■ अनिरुद्ध दुबे
बस्तर में इन दिनों दो नक्सलियों के नाम काफ़ी चर्चा में हैं। एक महिला नक्सली लीडर रूपी रेड्डी जो पुलिस की गोलियों से मारी गई, दूसरा नंद कुमार जिसके बारे में समझ पाना मुश्किल हो रहा है कि ज़मीन निगल गई या आसमान खा गया। रूपी रेड्डी पहले बीड़ी बनाने का काम करती थी। 27 साल पहले तैयार बीड़ी को ठेकेदार के पास छोड़ कर आने की बात कहकर जो घर से निकली तो दोबारा नहीं लौटी। 27 साल बाद उसकी लाश उसके गांव पहुंची। तेलंगाना के गांव में हुए उसके उसका अंतिम संस्कार का वीडियो जमकर वायरल हो रहा है। बड़े जुलूस के साथ उसकी शवयात्रा निकली जिसमें बड़ी संख्या में लोग हिड़मा सॉग पर नाचते दिख रहे हैं। शव यात्रा में शामिल कितने ही लोगों के हाथों में लाल झंडे अलग थे। ऐसा ही कुछ नज़ारा बड़े नक्सली लीडर चलपति की शव यात्रा में देखने मिला था। तेलंगाना का चलपति भी बस्तर में ही पुलिस मुठभेड़ में मारा गया था।
बताते हैं रूपी हमेशा से जिद्दी किस्म की रही। बेवज़ह की जिद्द वाली आदत के कारण ही उसने आत्मसमर्पण का रास्ता नहीं चुना। नक्सल जीवनकाल में भी वह अपनी ही नक्सल बिरादरी के बीच कोई कम विवादों में नहीं रही थी। तेलुगु कैडर होने के कारण उसकी शादी नक्सली विजय रेड्डी से हुई थी। दोनों मानपुर एरिया कमेटी में थे। इस शादी को कोई ज़्यादा लंबा समय नहीं बीता था कि रूपी व आरकेबी डिवीजन के नक्सली कमलाकर का दिल एक दूसरे पर आ गया। इश्कबाजी की यह दास्तान जब बड़े नक्सली लीडरों के कानों तक पहुंची, उनके कान खड़े हो गए। दोनों को बुलाकर समझाया गया, जिसका कोई असर नहीं हुआ। तब बड़े नक्सली लीडरों ने पनिशमेंट करते हुए रूपी को मानपुर से हटाकर सन् 2012 में कांकेर जिले में आने वाले परतापुर एरिया कमेटी भेज दिया। बस्तर के जंगलों में ही उसका अंत हुआ।
माना यही जा रहा है बस्तर के जंगलों में घूम रहे शस्त्रधारी नक्सलियों का आंकड़ा 20 के भीतर सिमटकर रह गया है। दंतेवाड़ा जिले के पोटाली गांव के नक्सली नंद कुमार से जुड़ी कोई ख़बर समाने नहीं आ पा रही है। 5 लाख रुपए के इनामी नक्सली नंद कुमार से जुड़े सूत्र तलाशे जा रहे हैं। पोटाली गांव के लोग इंतज़ार कर रहे हैं कि नंद कुमार समर्पण कर सही रास्ते पर आ जाए। बताते हैं पत्नी की मौत के बाद नंद कुमार भीतर से पूरी तरह बिखर गया था। तन्हाई वाले उस दौर में वह ऐसे लोगों के सम्पर्क में आया जो नक्सल विचारधारा से जुड़े थे। फिर उसे बंदूक थामते देर नहीं लगी। रूपी की तरह वह भी जो घर से निकला फिर कभी नहीं लौटा। घर वालों ने कई बार संदेश भिजवाया कि लौट आओ, पर वह नहीं लौटा। परिवार के सदस्य व गांव के लोगों को भरोसा है कि औरों की तरह नंद कुमार भी हथियार सौंपकर मूल धारा में वापस लौट आएगा।
‘मुर्दा शहर’ में दूध-दवा
मिले न मिले
दारू ज़रूर मिलेगी
