मिसाल न्यूज़
रायपुर। विधानसभा में आज पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने आरोप लगाया कि फर्जी ग्राम सभा के प्रस्तावों के आधार पर ग्राम अल्दा में ‘बालाजी स्पंज एवं आयरन लिमिटेड’ तथा ग्राम देवरी-घुलघुल में ‘अग्रसेन स्टील एंड पावर प्राइवेट लिमिटेड’ को प्लांट लगाने की अनुमति दे दी गई। बघेल ने यह भी आरोप लगाया कि इस मामले में थाने में दोषी सरंपच, पंचायत सचिव एवं प्लांट मालिकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की जगह अज्ञात नाम से एफआईआर दर्ज की गई। बघेल ने समूचे मामले में वित्त एवं पर्यावरण मंत्री ओ.पी. चौधरी के सामने कई सवाल खड़े किए। लंबी चर्चा के बाद मंत्री के जवाबों से अंसतुष्ट सारे कांग्रेस विधायक सदन से वाक आउट कर गए।
प्रश्नकाल में भूपेश बघेल का सवाल था कि क्या यह सही है कि जनपद पंचायत तिल्दा के ग्राम अल्दा में ‘बालाजी स्पंज एवं आयरन लिमिटेड’ तथा ग्राम देवरी-घुलघुल में ‘अग्रसेन स्टील एंड पावर प्राइवेट लिमिटेड’ की स्थापना, विस्तार, पर्यावरण ए.ओ.सी. या भूमि आबंटन/डायवर्सन हेतु ग्रामसभा प्रस्ताव शासन को मिले? यदि हाँ, तो कम्पनियों के पक्ष में किस कार्य हेतु किस तिथि को प्रस्ताव प्राप्त हुए? क्या ग्राम अलदा की ग्राम सभा प्रस्ताव में जालसाजी की शिकायत पर सीईओ जनपद पंचायत तिल्दा तथा तहसीलदार की संयुक्त समिति ने जांच की? यदि हाँ, तो जांच प्रतिवेदन किस तिथि को सौंपा गया और उसमें क्या पाया गया? जांच के आधार पर 17 जून 2026 तक कम्पनियों के प्रबंधकों, संलिप्त अधिकारियों व दोषियों के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत एफआईआर क्यों दर्ज नहीं कराई गई? सरकार कूटरचित प्रस्तावों के आधार पर जारी समस्त स्वीकृतियां निरस्त कर दोषियों के विरूद्ध कब तक ठोस कार्रवाई करेगी?
वित्त एवं पर्यावरण मंत्री ओ.पी.चौधरी की ओर से जवाब आया कि मेसर्स बालाजी स्पंज एण्ड आयरन लिमिटेड ग्राम- अल्दा, जिला- रायपुर एवं मेसर्स अग्रसेन स्टील एण्ड पॉवर लिमिटेड ग्राम-देवरी-घुलघुल जिला-रायपुर व्दारा छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल में जल (प्रदूषण निवारण तथा नियंत्रण) अधिनियम 1974 एवं वायु (प्रदूषण निवारण तथा नियंत्रण) अधिनियम 1981 के तहत सम्मति प्राप्त करने हेतु आवेदन नहीं किया गया। ग्राम सभा का कोई भी प्रस्ताव छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल को प्राप्त नहीं हुआ है। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग से प्राप्त जानकारी अनुसार जनपद पंचायत तिल्दा के ग्राम अल्दा की ग्राम सभा प्रस्ताव में जालसाजी की शिकायत पर तत्कालीन मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जनपद पंचायत तिल्दा तथा तत्कालीन नायब तहसीलदार व तत्कालीन तहसीलदार तिल्दा नेवरा की तीन सदस्यीय संयुक्त समिति ने 6 जून 2025 को जांच की। उक्त जांच प्रतिवेदन 30 जून 2025 को कार्यालय अनुविभागीय अधिकारी राजस्व तिल्दा नेवरा को प्रेषित किया गया। जांच प्रतिवेदन अनुसार ग्राम सभा में अनापत्ति प्रमाण पत्र नहीं दिये जाने का प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित किये जाने तथा कार्यवाही पंजी में अंतिम दो लाईन किसके व्दारा लिखी गई है, इसकी जानकारी किसी को नहीं होने का उल्लेख है। