● कारवां (2 अक्टूबर 2022)- अमीरी व ग़रीबी के बीच की खाई

■ अनिरुद्ध दुबे

नागपुर में भारत विकास परिषद व्दारा आयोजित कार्यक्रम में खरी-खरी बात कहने के लिए मशहूर केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि “भारत गरीब लोगों का अमीर देश है। हम दुनिया की पांचवीं बड़ी अर्थव्यवस्था हैं। समृद्ध देश होने के बावजूद भारत गरीबी, भूखमरी, बेरोजगारी, जातिवाद, अस्पृश्यता एवं महंगाई का सामना कर रहा है। अमीरी और गरीबी के बीच की खाई गहरी हो रही है जिसे पाटने की ज़रूरत है।“ गडकरी ने देश के संदर्भ में यह बड़ी बात कही। उनका यह कथन सामने आने पर सहसा छत्तीसगढ़ और जोगी जी याद आ गए। छत्तीसगढ़ राज्य के प्रथम मुख्यमंत्री बनने के तूरंत बाद प्रतिष्ठित अख़बार दैनिक देशबन्धु के तत्कालीन संपादक सुनील कुमार जी ने जोगी जी का काफ़ी बड़ा इंटरव्यू लिया था। उस इंटरव्यू में हैडिंग गई थी ‘सबसे अमीर धरती, सबसे ग़रीब लोग।‘ इसके बाद से ‘अमीर धरती के ग़रीब लोग’ जोगी जी का स्लोगन ही बन गया था। जोगी जी के कहने का आशय यही रहा था कि छत्तीसगढ़ वन, खनिज संपदा, कृषि, विरासत, कला एवं संस्कृति हर दृष्टि से संपन्न है। यह सब होते हुए भी यहां के अधिकांश लोग ग़रीबी में जी रहे हैं। जोगी जी की सरकार जाने के बाद मुख्यमंत्री बने डॉ. रमन सिंह ने ‘समावेशी विकास’ का नारा दिया। अधिकांश लोगों के लिए यह समझ पाना मुश्किल होता था कि आखिर यह ‘समावेशी’ क्या है! अब भूपेश बघेल का राज है। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान अपनी प्रजा के लिए मामा हैं तो भूपेश बघेल छत्तीसगढ़ की जनता के लिए काका। भूपेश जी का दावा यही है कि किसानों की कर्ज़ माफी, उचित समर्थन मूल्य पर धान के साथ गोबर व गो मूत्र खरीदी जैसे सुधारवादी कदम उठाए जाने से छत्तीसगढ़ के अंतिम पंक्ति के लोगों का जीवन स्तर सुधरा है। राज्य बने 22 साल हो चुके, अमीरी व ग़रीबी की जो खाई थी वह कहां तक पट चुकी यह रिसर्च का विषय हो सकता है।

भाजपा जिलाध्यक्षों

के बदलने की बारी

संकेत यही मिल रहे हैं कि छत्तीसगढ़ में भाजपा के भीतर परिवर्तन का जो सैलाब आया हुआ है वह फिलहाल थमने वाला नहीं। प्रदेश अध्यक्ष एवं नेता प्रतिपक्ष के बाद अब कुछ जिले के अध्यक्ष भी बदले जाने की तैयारी है। इसका सबसे ज़्यादा असर रायपुर संभाग में दिख सकता है। अंदर की ख़बर रखने वालों के मुताबिक ज़मीनी कार्यकर्ता क्षेत्रीय संगठन महामंत्री अजय जामवाल के समक्ष लगातार अपनी भावनाएं व्यक्त करते रहे हैं कि परिवर्तन ऐसा हो कि ऊपर से लेकर नीचे तक दिखे। नीचे का मतलब जिले हैं। आशय यह कि ऐसे जिला अध्यक्षों को बदला जाए, जिन्होंने पद पर रहते हुए पूरी ज़िम्मेदारी के साथ काम नहीं किया या फिर जिनके खिलाफ़ काफ़ी शिकायतें हैं। 9 अक्टूबर को गंगरेल रिसॉर्ट में भाजपा के संकल्प शिविर होने की ख़बर है। इस बात की पूरी संभावना है कि डी. पुरंदेश्वरी की जगह नये भाजपा प्रदेश प्रभारी बने ओम माथुर संकल्प शिविर में शामिल होंगे और प्रभारी बनने के बाद यह उनका पहला छत्तीसगढ़ प्रवास होगा। संकल्प शिविर के बाद कुछ जिलों में परिवर्तन की पूरी संभावना है।

