कारवां (5 जुलाई 2026) ● दिल्ली से जानने की कोशिश, ये नकटी क्या है… ● माननीयों का बड़ा सुनहरा सपना… ● 325 वर्ग फुट में 8 से 10 रहें भी तो कैसे… ● राहुल गांधी को चाहिये छत्तीसगढ़ में नये लीडर… ● युवा नेता ने जता दिया ‘दुनिया गोल’… ● कौन है के.सी. का वो ख़ास… ● नकटी में घर टूटे तो रायपुर में रेस्ट हाउस… ● विपक्ष नहीं, सत्ता पक्ष की विशेष सामान्य सभा…

■ अनिरुद्ध दुबे

नकटी में हुई तोड़फोड़ न सिर्फ़ प्रदेश बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन चुकी है। दिल्ली में बैठे राष्ट्रीय स्तर के कुछ न्यूज़ चैनल वालों ने छत्तीसगढ़ के स्थानीय पत्रकारों से मोबाइल पर जानने की कोशिश की कि ये नकटी क्या मामला है। अब भी रहस्य बरक़रार है कि सांसद बृजमोहन अग्रवाल की गांव वालों तथा आला अफ़सरों के बीच मिटिंग के बाद भी नकटी में तोड़फोड़ में जो ज़रा भी देर नहीं लगाई गई, पर्दे के पीछे उसका सूत्रधार कौन है! सूत्रधार के बारे में जान रहे हैं तो कुछ बड़े नेता व कुछ आला अफ़सर। कहावत है- “दो पाटन के बीच में साबुत बचा न कोय।“ नकटी मामले में कुछ वैसा ही हो गया। मानकर चलिये कि बात निकली है तो फिर दूर तलक़ जाएगी।

नकटी- 2

माननीयों का बड़ा

सुनहरा सपना

नकटी के बारे में सोचने वालों ने बहुत दूर तक सोच रखा था। अंदर की ख़बर रखने वाले बताते हैं जब नकटी में विधायक कॉलोनी बनाने की बात इक्का-दुक्का लोगों के दिमाग में आई तो इसकी भनक ज़मीन से ज़ड़े विभाग यानी राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा को भी नहीं थी। नकटी की उस चारागाह वाली ज़मीन जिसमें कुछ लोगों ने अपना घर खड़ा कर लिया था और कितने ही लोगों ने बाउंड्रीवॉल बनाकर घेर दिया था को टारगेट में लेने की प्लानिंग काफ़ी पहले हो चुकी थी। माननीय कहलाने वाले कुछ विधायक पहले से ही नकटी की उस क़रीब 56 एकड़ ज़मीन में विधायक कॉलोनी बनाने के पक्षधर रहे हैं। ये दूरदर्शी विधायक जानते हैं कि नकटी की इस ज़मीन से माना एयरपोर्ट का रास्ता 7 से 8 मिनट का है। फिर एयरपोर्ट से लगकर अरबों की एयरो सिटी बनना प्रस्तावित है। एयरो सिटी बनाने की परिकल्पना भूपेश बघेल की सरकार के समय में गई थी। बताते हैं उसी प्रोजेक्ट को वर्तमान सरकार आगे बढ़ाने जा रही है। फिर नकटी नये व पुराने रायपुर के एकदम बीच का केन्द्र है। कुछ दूरदर्शी माननीय मौका मिलने पर आपस में बतिया लेते हैं-  “यार, कॉलोनी बने तो नकटी में ही बने।“

नकटी- 3

325 वर्ग फुट में

8 से 10 रहें

भी तो कैसे…

बरसात के इस मौसम में सूरज आकाश से जब ठीक तरह से झांका भी नहीं था, नकटी में हज़ार की संख्या में पुलिस वालों की मौजूदगी में तथाकथित अवैध घरों को गिराने की ताबड़तोड़ कार्यवाही शुरु हो गई। कार्यवाही तब तक चलती रही जब तक निशाने पर रहे नकटी के वह सारे घर नेस्तनाबूद नहीं हो गए। फिर प्रभावित परिवारों को नया रायपुर के सेक्टर 30 में हाउसिंग बोर्ड व्दारा निर्मित उन ईडब्लूएस फ्लैटों में ले जाकर बसाने की कोशिश की गई जो दो छोटे कमरों वाले हैं। पूरा फ्लैट क़रीब 325 वर्ग फुट में बना है। प्रभावित परिवारों में कुछ ऐसे भी हैं जिनकी संख्या 8 से 10 है। 8 से 10 संख्या वाला परिवार 325 वर्ग फुट वाले इस घर में गुजर बसर करे भी तो कैसे…

