कारवां (27 सितम्बर 2026) ● मैं तुलसी तेरे आंगन की… ● बिहार के बदले बिहार… ● किरण देव के विकल्प पर विचार… ● जोगी परिवार कांग्रेस में आए या नहीं, बंटी राय… ● चेम्बर बड़ा करो… ● महिला पार्षद का अभिषेक…

■ अनिरुद्ध दुबे

भाजपा राष्ट्रीय महासचिव स्मृति ईरानी पार्टी की छत्तीसगढ़ प्रदेश प्रभारी बनाई गई हैं। साथ ही सिद्धार्थ शंभू सह प्रभारी बनाए गए हैं। छत्तीसगढ़ भाजपा संगठन को पिछले कई महीनों से नये प्रदेश प्रभारी व सह प्रभारी का इंतज़ार था। इसलिए कि नितिन नबीन छत्तीसगढ़ के प्रभारी रहते हुए में ही पहले भाजपा राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष, फिर राष्ट्रीय पूर्णकालिक अध्यक्ष बने। उनके अध्यक्ष बनने के बाद से छत्तीसगढ़ भाजपा पिछले क़रीब 9 महीने से नये प्रभारी की बाट जोहती रही। फिर नितिन नबीन छत्तीसगढ़ के पहले सह प्रभारी, बाद में पूर्ण प्रभारी बने थे, उस हिसाब से छत्तीसगढ़ को प्रभारी के साथ सह प्रभारी भी चाहिए था।

स्मृति ईरानी को काफ़ी सोची समझी रणनीति के तहत छत्तीसगढ़ का प्रभारी बनाया गया है। बता दें वर्ष 2003 में भाजपा प्रवेश के साथ ही स्मृति का राजनीतिक सफ़र शुरू हो चुका था। तब- ‘क्योंकि सास भी कभी बहू थी’ सीरियल से स्मृति ‘तुलसी’ के किरदार में घर-घर पहचानी जा चुकी थीं। विशेषकर महिलाओं के मन में उनके सीरियल किरदार की गहरी छवि बन चुकी थी। 2003 में ही छत्तीसगढ़ राज्य का जब पहला विधानसभा चुनाव हुआ, स्मृति भाजपा प्रत्याशियों के प्रचार के लिए यहां आई हुईं थीं। 2003 से स्मृति के छत्तीसगढ़ आने का जो सिलसिला शुरु हुआ, फिर रुका नहीं। याद करें 2023 के विधानसभा चुनाव के समय में स्मृति ईरानी ने छत्तीसगढ़ के जिन क्षेत्रों में चुनावी सभाएं लीं उनका भाषण काफ़ी आक्रामक रहा था। एक चुनावी सभा में वे मंच से एक ऐसे नाम का भी ज़िक्र कर गईं थीं, जिस नाम का सार्वजिनक मंच से उल्लेख करने में अन्य नेता परहेज़ करते रहे थे। 23 के चुनाव में नितीन नबीन छत्तीसगढ़ के भाजपा सह प्रभारी थे। वे तभी समझ चुके थे कि यह नेत्री छत्तीसगढ़ की राजनीतिक पृष्ठभूमि की गहरी समझ रखती हैं। फिर नबीन के यह भी समझ आ चुका था कि छत्तीसगढ़ में कोई फायर ब्रांड नेता ही प्रभारी के रुप में बेहतर परफार्मेंस दे पाएगा। बहरहाल ‘तुलसी’ हफ्ते-दस दिन के भीतर प्रभारी बनकर छत्तीसगढ़ के ‘आंगन’ में कदम रखने जा रही हैं।

बिहार के बदले बिहार

भाजपा में किसी का प्रदेश सह प्रभारी होना भी कम मायने नहीं रखता। भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन छत्तीसगढ़ के प्रभारी रहने से पहले सह प्रभारी ही तो थे। सिद्धार्थ शंभू भाजपा के राष्ट्रीय मंत्री हैं। सवाल यह कि बिहार निवासी सिद्धार्थ शंभू को छत्तीसगढ़ सह प्रभारी क्यों चुना गया? बता दें नितीन नबीन भी बिहार से ही हैं। छत्तीसगढ़ की राजनीतिक राह पर कहां-कहां जटिलताएं हैं इसे नबीन बख़ूबी समझते हैं। बरसों से भाजपा में उतार-चढ़ाव देखते आ रहे कुछ नेताओं का मानना है कि छत्तीसगढ़ में 2023 की सरकार बनने के बाद की स्थिति में कहीं-कहीं पर निर्मित हो चुके ‘असंतुलन’ की जानकारी से नबीन भलीभांति अवगत हैं। यही वज़ह है कि छत्तीसगढ़ की असल तस्वीर पूरी ईमानदारी के साथ समय-समय पर उनके सामने रखी जाती रहे के लिए उन्हें अपने ही बिहार के सिद्धार्थ के अलावा दूसरा कोई और बेहतर नहीं लगा।

