी ही फ़िल्मों के लिए 5.1 किए होंगे, छत्तीसगढ़ी सिनेमा में ये 5.1 की शुरुआत कब हुई थी…

00 कौन सा साल था यह बता पाना तो मुश्किल है, लेकिन शुरुआती दौर में ‘तोर मया मा का जादू हे’, ‘मोर दुलरवा’ एवं ‘मनमोहनी’ ऐसी फ़िल्में थीं जो 5.1 पर तैयार हुई थीं।

0 आपका श्रेष्ठ स्टूडियो किसी छत्तीसगढ़ी फ़िल्म के लिए कितना मददगार हो पाता है…

00 पूरा। प्रोड्यूसर-डायरेक्टर फ़िल्म का रॉ मटेरियल लेकर आते हैं और फाइनल आउटपुट लेकर जाते हैं। फाइनल आउटपुट मिल जाने के बाद उनका आख़री बड़ा काम सेंसर करवाना बचा रहता है।

0 क्या 7.1 के लिए कोई स्पेशल ट्रेनिंग ली…

00 करत-करत अभ्यास से सब होता चला गया। ऑन लाइन कोर्स किया। मैं ही नहीं, हमारे छत्तीसगढ़ी सिनेमा में अलग-अलग विधा में कितने ही ऐसे नाम हैं जो करत-करत अभ्यास  से आज बड़े मूकाम पर पहुंच चुके हैं। यही तो हमारे छत्तीसगढ़ की ख़ासियत है।

0 अगली कौन सी फ़िल्म है जिसका 7.1 करने जा रहे हैं…

00 फ़िलहाल ‘नाचा’ है। आगे और प्रपोज़ल आएंगे तो सिलसिला जारी रहेगा।

0 डायरेक्शन में नीरज का काम क्यों आगे नहीं बढ़ा…

00 हां, 2012 में मैंने छत्तीसगढ़ी फ़िल्म ‘गोलमाल’ डायरेक्ट की थी। अभी भी डायरेक्शन की इच्छा है। देखें कब ऐसा सुअवसर सामने आता है।

0 ‘मयारू भौजी- 2’ से सफल राइटर की भी श्रेणी में आ गए। क्या राइटिंग में भी कुछ चल रहा है…

00 ‘मयारू भौजी- 2’ से पहले ‘मिस्टर मजनू’ मेरी ही लिखी हुई थी। प्रोड्यूसर-डायरेक्टर राज वर्मा के लिए हाल ही में फ़िल्म ‘राज तिलक’ लिखी है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *