कारवां (2 अगस्त 2026) ● बेसरा की गिरफ़्तारी के बाद नहीं बचा कोई बड़ा नक्सली लीडर… ● स्कूलों में ये क्या, शेम..शेम…शेम… ● उलझन भरा ‘समन्वय’… ● नारे गढ़ने में माहिर कांग्रेसी… ● कंगना की बेबाक़ी से तोखन प्रभावित… ● संजू बाबा ही नहीं पूरे परिवार का रहा क्रेज़… ● बरसों से छाया हुआ है गोवा दारू का ज़ादू… ● भिलाई के बाद अब रायपुर-बिलासपुर नगर निगमों से नई कहानियां…

■ अनिरुद्ध दुबे

नक्सली संगठन सीपीआई (माओवादी) के पोलित ब्यूरो और केंद्रीय समिति में रहे 21 शीर्ष नेताओं में से एक मिसिर बेसरा की झारखंड में गिरफ़्तारी हुई। बेसरा के बाद अब पूरे भारतवर्ष में कोई भी बड़ा नक्सली लीडर नहीं बचा। मिसिर बेसरा की सक्रियता तो झारखंड में थी लेकिन बिहार, ओड़िशा एवं छत्तीसगढ़ से भी उसका गहरा संपर्क रहा था। बेसरा की गिरफ़्तारी के बाद अब देशव्यापी नक्सली सशस्त्र आंदोलन की कोई गुंजाइश हाल-फ़िलहाल बाकी नहीं रह गई है। 2007 में बेसरा की पहली गिरफ़्तारी हुई थी। 2009 में बिहार के लखीसराय कोर्ट परिसर में बड़ी संख्या में नक्सली हमला बोलकर मिसिर बेसरा को छुड़ा ले जाने में क़ामयाब हो गए थे। इसके बाद बेसरा 17 वर्षों तक सुरक्षा एजेंसियों को चकमा देता रहा। उस पर एक करोड़ से अधिक का इनाम था और 150 से अधिक मामले दर्ज थे।

इसे संयोग ही कहें कि उधर झारखंड में मिसिर बेसरा की गिरफ़्तारी हुई, इधर झारखंड में ही सक्रिय रहे 8 नक्सलियों ने छत्तीसगढ़ में बीजापुर पुलिस के सामने समर्पण कर दिया। समर्पण करने वालों में 5 महिलाएं एवं 3 पुरुष हैं। इन पर 49 लाख के इनाम थे।

स्कूलों में ये क्या,

शेम..शेम…शेम…

कुछ ही हफ़्ते पहले छत्तीसगढ़ का नया स्कूली सत्र शुरु हुआ। बीते सप्ताह स्कूलों से मन को झकझोर कर रख देने वाली 3 घटनाएं सामने आईं।

घटना- 1

अंबिकापुर से लगे ग्राम सरगवां स्थित एक नामी प्राइवेट स्कूल की एक शिक्षिका ने 8 वीं कक्षा के दो छात्रों के बीच हुए विवाद के बाद एक छात्र से कॉपी के पन्नों पर सौ बार हिन्दी व सौ बार अंग्रेज़ी में मां की गाली लिखवाई। यही नहीं शिक्षिका ने छात्र से उन गालियों वाले पन्नों पर मां-बाप का हस्ताक्षर कराकर लाने कहा। जब घर जाकर छात्र ने कॉपी अपने माता-पिता को दिखाई तो वे और परिवार के अन्य सदस्य सन्न रह गए।

घटना- 2

जांजगीर-चांपा जिले के बलौदा ब्लॉक के डोंगरी-काठापाली प्राथमिक स्कूल में पदस्थ एक शिक्षिका की सोने की बाली गुम हो गई। उसे शक हुआ कि बाली स्कूल से ही किसी ने गायब किया होगा। बाली खोजने उसने हवा में ऐसा ज़हरीला तीर चलाने की कोशिश की कि पूछो मत! वह लाल कपड़े और मौली में बंधा नारियल तथा दो तरह के चावल लेकर स्कूल पहुंची। एक-एक कर बच्चों से टोटके की सामग्री छुआई और कहा- “जिसने भी बाली ली है, चुपचाप ईमानदारी से लौटा दे, वरना उसके साथ बहुत बुरा होगा।“ इससे बच्चे सहम गए। बच्चों ने घर पहुंचकर घटना बताई, जिससे पूरे गांव में भारी आक्रोश है।

घटना- 3

जांजगीर जिले की डोंगाकोहरौद ग्राम पंचायत अंतर्गत शासकीय प्राथमिक शाला तेलीपारा से एक बेहद शर्मनाक कहानी सामने आई है। वहां के प्रधान पाठक ने स्कूल के मासूम बच्चों के साथ अश्लील हरकत की। प्रधान पाठक का पैंट ऊपर चढ़ाते हुए एक वीडियो भी वायरल हुआ,  जिसके बाद पूरे गांव में हंगामा मच गया। पुलिस ने प्रधान पाठक को हिरासत में ले लिया है।

उलझन भरा ‘समन्वय’

भाजपा के बारे में कहा जाता है कि वहां अनुशासन का कड़ा डंडा चलता है, लेकिन कांग्रेस में भी कैसी-कैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है वह तो उस पार्टी से जुड़े लोग ही जानते हैं।

छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी की ओर से निर्देश जारी हुआ है कि व्यक्तिगत धरना-प्रदर्शन, आंदोलन और अन्य राजनीतिक कार्यक्रमों से पहले संबंधित जिला कांग्रेस कमेटी अथवा प्रदेश संगठन से समन्वय स्थापित करें फिर अगला कदम बढ़ाएं। इस तरह के निर्देश से वे लोग ख़ुद को उलझाव में पा रहे हैं जो अपना राजनीतिक ग्राफ बढ़ाने में लगे रहे हैं और ढाई साल बाद होने वाले चुनाव को टारगेट में रखकर आगे बढ़ रहे हैं।

कॉफी हाऊस में दिन भर टिके रहने वाले कुछ कांग्रेसियों का कहना है कि “ऊपर वालों को समन्वय वाला यह दिमाग रायपुर के ही किसी महत्वाकांक्षी नेता ने दिया है। अब ऊपर वालों को कौन समझाए कि कुछ ऐसे सम-सामयिक मुद्दे होते हैं जिन पर तुरत-फुरत में आंदोलन का निर्णय लेना पड़ता है। समन्वय बनाने के फेर में कितनों की ही राजनीतिक गाड़ी की रफ़्तार धीमी पड़ सकती है।“

नारे गढ़ने में

माहिर कांग्रेसी

नये-नये नारे गढ़ने में तो कांग्रेस के लोगों की मास्टरी है। इन दिनों एक नया नारा चला हुआ है- “खाबो लाठी जाबो जेल, हमर नेता उमेश पटेल।“  कभी जब ढाई-ढाई साल वाला मामला चला था तब एक नारा बना था- “छत्तीसगढ़ डोल रहा है, बाबा बाबा बोल रहा है।“ बहरहाल कांग्रेस नेता अरुण मालाकार ने सोशल मीडिया पर पूर्व मंत्री उमेश पटेल को प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बनाने की मांग उठा दी, जो उन्हें भारी पड़ गई। प्रदेश कांग्रेस संगठन ने इसे अनुशासनहीनता मानते हुए मालाकार को कारण बताओ नोटिस थमा दिया है। नोटिस से कहीं कोई भय तो कायम नहीं हुआ, दूसरे कई कांग्रेस कार्यकर्ता ज़रूर मालाकार के समर्थन में सामने आ गए हैं। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज का कार्यकाल पूरा होने के बाद अटकलों का दौर शुरु हो गया है। कोई कहता है बैज बने रहेंगे, तो किसी का मानना है कि टी.एस. बाबा या उमेश पटेल में से कोई एक अगला प्रदेश अध्यक्ष होगा। कांग्रेस के भीतर ही कितने लोग एक दूसरे से सवाल करते नज़र आ जा रहे हैं कि पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल जो ख़ुद कभी प्रदेश अध्यक्ष रहे अब प्रदेश अध्यक्ष की कुर्सी पर किसको देखना चाह रहे हैं?

कंगना की बेबाक़ी

से तोखन प्रभावित

नीट पेपर लीक होने पर कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) का जो आंदोलन हुआ उसे लेकर मुंहफट एक्ट्रेस व भाजपा सांसद कंगना रनौत फूट पड़ीं। कंगना ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में ‘जेन-जी’ प्रदर्शनकारियों की भाषा और व्यवहार पर निशाना साधते हुए उन्हें ‘गटर जेनरेशन’ बताया।

आवास एवं शहरी कार्य राज्य मंत्री एवं छत्तीसगढ़ी परिवेश में पले-बढ़े नेता तोखन साहू कंगना रनौत की बेबाक़ी से काफ़ी प्रभावित हैं। हाल ही में दिल्ली में तोखन साहू कंगना रनौत से मिले और उन्हें शॉल भेंट की। कंगना की दबंगता से तो डॉ. रमन सिंह भी प्रभावित रहे हैं। डॉ. रमन सिंह के मुख्यमंत्रित्वकाल में उनके साथ कंगना की प्रचार करते हुए फोटो आज भी सोशल मीडिया में दिख जाती है।

संजू बाबा ही नहीं पूरे

परिवार का रहा क्रेज़

1 हज़ार करोड़ से ऊपर का बिजनेस कर चुकी फ़िल्म ‘धुरंधर’ में पाकिस्तानी पुलिस अफ़सर असलम चौधरी का किरदार निभाकर वाहवाही पाने वाले संजय दत्त के कद्रदानों की छत्तीसगढ़ में कमी नहीं। बिलासपुर के गुरुदेव अवस्थी (चुट्टू) हर साल 29 जुलाई को संजय दत्त का जन्म दिन मनाते हैं। गुरुदेव अवस्थी की अगुवाई में जन्म दिन पर संजय दत्त की तस्वीर के साथ जो जुलूस निकलता है वह वह भारी सुर्ख़ियों में रहता है। पूर्व में निकलते रहे जन्म दिन वाले जुलूस को सोशल मीडिया में लाखों लोग देख चुके हैं। इस साल संजय दत्त जन्मोत्सव की राह आसान नहीं थी। गुरुदेव ने संजय दत्त का जन्म दिन मनाने बिलासपुर एसडीएम के समक्ष आवेदन पेश किया था। एसडीएम ने यह कहते हुए आवेदन ख़ारिज कर दिया था कि “आवेदक ने पिछले साल मध्य नगरी चौक की मुख्य सड़क पर जो जश्न मनाया, उससे यातायात बुरी तरह ठप हो गया था जिससे कानून-व्यवस्था में व्यवधान पहुंचा।“ गुरु भी कहां मानने वाले थे, हाईकोर्ट की शरण में चले गये। हाईकोर्ट ने इस आदेश के साथ संजू बाबा का जन्म दिन मनाने की अनुमति दी कि समारोह बिलासपुर शहर से दूर निजी परिसर में मनेगा। बीच सड़क पर किसी भी तरह का व्यवधान या शोर-शराबा बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

