कारवां (26 जुलाई 2026) ● फिलहाल यूसीसी से ख़तरे में नहीं आदिवासी समुदाय… ● नकली मंगलसूत्र ही नहीं, नकली शादी भी… ● रायपुर में क्षमता से कई ज़्यादा कैदी, गोढ़ी में जेल कब बनेगी साहब… ● गोढ़ी में ये क्या, कीचड़ में भगवान… हे राम!… ● कर्मा विश्वविद्यालय के पद लाखों में बिकने के आरोप… ● फसल उगाने में जुटे टंकराम… ● स्मार्ट मीटर बड़ा दुख दीना…

■ अनिरुद्ध दुबे

मध्यप्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र में कांग्रेस के भारी विरोध के बीच समान नागरिक संहिता (यूसीसी) विधेयक ध्वनि मत से पारित हो गया। इस विधेयक के पारित होने के बाद मध्यप्रदेश में अब कोई भी एक से अधिक विवाह नहीं कर सकेगा। विवाह और तलाक का पंजीकरण अनिवार्य कर दिया गया है। लिव इन में रहना है तो उसके लिए भी पंजीकरण करवाना होगा। इस विधेयक के दायरे से मध्यप्रदेश के आदिवासी समुदाय को बाहर रखा गया है।

बात छत्तीसगढ़ की करें। छत्तीसगढ़ सरकार यह विधेयक दिसंबर में होने वाले विधानसभा के शीतकालीन सत्र में ला सकती है। छत्तीसगढ़ विधेयक का प्रारूप तैयार करने के लिए बनी उच्च स्तरीय की बैठक हाल ही में हुई। छत्तीसगढ़ में विधेयक लाने अभी तो दिल्ली दूर है, लेकिन मध्यप्रदेश के विधानसभा में इस विधेयक रखे जाने से पहले ही छत्तीसगढ़ में विपक्षियों की तरफ से शोर मचना शुरु हो गया। यह कहते हुए कि इस विधेयक के लागू होने से छत्तीसगढ़ में आदिवासियों की अस्मिता खतरे में पड़ जाएगी। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज जो ख़ुद आदिवासी समुदाय से हैं ने तरह-तरह की आशंकाएं जताई। भाजपा जिसकी सरकार है थोड़ा तो अपने भले बुरे का ज्ञान रखती है। छत्तीसगढ़ में सत्ता की चाबी उस सरगुजा व बस्तर से निकलती है जो आदिवासी बहुल हैं। 23 के विधानसभा चुनाव में सरगुजा से पूरी 14 की 14 एवं बस्तर में 12 में से 8 सीटें भाजपा को मिलीं। बस्तर व सरगुजा को छोड़कर वो अन्य इलाके भी जहां आदिवासी समुदाय के लोग रहते हैं वहां की भी अधिकांश सीटें सरकार बनाने भाजपा के लिए मददगार रहीं। ऐसे में यह माना जाना चाहिए कि मध्यप्रदेश की तरह छत्तीसगढ़ में भी आदिवासी समुदाय पर यूसीसी का बंधन नहीं रहेगा।

नकली मंगलसूत्र ही

नहीं, नकली शादी भी

पिछले दिनों हुए छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र में मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना पर कांग्रेस विधायक श्रीमती अनिला भेंडिया ने महिला बाल विकास व समाज कल्याण मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े को घेरा। अनिला भेंडिया ने आरोप लगाया कि “पिछले दिनों योजना के तहत सरकार व्दारा कराए गए सामूहिक विवाह में नकली मंगलसूत्र बांटे गए।“ एक अन्य कांग्रेस विधायक श्रीमती संगीता सिन्हा ने तो एक कदम और आगे बढ़ते हुए कहा कि “ऐसे भी मामले सामने आए,  दो साल या 15 महीने पहले जिनकी शादी हो चुकी है, वह लाभ के मक़सद से सामूहिक विवाह में फेरे लेने पहुंच गए।“

इस तरह के आरोप कोई आज नहीं पहले भी लगते रहे हैं। 2008 से 2013 के बीच जब भाजपा की सरकार थी विधानसभा में ही इससे मिलता-जुलता प्रसंग सामने आया था। तब के विपक्षी तत्कालीन कांग्रेस विधायक डॉ. शिव कुमार डहरिया ने आरोप लगाया था कि “कितने ही शादीशुदा लोग अनुचित फायदा लेते हुए मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह में फिर से फेरे लेने बैठ गए।“ डहरिया ने यह भी कहा था कि “विवाह स्थल पर कहीं पर ऐसा भी नज़ारा सामने आया कि दुल्हा बनकर बैठे किसी युवक को कोई बच्चा पुकार बैठा पापा-पापा। स्वाभाविक है वह बच्चा फेरे ले रहे उन दुल्हा-दुल्हन का ही रहा होगा। “