आशा पारेख का

छत्तीसगढ़ से रिश्ता

जानी-मानी फ़िल्म अभिनेत्री आशा पारेख को प्रतिष्ठित दादा साहब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। किसी जमाने में शम्मी कपूर, राजेश खन्ना एवं धर्मेन्द्र जैसे सितारों के साथ आशा पारेख की जोड़ी ने रूपहले पर्दे पर धूम मचा दी थी। ‘मैं तुलसी तेरे आंगन’ की फ़िल्म में आशा पारेख ने अपने अभिनय की अमिट छाप छोड़ी थी। यह बात कम लोग जानते हैं कि आशा पारेख का छत्तीसगढ़ से गहरा रिश्ता रहा है। बस्तर के वरिष्ठ आदिवासी नेता अरविंद नेताम एवं आशा पारेख के बीच पारिवारिक संबंध रहे हैं। अरविंद नेताम की पत्नी श्रीमती छबिला नेताम सन् 1996 में जब लोकसभा चुनाव लड़ीं थीं, उनके प्रचार के लिए आशा पारेख ख़ास तौर पर मुम्बई से बस्तर आई थीं। बस्तर में घूम-घूमकर उन्होंने जनता से अपील की थी कि “मेरी छबीला भाभी को ज़रूर वोट दीजिए।“ छबिला जी वह चुनाव जीती भी थीं। पंडित जवाहरलाल नेहरू के जमाने में राजनीति में कदम रखने वाले अरविंद नेताम, श्रीमती इंदिरा गांधी एवं पी.व्ही. नरसिंह राव के प्रधानमंत्रित्व काल में केन्द्र सरकार में मंत्री रहे थे। नेताम जी का जब कभी मुम्बई प्रवास होता है वह आशा पारेख जी से ज़रूर मुलाक़ात करते हैं। दो-तीन वर्ष पहले विधानसभा की चलती कार्यवाही के दौरान हास-परिहास के क्षणों में विधानसभा अध्यक्ष डॉ. चरणदास महंत ने कहा था कि “हिन्दी फ़िल्मों की एक सुप्रसिद्ध अभिनेत्री को छत्तीसगढ़ की एक ख़ास किस्म की अमारी भाजी बेहद पसंद है। अमारी भाजी से बना व्यंजन उनके लिए स्पेशली छत्तीसगढ़ से मुम्बई भेजा जाता है।“ डॉ. महंत ने बिना नाम लिए जिस अभिनेत्री का ज़िक्र किया था वह कोई और नहीं आशा पारेख ही हैं।

चुनाव और फ़िल्में

अगले साल तेलंगाना में जो विधानसभा चुनाव होना है उसे मद्देनज़र रखते हुए हैदराबाद के पूर्व शासक निजाम पर फ़िल्म बनाने की तैयारी चल रही है। कोई राजनीतिक पार्टी निजाम पर बनने जा रही फ़िल्म के माध्यम से वोट बैंक साधने का प्रयास कर सकती है। तेलंगाना की तरह छत्तीसगढ़ में भी फ़िल्म के माध्यम से मतदाताओं को आकर्षित करने की तैयारियां चल रही हैं। कुछ लोग पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी की बायोपिक पर काम शुरु कर चुके हैं। इनका प्रयास है कि दिसंबर 2023 में संभावित विधानसभा चुनाव से पहले जोगी जी पर बनी फ़िल्म आ जाए। झीरम घाटी नक्सली हमले में शहीद हुए वरिष्ठ आदिवासी कांग्रेस नेता महेन्द्र कर्मा पर फ़िल्म बनाने की घोषणा हुई थी, जिसके बारे में यही बताया गया था कि 2023 में इसका प्रदर्शन होगा। बताते हैं इस फ़िल्म पर अभी काम शुरु नहीं हो पाया है। अगले साल होने जा रहे चुनाव को टारगेट में रखते हुए ही इस फ़िल्म को बनाने पर विचार हो रहा था। क़रीब 105 घंटे तक बोरवेल के गहरे गड्ढे में फंसे रहकर जीवन और मौत के बीच लड़ाई लड़ने वाले बालक राहुल साहू पर भी फ़िल्म बनाने का ऐलान हो चुका है। इस फ़िल्म के निर्माण में छत्तीसगढ़ सरकार की रुचि होने की बात भी सामने आई है। माना यही जा रहा है कि राहुल पर अगर फ़िल्म बनती है तो वह अगले विधानसभा चुनाव से पहले सत्तारूढ़ दल की ओर से अपनी इस बड़ी उपलब्धि को प्रचारित करने का बड़ा माध्यम होगी। यह भी घोषणा हुई थी की इस फ़िल्म को ‘भूलन द मेज़’ फ़ेम डायरेक्टर मनोज वर्मा निर्देशित करेंगे और इसका प्रदर्शन 2023 में होगा। ख़बर यही है कि राहुल पर बनने वाली फ़िल्म पर अभी काम शुरु नहीं हुआ है।

रेव पार्टी

राजधानी रायपुर के किसी कोने-काने में कभी-कभार रेव पार्टी होने की ख़बरें सुनने मिल जाया करती थीं पर अब इसका क्रेज छत्तीसगढ़ के दूसरे शहरों में भी देखा जा रहा है। हाल ही में कोरबा के जमनीपाली स्थित एक हॉटल में रेव पार्टी करते कुछ लोग पकड़े गए। पुलिस ने रेव पार्टी में संलग्न लड़के-लड़कियों को तो पकड़ा ही, साथ में वहां एक महिला दलाल भी सपड़ में आई। पांच-छह साल पहले रायपुर में एक बड़ी रेव पार्टी होने का खुलासा हुआ था। कोरबा की तरह रायपुर की उस रेव पार्टी में भी एक महिला की अहम् भूमिका पाई गई थी। बताते हैं इवेंट की दुनिया से जुड़ी उस महिला के जलवे अब भी बरक़रार हैं। जिसके नाम में ही गहरा नशा हो तो फिर उसकी कार्य शैली कितनी जादुई होगी इसका सहज अंदाजा लगाया जा सकता है।

टंकी में शराब

नल से सप्लाई

वादे के बाद भी छत्तीसगढ़ में शराब बंदी नहीं होने का आरोप लगाते हुए भारतीय जनता पार्टी प्रदेश सरकार पर लगातार हमला बोल रही है। कुछ महीने पहले रायपुर के आउटर में नकली शराब का धंधा करते कुछ लोग पकड़ाए थे। रायगढ़ जिले के अंजोरीपाली गांव का एक शख़्स भी कोई कम नहीं निकला। उसने अपने घर की छत में एक टंकी बना रखी थी।  आसपास के लोग यही समझ रहे थे कि टंकी में पानी है। वास्तव में वह पानी नहीं शराब की टंकी थी। वहां महुआ से बनी शराब भरकर रखी जाती थी। उस टंकी से पाइप लाइन खींचकर रखी गई थी। शराब का कोई तलबग़ार वहां पहुंचता तो नल चालू कर शराब उपलब्ध करा दी जाती थी। पुलिस ने अपनी तरह के इस अनोखे शराब व्यवसायी को गिरफ्तार कर लिया है। वैसे छत्तीसगढ़ सरकार की ओर से शराब बंदी के लिए एक समिति बनी हुई है, जिसकी 3 साल में सिर्फ 3 बैठकें हुई हैं। यह समिति गुजरात, बिहार, नगालैंड, मिजोरम एवं केन्द्र शासित प्रदेश लक्ष्य दीप जाकर अध्ययन करने का इरादा रखती है, जहां कि पूर्ण शराब बंदी है।

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