किरण देव के

विकल्प पर विचार

छत्तीसगढ़ भाजपा अध्यक्ष किरण देव क़रीब 2 महीने बाद बुधवार को नई दिल्ली से छत्तीसगढ़ लौटे। किरण देव गत 29 जुलाई को सड़क दुर्घटना के शिकार हुए थे। उनका इलाज़ पहले झांसी स्थित मेडिकल कॉलेज में चला, फिर गुड़गांव स्थित मेदांता अस्पताल में शिफ्ट किए गए। मेदांता में उनके हिप हेयर फ्रेक्चर का ऑपरेशन हुआ। पार्टी की हर गतिविधियों पर पैनी नज़र रखने वाले कुछ नेताओं का मानना है कि किरण देव भयंकर दौर से बचकर निकले हैं। पहले से उनके स्वास्थ्य में काफ़ी सुधार है, लेकिन अभी वे इस स्थिति में नहीं हैं कि यहां-वहां तूफानी दौरा कर सकें। डॉक्टरों ने फ़िलहाल भाग-दौड़ से बचे रहने की सलाह दे रखी है। उन्हें कम से कम छह महीने ख़ुद को संभाले रखने कहा गया है। यह बात दिल्ली के कर्ता-धर्ताओं के भी संज्ञान में है। अंदर की ख़बर रखने वाले बताते हैं कि किरण देव के स्वास्थ्य को लेकर चिंतित दिल्ली के नेताओं के बीच पिछले दिनों विचार विमर्श हुआ था कि नया छत्तीसगढ़ प्रदेश अध्यक्ष बनाया जाए या किसी कार्यकारी अध्यक्ष की नियुक्ति की जाए। हालांकि पूर्णकालिक प्रदेश अध्यक्ष या कार्यकारी अध्यक्ष पद को लेकर दिल्ली में फ़िलहाल कोई अंतिम निर्णय नही हुआ है, लेकिन बताया जाता है सुश्री लता उसेंडी, शिवरतन शर्मा एवं अमर अग्रवाल समेत अन्य दो-तीन नाम हैं, जिनके बारे में मोटे तौर पर विचार हुआ था। स्मृति ईरानी नई प्रदेश प्रभारी बनी हैं, को ध्यान में रखते हुए दिल्ली में यह बात भी सोचने में आई  कि क्या प्रदेश अध्यक्ष पद का भी दायित्व किसी वरिष्ठ महिला नेत्री को सौंपने जैसा समीकरण बिठाया जाए। किरण देव बस्तर से हैं और सुश्री लता उसेंडी भी वहीं से हैं। ‘बस्तर के बदले बस्तर’ जैसी बात भी दिल्ली वालों के दिमाग में आई थी। सरगुजा और बस्तर दोनों आदिवासी बहुल क्षेत्र हैं। जैसा कि पहले सरगुजा से विष्णु देव साय को मुख्यमंत्री व बस्तर से किरण देव को अध्यक्ष बनाकर संतुलन कायम किया गया, उस लिहाज़ से भी सुश्री लता उसेंडी के नाम पर विचार होने की बात पिछले दरवाज़े से सुनने मिलती रही है। फिर लता उसेंडी बस्तर की नेत्री होने के साथ आदिवासी समुदाय से भी हैं। यदि किसी नये अध्यक्ष के नाम को लेकर आगे भी विचार विमर्श का दौर चलते रहा तो हो सकता है लता जी का पड़ला भारी रहे।