रायपुर में क्षमता से कई

ज़्यादा कैदी, गोढ़ी में

जेल कब बनेगी साहब

लोक निर्माण विभाग सचिव मुकेश कुमार बंसल ने प्रदेश के विभिन्न जेलों में निर्माणाधीन कार्यों की प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने पीडब्लूडी मुख्यालय ‘निर्माण भवन’ में आयोजित बैठक में जिलों के कार्यपालन अभियंताओं, जेल अधीक्षकों और ठेकेदारों को बेहतर समन्वय बनाकर कार्यों में तेजी लाते हुए उन्हें ज़ल्द पूर्ण करने के निर्देश दिए। जेल एवं सुधारात्मक सेवाओं के महानिदेशक हिमांशु गुप्ता और लोक निर्माण विभाग के प्रमुख अभियंता वी.के. भतपहरी भी बैठक में शामिल हुए। हिमांशु गुप्ता ने बैठक में कहा कि “जेलों में क्षमता से अधिक कैदी रह रहे हैं। नई बैरकों के निर्माण और मौजूदा सुविधाओं के विस्तार से राहत मिलेगी।“

मुकेश बंसल ने रायपुर केन्द्रीय जेल में पार्किंग शेड, पाठशाला शेड, मुलाकातियों-परिजनों के लिए शेड व शौचालय निर्माण कार्यों की समीक्षा की। जैसा कि हिमांशु गुप्ता ने स्वीकार किया कि जेलों में क्षमता से अधिक कैदी रह रहे, इसके बाद रायपुर की नई केन्द्रीय जेल कब बनेगी पर फिर सवाल उठ खड़ा हुआ है! रायपुर की सेंट्रल जेल अंग्रेजों के ज़माने की जेल है। समय-समय पर उसका विस्तार ज़रूर होता रहा, लेकिन आज तारीख़ में रायपुर जेल में क्षमता 1690 है और वहां 3 हजार से ज़्यादा कैदी निरुद्ध हैं। सवाल फिर वही खड़ा होता है कि नया रायपुर के पास गोढ़ी में जो नई जेल बनने वाली थी उसका क्या हुआ और इस पर शासन एवं प्रशासन की ओर से गहरी चुप्पी क्यों? 2019 में तय हुआ था कि गोढ़ी में 85 एकड़ ज़मीन पर नई जेल बनेगी, जहां 5 हज़ार कैदियों को रखने की क्षमता होगी। तब कि सरकार ने इस नई जेल के निर्माण के लिए बजट में 50 करोड़ का प्रावधान रखा था और पहली किस्त में 20 करोड़ जारी भी हो गए थे। जनवरी 2022 में तत्कालीन अपर मुख्य सचिव गृह (जेल) सुब्रत साहू ने प्रस्तावित जेल स्थल का निरीक्षण किया था और लोक निर्माण तथा राजस्व विभाग के अधिकारियों को इस विशेष जेल निर्माण के संबंध में एक सप्ताह के भीतर कार्य योजना तैयार करने के निर्देश दिए थे। सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट व्दारा समय-समय पर जेलों की स्थिति में सुधार लाने की बात कही जाती रही है। सवाल वही खड़ा है रायपुर में नई जेल कब?

गोढ़ी में ये क्या, कीचड़

में भगवान… हे राम!

बात गोढ़ी की निकल ही आई है तो फिर एक और विषय का ज़िक्र करते चलें। चंदखुरी स्थित प्राचीन कौशल्या माता मंदिर परिसर में स्थापित करने के लिए ग्वालियर से मंगवाई गई भगवान राम की विशाल मूर्ति लगभग चार महीनों से चंदखुरी के पास ही स्थित गोढ़ी गांव के एक खुले मैदान में लाकर रख दी गई थी। एक टेंट के नीचे पॉलिथिन में बांधकर रखी गई मूर्ति के आसपास बरसात के कारण कीचड़ हो गया था, जिस पर चंदखुरी व गोढ़ी में रहने वालों के भीतर भारी गुस्सा दिखा। नाराज़गी की ख़बर जब प्रशासन तक पहुंची तब मूर्ति की सुध ली गई। चंदखुरी व आसपास गांव के लोग कह रहे हैं “बिना देर किए इस मूर्ति को ससम्मान कौशल्या माता मंदिर में स्थापित करें, अन्यथा आंदोलन होगा।“ राम जी की यह नई प्रतिमा सरकार ने बनवाई है। प्रतिमा की स्थापना का मुहुरत भी सरकार को ही निकलवाना है।

कर्मा विश्वविद्यालय के पद

लाखों में बिकने के आरोप

कभी विद्याचरण शुक्ल एवं बाद में अजीत जोगी के क़रीबी रहे राजधानी रायपुर के एक उम्रदराज़ नेता किसी ज़माने में अपनी मित्र मंडली के बीच अक्सर कविता की ये चंद लाइनें कहा करते थे-