राहुल गांधी को चाहिये

छत्तीसगढ़ में नये लीडर

कांग्रेस प्रशिक्षण शिविर में अभनपुर पहुंचे राहुल गांधी ने कहा कि “छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की नई लीडरशिप जिलों से निकलेगी। अभी छत्तीसगढ़ में बड़े नेताओं की गिनती में 3-4 नाम ही आते हैं। नई लीडरशिप तैयार होनी चाहिए।“ राहुल गांधी ने कुछ ग़लत भी नहीं कहा। डॉ. चरणदास महंत एवं टी.एस. सिंहदेव जैसे नेता 70 पार कर चुके हैं। वहीं भूपेश बघेल 65 साल वाली लाइन क्रास करने को हैं। नई लीडरशिप में फिलहाल प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज, देवेन्द्र यादव एवं उमेश पटेल जैसे नेताओं का नाम ज़रूर सामने हैं, लेकिन अभी की राजनीति में दो-तीन बड़े चेहरों से कहां काम चलने वाला है।

युवा नेता ने जता

दिया ‘दुनिया गोल’

अभनपुर में हाल ही में हुआ कांग्रेस का प्रशिक्षण शिविर कांग्रेसियों के बीच कुछ खट्टी-मीठी यादें छोड़ गया। कांग्रेस का एक ऐसा युवा नेता जिसके बारे में बहुत से लोग मानते हैं कि उसका शारीरिक व राजनीतिक क़द दोनों बड़ा है, सुर्खियों में रहा। इस युवा नेता की शुरुआती राजनीतिक ट्रेनिंग राजधानी रायपुर के सिविल लाइन क्षेत्र से लगी ‘योगी राजनीतिक पाठशाला’ में हुई थी। जब राजनीति की यूनिव्हरसिटी चलाने वालों के दिन लद गए तो यह युवा नेता बुद्धिमता दिखाते हुए तेज तर्रार सीनियर नेता के केम्प में चला गया। फिर एक समय ऐसा आया कि वह ‘मोहन’ रूपी नेता का ख़ास कहलाया। जब ‘मोहन’ रूपी नेता की चमक थोड़ी फीकी पड़ी तो वह उस ‘दीपक’ की लौ के क़रीब आ गया जहां से इन दिनों बहुतेरे लोग अपनी राजनीति चमकाने में लगे हुए हैं। ससुरा ये टेक्नालॉजी जितनी बेहतरीन चीज है तो उतनी ख़राब भी। ‘दीपक’ के उजाले के बीच रहने वाले कुछ लोग ऐसी वाट्स अप चैटिंग देख लिए जिसकी गोपनीयता बरक़रार रहनी थी वह नहीं रह पाई। राजनीति काजल की कोठरी जो ठहरी! यहां दिमागरूपी गन में लोग कारतूस लोड करके समय का इंतज़ार करते बैठे रहते हैं। मौका मिला नहीं… कि बड़े लोगों के कानों में ज़हर घोलने में देर नहीं लगती!  कहावत है- “दुनिया गोल है।“ अब यह युवा नेता तेज तर्रार सीनियर नेता के केम्प का फिर से हिस्सा बन चुका है। कुछ लोग गलतफ़हमी पाले हुए थे कि चिंतन शिविर के दौरान राहुल जी से एयरपोर्ट में मिलने वालों में इस युवा नेता का पत्ता कट है। लेकिन युवा नेता ने दिल्ली में भी अपनी ज़मीन मजबूत कर रखी है। दिल्ली से संदेशा आ गया कि राहुल जी से एयरपोर्ट पर मिलने वालों में इस युवा नेता का भी नाम होगा। और एयरपोर्ट में बड़े नेताओं के साथ इस युवा नेता ने भी राहुल जी से हाथ मिलाया।

कौन है के.सी.

का वो ख़ास

कुछ नेता ऐसे भी होते हैं जो बड़े नेताओं से रिश्ते नाते वाले सुनहरे ताश जैसे पत्तों को छुपाकर रखते हैं। पत्तों के ओपन होने में ख़तरा है। टांग खिंचने वाले लोग जगह-जगह पर जो हैं। राजधानी रायपुर के ही युवावस्था को पार कर चुके एक नेता के बारे में कहा जाता है कि उनका कांग्रेस राष्ट्रीय महासचिव के.सी. वेणुगोपाल से मामला अच्छा जमा हुआ है। कांग्रेस के चिंतन शिविर में हिस्सा लेने वेणुगोपाल जी रायपुर-अभनपुर आए हुए थे। गुणा भाग में पारंगत वह नेता वेणुगोपाल जी के सामने कम से कम आया। वह जानता है अच्छे से मुलाक़ात के लिए तो दिल्ली है ही, फिर रायपुर में क्यों जोर लगाना और राजनीतिक गॉसिप में दिन भर लगे रहने वालों को बातचीत के लिए कोई नया सब्जेक्ट क्यों देना।