छत्तीसगढ़ में न सिर्फ़ संजू बाबा बल्कि उनके पिता सुनील दत्त, मां नरगिस दत्त व नानी जद्दन बाई के भी क़द्रदान रहे हैं। इस विरासत का छत्तीसगढ़ से नाता कुछ नहीं तो लगभग 90 साल पुराना है। इतिहासकार व पुराने पत्रकार बताते हैं देश आज़ाद होने से कुछ ही समय पहले की बात रही होगी जब संजय दत्त की नानी जद्दन बाई ने रायपुर के रहमानिया चौक के पास संगीत की महफ़िल सजाई थी। छत्तीसगढ़ के पहले मुख्यमंत्री अजीत जोगी के शासनकाल में वित्त मंत्री रहे रामचंद सिंहदेव की नरगिस दत्त के प्रति जो दीवानगी थी वह जानने वाले जानते हैं। सिंहदेव साहब के घर के ड्राइंग रुम में नरगिस दत्त की तस्वीर लगी होती थी। सिंहदेव साहब ने शादी नहीं की थी। अभिनेता सुनील दत्त साहब जब राजनीति में आए और कांग्रेस का हिस्सा बने तो उनका रायपुर समेत छत्तीसगढ़ के अन्य स्थानों पर दौरा हुआ था। अपने राजनीतिक जीवनकाल में दत्त साहब छत्तीसगढ़ के कुछ सीनियर नेताओं के लगातार संपर्क में रहे थे।

बरसों से छाया हुआ

है गोवा दारू का ज़ादू

पंजाब के कपूरथला के पास नवां पिंड भट्ठा गांव में एक दिलचस्प मामले का ख़ुलासा हुआ। वहां शराब की तस्करी करने वाले चाचा-भतीजे बेडरूम व बाथरूम के नीचे 1,000 लीटर का अंडरग्राउंड स्टोरेज टैंकर बना रखे थे। शराब की बोतलें तेल के नोजिल की तरह पंप की मदद से भरते और बेचते थे। दोनों ने शराब सप्लाई के लिए फर्श के नीचे पाइप लाइन तक बिछा रखी थी। पुलिस ने पिछले दिनों इस अवैध शराब फैक्टरी के बड़े नेटवर्क का भंडाफोड़ किया।

ये तो बात रही पंजाब की, भला अपना छत्तीसगढ़ भी शराब के मामले में कब पीछे रहा है। 2004 से 2006 के बीच में छत्तीसगढ़ ब्रेवरेज़ कार्पोरेशन से जुड़े एक ज़िम्मेदार शख़्स ने स्वीकार किया था कि शराब की ख़पत के मामले में हमारा प्रदेश पूरे देश में तीसरे नंबर पर है। जिस तरह गीले व सूखे नशे के कारण पंजाब नंबर वन पर है तो हमारा छत्तीसगढ़ भी भला कहां पीछे रहने वाला! जब नशीले पदार्थों की लत व तस्करी पर ‘उड़ता पंजाब’ फ़िल्म आई तो ‘डोलता छत्तीसगढ़’ का जुमला भी चल पड़ा था। फिर छत्तीसगढ़ के मदिरा प्रेमियों का शराब के साथ ‘गोवा’ शब्द से गहरा प्रेम रहा है। राजधानी रायपुर के मठपुरैना क्षेत्र में हाल ही में पुलिस ने एक घर में छापेमारी की जहां छिपाकर रखी गई ढाई सौ क्वार्टर रॉयल गोवा व्हिस्की बरामद हुई। 229 क्वार्टर पांच पेटियों में थी, जबकि 20 क्वार्टर एक बाल्टी में छिपाकर गई थी। शराब की बोतलों पर ‘फॉर सेल इन गोवा ओनली’ अंकित था। यही नहीं आरंग-नवागांव मार्ग पर गोढ़ी ग्राम के पास एक गड्ढे में 30 पेटी शराब जो जप्त की गई उन पर केवल गोवा राज्य में विक्रय लिखा था। अब यह पड़ताल का विषय है कि गोवा में बेचने के लिए तैयार शराब रायपुर किस रास्ते से पहुंची!

शराब के विविध ब्रांडों की गहरी जानकारी रखने वाले एक शख़्स ने कॉफी हाउस की टेबल पर विविध लोगों के बीच ज्ञान बांटते हुए बताया कि रायपुर में ‘गोवा’ नाम का असर कोई आज का नहीं बरसों पुराना है। 2002 में रायपुर में गोवा स्पेशल के क्या कोई कम कद्रदान थे! मात्र 35 रुपये में गोवा का पौव्वा मिल जाता था और 50 रुपये में मैक्डावल नंबर वन का। जिसकी जेब हल्की रहे उसके लिए गोवा था और जिसकी थोड़ी वज़नदार रहे उसके लिए मैक्डावल नंबर वन!

