मिसाल न्यूज़
रायपुर। रायपुर महापौर श्रीमती मीनल चौबे ने कहा कि राहुल गांधी आरोप लगाते रहे हैं कि चुनाव आयोग सत्ताधारी दल के दबाव में काम कर रहा है और यह एक ‘कठपुतली’ बन चुका है। हर बार राहुल गाँधी का झूठ अदालत से खारिज हुआ है। चुनाव आयोग की बैठक और संयुक्त प्रेस नोट से दूध का दूध और पानी का पानी हो गया। राहुल गांधी एक बार फिर गलत साबित हुए हैं।
एकात्म परिसर में आज प्रेस वार्ता में श्रीमती मीनल चौबे ने कहा कि कांग्रेस व अन्य विपक्षी दल सिर्फ झूठ, सनसनी और भ्रम फैलाने का काम कर रहे हैं। तीनों चुनाव आयुक्तों की सर्वसम्मति से लिए गए एसआईआर (SIR) समेत सभी फैसले निष्पक्ष हैं। निष्पक्ष चुनावी प्रक्रिया पर सवाल उठाना विपक्ष की हताशा का प्रतीक है। कैबिनेट सेक्रेटरी को लिखा पत्र किसी नीतिगत विषय या एसआईआर से संबंधित नहीं था; एक अंग्रेजी अखबार की रिपोर्ट कोरी कल्पना पर आधारित गढ़ी गई कहानी साबित हुई। फॉर्म-6 के घोषणा पत्र को सर्वोच्च न्यायालय पहले ही वैध ठहरा चुका है; विपक्ष की संवैधानिक संस्थाओं को बदनाम करने की साजिश फिर नाकाम रही।
महापौर ने कहा कि कांग्रेस अपने राजनीतिक स्वार्थ के लिए चुनाव आयोग, सुप्रीम कोर्ट और अन्य संवैधानिक संस्थाओं पर लगातार सवाल उठाकर उनकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने का प्रयास कर रही है। चुनाव आयोग की स्पष्टता के बाद कांग्रेस के आरोपों की वास्तविकता सामने आ गई है, ऐसे में कांग्रेस को संवैधानिक संस्थाओं पर बेबुनियाद आरोप लगाने के बजाय तथ्यों का सम्मान करना चाहिए। जब भी विपक्ष जनता की अदालत में पराजित होता है, वह अपनी खीझ और हताशा निकालने के लिए संवैधानिक संस्थाओं पर झूठे आरोप मढ़ने लगता है। निर्वाचन आयोग के स्पष्ट और कड़े वक्तव्य ने विपक्ष के सभी झूठ और दुर्भावनापूर्ण प्रोपेगेंडा की हवा निकाल दी है।
उन्होंने कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और दोनों चुनाव आयुक्त डॉ. एस. एस. संधू एवं डॉ. विवेक जोशी की बैठक हुई। उसके बाद एक जॉइंट प्रेस स्टेटमेंट चुनाव आयोग की ओर से जारी किया गया है जिसमें यह स्पष्ट कर दिया गया है कि देश भर में संचालित स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) सहित सभी प्रमुख निर्णय सर्वसम्मति से लिए गए हैं। 24 जून 2025 का मूल आदेश हो, या विभिन्न चरणों (12 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों व 19 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों) की समय-सारणी, सभी निर्णय पूरे आयोग की पूर्ण सहमति से लिए गए हैं। इतना ही नहीं सुप्रीम कोर्ट ने 27 मई 2026 को इस प्रक्रिया को कानूनी रूप से वैध ठहराया है। इसके बावजूद विपक्ष चुनाव आयोग की निष्पक्षता और प्रक्रियाओं पर झूठा कीचड़ उछालने का घिनौना काम कर रहा था।
महापौर ने कहा कि विपक्ष द्वारा एक तथाकथित पत्र को लेकर जो भ्रम फैलाया जा रहा था, आयोग ने साफ कर दिया है कि कैबिनेट सेक्रेटरी को लिखा गया पत्र आयोग की किसी नीति या आईटी प्रभाग से संबंधित नहीं था, बल्कि यह प्रतिनियुक्ति (डेपुटेशन) पर आए एक अधिकारी के प्रशासनिक कार्यप्रणाली तक सीमित आंतरिक मामला था। न तो यह निर्णय आयोग के किसी नीतिगत विषय के खिलाफ था और न ही एसआईआर (SIR) से जुड़ा हुआ था।
महापौर ने कहा कि एक अंग्रेजी दैनिक में प्रकाशित रिपोर्ट पूरी तरह से निराधार और काल्पनिक कहानी प्रतीत होती है। उस रिपोर्ट में न तो कोई ठोस तथ्य था और न ही सच्चाई। विपक्ष ने एक काल्पनिक और तथ्यहीन लेख को हथियार बनाकर देश के लोकतंत्र और स्वतंत्र चुनाव आयोग पर सवाल उठाने की नाकाम कोशिश की, जो अब पूरी तरह बेनकाब हो चुका है। देश की जनता भली-भांति जानती है कि जितने भी राज्यों में चुनाव संपन्न हुए हैं, वे पूरी तरह निष्पक्ष, पारदर्शी और स्वतंत्र रूप से संपन्न हुए हैं। कांग्रेस और उसके सहयोगी दल जब चुनाव हारते हैं, तो कभी ईवीएम पर, कभी संवैधानिक संस्थाओं पर तो कभी चुनाव आयोग पर झूठे आरोप लगाते हैं। चुनाव आयोग के इस पूर्ण और सर्वसम्मत बयान के बाद कांग्रेस नेतृत्व को देश और संवैधानिक संस्थाओं से बिना शर्त माफी मांगनी चाहिए।

