कारवां (10 मई 2026) ● दो बड़े के विभागों पर शक्ति का प्रभाव… ● संगीता सिन्हा- दर्शक दीर्घा से विधायक तक… ● प्रेस कांफ्रेंस स्थगित होने पर सवाल… ● सीमेन्ट फैक्ट्री से मुआवजे की आस में आंखें पथरा रही किसानों की… ● नये निगम कमिश्नर संबित मिश्रा का जशपुर लिंक… ● तलवार लहराने वाली टीचर… ● तंग रास्ते से गुजर रहे अभिनेता राहुल राय का छत्तीसगढ़ से वास्ता…

■ अनिरुद्ध दुबे

‘सुशासन तिहार’ के बीच 42 आईएएस अफ़सरों के विभागों में फेरबदल अपने आप में बड़ी प्रशासनिक सर्जरी है। सरकारी सेवा में आने के बाद अधिकांश बड़े अफ़सरों में प्रशासनिक के साथ राजनीतिक गुण समाते चले जाते हैं। कभी-कभी बड़े अफ़सरों का व्यवहार किसी नेता की तरह ही नज़र आने लगता है, जैसे- किसी काम के लिए ना नहीं बोलना और काम भी नहीं करना। इसी छत्तीसगढ़ में ऐसे भी अफ़सर देखने मिलते रहे हैं जो अपने विभाग के मंत्री को जैसा पाठ पढ़ाना हो पढ़ा देते हैं। थोड़ा और नीचे की तरफ झाकें तो कितनी ही नगर निगमों, पालिकाओं व पंचायतों से सुनने में आते रहा कि वहां बैठे नेता अपनी बात कहते रहे और वहां के सर्वोच्च पद पर बैठे अफ़सर जैसे चलना था चलते रहे।

रही बात हाल ही में हुई बड़ी प्रशासनिक सर्जरी की तो उसे अलग-अलग नज़रिये से देखा जा रहा है। प्रदेश में जिस पार्टी की तूती बोल रही है उसी से जुड़े कुछ मर्मज्ञ लोगों का आकलन है कि प्रशासनिक सर्जरी में दो बड़ी हस्तियों पर नकेल कसने कोई कसर बाकी नहीं रखी गई। ये वो दो लोग हैं जिनकी 2018 से 2023 के बीच फर्श पर रही पार्टी को अर्श तक पहुंचाने में अहम् भूमिका रही थी। उन दो बड़े लोगों के विभागों में सोच-समझकर ‘शक्ति’ को लाया गया है। मतलब ऐसी सीमा रेखा खींच दो। ज़्यादा लंबी दौड़ की गुंजाइश ही नहीं रहे।

संगीता सिन्हा- दर्शक
दीर्घा से विधायक तक

काफ़ी लंबे इंतज़ार के बाद छत्तीसगढ़ प्रदेश महिला कांग्रेस कार्यवाहक अध्यक्ष के नाम की घोषणा हो ही गई। श्रीमती संगीता सिन्हा प्रदेश कार्यवाहक अध्यक्ष की ज़िम्मेदारी संभालने जा रही हैं। प्रदेश महिला कांग्रेस अध्यक्ष के लिए श्रीमती संगीता सिन्हा के अलावा पूर्व विधायक छन्नी साहू के नाम की भी चर्चा थी। लक्ष्मी ध्रुव, ममता चंद्राकर तथा तूलिका कर्मा भी दौड़ में थीं। इन सबका दिल्ली में इंटरव्यू हुआ था। इस रेस में एक-एक कर 3 नाम छंट गए। आख़री में दो नाम संगीता सिन्हा व छन्नी साहू बचे रहे। संगीता सिन्हा को भूपेश बघेल गुट व छन्नी साहू को टी.एस. बाबा गुट का बताया जाता रहा है। पिछले दिनों महिला आरक्षण विधेयक को लेकर हुए विधानसभा के विशेष सत्र में जिस तरह श्रीमती संगीता सिन्हा काफ़ी मुखर रही थीं उससे चिंतन मनन में डूबे रहने वाले कुछ कांग्रेसियों को अंदाज़ा हो गया था कि मैडम को कुछ बड़ा मिलने जा रहा है।

2013 में श्रीमती सिन्हा के पति भैयालाल सिन्हा संजारी बालोद से विधायक बने थे। जिस दिन भैयालाल सिन्हा विधानसभा में विधायक पद की शपथ ले रहे थे उनकी पत्नी श्रीमती संगीता सिन्हा दर्शक दीर्घा से विधानसभा की कार्यवाही देख रही थीं। तब विधानसभा में मौजूद इक्का-दुक्का लोगों को ही पता था कि किसी नवनिर्वाचित विधायक की पत्नी अपने हमसफ़र को शपथ लेते देखने के लिए पहुंची हुई हैं। फिर धीरे-धीरे हुआ यह कि श्रीमती सिन्हा किचन की ज़िम्मेदारी निभाने के साथ-साथ पति के राजनीतिक क्रियाकलापों में भी हाथ बंटाने लगीं। पार्टी को श्रीमती सिन्हा की सक्रियता नज़र आने लगी थी। 2018 के चुनाव में कांग्रेस ने सीधे संजारी बालोद से श्रीमती सिन्हा को टिकट देना मुनासिब समझा। वे पार्टी की उम्मीदों पर खरी उतरती हुई चुनाव जीत गईं। चुनाव जीतने के बाद वे ज़मीनी स्तर पर पति से कई कदम आगे चलते हुए सक्रिय रहीं। 2023 के चुनाव में दोबारा चुनावी मैदान में उतरीं और जीतीं। दोबारा विधायक बनते तक श्रीमती सिन्हा का राजनीतिक क़द काफ़ी बड़ा हो चुका था। अब तो उनके पास एक ही समय में दो बड़े पद हैं।

प्रेस कांफ्रेंस स्थगित
होने पर सवाल…

श्रीमती संगीता सिन्हा को प्रदेश महिला कांग्रेस कार्यवाहक अध्यक्ष बने एकाध दिन ही हुए होंगे कि सूचना जारी हुई, वे राजधानी रायपुर के राजीव भवन में प्रेस कांफ्रेस लेंगी। इस सूचना के जारी होने के बाद दूसरी और सूचना जारी हुई कि प्रेस कांफ्रेंस स्थगित कर दी गई है। कांग्रेस हो या भाजपा प्रेस कांफ्रेस की घोषणा होने के बाद उसके स्थगित होने के उदाहरण बहुत ही कम देखने को मिलते रहे हैं। सवाल यह कि श्रीमती संगीता सिन्हा की प्रेस कांफ्रेंस स्थगित क्यों हुई? काफी हाउस के कोने में एक-दो कांग्रेसी बतियाते नज़र आए कि प्रेस कांफ्रेंस आहूत होने कि सूचना एक बड़े नेता जी के कानों तक पहुंची तो उन्होंने बेहद समझदारी वाले अंदाज़ में किसी को समझाया कि “अभी तो मैडम जी का पदभार ग्रहण नहीं हुआ है, ऐसे में प्रेस कांफ्रेंस कैसे!”

सीमेन्ट फैक्ट्री से मुआवजे
की आस में आंखें
पथरा रही किसानों की

सिमगा ब्लॉक में आने वाले कुछ गांवों का माहौल इन दिनों गरमाया हुआ है। वहां एक सीमेन्ट फैक्ट्री की स्थापना के समय उस क्षेत्र में निवासरत् किसानों जिनमें प्रमुख रूप आदिवासी किसान हैं कि सैकड़ों एकड़ भूमि का एग्रीमेंट कर भूमि अनुसार थोड़ी थोड़ी राशि प्रदान की गई थी। फैक्ट्री शुरु होने के बाद कंपनी प्रबंधन ने जिन किसानों की जमीन का एग्रीमेंट किया गया था उन्हें भुला दिया। अनुबंध में ग्रामीणों से बड़े बड़े वादे किये गए थे कि सीमेंट कंपनी में प्राथमिकता से वहां के ग्रामीणों को रोजगार का अवसर दिया जाएगा एवं ग्राम विकास हेतु सीमेंट फैक्ट्री समय-समय पर राशि प्रदान करेगी। 12 साल से अधिक का समय गुजर चुका, प्रभावित किसानों को ज़मीन की पूरी मुआवजा राशि नहीं मिल पाई। और न ही पुनर्वास की राशि। प्रभावित किसानों में हताशा छाई हुई है । किसान अब ख़ुद को ठगा महसूस कर रहे हैं। ऐसा नहीं है कि संबंधित क्षेत्र के नेताओं व अफ़सरों को यह बात मालूम नहीं है, मालूम है। लेकिन बड़ी मछली की तरफ कौन हाथ बढ़ाता है। इधर, फैक्ट्री प्रबंधन यूनिट पर यूनिट स्थापित करते जा रहा है। बताते हैं मुआवजा राशि नहीं मिलने एवं कर्ज़ के बोझ तले दबे होने के कारण ग्राम चंडी के एक व्यक्ति ने आत्महत्या कर ली।

नये निगम कमिश्नर
संबित मिश्रा का
जशपुर लिंक

2018 बैच के आईएएस संबित मिश्रा को राजधानी रायपुर के नगर निगम के कमिश्नर पद की ज़िम्मेदारी दी गई है। बीच में परंपरा चल पड़ी थी कि रायपुर जिला पंचायत का जो सीईओ होता उसे ही रायपुर नगर निगम कमिश्नर का दायित्व सौंप दिया जाता था। प्रभात मलिक, मयंक चतुर्वेदी, अबिनाश मिश्रा एवं विश्वदीप रायपुर जिला पंचायत सीईओ के ठीक बाद रायपुर नगर निगम कमिश्नर पद पर बिठाए गए। रायपुर अब पुलिस कमिश्नरी वाला शहर हो गया है। स्वाभाविक है अब आगे काफ़ी सोच समझकर ही रायपुर कलेक्टर व रायपुर नगर निगम कमिश्नर पद की ज़िम्मेदारी किसी को सौंपी जाएगी। जैसा कि पिछले काफ़ी दिनों से अटकलें लगाई जा रही थीं कि किसी कलेक्टर रैंक के अफ़सर को रायपुर नगर निगम कमिश्नर का दायित्व सौंपा जाएगा, वैसा ही हुआ। बीजापुर कलेक्टर संबित मिश्रा को रायपुर नगर निगम कमिश्नर का दायित्व सौंपा गया। ओड़िशा की राजधानी भुवनेश्वर के रहने वाले संबित मिश्रा वैसे तो छत्तीसगढ़ के अलग-अलग शहरों व कस्बों में सेवाएं दे चुके हैं, लेकिन उन्होंने कभी जशपुर जिला पंचायत सीईओ पद पर जो सेवाएं दी थी उसके तार कहीं न कहीं रायपुर नगर निगम कमिश्नर से जुड़े नज़र आ रहे हैं। जशपुर, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का क्षेत्र है। कुछ ऐसे अधिकारी रहे हैं जो जशपुर से होकर गुजरे हैं और उन पर सीएम हाउस की सीधी नज़र रही। उन सीधी नज़रों का कहीं न कहीं संबंध संबित मिश्रा से भी है। संबित मिश्रा की पत्नी प्रतिष्ठा ममगाईं बेमेतरा कलेक्टर हैं। प्रतिष्ठा पहले आंध्रप्रदेश कैडर की आईएएस थीं। पति पत्नी के एक कैडर में रह सकने के नियम के आधार पर उन्होंने इंटर कैडर चेंज पॉलिसी के तहत कैडर चेंज करवा छत्तीसगढ़ कैडर चुन लिया।

सवाल यह कि क्या कलेक्टर रैंक के किसी अफ़सर को रायपुर नगर निगम कमिश्नर बनाने का प्रयोग पहले भी हुआ है? ज़वाब है- हां। कांग्रेस शासनकाल के समय में 2009 बैच के आईएएस सौरभ कुमार को जब रायपुर नगर निगम कमिश्नर पद पर लाया गया, तब वे दंतेवाड़ा कलेक्टर थे। इसे संयोग कहें कि कलेक्टर से रायपुर नगर निगम कमिश्नर पद पर जो भी आए वह बस्तर तरफ से होते हुए आए।

तलवार लहराने
वाली टीचर…

क्या बड़े, क्या छोटे- कितनों को ही सोशल मीडिया ने अपनी गिरफ़्त में ले रखा है। किसी आला अफ़सर की बीबी बीच सड़क पर कार के बोनेट पर केक काटती नजर आ जाती है, तो किसी बड़े नेता का बेटा और उसके साथी तेज भागती कार पर स्टंट करते हुए वीडियो बनाते हैं और उसे सोशल मीडिया पर डाल देते हैं। मूंह पर चाकू दबाए या खुली सड़क पर चाकू-तलवार लहराने वाले दबंगों के भी वीडियो कभी कभार दिखते रहते हैं। इन सबके प्रभाव से एक शिक्षिका बची नहीं रह पाई। राजधानी रायपुर के एक सरकारी स्कूल में पढ़ाने वाली एक शिक्षिका ने तलवार लहराते हुए वाला एक वीडियो सोशल मीडिया में शेयर कर दिय़ा। बात जिला शिक्षा अधिकारी तक पहुंची और उन्होंने केवल स्पष्टीकरण मांगते हुए अपने कर्तव्य की इतिश्री कर ली। यानी किसी बड़ी कार्यवाही की ज़रूरत नहीं समझी गई। शिक्षा विभाग ने संबंधित स्कूल के प्राचार्य को नोटिस जारी करते हुए सच क्या है पता लगाने कहा है।

तंग रास्ते से गुजर रहे
अभिनेता राहुल राय का
छत्तीसगढ़ से वास्ता

जाने-माने फ़िल्म अभिनेता राहुल राय इन दिनों सोशल मीडिया में जमकर चर्चा में हैं। पिछले दिनों एक वीडियो ख़ूब वायरल हुआ जिसमें राहुल राय अपना ट्राली बैग खींचते हुए मुम्बई के किसी तंग रास्ते से पैदल गुजर रहे हैं। बाद में एक रील भी सोशल मीडिया में ख़ूब घुमी, जिसमें किसी गाने में राहुल राय किसी युवती के साथ नज़र आ रहे हैं। कितने ही सोशल मीडिया इंफ्लूएंसर यह कहते हुए स्टोरी डेवलप कर चुके हैं कि किसी ज़माने में स्टार रहे राहुल राय को क्या दिन देखने पड़ रहे हैं। हालांकि राहुल राय ने ख़ुद एक वीडियो जारी करते हुए सारी बातों का खंडन किया और यह कहते नज़र आए कि “मैं अपनी बहन और जीजा के साथ अच्छी ज़िन्दगी बीता रहा हूं। और लोग मेरी बेवज़ह चिंता न करें।“

उल्लेखनीय है कि 90 के दशक में राहुल राय की पहली म्यूज़िकल फ़िल्म ‘आशिकी’ रुपहले पर्दे पर पहुंची थी, जिसने बॉक्स ऑफिस पर तहलका मचा दिया था। ‘आशिकी’ के बाद राहुल राय 50 से अधिक फ़िल्में कर चुके हैं। चर्चित टीवी प्रोग्राम ‘बिग बॉस’ के एक सीजन में वे विजेता भी रहे। राहुल राय का छत्तीसगढ़ से भी फ़िल्मी रिश्ता रहा है। 2025 में एक छत्तीसगढ़ी फ़िल्म आई थी ‘राधे श्याम’, जिसमें राहुल राय का एक महत्वपूर्ण किरदार था। इस फ़िल्म की शूट के लिए राहुल राय छत्तीसगढ़ आए थे। सूत्र बताते हैं डायरेक्टर अभिषेक सिंह निर्देशित फ़िल्म ‘राधे श्याम’ में राहुल राय 25 हज़ार रुपये पर डे के हिसाब से काम किए थे। ‘राधे श्याम’ के लिए उनका क़रीब 10 दिन का शूट हुआ था।

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