नकटी में घर टूटे तो

रायपुर में रेस्ट हाउस

बुलडोजर नकटी ही नहीं राजधानी रायपुर की ही एक और जगह पर चला। यह अलग बात है इसकी चर्चा ज़्यादा नहीं हो पाई। इसलिए कि यहां पर मामला किसी के घर टूटने जैसा नहीं था, बल्कि मजदूरों के लिए बने रेस्ट हाउस के ढहने का था। राजधानी रायपुर में पंडरी के पास पुरानी कृषि उपज मंडी परिसर में जो ज्वेलरी पार्क बनने जा रहा है वह भी कोई कम विवादों में नहीं। जो भाजपा सरकार ज्वेलरी पार्क बनवा रही है उसी पार्टी के दिग्गज विरोध पर उतर आए हैं। यह अलग बात है कि विरोध के मुद्दे अलग-अलग हैं। छत्तीसगढ़ सरकार के कृषि मंत्री रामविचार नेताम लगातार कहते आ रहे हैं कि “जगह कृषि मंडी की है। ज्वेलरी पार्क के लिए जितनी जगह ली जा रही है उतनी ही ज़मीन कृषि विभाग को कहीं और उपलब्ध कराएं। फिर शौक से ज्वेलरी पार्क बना लें।“ वहीं देवजी पटेल जो पूर्व में लगातार 3 बार विधायक रहे और कभी इसी कृषि उपज मंडी के अध्यक्ष भी रहे थे, उनका विरोध भी कोई कम नहीं। जब मजदूरों का रेस्ट हाउस तोड़ा जा रहा था, मौके पर पहुंचकर तोड़फोड़ करने वालों को देवजी भाई ने फटकार लगाई। बाद में उसी जगह पर पहुंचकर विधायक पुरंदर मिश्रा भी तोड़फोड़ करने वालों पर जमकर बरसे। देवजी भाई का मानना है कि 10 एकड़ ज़मीन के केवल 35 प्रतिशत हिस्से में जेम्स एंड ज्वेलरी पार्क बनाया जा रहा है, बाकी 65 प्रतिशत हिस्सा कमर्शियल उपयोग के लिए रखा गया है, जो कि पूरी तरह अवैध कार्य है।

जेम्स एंड ज्वेलरी पार्क पर भाजपा के बड़े नेता ही नहीं सराफा एसोसियेशन के लोग भी बंटे नज़र आ रहे हैं। छत्तीसगढ़ सराफा एसोसियेशन ने जहां रायपुर में बनने जा रहे इस पार्क पर खुशियां जताई है वहीं रायपुर सराफा एसोसियेशन शुरु से मांग करते आ रहा है कि पंडरी में जहां कभी बस स्टैंड हुआ करता था, उस खाली पड़ी जगह पर पार्क बने। ख़ैर अब तो पार्क के लिए टेंडर हो चुका। बनना तो उसी पुरानी मंडी वाली जगह पर ही है।

विपक्ष नहीं, सत्ता पक्ष

की विशेष सामान्य सभा

रायपुर नगर निगम की विशेष सामान्य सभा 6 जुलाई को होने जा रही है। इतिहास के पन्नों को पलटते हुए यदि जनहित से जुड़े मुद्दों पर केन्द्रित करते हुए बात करें तो अब तक देखने में यह आते रहा था कि नगर निगम में जो भी दल विपक्ष में होता वह सत्ता पक्ष के कुछ लोगों को विश्वास में लेते हुए बक़ायदा हस्ताक्षर अभियान चलाकर महापौर, सभापति तथा निगम कमिश्नर को विशेष सामान्य सभा बुलाने बाध्य करता था। इस बार रायपुर नगर में कुछ अनोख़ा नज़र आ रहा है। महापौर श्रीमती मीनल चौबे की तरफ से सभापति सूर्यकांत राठौर को विशेष सामान्य सभा बुलाने पत्र गया। उस पत्र के आधार पर ही तारीख़ घोषित हुई। इस विशेष सभा को लेकर बहुतों के मन में सवाल है कि कौन निशाने पर रहेगा! इसलिए कि सभा तो ख़ुद महापौर की मांग पर बुलाई गई है तो फिर शाब्दिक हमला कौन किस पर करेगा…

रायपुर नगर निगम के इतिहास में झांकें तो पहली बार विशेष सामान्य सभा की पहल तब हुई थी जब तरुण चटर्जी महापौर थे। तब तरुण चटर्जी भाजपा से महापौर थे और उस समय सारे मेयर इन कौंसिल सदस्य भी भाजपा के थे। रायपुर दक्षिण के वर्तमान विधायक सुनील सोनी की भूमिका उस समय सभापति की थी। जैसा कि तब भाजपा का बहुमत था, भाजपा के ही एक पार्षद सुरेश बजाज जिनकी उग्रता की चर्चा हर तरफ होती थी, पहली बार विशेष सामान्य सभा के लिए हस्ताक्षर अभियान चलाकर उन्होंने पार्षदों को यह बताने की कोशिश की थी कि यह भी हमारा एक बड़ा अधिकार है। बजाज व्दारा चलाए गए उस हस्ताक्षर अभियान में एमआईसी सदस्यों को छोड़कर अधिकांश भाजपा पार्षदों ने विशेष सभा वाले उस मांग पत्र पर दस्तख़त किए थे। साथ ही विपक्षी कांग्रेस पार्षदों ने भी। 1999 से 2004 की उस परिषद के समय में रायपुर नगर निगम में 3 बार विशेष सामान्य सभा हुई थी।

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