सक्ती प्लांट दुर्घटना पर विधानसभा में हंगामा… भूपेश ने कहा- “किसी और को बिकवाने के चक्कर में अनिल अग्रवाल के खिलाफ करवाई एफआईआर”

मिसाल न्यूज़

रायपुर। सक्ती स्थित प्लांट में बॉयलर गिरने से 25 लोगों की मौत का मामला आज विधानसभा में जमकर गूंजा। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने आरोप लगाया कि किसी अन्य व्यक्ति को प्लांट बिकवाने के मकसद से प्लांट के वर्तमान मालिक अनिल अग्रवाल के खिलाफ एफआईआर करवाई गई। सत्ता पक्ष ने बघेल की इस बात का जमकर विरोध किया। सरकार की नीयत पर सवाल खड़े करते हुए सारे कांग्रेस विधायक नारेबाजी करते हुए सदन से वाक आउट कर गए।

प्रश्नकाल में नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत का सवाल था कि जनवरी 2024 से मई 2026 की अवधि में प्रदेश में कितनी गंभीर प्रकृति की औद्योगिक दुर्घटनाएं हुईं? दुर्घटना का कारण क्या था, मृतकों की संख्या कितनी थी, मुआवजा राशि कितनी दी गई, दुर्घटनाओं के संबंध में किनके विरूद्ध क्या कार्यवाही की गई? दुर्घटना वाले उद्योगों का सेफ्टी ऑडिट कब-कब किसके किसके व्दारा किया गया? जांच के निष्कर्ष क्या रहे?

वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री लखनलाल देवांगन की ओर से जो जवाब आया उन पर डॉ. महंत ने और भी सवाल खड़े किए। डॉ. महंत ने कहा कि सक्ती में औद्योगिक संयंत्र में 25 लोगों की मौत हुई एवं 7 घायल हुए। सरकार व्दारा इस दुर्घटना के लिए दोषी लोगों की जो संख्या बताई जाती रही है वह सत्य नहीं है। मंत्री लखनलाल देवांगन ने कहा कि उस मामले में डभरा पुलिस थाने में उद्योग के निदेशक अनिल  अग्रवाल समेत अन्य लोगों के खिलाफ मामला दर्ज हुआ है। डॉ. महंत ने कहा कि सरकार अनिल अग्रवाल का नाम क्यों छिपाना चाहती है। विधानसभा की पुस्तिका में आए जवाब में तो उनके नाम का उल्लेख नहीं है। क्या इसलिए नहीं है कि कोरबा में भी उनका प्लांट है। अनिल अग्रवाल को पकड़ने क्या कदम उठाए गए हैं? मंत्री देवांगन ने कहा कि इस मामले में पुलिस विवेचना जारी है। महंत ने कहा कि विवेचना से मतलब कहीं लेन-देन से तो नहीं है! मंत्री ने कहा कि पुलिस मुस्तैदी से काम कर रही है।

कांग्रेस विधायक राम कुमार यादव ने कहा कि उद्योगपति खोजे नहीं मिल रहे हैं। गरीब को पीटकर अंदर कर दिया जाता है। दोषी लोग कब सलाखों के पीछे जाएंगे। मंत्री ने कहा कि मृतकों के परिजनों को प्रबंधन ने 35-35 लाख मुआवजा दिया है। केन्द्र सरकार की ओर से 2 लाख तथा छत्तीसगढ़ सरकार की ओर से 5 लाख मुआवजा दिया गया है।

पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सवाल खड़े करते हुए कहा कि पूर्व में कोरबा के वेदांता में हुए हादसे में 42 लोग मरे थे तब तो उद्योग के डायरेक्टर के खिलाफ एफआईआर नहीं हुआ था। बघेल की इस बात पर भाजपा विधायक अजय चंद्राकर ने आपत्ति करते हुए कहा कि इस तरह सदन में किसी का नाम लेकर चर्चा नहीं की जा सकती। बघेल ने कहा कि क्यों नहीं की जा सकती। साफ दिख रहा है कि किसी और को लाभ पहुंचाने एफआईआर किया जा रहा है। बघेल के इस कथन पर आपत्ति जताते हुए सत्ता पक्ष के विधायक शोर मचाने लगे।

विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने कहा कि व्यक्तिगत नाम लेकर चर्चा नहीं की जा सकती। भूपेश बघेल ने कहा कि एफआईआर में अनिल अग्रवाल का नाम है। फैक्ट्री किसी और को बिकवाने के लिए यह सब कार्रवाई की जा रही है। बघेल की इस बात पर सत्ता पक्ष की तरफ से फिर शोर शराबा होने लगा। जवाब में विपक्ष की तरफ से भी हल्ला होने लगा। दोनों तरफ से नारेबाजी होने लगी। मंत्री की तरफ से संतोषजनक जवाब नहीं आने की बात कहते हुए सारे कांग्रेस विधायक नारेबाजी करते हुए सदन से वाक आउट कर गए।

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