■ अनिरुद्ध दुबे
“कौव्वा कौव्वा…” गाने के साथ ही छत्तीसगढ़ जनता कांग्रेस के नेता अमित जोगी की लोकप्रियता में और चार चांद लग गए हैं। 1 अक्टूबर को जब “कौव्वा कौव्वा…” का टीज़र सामने आया, ये दो बोल सुन कितने ही लोगों को अमिताभ बच्चन स्टारर फ़िल्म ‘हम’ के गाने का बोल “जुम्मा… जुम्मा…” याद आ गया। वहां अमित जी, तो यहां भी अमित जी। 1 अक्टूबर को अमित ने फ़ेस बुक पर “कौव्वा कौव्वा…” की झलक भर पेश की थी और पूरे गाने के लिए कल का इंतज़ार करने को कहा था। अमित को भी लगा होगा कि “कौव्वा कौव्वा…” गीत जनता के बीच शेयर करने के लिए गांधी जयंती वाले दिन से अच्छा भला दूसरा और क्या दिन हो सकता है। अमित ने सोशल मीडिया पर स्पष्ट करते हुए कहा कि “मेरी माता जी ने “कौव्वा कौव्वा…” देख इसे डिलीट करने कहा। साथ ही माता जी ने यह भी कहा कि लोग तूम्हें पागल समझेंगे।” लेकिन अमित के कॉन्फिडेंस लेवल का भला क्या मुक़ाबला! जब ढिंचेक पूजा और एक्टर-नेता मनोज तिवारी की बेटी ‘बिग बॉस’ फ़ेम रीति तिवारी के गीत सुने जा सकते हैं तो अमित जोगी के क्यों नहीं…
स्मृति व शंभू
की नई ट्रेनिंग
स्मृति ईरानी के भाजपा छत्तीसगढ़ प्रभारी तथा सिद्धार्थ शंभू के सह प्रभारी बनने के बाद से यहां के पार्टी के लोगों को दोनों नेताओं के आगमन का बेसब्री से इंतज़ार है। माना जा रहा है कि दिल्ली में नये प्रभारियों व सह प्रभारियों को प्रशिक्षित करने के बाद ही उनके प्रभार वाले प्रदेश में भेजने की रणनीति अपनाई गई। इसी के चलते भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन ने विभिन्न प्रदेशों के सभी नये प्रभारियों, सह प्रभारियों की बैठक ली। दिल्ली से जुड़े सूत्र बताते हैं नितिन नबीन ने बैठक में साफ शब्दों में कहा कि “दिल्ली में दफ़्तरों में बैठकर राज्यों की राजनीति नहीं संभालना है। प्रभार वाले राज्यों का लगातार दौरा करते हुए वहां संगठन की नब्ज़ टटोलना है। बूथ तक पहुंचना है और कार्यकर्ताओं के बीच समय बिताना है। कार्यकर्ताओं से सीधे संवाद होते रहना ज़रूरी है।“ प्रभारियों और सह-प्रभारियों से यह भी कहा गया कि अपने राज्यों में बूथ स्तर तक में बैठकें सुनिश्चित करें। बैठकों में केवल संगठनात्मक चर्चा नहीं, बल्कि स्पष्ट लक्ष्य तय किए जाएं। जब भी बाद वाली बैठक हो उसमें पिछली हुई बैठक के लक्ष्यों की प्रगति की समीक्षा हो। पार्टी के लोगों के अलावा समाज के विभिन्न वर्गों के बीच भी संपर्क बढ़ाएं।