‘मुर्दा शहर’ नया रायपुर में दूध या दवा भले ही खोजे न मिले पर दारू मिलने की ज़बरदस्त व्यवस्था है। यानी बरबादी की चीजें बड़ी आसानी से उपलब्ध हैं। पुराने रायपुर शहर में अंगूर की इस बेटी के कद्रदानों की कमी नहीं रही है, फिर भला नया रायपुर इससे क्यों अछूता रह जाए! तभी तो मंत्रालय व इंद्रावती भवन के अफ़सरों व कर्मचारियों तक मैसेज पहुंचाने की कोशिश की गई कि नया रायपुर में हमारे ठिकाने पर आएं तो सही, शराब पर 10 परसेंट छूट देने के लिए हम जो बैठे हैं। नया रायपुर में दारूखाना चला रहे लोगों ने 10 परसेंट छूट वाला कागज़ मंत्रालय व इंद्रावती भवन के आसपास खड़ी गाड़ियों तक पहुंचाया। जहां बीयर का रेट 299 रुपए से शुरू होना बताया गया, वहीं शराब के बिल में 10 परसेंट और खाने के बिल में 20 परसेंट तक की छूट का ऑफर दिखाया गया।
फिर नया रायपुर से ही लगकर वीआईपी रोड और जोरा के आसपास वीकेंड में होने वाली लेट नाइट पार्टियां, बाप रे बाप! नाइट क्लब के बाहर नशे की हालत में छेड़छाड़, फिर इसके बाद ढिशुम-ढिशुम जैसी घटनाएं तो आम बात हो गई हैं। अब तो पिलाने वाली भी बाहर से आने लगी हैं। पिछले दिनों वायरल हुआ वीडियो इस बात की ख़ूब चुगली कर रहा है। जीई रोड सेरीखेड़ी स्थित किसी दारूखाने में हुए एक इवेंट की शान बढ़ाने ‘रोडीज़’ फ़ेम श्रेया कालरा और ऋषभ जायसवाल पहुंचे हुए थे। वायरल वीडियो में श्रेया कालरा ‘दारू पियो, ऐश करो’ कहते हुए सुनाई दे रही है और लोगों के गिलास में शराब छलका रही है।
अब नकली सिगरेट भी
बिलासपुर की सिविल लाइन थाना पुलिस ने एक गोदाम में छापा मारकर नकली ‘गोल्ड फ्लैक’ सिगरेट का बड़ा स्टॉक पकड़ा। जब्त सिगरेट की कीमत लगभग 4 लाख 74 हजार बताई जा रही है। नकली सिगरेट के क़ारोबारी की गिरफ़्तारी हुई है। छत्तीसगढ़ में मिलावटी बीयर व मिलावटी शराब की बात तो सुनने मिलते रही थी, लेकिन ये नकली सिगरेट का अनोखा किस्सा सामने आ गया है।
चलो नकली सिगरेट के बहाने पुराने दो किस्सों को फिर से याद कर लें। 2017-18 का दौर था। तब एक शराब ठेकेदार की ख़ूब मोनोपली थी और वह बीयर में एक लोकल ब्रांड को छोड़कर दूसरे किसी ब्रांड को टिकने नहीं देता था। 2018 में विधानसभा में तत्कालीन विपक्ष ने घटिया किस्म की शराब बिक्री के मुद्दे को उठाया था। एक दमदार विपक्षी नेता जो बाद में शिखर पर पहुंचे वह विधानसभा में ये तक कहने से नहीं चूके थे कि “तथाकथित बीयर पीने पर स्वाद, स्वाद जैसा नहीं लगता।“ 2018 के आख़री में सत्ता परिवर्तन हुआ तो बाद वाले विपक्ष के एक वरिष्ठ विधायक ने विधानसभा के ही भीतर शिकायत करते हुए कहा था कि “हमारे क्षेत्र में ख़ूब नकली शराब बिक रही है। शराबी शिकायत कर रहे हैं कि हलक से नीचे उतारने के बाद सही तरीके से पिकअप नहीं ले रहा है।“
ठोक दूं शहर में
जो दादा बनता…
इस कलमकार ने अपने पिछले ‘कारवां’ कॉलम में जेलों की हालत के बारे में लिखा था। जेलों के भीतर रहते हुए आरोपी क्या कर गुजर रहे हैं, इसकी एक और मिसाल सामने आई है। ये मिसाल भी ऐसी है कि अंडरवर्ल्ड पर बनी फ़िल्म ‘सत्या’ के गुलज़ार साहब के लिखे गीत- “गोली मार भेजे में… मामा… कल्लू मामा…” की याद दिला देती है।
