विधानसभा के मानसून सत्र का पहला दिन… पंडवानी को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने वाली तीजन बाई याद की गईं…

मिसाल न्यूज़

रायपुर। विधानसभा के मानसून सत्र के आज पहले दिन सदन में पद्म विभूषण से सम्मानित पंडवानी गायिका तीजन बाई के निधन पर शोक व्यक्त करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि दी गई तथा कला के क्षेत्र में उनके योगदान को याद किया गया।

विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने कहा कि 5 जुलाई 2026 को तीजन बाई का निधन हो गया। उनका बचपन संघर्षों से भरा रहा। बचपन में उन्हें पंडवानी की शिक्षा नाना बृजलाल से मिली। 13 साल की उम्र में उन्होंने लोगों के बीच पंडवानी की पहली प्रस्तुति दी थी। वे कापालिक शैली में पंडवानी की प्रस्तुति देती थीं। शुरुआत में उन्हें काफी विरोध का सामना करना पड़ा। उन्होंने पंडवानी को न सिर्फ राष्ट्रीय बल्कि अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिष्ठा दिलवाई। 1980 में वे भारत की सांस्कृतिक राजदूत रहीं। कई देशों की यात्रा करते हुए उन्होंने पंडवानी का प्रदर्शन किया। उन्हें 1988 में पद्मश्री, 2003 में पद्मभूषण एवं 2019 में पद्मविभूषण से सम्मानित किया गया।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि तीजन बाई के निधन से छत्तीसगढ़ ने अपनी लोक संस्कृति का एक अनमोल रत्न खो दिया। उनके जाने से कला एवं सांस्कृतिक जगत की अपूरणीय क्षति हुई है। तीजन बाई ने पंडवानी गायन की कापालिक शैली को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया और अपनी विलक्षण प्रतिभा से लोककला को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई। उनकी प्रस्तुतियों में गायन और अभिनय का अद्भुत समन्वय देखने को मिलता था। पात्रों का सजीव चित्रण, ओजपूर्ण वाणी और प्रभावशाली प्रस्तुति श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर देती थी। मुख्यमंत्री ने कहा कि तीजन बाई का जीवन संघर्ष, साधना और समर्पण का प्रेरक उदाहरण है। जिस दौर में महिलाओं की पंडवानी गायन में भागीदारी अत्यंत सीमित थी, उस समय उन्होंने सामाजिक रूढ़ियों को चुनौती देते हुए अपनी अलग पहचान बनाई और आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत बनीं। तीजन बाई ने एशिया, यूरोप सहित विश्व के अनेक देशों में अपनी प्रभावशाली प्रस्तुतियों के माध्यम से छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान को वैश्विक मंच पर स्थापित किया। उनके अद्वितीय योगदान के लिए उन्हें पद्मश्री, पद्मभूषण, संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार सहित अनेक राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय सम्मानों से सम्मानित किया गया। वर्ष 2019 में भारत सरकार ने उन्हें देश के दूसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्मविभूषण से अलंकृत किया। यह गौरव प्राप्त करने वाली वे छत्तीसगढ़ की एकमात्र विभूति हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु एवं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी डॉ. तीजन बाई के कला क्षेत्र में अतुलनीय योगदान का स्मरण करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। राज्योत्सव के अवसर पर रायपुर प्रवास पर आए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने डॉ. तीजन बाई के परिजनों से दूरभाष पर बातचीत कर उनका कुशलक्षेम जाना था।

नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने कहा कि छत्तीसगढ़ में ऐसा कौन व्यक्ति होगा जो तीजन बाई को नहीं जानता होगा। उनका अभिनय, उनकी आवाज हम सबके दिल में बसी हुई है। भूपेश बघेल से उनके किस्से सुनने को मिलते रहते हैं। उन्हें बुलाकर अपने क्षेत्र में सुनना सौभाग्य माना जाता था। उनेक गुणों को स्व. राजीव गांधी ने पहचाना था। 1988 में राजीव जी के समय उन्हें पद्मश्री, 2003 में अटल जी के समय में पद्मभूषण एवं 2019 में मोदी जी के कार्यकाल में पद्मविभूषण से सम्मानित किया गया। छत्तीसगढ़ राज्य की पहली व एकमात्र पद्मविभूषण से सम्मानित कलाकार थीं। इस सदन में पहली बार किसी पद्मविभूषण से सम्मानित कलाकार को आज हम श्रद्धांजलि दे रहे हैं। उनके नाम से पुरस्कार की घोषणा होनी चाहिए।

पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि तीजन बाई का जन्म पाटन ब्लाक के गनियारी गांव में हुआ था। वे पारधी समाज से थीं। पारधी समाज के लोगों का काम मुख्य रुप से चिड़िया का आखेट करना, चटाई बनाना, दातून बेचना एवं बैल पालना हुआ करता था। समाज के लोग ज्यादा शिक्षित नहीं हुआ करते थे। ज्यादातर परिवार बहुत गरीब हुआ करते थे। ऐसे माहौल से तीजन बाई जैसी महान शख्सियत निकलीं। उनकी पंडवानी सुनने हजारों की भीड़ इकट्ठी हुआ करती थी। उनका कोई मुकाबला नहीं था। उन्होंने पंडवानी लोक कला को मान दिलाया। छत्तीसगढ़ ने एक प्यारी बेटी खो दी।

संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल, संसदीय कार्य मंत्री केदार कश्यप एवं स्कूली शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव समेत विधायकगण कुंवर सिंह निषाद, किरण देव, अनुज शर्मा, श्रीमती अनिला भेड़िया, डोमनलाल कोर्सेवाड़ा व रिकेश सेन ने भी तीजन बाई को श्रद्धांजलि अर्पित की।

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