विधायक का ऐसा धक्का
कि सामने वाला लड़खड़ाया
पान ठेले-चाय दुकान में राजनीति के गहन चिंतन में उलझे रहने वाले तथाकथित बुद्धिजीवियों के श्रीमुख से कितने ही बार सुनने मिल जाता है कि सत्ता का नशा ‘मय’ के नशे से भी ज़्यादा ख़तरनाक है। ‘मय’ के नशे में ख़ुद के लड़खड़ाने-गिरने का डर रहता है, पर जिसे सत्ता का नशा सवार रहे तो वह दूसरे को गिराने में लग जाता है। सत्ता के नशे में चूर रहने वाला ख़ुद लड़खड़ाता नहीं, बल्कि उसके धक्के से दूसरे लड़खड़ा जाते हैं। ऐसा ही कुछ उदाहरण 2 अक्टूबर को राजधानी रायपुर में आयोजित एक कार्यक्रम में देखने को मिला। किसी कार्यक्रम में कोई मंत्री पहुंचें तो कभी-कभी झूमाझटकी जैसी स्थिति भी देखने को मिल जाती है। 2 अक्टूबर के उस कार्यक्रम में शिक्षा का प्रकाश फैलाने वाले मंत्री जी समेत बड़े क़द के कुछ नेता व निगम-मंडल के पदाधिकारी पहुंचे हुए थे। उस कार्यक्रम में एक विधायक जी को किसी निगम-मंडल के पदाधिकारी का मंत्री जी के आसपास होना रास नहीं आया। मौका पाकर विधायक जी ने निगम मंडल के पदाधिकारी को ऐसा जोर से धक्का लगाया कि वह जैसे-तैसे ख़ुद को संभाल पाया। यह अलग बात है कि ऐसे कुछ लोग जो उस दृश्य के गवाह रहे उनकी सहानुभूति धक्का खाने वाले के साथ थी न कि धक्का देने वाले के साथ।
कौन हैं रायपुर के
पांचवें विधायक…
एक बड़े राजनीतिक पार्टी के दफ़्तर में कोई नेता किसी से यह कहते दिखा कि रायपुर शहर को चार नहीं पांच विधायक चला रहे हैं। वैसे ही जैसा कि रमन सरकार के दौर में मंत्रियों की संख्या तो बारह हुआ करती थी, कोई न कोई तेरहवां अदृश्य मंत्री हो जाया करता था। चौंकिये मत रायपुर में विधानसभा सीटें 4 ही हैं और निर्वाचित होकर आए विधायकों की संख्या भी 4 ही है, लेकिन पांचवीं जो शख़्सियत है और जिस हिसाब से उनकी वर्किंग स्टाइल है, उन्हें अदृश्य पांचवां विधायक मान लिया गया है। पांचवीं अदृश्य शक्ति एक ही समय में कई-कई मोर्चे पर डटी रहती है। कभी बैठक के रुप में दफ़्तर में तो कभी दौरा करते हुए फील्ड में। चारों निर्वाचित विधायक जैसा कि रोज़ाना आम जनता से मिलते हैं, वैसे ही पांचवें अदृश्य विधायक भी सुबह आम जनता के लिए अपना दरवाज़ा खुला रखते हैं। कुल मिलाकर माज़रा यह है कि अदृश्य विधायक जी सदा ख़ुश, उनके बेहद क़रीबी लोग खुश और बड़ी संख्या में जनता भी ख़ुश!