बिलासपुर सेंट्रल जेल में बंद गोलीकांड के आरोपियों का रील वायरल हुआ है। आरोपियों से मिलने गए रिश्तेदार ने मुलाक़ाती कक्ष में वीडियो बनाकर उसे इंस्टाग्राम पर अपलोड कर दिया और कैप्शन लिखा- “जल्दी आओ मामा लोग…” वीडियो में “सीधा ठोक दूं शहर में जो दादा बनता…” गाने के साथ एक-एक कर सभी आरोपियों को दिखाया गया है। इसमें दिख रहा एक आरोपी नेता है, जिसने अक्टूबर 2025 में दूसरे अन्य नेता पर फायरिंग की थी। तब से वह और उसके साथी जेल में हैं। जेल के अंदर मोबाइल ले जाने की अनुमति नहीं होती। ऐसे में सोशल मीडिया में रील वायरल होने के बाद जेल प्रशासन की नींद उड़ गई है। जिस आईडी से रील अपलोड हुआ है, उस कैप्शन में “ज़ल्दी आओ मामा लोग…” लिखा है।
नगर निगम से तो
पहले भी गायब
होती रही हैं फाइलें
रायपुर नगर निगम के जोन 10 में आने वाले कुछ वार्डों की ज़मीनों की मार्ग संरचना से संबंधित फाइलों के गायब हो जाने से काफ़ी बवाल मचा हुआ है। इस पर जांच कमेटी की आई रिपोर्ट के आधार पर निगम कमिश्नर विश्वजीत ने जोन 10 के पूर्व कमिश्नर समेत 3 इंजीनियरों को सस्पेंड कर दिया है। दोषी अधिकारी-कर्मचारियों के खिलाफ़ विधिक कार्रवाई की सिफारिश भी हो सकती है। व्यवस्था यही है कि मार्ग संरचना की फाइलें निगम कमिश्नर के हस्ताक्षर से ग्राम तथा नगर निवेश विभाग जाती हैं, लेकिन जोन के कुछ अफ़सरों ने फाइलों को व्हाइट हाउस यानी निगम मुख्यालय पहुंचने ही नहीं दिया। ऐसा करने के पीछे मक़सद जमीन के क़ारोबारियों को फ़ायदा पहुंचाना बताया जा रहा है। फाइलों के गुम होने का मामला उजागर होने पर जोन 10 के वर्तमान कमिश्नर को बाकी जोन दफ़्तरों में पत्र भेजना पड़ा कि “कहीं भूलवश फाइलें आपके पास पहुंच गई हैं तो उन्हें सही जगह पर भिजवा दें।“ फाइलों के नहीं मिलने की स्थिति में जोन 10 कमिश्नर ने आगे एफआईआर कराने की बात मीडिया से कही है।
रायपुर नगर निगम से फाइलों के गुमने की ये कोई नई कहानी नहीं है। मार्ग संरचना से संबंधित ये फाइलें तो निगम कमिश्नर के पास पहुंची ही नहीं, क़रीब 4 साल पहले तो ऐसा हुआ था कि किसी निगम कमिश्नर के दस्तख़त से आगे बढ़ी किसी गंभीर विषय से जुड़ी फाइल नया रायपुर से ग़ायब हो गई थी। निगम मुख्यालय (व्हाइट हाउस) से उस फाइल के आगे बढ़ने के बाद तब के निगम कमिश्नर ने इतनी ज़हमत भी नहीं उठाई थी कि पता कर लेते कि वह फाइल कहां है! फाइल को ढूंढ निकलवाने का काम तब कुछ उन लोगों ने किया था जिनका कि जुड़ाव सीधे उस फाइल से था। उस फाइल पर भ्रम फैलाने की कोशिश में तब के एक मंत्री भी पीछे नहीं रहे थे। मंत्री जी ने कह दिया था कि “फाइल मुख्य सचिव के पास गई हुई है, उनकी (सीएस) अध्यक्षता वाली कमेटी ही उस पर निर्णय लेगी।“ वास्तविकता यह थी कि फाइल न तो मुख्य सचिव के पास गई थी और न ही उनकी अध्यक्षता वाली कमेटी को उस पर कोई निर्णय लेना था। नगर निगम में लुका छिपी का ख़ेल कोई आज से नहीं बरसों से खेला जाता रहा है। बस समय-समय पर पात्र बदलते रहते हैं।