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग से प्राप्त जानकारी अनुसार अनुविभागीय अधिकारी तिल्दा-नेवरा व्दारा ग्राम पंचायत अल्दा के प्राप्त जांच प्रतिवेदन के आधार पर अज्ञात आरोपियों के विरूद्ध तिल्दा नेवरा थाना में 22 जून 2026 को लिखित में रिपोर्ट दर्ज कराई गई। थाने में भारतीय न्याय संहिता की धारा 318 (4) के तहत प्रकरण दर्ज हुआ। भारत सरकार, पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय नई दिल्ली व्दारा पर्यावरणीय स्वीकृति जारी नहीं की गई है।
(सदन में आगे इस मसले पर कुछ इस तरह बहस चली)
भूपेश- जमीन का मामला है। राजस्व, पंचायत, उद्योग होते हुए अंतिम बात आपके पर्यावरण विभाग पर आती है। इसीलिए प्रश्न पर्यावरण मंत्री से है। आपके जवाब में कार्यवाही पंजी में अंतिम दो लाईन किसके व्दारा लिखी गई है, इसकी जानकारी किसी को नहीं होने का उल्लेख है। वास्तविकता यह है कि शिकायत ग्रामीणों की तरफ से हुई थी।
ओ.पी.- जैसा कि स्पष्ट है बहुत से विभागों की भूमिका है। पर्यावरण विभाग का दो स्टेज में इन्वालमेंट है। यह स्पष्ट हो चुका है कि कंपनी की तरफ से कोई आवेदन नहीं लगा था। ग्राम पंचायत व्दारा कोई प्रस्ताव नहीं दिया गया था। पंचायत विभाग से जानकारी मांगी गई तो ज्ञात हुआ, गलत तरीके से ग्राम पंचायत से प्रस्ताव पारित हुआ। 3 सदस्यीय कमेटी ने जांच की, फिर एफआईआर हुई।
भूपेश- 6 जून 2025 को जांच हुई। 22 जून 2026 को एफआईआर हुई। यानी एफआईआर में एक साल का समय लग गया। एफआईआर भी बिना नाम वाली है। अज्ञात के नाम से पुलिस विवेचना कर रही है। पंचायत का पंजीयन रजिस्टर सचिव के पास रहता है। सरपंच की देखरेख में। आप सरपंच व सचिव को क्यों बचा रहे हैं? फिर जिसे प्लांट लगाने की अनुमति मिली वही तो लाभार्थी है।
ओ.पी.- पुलिस विवेचना कर रही है। सरपंच हो या सचिव या फिर कोई तीसरा व्यक्ति दोषी पाया गया तो उसके खिलाफ कार्रवाई होगी।
भूपेश- क्या बालाजी स्पंज एवं आयरन लिमिटेड तथा अग्रसेन स्टील एंड पावर प्राइवेट लिमिटेड को मिली अनुमति को निरस्त करेंगे…
ओ.पी.- जमीन का आबंटन राजस्व व उद्योग विभाग से होता है।
भूपेश- सवाल वही है, क्या आबंटन निरस्त करेंगे…
(भूपेश बघेल व्दारा आबंटन निरस्त करने वा एफआईआर की मांग तीखे अंदाज़ में करने पर सत्ता पक्ष के लोगों ने उस पर आपत्ति की। सत्ता पक्ष व विपक्ष दोनों तरफ शोर शराबा होने लगा। नारे भी लगे।)
ओ.पी.- विष्णु देव साय सरकार किसी भी दोषी को नहीं बख्शने वाली…
भूपेश बघेल- जब हम आंदोलन किए तब कहीं जाकर एफआईआर हुई। मंत्री की तरफ से संतोषजनक जवाब नहीं आ रहा है। इसके विरोध में वाक आउट करते हैं।
(इसके साथ ही सारे कांग्रेस विधायक नारेबाजी करते हुए सदन से वाक आउट कर गए।)