टिकटों के बाद क्या
अब पदों की भी बोली
एक युवती व्दारा सत्तारुढ़ पार्टी के संगठन में बड़ा पद दिलाने के नाम पर एक युवक से 82 लाख रुपये ऐंठ लेने का मामला बिलासपुर के सरकंडा थाने में दर्ज हुआ है। झांसा देने वाली युवती गिरफ़्तार हो चुकी है। पुलिस सूत्रों के माध्यम से जो कहानी सामने आई वह इस प्रकार है- युवक की क़रीब एक साल पहले फ़ेसबुक के जरिए युवती से पहचान हुई थी। बातचीत में युवती ने युवक से कहा कि उसकी पार्टी में गहरी पकड़ है। बड़े-बड़े नेताओं के साथ उसका उठना बैठना है। बड़ी रकम ऊपर तक पहुंचाना पड़ेगा और बदले में उसे संगठन में बड़ा पद मिल जाएगा। झांसे में आ चुके युवक ने युवती को अलग-अलग किश्तों में क़रीब 82 लाख दे दिए। दिन, हफ्ते महीने बीत गए, पार्टी संगठन में जब पद नहीं मिला युवक ने अपना पैसा वापस मांगा। अब युवती के सुर बदल चुके थे। युवती ने कहा- “काहे का पैसा… जान प्यारी है तो पैसे की बात करना भूल जाओ।“ मरता क्या न करता, युवक को सरकंडा थाने की शरण में जाना पड़ा।
इस मामले के सामने आने के बाद से एक नई चर्चा का दौर शुरु हो गया है। क्या किसी पार्टी के संगठन में बड़े पद की कीमत अब 82 लाख से 1 करोड़ तक जा पहुंची है। अभी तक तो विभिन्न चुनावों के दौरान बड़ी पार्टियों की टिकट बिकने की चर्चाएं दबी ज़ुबान से सुनी जाती रही थीं, अब संगठन में बड़े पद की बोली को लेकर भी चर्चाओं का दौर शुरु हो गया है।
रायपुर नगर निगम
में नये चेहरों की इंट्री
रायपुर नगर निगम की प्रशासनिक ताकत बढ़ाने पर्दे के पीछे से बड़ी कोशिशें चल रही हैं। 2 अफ़सरों को अपर कमिश्नर तथा 1 को डिप्टी कमिश्नर बनाकर रायपुर नगर निगम भेजा गया है। इनमें से एक अपर कमिश्नर तो राजनांदगांव के नगर निगम कमिश्नर भी रहे हैं। चर्चा तो यह भी है कि मंझोले क़द के चार-पांच और अफ़सरों को रायपुर नगर निगम लाने की तैयारी है। हो सकता है 2026 की बिदाई एवं 2027 के स्वागत, इन तीन महीनों के बीच रायपुर नगर निगम में कुछ नये रंग चढ़ते और कुछ पुराने रंग उतरते दिखें। रायपुर नगर निगम की सूरत बदल देने की कोशिशें जारी हैं। परिवर्तन के दौर से गुज़र रहे रायपुर नगर निगम के कुछ नेता कभी-कभार आपस में यह कहते दिख जाते हैं कि “आगे चुनाव उनको लड़ना है या हमको…”
पार्टनर दिलाने वाला
ये कैसा गरबा ऑफर
जब राखी का त्यौहार क़रीब था तो राजधानी रायपुर के एक कैफे ने अनोखा ऑफर लाया था कि यदि रक्षा बंधन की शाम बहन को लेकर भाई कैफे पहुंचता है तो भाई के एक पेग के पीछे बहन का एक पेग फ्री। भारी विरोध के बाद उस ऑफर को हटाना पड़ा था। अब नवरात्रि नज़दीक है तो एक विचित्र किस्म का ऑफर पिछले दिनों सोशल मीडिया पर दौड़ते दिखा। बताते हैं सोशल मीडिया में वायरल हुए पोस्टर में दर्शाया गया कि नवरात्रि के दौरान होने वाले गरबा उत्सव के लिए ‘रेंट पार्टनर’ उपलब्ध है। उसमें सिल्वर, गोल्ड और प्लैटिनम नाम से अलग-अलग पैकेज और रेट दिए गए। सिल्वर पैकेज की कीमत 1000 रुपए बताई गई। दो घंटे के लिए मैचिंग परिधान में गरबा पार्टनर उपलब्ध कराने का भी ऑफर दिखा। चार घंटे के लिए पार्टनर के साथ रील्स और फोटो की सुविधा देने की बात लिखी नज़र आई। वहीं प्लैटिनम पैकेज में पूरे दिन पार्टनर उपलब्ध कराने के साथ किस करने संबंधी ऑफर तक दर्शाया गया। बताते हैं पुलिस तक ऐसे ऑफर की शिकायत पहुंच चुकी है।