भिलाई के बाद अब

रायपुर-बिलासपुर नगर

निगमों से नई कहानियां

भिलाई नगर निगम से लगातार वहां के निर्वाचित जन प्रतिनिधियों तथा निगम कमिश्नर के टकराव की कहानियां सामने आते रहने के बाद अब बिलासपुर व रायपुर नगर निगम से नये-नये किस्से निकलकर सामने आ रहे हैं। फिर बिलासपुर तो वह जगह है, उप मुख्यमंत्री यानी नगरीय निकाय विभाग के भारसाधक मंत्री अरुण साव जहां के रहवासी हैं।

पिछले दिनों बिलासपुर नगर निगम की मेयर इन कौंसिल की बैठक में उस समय माहौल तनावपूर्ण हो गया, जब एमआईसी सदस्य बंधु मौर्य ने निगम के इंजीनियरों को ‘मक्कार’ कह डाला। मौर्य ने कहा कि “मैंने कोई गाली नहीं दी, ‘मक्कार’ का मतलब कामचोर होता है। शहर में करोड़ों के काम महीनों से अधूरे पड़े हैं। अधिकांश इंजीनियर ख़ुद फील्ड में जाने के बजाय ठेकेदारों के भरोसे काम छोड़ देते हैं, जिससे काम में देरी होती है।“ नगर निगम कमिश्नर प्रकाश कुमार सर्वे ने मौर्य के इस कथन पर तुरंत आपत्ति की। निगम कमिश्नर ने कहा कि “किसी भी सरकारी कर्मचारी के खिलाफ ऐसी भाषा का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता।“

बात रायपुर की करें। रायपुर नगर निगम से जुड़ी विभिन्न समस्याओं के निराकरण एवं संस्था की आर्थिक मजबूती के लिए फंड उपलब्ध कराने जैसे महत्वपूर्ण मसले को लेकर महापौर श्रीमती मीनल चौबे के नेतृत्व में भाजपा पार्षदगण उप मुख्यमंत्री (नगरीय प्रशासन) अरुण साव से मिलने पहुंचे हुए थे। वह एक गाने की लाइन है न “दिल की बात कहीं लब पे न आ जाए…”- वैसा ही कुछ उस मुलाक़ात में हुआ। हर बात को गहराई से सोचने और बोलने वाले मेयर इन कौंसिल के एक सदस्य भावनाओं में बहते हुए कह गए कि “यह त्यौहारों का देश है। गणेश, दुर्गा, दिवाली और न जाने क्या-क्या त्यौहार साल भर लगे रहते हैं। न जाने कितने ही लोगों की उम्मीदें हमसे लगी रहती है। कोई तो रास्ता निकले जिससे हम लोगों की उम्मीदों को पूरी कर सकें।“ मंत्री जी ने सामने वाले की बात को ध्यान से सुना और मुस्कराए। साथ ही दूसरा विषय सामने ले आए और कहा कि “रायपुर नगर निगम को तो विकास कार्यों के लिए 1800 करोड़ दे चुके हैं, लेकिन 1800 करोड़ जैसा काम तो नज़र नहीं आता।“ मंत्री जी के दरबार से लौटने के बाद एक चिंतनशील पार्षद ने कहा कि “भई हमारी परिषद को आए तो डेढ़ साल ही हुए हैं। छह महीने तो किसी जगह पर व्यवस्थित होने में ही लग जाते हैं। इस तरह हमारा हुआ एक साल। हमारे आने से पहले तो एक साल महापौर एजाज़ ढेबर का कार्यकाल रहा था। यह भी समीक्षा हो जाए कि ढेबर के कार्यकाल में क्या-क्या हुआ था! फिर शासन से आया पैसा वार्डों में कहीं तो दिखे, जो कि नहीं दिख  रहा है।“

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