जोगी परिवार कांग्रेस में

आए या नहीं, बंटी राय

छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस की अनुशासन कमेटी ने हाल ही में पार्टी से निष्कासित 36 नेताओं की वापसी के आवेदनों पर मंथन किया। बैठक में धनेन्द्र साहू, धनेश पाटिला, प्रतिमा चंद्राकर समेत कमेटी के अन्य सदस्यगण मौजूद रहे। कांग्रेस के बड़े से लेकर छोटे नेताओं तक के मन में जिज्ञासा थी कि निष्कासित पूर्व विधायक डॉ. रेणु जोगी, अमित जोगी, बृहस्पत सिंह, अनूप नाग व गोरेलाल बर्मन जैसे चर्चित नामों के आवेदनों पर क्या फ़ैसला होगा! बैठक में इन नामों पर कमेटी ने फ़ैसला लंबित रखा। राजनांदगांव और बस्तर के 15 लोगों का निष्कासन रद्द कर दिया गया। इनमें पार्षद से लेकर सामान्य कार्यकर्ता शामिल हैं।

बात जोगी परिवार की करें तो कॉफी हाउस में लंबा समय बिताते रहने वाले कुछ कांग्रेसी बताते हैं- दो दिग्गज नेताओं की राय बंट गई है। गरम दल वाले एक दिग्गज कई बार दोहरा चुके हैं कि मुझे निपटाने में लगे रहने वालों का पार्टी में स्वागत क्यों हो! नरम दल वाले दूसरे दिग्गज को किन्हीं बड़े चेहरों की वापसी में बुराई नहीं दिखती। फिर नरम दल वाले का क्षेत्र उन इलाकों से लगा हुआ है जहां जोगी परिवार की पकड़ रही है। तीसरे दिग्गज की बात करें। बस्तर तरफ के दिग्गज के बारे में बताया जा रहा है जोगी परिवार के पार्टी में प्रवेश होने या नहीं होने, दोनों ही मसले पर उनकी कोई बहुत ज़्यादा रुचि नहीं है। इस समय उनकी फ़िक्र सिर्फ़ इतनी है कि उनका स्थान सूरक्षित रहे। ये दूरदर्शी दिग्गज यह मानकर चल रहे हैं कि कौन जाने कब हवा का रुख़ बदल जाए और किसी फैक्टर के चलते सबसे बड़ी कुर्सी पर जाने की राह खुल जाए। अब लंबे क़द वाले चौथे दिग्गज की बात करें तो उन्हें फ़िलहाल किसी के आने-जाने से कोई अड़चन नहीं है। अपना सरगुजा ज़िंदाबाद।

चेम्बर बड़ा करो

निगम, मंडल व प्राधिकरण में पद मिले तो उसका अपना अलग ही क्रेज़ होता है। दवाओं के गहरे जानकार कोई शख़्स रायपुर स्थित दफ़्तर में कोई बड़ा पद पा गए हैं। दवा विशेषज्ञ की दवा सेवाएं कभी-कभी मुखिया भी ले लेते हैं। निकटता का लाभ दवा विशेषज्ञ को तो मिलना ही था। पदभार ग्रहण करने के बाद दवा विशेषज्ञ ने अपने ऊपर बैठे अध्यक्ष को सूपरशीट करने की कोशिश की, लेकिन वहीं के संबंधित सीईओ ने इस प्रयास को सफल नहीं होने दिया। अब दवा विशेषज्ञ ने जिद्द पकड़ ली है मेरे चेंबर यानी कक्ष को बड़ा करो।

महिला पार्षद

का अभिषेक

देवी देवताओं की प्रतिमाओं का तो दूध या जल से अभिषेक होता है, रायपुर की एक पार्षद ने विधि विधान से मंत्रोच्चारण के साथ अपना अभिषेक करा लिया। अभिषेक का वीडियो भी वायरल हुआ है। लोग अचंभित हैं, कोई नारी शक्ति ख़ुद का अभिषेक करवाती जो नज़र आई हैं। बताते हैं पार्षद जी का टारगेट काफ़ी बड़ा है। जब लक्ष्य बड़ा हो तो बड़े अनुष्ठान कराने ही पड़ते हैं। वैसे भी जिस ‘सफ़ेद हाउस’ से पार्षद जी का गहरा संबंध है उस कर्म भूमि में पिछले कुछ हफ्तों से कितने ही लोगों के दिल व दिमाग अदृश्य तूफान से जूझ रहे हैं। अच्छा यह है कि तूफान के बीच भी फ़िलहाल स्थिति शांतिपूर्ण एवं नियंत्रण में है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *