(2 अगस्त को विश्व मित्रता दिवस पर विशेष)
■ अनिल दुबे
एक दोस्ती ऐसी भी… जब दोस्ती केवल दो लोगों के बीच नहीं, बल्कि एक पूरे परिवार, एक विचार और एक सपने की हो जाती है। दोस्ती केवल साथ बैठकर हँसने-मुस्कुराने का नाम नहीं। सच्ची दोस्ती वह होती है, जो समय की कठिन परीक्षाओं में भी अडिग रहे। जो किसी व्यक्ति के जाने के बाद भी उसके सपनों को अपना सपना बना ले। जो रिश्तों की परिभाषा को मित्रता से आगे बढ़ाकर परिवार का रूप दे दे। मेरे जीवन में ऐसी ही एक अनोखी दोस्ती का नाम है—निर्मल पाण्डेय।
फिल्म “बैंडिट क्वीन” के बाद हमारी मुलाक़ात हुई और फिर यह रिश्ता केवल कलाकार और निर्देशक का नहीं रहा, समय के साथ यह दोस्ती विश्वास, सम्मान और आत्मीयता में बदल गया। जीवन के हर उतार-चढ़ाव में हमने एक-दूसरे का साथ निभाया। निर्मल जी केवल एक महान अभिनेता नहीं थे, बल्कि एक बेहद संवेदनशील, सहज और स्नेही इंसान भी थे। वर्ष 2010 में जब निर्मल जी हमें छोड़कर चले गए, तब लगा जैसे जीवन का एक महत्वपूर्ण अध्याय समाप्त हो गया हो। लेकिन तभी महसूस हुआ कि सच्चे मित्र कभी जाते नहीं, वे अपने सपनों और मूल्यों के रूप में हमारे भीतर जीवित रहते हैं। उसी भावना से निर्मल पाण्डेय स्मृति न्यास और निर्मल पाण्डेय स्मृति फिल्म फेस्टिवल की शुरुआत हुई, ताकि उनकी कला, उनके विचार और उनका सपना आने वाली पीढ़ियों तक पहुँच सके।
निर्मल पांडे के साथ अनिल दुबे
इस सफ़र में सबसे सुंदर बात यह रही कि यह दोस्ती केवल हम दोनों तक सीमित नहीं रही। यह मित्रता एक विशाल परिवार बन गई, जिसमें अनेक संवेदनशील और रचनात्मक साथी जुड़ते चले गए। इस परिवार में रोहिताश्व गौर, रेखा गौर, आमोद कृष्ण भट्ट, सुभाश्री भट्ट, जयंत देशमुख, कविता गाँधी, सीमा बिस्वास, रघुवीर यादव के अलावा और ऐसे अनेक मित्र हैं, जिन्होंने हर कदम पर स्नेह, विश्वास और सहयोग दिया। इन सभी ने यह साबित किया कि सच्ची मित्रता किसी स्वार्थ या अवसर की मोहताज नहीं होती; वह केवल अपनापन, विश्वास और एक साझा उद्देश्य चाहती है।
हम सभी अलग-अलग शहरों, अलग-अलग क्षेत्रों और अलग-अलग अनुभवों से जुड़े हैं, लेकिन हमें जोड़ता है एक साझा सपना। वह सपना जिसमें कला का सम्मान है, नए कलाकारों के उत्साहवर्धन का मिशन है और निर्मल जी की स्मृतियों को जीवंत बनाए रखने का अभियान है। आज जब हम विश्व मित्रता दिवस मना रहे हैं, तब रह-रहकर यह बात मन में आती है कि दोस्ती केवल साथ बिताए गए पलों का नाम नहीं, बल्कि निभाए गए वादों का नाम है। सच्चा मित्र वह है जो आपके सपनों को अपनी ज़िम्मेदारी समझे। आपकी अनुपस्थिति में भी आपके विचारों को जीवित रखे और हर परिस्थिति में आपका हाथ थामे रहे। यदि दोस्ती सच्ची हो तो वह समय, दूरी और मृत्यु जैसी सीमाओं को भी पार कर जाती है।
विश्व मित्रता दिवस 2026 पर मैं अपने उन सभी मित्रों को नमन करता हूँ, जिन्होंने इस सफ़र को केवल मेरा नहीं, बल्कि अपना सफ़र माना। आप सभी के कारण यह विश्वास और मजबूत हुआ है कि— “दोस्त बदल सकते हैं दुनिया की दिशा, क्योंकि सच्ची दोस्ती कभी केवल दो लोगों की नहीं होती; वह एक विचार, एक परिवार और एक विरासत बन जाती है।”
आप सभी मित्रों को विश्व मित्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ।
(लेखक निर्मल पाण्डेय स्मृति न्यास
के संस्थापक एवं फेस्टिवल डायरेक्टर हैं)