“समय समय की बात है

समय समय का जोग

लाखों में बिकने लगे हैं

दो कौड़ी के लोग”

एक तरफ जहां नीट परीक्षा का पेपर लीक होने पर दिल्ली में हाहाकार मचा रहा, वहीं बस्तर में शहीद महेन्द्र कर्मा विश्वविद्यालय में हुई शैक्षणिक पदों की भर्तियों पर दिग्गज भाजपा नेताओं ने ही आवाज़ बुलंद कर रखी है। जगदलपुर से दो बार के विधायक एवं सीनियर भाजपा नेता संतोष बाफना का आरोप है कि विश्वविद्यालय का एक- एक पद 20-20 लाख में बिका है। उनसे पहले पूर्व मंत्री एवं विधायक लता उसेंडी ने भी विधानसभा में भर्ती प्रक्रिया पर सवाल खड़े किये थे।

मीडिया के माध्यम से छनकर जानकारी सामने आई है कि  विश्वविद्यालय प्रशासन व्दारा मार्च 2026 में विज्ञापित विभिन्न विभागों के प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर और असिस्टेंट प्रोफेसर के पदों के लिए पात्र-अपात्र आवेदकों की सूची जारी की गई। चौंकाने वाली बात यह रही कि सूची में आवेदकों के नाम गायब हैं और गोपनीयता बरतते हुए केवल एप्लिकेशन आईडी दर्शाई गई है। सूची जारी होने के साथ ही भर्ती प्रक्रिया में घालमेल और गड़बड़ी का आरोप लगना शुरु हो गया। कॉमर्स, फिजिक्स, गणित, जूलॉजी, केमिस्ट्री, बॉटनी, सोशियोलॉजी, स्टैटिस्टिक्स, जियोलॉजी एवं इकोनॉमिक्स विषयों की जो सूची अपलोड की गई उसमें उम्मीदवारों के नाम छुपाए गए। जगदलपुर के चौक चौराहों में चर्चा यही है कि राज्य के किसी भी शासकीय विश्वविद्यालय में ऐसी कोई परंपरा नहीं रही है कि बिना नाम वाली सूची जारी हो।

फसल उगाने में

जुटे टंकराम…

17 जुलाई को विधानसभा का मानसून सत्र ख़त्म हुआ और राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा अपने खेत पहुंच गए। टंकराम ने बैल फांदकर खेत की जोताई करते हुए धान की बुआई की। उनकी जोताई करती हुई फोटो सोशल मीडिया में ख़ूब वायरल हुई है। टंकराम बहुमूखी प्रतिभा के धनी हैं। संगीत कला में पारंगत हैं। कभी हारमोनियम बजाते हुए छत्तीसगढ़ी लोक गीत गाते हुए वाला उनका वीडियो भी ख़ूब वायरल हुआ था। सक्रिय राजनीति में आने से पहले वे दो मंत्रियों के पीए रहे थे। इस तरह राजनीतिक व प्रशासनिक गुण तो पहले ही उनके रोम रोम में समा चुका है। राजनीति के गहरे जानकार लोग सच ही कहते हैं कि टंक जी के जीवन में कई रंग हैं। सात रंग के सपने उन्हें हमेशा जीवंत बनाए रखते हैं।

टंकराम जी की सामने आई तस्वीरें कभी किसी को उंगली उठाने का मौका नहीं देतीं। पीठ पीछे दुनिया वाले कुछ भी कहते रहें उससे क्या फ़र्क पड़ता है। कहां तो पिछले साल महिला बाल विकास व समाज कल्याण मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े की ऐसे ही बरसात के दिनों में आई एक फोटो पर सोशल मीडिया के जागरुक गुरुओं व छात्रों ने जमकर टीका टिप्पणी की थी। याद है मैडम की प्लास्टिक की कुर्सी पर बैठकर खेत में रोपा लगाते हुए फोटो…

स्मार्ट मीटर

बड़ा दुख दीना

स्मार्ट बिजली मीटर को लेकर पूरे प्रदेश में हाहाकार मचा है। कहां तो छह साल पहले छत्तीसगढ़ में बिजली बिल हाफ होने का आनंद मिला था और कहां अब बिजली बिल डबल-तिबल होने से दुख का पहाड़ टूट पड़ा है। बिजली बिल डबल-तिबल आने के बाद कितनों को ही ये लगा कि स्मार्ट मीटर में गड़बड़ी भी तो हो सकती है। जब ले-देकर कुछ लोग मीटर चेक कराने की हिम्मत जुटाए भी तो पता लगा कि जांच आवेदन के साथ सिंगल फेज मीटर के लिए पांच सौ और थ्री पेज मीटर के लिए हजार रुपए देना पड़ेगा। ये तो वही बात हो गई न दुबले को दो आषाढ़।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *