मिसाल न्यूज़
रायपुर। विधानसभा में आज रायपुर शहर के जल संकट को लेकर भाजपा विधायकगण अजय चंद्राकर, राजेश मूणत एवं सुनील सोनी ने अपनी ही सरकार को जमकर घेरा। चंद्राकर ने आरोप लगाया कि जल मिशन में स्मार्ट सिटी का पैसा लगाकर भारी करप्शन किया गया है। वहीं उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने स्पष्ट किया अमृत जल मिशन के तहत चौबीसों घंटे पानी देने का कोई प्रावधान नहीं है।
प्रश्नकाल में भाजपा विधायक अजय चंद्राकर का सवाल था कि रायपुर नगर निगम अंतर्गत अमृत मिशन कब लागू हुआ और कब कार्य पूर्ण सम्पादित हुआ? पूरे कार्य में कितनी लागत आई? इस योजना से निगम क्षेत्र में कितने प्रतिशत लोगों को पेयजल उपलब्ध हुआ? जल जीवन मिशन की भौतिक और वित्तीय उपलब्धि, कार्यपूर्णता की समयावधि क्या है? 15 जून 2026 की स्थिति में उक्त दोनों योजनाओं के क्रियान्वयन होने के बाद रायपुर निगम क्षेत्र के कितने प्रतिशत लोगों को नल से शुद्ध पेयजल 24 घण्टे उपलब्ध हो रहा है? यदि पूरी आबादी को पेयजल उपलब्ध नहीं हो रहा है तो उसके क्या कारण हैं? दोषी कौन है और उनके विरूद्ध क्या कार्यवाही की गई? वित्तीय वर्ष 2023-24, 2024-25, 2025-26 एवं 2026-27 (15 जून, 2026 की स्थिति) में रायपुर शहर अंतर्गत पानी टैंकर से पानी सप्लाई में कितनी राशि, किस मद से व्यय हुई? उपरोक्त योजनाओं के क्रियान्वयन के बाद भी टैंकर से पानी सप्लाई के क्या कारण हैं?
उप मुख्यमंत्री अरूण साव की ओर से जवाब आया कि रायपुर नगर निगम अंतर्गत अमृत मिशन योजना 2016 में प्रारंभ तथा 2025 में पूर्ण हुई। योजना के जल प्रदाय घटक के कार्यों को पूर्ण करने में कुल 4 अरब 27 करोड़ 37 लाख 23 हजार की लागत आई। इस योजना के तहत 20 वार्ड में निवासरत जनसंख्या को पूर्ण रूप से तथा 25 वार्ड में निवासरत जनसंख्या को आंशिक रूप से पेयजल उपलब्ध हुआ है। जल जीवन मिशन के तहत रायपुर नगर निगम में कोई भी कार्य स्वीकृत नहीं है। रायपुर नगर निगम व्दारा क्रियान्वित अमृत मिशन योजना में 24 घण्टे निरंतर जलापूर्ति का प्रावधान नहीं था। वर्तमान में जलागारों से सुबह व शाम जलापूर्ति की जाती है। रायपुर शहर में पेयजल व्यवस्था अमृत मिशन के अलावा अन्य योजनाओं, स्मार्ट सिटी मिशन, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के माध्यम से भी की गई है। वर्तमान में कुल 3 लाख 42 हजार मकानों में से कुल 2 लाख 21 हजार मकानों को नल के माध्यम से शुद्ध पेयजल की आपूर्ति की जा रही है। जनसंख्या के पृथक से आंकड़े उपलब्ध नहीं हैं। शहर के तीव्र विस्तार एवं निरंतर बढ़ती जनसंख्या के कारण सम्पूर्ण आबादी को पेयजल उपलब्ध कराना एक निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है। चूंकि ढांचागत विकास वित्तीय उपलब्धता पर निर्भर है, अतः शत-प्रतिशत क्षेत्र कवर न होने के लिए कोई विशिष्ट अधिकारी दोषी नहीं है। टैंकर सप्लाई हेतु वित्तीय वर्ष 2023-24 में 58.35 लाख, 2024-25 में 168.46 लाख, 2025-26 में 206.98 लाख तथा 2026-27 (15 जून 2026 की स्थिति में) में 211.54 लाख का व्यय जल संकट मद से किया गया है। शहर के क्षेत्रफल एवं जनसंख्या में वृद्धि के साथ-साथ भूजल स्तर में गिरावट आना इसका मुख्य कारण है।
अजय चंद्राकर ने कहा कि जल मिशन के कार्य से स्मार्ट सिटी को जोड़कर 158 करोड़ खर्च करते हुए भारी करप्शन किया गया है। रायपुर शहर के किसी भी वार्ड में 24 घंटे सातों दिन पानी नहीं मिल रहा है। मेरे हिसाब से रायपुर शहर में पेयजल आपूर्ति के लिए तकनीकी रूप से दक्ष विशेषज्ञ पदस्थ नहीं हैं।
सुनील सोनी ने कहा कि पूरी गर्मी में रायपुर शहर में जहां-जहां पानी की टंकियां थीं, टैंकर चलते नज़र आए। अमृत मिशन के पाइप को पुरानी राइजनिंग लाइन से जोड़ दिया गया। जहां टंकियां हैं वहां पानी नहीं है। आने वाले समय को लेकर क्या कार्य योजना है? उप मुख्यमंत्री ने कहा कि रायपुर में कुल 45 पानी टंकियां हैं। उनमें अमृत मिशन की 12 हैं। लाभांडी एवं फूंडहर में बनी टंकियों से अभी पानी देना शुरु नहीं हुआ है। सुनील सोनी ने कहा कि सवाल यह है कि जब चंगोराभाठा में पानी टंकी है वहां भक्त माता कर्मा वार्ड में टैंकर क्यों चल रहे हैं?
भाजपा विधायक राजेश मूणत ने कहा कि रायपुर की पेयजल समस्या गंभीर चर्चा का विषय बन चुकी है। हर घर तक पीने का पानी पहुंचाने क्या कोई कार्य योजना बनी है? उप मुख्यमंत्री ने कहा कि जहां तक चंगोराभाठा की बात है कुछ क्षेत्र बहुत दूर पर स्थित हैं, इसलिए वहां पाइप लाइन से पानी नहीं पहुंच पा रहा। हमने सभी नगर निगम कमिश्नरों एवं नगर पालिका के सीएमओ को पत्र लिखा है कि अपने शहर में पूर्णतः जल आपूर्ति के लिए कार्य योजना बनाएं। राजेश मूणत ने कहा कि रायपुर में 24 घंटे पानी देने के लिए 3 वार्डों तात्यापारा वार्ड, शहीद चूड़ामणी वार्ड एवं स्वामी आत्मानंद वार्ड को चिन्हित किया गया। इन क्षेत्रों में डबल पाइप लाइन बिछाई गई। इसके बाद भी 24 घंटे पानी की सप्लाई नहीं हो सकी। उप मुख्यमंत्री ने पुनः दोहराया कि चौबीसों घंटे पानी देने का अमृत मिशन में कोई प्रावधान नहीं है।

